अपना बलिया- भृगुक्षेत्र

अपना बलिया- भृगुक्षेत्र

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"भृगुक्षेत्र विकास परिषद न्यास" का गठन यहां की जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए इस परिक्षेत्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए किया गया है, जो इस परिक्षेत्र में बसने वाले नागरिकों और इस मिट्टी से प्यार करने वाले लोगों के सहयोग से संभव होगा।

16/03/2026

बलिया में ब्रह्माइन का मंदिर शहर से सटे हनुमानगंज में स्थित है, माँ ब्राह्मणी देवी का स्थान सदियों से उसी जगह है और इसका जिक्र तब से है जब महर्षि भृगु ने उक्त भूमि को अपने तप के लिए चुना था या राजा बलि ने अपने यज्ञ उसे चुना था। आज भी वो मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और सिद्धपीठ के रूप में ख्यात है जो जिला मुख्यालय से लगभग 5-8 किमी दूर सिकंदरपुर मार्ग पर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि राजा सुरथ ने मेधा ऋषि के निर्देश पर यहां तपस्या की थी और हवन कुंड से देवी प्रकट हुई थीं। यह भी कहा जाता है कि महर्षि भृगु के माता-पिता यहाँ रुके थे। इस प्राचीन मंदिर को अब सरकार द्वारा एक प्रमुख पर्यटन और आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
यह मंदिर न केवल बलिया, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र है।

27/12/2025

चैते गुड़ बैसाखे तेल,
जेठे पन्थ असाढ़े बेल।
सावन साग न भादों दही,
क्वार करेला न कातिक मही।।
अगहन जीरा पूसे धना,
माघे मिश्री फागुन चना।
ई बारह जो देय बचाय,
वहि घर बैद कबौं न जाय।।

Photos from अपना बलिया- भृगुक्षेत्र's post 13/12/2025

🙏🌷 जय श्री बाबा बालेश्वर नाथ जी 🌷🙏
श्री बाबा बालेश्वर नाथ जी महाराज का बाल भोग आरती, श्रृंगार दर्शन 13 दिसंबर 2025 ( शनिवार ) बलिया, उत्तर-प्रदेश।

13/12/2025

हम मूल रूप से ग्रामीण हैं, हमारे माता पिता नाना नानी, दादा दादी का श्रोत आज भी गांवों से ही जुड़ा हुआ है इस लिए हम ऊपरी तौर पर शहरी हो सकते हैं लेकिन अंदर से हमारी तासीर ग्रामीण ही है। और हमें इसका भरपूर फायदा उठाते हुए अपने को स्वस्थ और तंदरुस्त रखने के लिए आदि कवि घाघ जो एक मौसम वैज्ञानिक और किसान भी थे उनकी युक्तियों को प्रयोग में लाना चाहिए।

चैते चना , बैशाखे बेल ;
जेठे शयन , आसाढे खेल ।

सावन हरे , भादौ तीत ;
क्वार में करो , गुङ से प्रीत ।

कार्तिक मूली , अगहन तेल ;
पूष में करो , दुध से मेल ।

माघ मास घी खिचङी खाय ;
फागुन उठकर नित्य नहाय।

यह बारह जो सेवन करे ;
रोग दोष दुख तन कर हरे ।।

#चैत्र के महीने में चने का सेवन जरूर करना चाहिए। नया चना प्रकृति नव परिवर्तन के साथ पथ्य बन जाता है । जो फाल्गुन में अपनी नमी के चलते वात प्रधान था। वह चैत्र में औषध जैसा बन जाता है।

#वैशाख के महीने में बेल फल का सेवन जरूर करना चाहिए। पूरे वैशाख मास के अंदर फलों में हमेशा बेल फल को भोजन का हिस्सा जरूर बनायें ।

#ज्येष्ठ के महीने में जब दिन में बाहर भयंकर गर्मी पड़ती है तो दिन के समय शयन कर, जरूर आराम करना चाहिए। वैसे आयुर्वेद में दिन में सोना वर्जित होता है, लेकिन सिर्फ ज्येष्ठ के महीने में ही सोने को अनुकूल माना गया है।

