क्या आप जानते हैं कि INDIA गठबंधन या कोई भी तथाकथित “secular parties” तेलंगाना के बाहर AIMIM के साथ गठबंधन क्यों नहीं करती?
आइए इसे ध्यान से समझते हैं — एक थ्रेड में
Part 1 — इन तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने एक बात साफ़ समझ ली है: मुसलमान सिर्फ़ BJP और उसके सहयोगियों को हराने के लिए वोट देते हैं, चुनाव बाद वो किसी भी फायदे की माँग नहीं करते।
2— सेक्युलर पार्टियाँ मुसलमानों को बस बीजेपी का डर दिखाती हैं। न उनके असली मुद्दों पर बात करती हैं, न शिक्षा, रोज़गार या सामाजिक न्याय का ठोस वादा करती हैं, फिर भी मुसलमानों के बड़े पैमाने पर वोट आसानी से मिल जाते हैं
3— लेकिन अगर AIMIM के साथ गठबंधन हो जाए तो तस्वीर बदल सकती है। मुसलमानों को एक मज़बूत राजनीतिक विकल्प मिलेगा और अगले चुनाव में वे भी अपनी माँगें सामने रखने लगेंगे — बेहतर शिक्षा, सरकारी योजनाओं व नौकरियों में उचित हिस्सेदारी, सामाजिक न्याय और सही राजनीतिक प्रतिनिधित्व। ठीक वैसे ही, जैसे यादव, मराठा, लिंगायत और अन्य समुदायों ने अपने अधिकारों के लिए किया है
4— अगर Hung Assembly यानी जब कोई भी पार्टी अकेले सरकार न बना पाए तो? असदुद्दीन ओवैसी जानते हैं कि ऐसे हालात में कैसे सौदेबाज़ी करनी है।
तेलंगाना और पूर्व आंध्र प्रदेश इसका उदाहरण हैं —
AIMIM के बिना वहाँ सरकार बनना मुश्किल था। AIMIM ने कांग्रेस को समर्थन दिया और उसी दबाव में मुसलमानों को 4% आरक्षण मिला। लेकिन जब कांग्रेस केंद्र या महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में सत्ता में थी, तब उसने यह आरक्षण नहीं दिया — क्योंकि वहाँ AIMIM किंगमेकर नहीं थी।
5— इस 4% आरक्षण ने हज़ारों लाखों ज़िंदगियाँ बदल दीं।
मुस्लिम छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफ़ेशनल कॉलेजों तक पहुँचे। आज वही छात्र डॉक्टर, इंजीनियर और आईटी प्रोफ़ेशनल बनकर दुनिया भर में काम कर रहे हैं।
उनके परिवार गरीबी से निकलकर स्थिरता की ओर बढ़े और एक मज़बूत मिडिल क्लास खड़ा हुआ।
6— यही असली सौदेबाज़ी की ताक़त है। आज तेलंगाना में मुसलमान सरकार से हिस्सेदार बनकर बात करते हैं — न कि बेबस वोट बैंक की तरह खामोश हैं।
7— क्या ऐसा दूसरे राज्यों में भी हो सकता है? बिल्कुल।
लेकिन ‘धर्मनिरपेक्ष’ पार्टियाँ AIMIM से गठबंधन नहीं करतीं, क्योंकि उन्हें तो वैसे ही मुसलमानों के वोट मुफ़्त में मिल जाते हैं। फिर वे क्यों सत्ता में हिस्सेदारी बाँटें या मुसलमानों को और ज़्यादा माँग करने का मौका दें?
8— आंध्र और तेलंगाना में AIMIM को इस स्तर तक पहुँचने में 20–30 साल का ज़मीनी संघर्ष करना पड़ा। उत्तर भारत के मुसलमानों को भी यह राजनीतिक सच्चाई समझने में थोड़ा समय लगेगा।
9— पढ़े-लिखे मुस्लिम नौजवानों की ज़िम्मेदारी है कि वे समाज को समझाएँ — अपनी अलग लीडरशिप होने का मतलब है ताक़त, और ताक़त से ही असली तरक़्क़ी मिलती है। सिर्फ़ बीजेपी का डर या खाली भाषणों से कुछ नहीं बदलता। असली राजनीति यही है, ऐसे ही क़ौमें आगे बढ़ती हैं।
AIMIM Rajasthan
follow me
for AIMIM update
31/08/2025
Hyderabad: AIMIM गुजरात अध्यक्ष जनाब साबिर काबलीवाला साहब ने पार्टी हेड ऑफिस दारुस्सलाम में AIMIM अध्यक्ष जनाब बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब से मुलाक़ात की। इस दौरान गुजरात में पार्टी को और मज़बूत करने व AIMIM का पैग़ाम घर-घर पहुँचाने पर चर्चा हुई।
इस मौके पर जनाब सैयद मुश्ताक़ अहमद (पी.ए. बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब) और असलम अहमद (राजू भाई) मौजूद थे।
03 राउंड मुस्तफाबाद
अली मेहदी - INC: 722
अदील खान - AAP: 5581
ताहिर हुसैन - AIMIM: 119
मोहन सिंह - BJP: 21762
Draupadi Murmu cars VS narendra Modi car collection
बोलने से क्या होता है बोलने वालो सुनो
Akhtarul Iman के बोलने से काम होता है✌🏻
AIMIM Bihar Asaduddin Owaisi Aimim- All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen AIMIM BIHAR
बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की विशाल जनसभा गागरिया रामसर
12/03/2023
गागरिया राजस्थान में मुनअ'क़िद बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की विशाल जनसभा की तसवीरी झलकियां।
मज़लूमों की आख़री उम्मीद 'बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी' को सुनने आए इन सरों का समंदर देख कर राजस्थान की मौजूदा सरकार के होश उड़ गए हैं।
"लड़ना है" "आगे बढ़ना है"
11/03/2023
ज़्यादा से ज़्यादा की तादाद में पहुँच कर इस जनसभा को सफल बनाए
स्थान आज़ाद होटल गागरिया रामसर
समय सुबह 10 बजे
Aimim- All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen
11/03/2023
बम्बा मोहल्ला, जोधपुर, राजस्थान में AIMIM अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की पैदल यात्रा। मक़ामी आवाम ने किया ज़ोर-दार इस्तेक़्बाल। लोगों के जोश-ओ-जज़्बे से को सलाम। इंशा अल्लाह राजस्थान में मजलिस एक नई तारीख़ लिखेगी।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Website
Address
Barmer
