04/05/2024
दर्द कितने समाये हैं, ये दिल जानता है
कितना सर झुकाये हैं, ये दिल जानता है
तक तक के मारे हैं तीर जाने कितनों ने,
कितने ज़ख्म खाये हैं, ये दिल जानता है
उनके दिल में है क्या वो तो उनका करम,
हम कितना छटपटाये हैं, ये दिल जानता है
अपनी हस्ती मिटा के साथ जिनका दिया,
वो कितने अब पराये हैं, ये दिल जानता है
मुखौटों की बाज़ीगरी से लुटते रहे हम तो
चेहरे कितने आजमाए हैं, ये दिल जानता है
हम तो फरेबों की दुनिया में जीते रहे यूं ही,
कब किसने हम फंसाये हैं, ये दिल जानता है

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