05/11/2025
महर्षि भृगु बाबा की तपोस्थली, बागी बलिया की पावन धरती पर कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर ऐतिहासिक ददरी मेले में गंगा स्नान के लिए पधारने वाले सभी श्रद्धालुओं, भक्तों एवं आगंतुकों का हार्दिक स्वागत, वंदन और अभिनंदन है।
भृगु भूमि का ‘ददरी मेला’, हजारों साल पुरानी परंपरा का है जीवंत प्रतीक।
Dadri Fair of Ballia: बेहद प्राचीन ऐतिहासिक और पौराणिक मेलों में से एक है उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में लगने वाला ददरी मेला। जो अपनी आध्यात्मीक, इतिहास और सांस्कृतिक वैभव के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. जी हां यह मेला न केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि नदी जल संरक्षण और गुरू-शिष्य परंपरा का अटूट बंधन भी है।
कहा जाता है कि जब गंगा की धारा भृगु आश्रम (बलिया) आकर सूख जाती थी, तब महर्षि भृगु ने अपने शिष्य दर्दर मुनि के माध्यम से अयोध्या तक सरयू नदी का जल प्रवाह गंगा नदी से जोड़ा था।
ददरी मेला की परंपरा कब शुरू हुई?
गंगा और सरयू का यह अद्भुत संगम कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ और उसी जल संरक्षण के सम्मान में ददरी मेला की परंपरा शुरू हुई थी। इसके अलावा, इसी पावन धरा पर महर्षि भृगु द्वारा रचित भृगु संहिता और ज्योतिष शास्त्र का अद्वितीय ग्रंथ का लोकार्पण भी हुआ था। यही कारण है कि यह मेला न केवल धार्मिक है, बल्कि वैदिक ज्ञान और प्रकृति संरक्षण का बड़ा केंद्र बन गया है। कहते हैं कि जब गंगा और सरयू की धाराएं आपस में टकराईं, तो उससे दर्दर और घर्घर की आवाज निकली थी। जिसके कारण महर्षि भृगु ने अपने शिष्य का नाम दर्दर और सरयू नदी का नाम बलिया में घाघरा रख दिया था।
इसी के चलते यह मेला महर्षि भृगु मुनि के नाम पर नहीं, बल्कि उनके शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर ददरी मेला के नाम से मशहूर हो गया। इस मेले का वर्णन न केवल पद्म पुराण में, बल्कि मत्स्य पुराण में भी मिलता है. जब सूर्य तुला राशि में होता है, तब भृगु क्षेत्र का आध्यात्मिक महत्व अन्य तीर्थों से भी बढ़ जाता है. क्योंकि बलिया के धरती पर भृगु मुनि को मोक्ष मिला था। यहां के ददरी मेले में पंजाब, ओडिशा बिहार और नेपाल तक से लोग आते हैं।
बलिया का यह ददरी मेला हर साल कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर 25 दिनों तक चलता है, पर इस बार प्रशासन इसे एक माह तक आयोजित करने जा रहा है। यह मेला व्यापार, संस्कृति और श्रद्धा का संगम बन चुका हैं। यह मेला अब बलिया के विकास का प्रतीक बन गया है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि ददरी मेले को राजकीय दर्जा मिले, ताकि आने वाले दिनों में यह राष्ट्रीय पहचान हासिल पाने में सफल हो।
बोला बोला भृगु बाबा की जय!
गंगा मईया की जय!
#बलिया

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