#आषाढ़ के महीने में खेल यानि विभिन्न प्रकार के खेल , योग , कसरत , एक्सरसाइज करनी चाहिए। आषाढ के महीने का मौसम अनुकूल होता है और शरीर को भी आने वाले मौसम के लिए तैयार रखना जरूरी हैं।

#सावन के महीने में छोटी हरङ का एक डंठल हर रोज एक दिन में एक बार मुंह में सुपारी की भांति रखकर के जरूर खाना चाहिए। हरङ त्रिफलों में एक महत्वपूर्ण औषधि है।

#भाद्रपद महीने में तीत यानी किरायचा जरूर खाएं। किरायचा छोटे छोटे कवक जीवाणु आदि को शरीर से बाहर निकालता हैं, जो नुकसानदायक होते हैं।

#कुआर के महीने में गुड़ जरूर खाना चाहिए । रात को सोते समय एक गुड़ की छोटी सी डली खाकर के कुल्ला करके सो जाएं। पूरा शरीर डिटॉक्स हो जाएगा।

#कार्तिक के महीने में मूली जरूर खाएं । कार्तिक मास की सुबह में अगर आपने मूली खाई तो वह औषध के समान शरीर को गुण देती है।

#अगहन महीने में तेल का सेवन जरूर करें , क्योंकि बाहर के सर्द मौसम से चमड़ी शुष्क हो जाती है। और हमारी चमड़ी को भी वसा की जरूरत होती है । मिक्सर में तेल खाना भी चाहिए और तेल से शरीर पर मसाज भी करना चाहिए।

#पौष के महीने में दूध का सेवन जरूर करें । रात को सोते समय गाय का दूध अच्छी तरह से गर्म करने के पश्चात सोते समय पीकर सोयें।

#माघ के महीने में घी और खीचड़ी का भोजन जरूर करें। इस महीने में भगवान को भी खींचङे का ही भोग इसीलिए लगाते है।

#फाल्गुन के महीने में सुबह जल्दी उठकर जरूर अच्छी तरह से नहाना चाहिए , क्योंकि बाहर का मौसम इस महीने में उल्टा सीधा चलता रहता है। सुबह-सुबह सूर्योदय के साथ स्नान करके अपने शरीर के तापमान को संतुलित करना परम आवश्यक है।

हमारे पूर्वजों के द्वारा बताई गई ये समस्त बातें उनके वर्षों का अनुभव हैं। इसलिए ये सिर्फ किंवदंतियां नहीं सांईटीफिक भी पूर्ण निरापद बातें हैं। ऐसा हर पदार्थ मौसम व समय के अनुसार खाया जाए तो ओषध जैसा होता हैं तो असमय सेवन से विष समान बन जाता हैं।

22/11/2025

बाबा बालेश्वरनाथ की जय हो 🌹🙏

22/11/2025
Photos from अपना बलिया- भृगुक्षेत्र's post 21/11/2025

श्री खाकी बाबा मंदिर खनवार, बलिया।

Photos from अपना बलिया- भृगुक्षेत्र's post 21/11/2025

श्री श्री १००८ स्वामी जी महाराज बाबा की जय हो 💐🙏

21/11/2025

अगर आधार कार्ड व खतौनी में अलग अलग नाम है तो नहीं मिल पाएगा किसान सम्मान निधि, इसके लिए सरकार ने सहूलियत दी है आप इसमें आसानी से सुधार करा पाएंगे।👇👍👏

21/11/2025

इस बार का ददरी मेला विवादों में घिरा रहा जिस कारण मेला आयोजन में विघ्न उत्पन्न हुआ, ध्यान रहे ये सिर्फ आम मेला नहीं भारत के पुनरुत्थान की धूरी है।

Photos from अपना बलिया- भृगुक्षेत्र's post 15/09/2024

ये रमणीक स्थान अपने भृगुक्षेत्र में है, बलिया के ऐसे बहुत से लोग हैं जो आज तक इस स्थान पर नहीं जा पाये हैं। देखते हैं कितने लोग इस जगह को पहचान पाते हैं?

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