Dr.rakhi chauhan clinic

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22/09/2025

Male infertility (पुरुष बांझपन) कई कारणों से हो सकता है। इसे मुख्य रूप से शुक्राणुओं (sperms) की संख्या, गुणवत्ता या गतिशीलता (motility) में गड़बड़ी और प्रजनन अंगों की समस्याओं से जोड़ा जाता है।

Male infertility के मुख्य कारण 👇

1. शुक्राणुओं से जुड़ी समस्याएँ

Oligospermia → शुक्राणुओं की संख्या कम होना।

Azoospermia → शुक्राणुओं का बिल्कुल न बनना।

Teratospermia → असामान्य आकार के शुक्राणु।

Asthenospermia → शुक्राणुओं की गतिशीलता (motility) कम होना।

2. हार्मोनल कारण

Hypothalamus या pituitary gland की गड़बड़ी (FSH, LH, Testosterone imbalance)।

Hypogonadism (टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होना)।

3. संरचनात्मक (Structural) कारण

Vas deferens या epididymis में blockage।

Undescended te**es (अंडकोष का पेट में ही रह जाना)।

Varicocele (अंडकोष की नसों में सूजन)।

4. संक्रमण (Infections)

Mumps orchitis (कण्ठमाला के बाद अंडकोष में सूजन)।

Tuberculosis, STDs (chlamydia, gonorrhea) जो reproductive tract को नुकसान पहुँचाते हैं।

5. अनुवांशिक कारण (Genetic causes)

Klinefelter syndrome (47, XXY)।

Y-chromosome microdeletions।

6. जीवनशैली और पर्यावरणीय कारण

धूम्रपान, शराब, नशीली दवाएँ।

अत्यधिक गर्मी (ज्यादा गर्म कपड़े, hot bath, लैपटॉप गोद में रखना)।

रेडिएशन और प्रदूषण का असर।

मोटापा और stress।

7. अन्य कारण

Erectile dysfunction (स्तंभन दोष)।

Ejaculatory disorders (वीर्यपात की समस्या)।

Certain medicines (chemotherapy drugs, steroids, antihypertensives)।

👉 कुल मिलाकर, शुक्राणुओं की संख्या/गुणवत्ता की समस्या + हार्मोनल असंतुलन + structural या genetic कारण male infertility के प्रमुख responsible factors हैं।

19/09/2025
02/09/2025

*तुमा शिल्प- बस्तर*

तुमा एक प्रकार की लौकी है,

बस्तर की इस कलाकृति को बनाने के लिए तुमा को कम से कम दो माह तक सुखाया जाता है।

सुखी लौकी जब लकड़ी की तरह कठोर हो जाती है,
तब इस पर नक्काशी करके सुंदर लैंप और सजावटी वस्तुएं बनायीं जाती हैं।

इसके निर्माण की पद्धति से प्राचीनकाल की उन्नत तकनीक उजागर होती है।

वर्तमान में भले ही यह सजावटी वस्तु के तौर पर ख्यातिलब्ध है लेकिन पहले इसका उपयोग पानी, सल्फी, पेज जैसे पेय पदार्थों को रखने के लिए किया जाता है।

*मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान* 🚩

12/03/2025

*रंगों का महा उत्सव - होली पर्व*

हर्ष, उल्लास एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक यह होली का महापर्व रंगों के महा उत्सव के रूप में मनाया जाता है.

सनातन संस्कृति में इस पर्व का अत्यधिक महत्व है, जिसे बसंत ऋतु के समय फाल्गुन मास में उत्साह एवं उमंग के साथ खेलकर मनाया जाता है.

देश के ब्रज, गोवा, पंजाब, राजस्थान समेत विभिन्न हिस्सों की होली विश्वप्रसिद्ध है, जहां रंगों के साथ-साथ लोकगीतों एवं पारंपरिक नृत्यों और व्यंजनों के आनंद में यह पर्व दिखाई देता है.

_बसंत के इस आंनद उत्सव, रंगों के महापर्व, होली की आपको शुभकामनाएं 🌸_

*मेरी संस्कृति...मेरा देश...मेरा अभिमान 🚩*

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10/03/2025

लट्ठमार होली, बरसाना 🌸

ब्रज क्षेत्र के बरसाना में एक अनूठी होली खेली जाती है, जिसे लट्ठमार होली कहा जाता है.

बरसाना की यह लट्ठमार होली ना सिर्फ भारत में, बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है.

बरसाना में ही राधा रानी का जन्म हुआ था और प्रभु श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ यहां होली खेलने पहुँचे थे.

इस लट्ठमार होली को भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के बीच प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है.

बरसाने की होली फागुन मास के नवमीं से ही प्रारंभ हो जाती है, जो होली के बाद 5 दिन अर्थात रंग पंचमी तक चलती है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तजन हर्षोल्लास से सम्मिलित होते हैं.

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10/01/2025

प्राचीन भारत के कलचुरि

कलचुरि भारत की सबसे शक्तिशाली एवं प्रसिद्ध राजवंशों में से है, जिनका विस्तार उत्तर एवं मध्य भारत के व्यापक क्षेत्र में फैला हुआ था.

6वीं शताब्दी में महाक्षत्रप ईश्वरदत्त द्वारा स्थापित इस राजवंश ने कालांतर में अनेक वीरों को सिंहासन पर बैठाया और नए नगरों का निर्माण करवाया.

धर्मपरायण मानी जाने वाले इस राजवंश की सत्ता के काल में कोसल क्षेत्र के रतनपुर से लेकर त्रिपुरी क्षेत्र तक में हुए निर्माण ने वर्तमान भारत के आधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.

नोहलेश्वर मंदिर, रत्नेश्वर महादेव मंदिर, मल्हार का शिव मंदिर एवं रतनपुर के मंदिरों की वास्तुकला कलचुरियों की उन्नत स्थापत्यकला को प्रदर्शित करती है

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