Prachin Gyan Bhandar प्राचीन ज्ञान भण्डार

Prachin Gyan Bhandar प्राचीन ज्ञान भण्डार

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historical place , history and educational post

30/06/2023
29/06/2023

प्रकृति के साथ -मिर्जापुर -लिखुनिया दरी

29/06/2023

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एलोरा की स्थिति -
भारत की एक गौरवशाली धरोहर जो अपने कला कौशल के लिये विश्व विख्यात है जहा हर साल लाखो पर्यटक इस कला कौशल को देख कर आश्चर्य चकित रह जाते है l

एलोरा गुफा महाराष्ट्र के औरङ्गाबाद जिले से 29 km. तथा अजन्ता से 135 km. दूरी पर स्थित है l

https://www.blogger.com/blog/posts/8265950797553015129

एलोरा गुफा का प्राचीन नाम क्या था?

एलोरा का प्राचीन नाम कुछ शिलालेखो से ज्ञात होता है जिसमे एलोरा का नाम 'एलापुर अञ्चल ' बताया गया था l कुछ स्थानीय लोग एलोरा को वेरुल के नाम से पुकारते है l

एलोरा गुफा को किन शासको ने बनवाया था?

वैसे तो एलोरा गुफा मन्दिर का निर्माण कई वर्षो तक चला परन्तु एस गुफा का निर्माण का श्रेय राष्ट्रकूट वन्श को जाता है l राष्ट्रकूट वन्श के शासक 'कृष्ण प्रथम' (754-772) के मध्य एलोरा के प्रसिध्द कैलाश मन्दिर का निर्माण कराया था l

कैलाश मन्दिर मे किस कला शैली का प्रयोग हुआ है?

एलोरा मे सबसे प्रसिध्द मन्दिर कैलाश मन्दिर है, कैलाश मन्दिर चालुक्य मन्दिर और द्रविड शैली दोनो के मिले जुले रूप मे निर्मित हुई है l

विशाल चट्टानो को काट कर बनाई गई गुफाये -

एलोरा की गुफाये एक बडी पहाडी को काटकर बनाई गई है l ऊपर से नीचे की ओर पहाडी काट कर गुफा मन्दिर का निर्माण किया गया हैl

एलोरा मे कितनी गुफाये है?

एलोरा मे 34 गुफाये है l 12 दक्षिणमुखी 'बौध्द धर्म से संबन्धित है, मध्य की 17 गुफाये 'हिन्दू धर्म ' से संबन्धित है और उत्तरमुख 5 जैन धर्म से संबन्धित है l

एलोरा की गुफाओ का निर्माण काल क्या है?

एलोरा की गुफाओ का निर्माण 900 सालो तक निरन्तर चलता रहा l गुफा 1 से 12 तक का निर्माण काल 350 ई. से 700 ई. तक चला, गुफा 13 से गुफा 29 हिन्दू धर्म से है जिसका उत्खनन 700ई. से 972 ई. तक चला, 30 से 34 जैन धर्म से संबन्धित है जो 9वी से 12वी शताब्दी के बीच निर्मित हुई l

एलोरा की प्रसिध्द गुफाये कौन किन सी है?

गुफा 14 - यह गुफा 'रावण की खाई' के नाम से प्रसिध्द है l

गुफा 15 - इस गुफा को 'दशावतार गुफा ' के नाम से जाना जाता है l गोवर्धनधारी कृष्ण, महिषासुरमर्दिनी, गजेन्द्र मोक्ष, गङ्गा यमुना की मूर्ति आदि l

गुफा 16 - गुफा 16 मे ही जगत प्रसिध्द कैलाश मन्दिर है जो 756-775 ई. मे निर्मित हुआ था l जिसे राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने बनवाया था l सम्पूर्ण मन्दिर एक पहाडी को काट कर बनाया गया है l यह मन्दिर स्थापत्य और मूर्ति कला का आश्चर्य जनक नमूना है l रावणानुग्रह, कल्याण सुन्दर मूर्ति कैलाश मन्दिर की शोभा बढा रही है l एक दृश्य मे रावण को कैलाश पर्वत उठाते हुए दिखया गया है जिसके कारण माता पार्वती भयभीत हो कर शिव की विशाल भुजाओ को पकडे हुए है सभी गण इधर उधर भाग रहे है l इसी मन्दिर मे एक दृश्य 'अन्धकासुर का वध शिव द्वारा दिखाया गया है l शिव पार्वती विवाह, इन्द्र इन्द्राणी की मूर्ति, भैरव प्रतिमा आदि इस मन्दिर मूर्तिया इस मन्दिर की शोभा बढा रही है l

गुफा 21 - मातृशक्ति या प्रजनन से संबन्धित गुफा है l

गुफा 29 - शैव, वैष्णव एवं शाक्त संप्रदाय से संबन्धित है l

जैन धर्म -

गुफा 30 - 34 - गुफा 30 से 34 जैन धर्म की दिगम्बर शाखा से संबन्धित है यह गुफा 9वी से 10वी शताब्दी मे बनी थै l

गुफा 32 - मे 'इन्द्र सभा ' को दर्शाया गया है l

गुफा 33 - मे 'जगन्ननाथ' को दर्शाया गया है l

गुफा 30- 'छोटा कैलाश' के नाम से जाना जाता है l

https://www.blogger.com/blog/post/edit/8265950797553015129/2590739318739860539

27/06/2023

Bagh Gufa kis Pradesh Me Sthit Hai ? Bagh Gufa ki Drawing l बाघ की गुफा कि खोज, निर्माण, स्थिति,, विशेषताये, उद्देश्य व किस धर्म से संबन्धित है?

बाघ गुफा की वास्तविक स्थिति क्या है?
बाघ कि गुफा विध्यपर्वत शृङ्खला के अन्तर्गत नर्मदा नदी कि सहायक नदी बाग्मती (बाघिनि ) से लगभग 3km दूर 'बाघ ' नामक ग्राम के पास पडती है l शायद इसी कारण इस गुफा का नाम बाघ पडा l इस गुफा के पास मे ही एक बगेश्वरी नाम का प्राचीन मन्दिर भी है l यहा के ग्रामीण इस गुफा को पञ्च पाण्डु गुफा के नाम से बुलाते है l वर्तमान समय मे बाघ कि गुफा मध्य प्रदेश के धार जनपद मे पडती है l रेलगाडी के द्वारा बाघ गुफा तक पहुचा जा सकता है जिसके लिये आपको महू स्टेशन तक रेल द्वारा फिर आपको धार रास्ते द्वारा बाघ कस्वे तक सडक मार्ग द्वारा 87 मील लगभग सफर तय करके पहुचा जाता है l

बाघ गुफा की खोज कब और किसने की?

बाघ की गुफाओ की खोज डेन्जरफील्ड नाम के एक अङ्ग्रेज ने 1818 ई.मे कि थी l सबसे पहले इसने ही मुम्बई से एक पत्रिका 'साहित्यिक विनियम संघ ' मे इस गुफा के बारे मे जानकारी प्रकाशित करायी थी l 1910 ई. मे श्री असित कुमार हाल्दार ने यहा के चित्रो कि प्रतिलिपिया बनाई, बाद मे 1925 ई. मे मुकुलचन्द्र डे ने प्रतिलिपि तैयार किया था l

बाघ गुफा का उद्देश्य क्या था?

बाघ की गुफाये बौध्द धर्म की महायान शाखा से संबन्धित है l इन गुफाओ का मुख्य उद्देश्य बौध्द भिक्षुओ के लिये निवास स्थान के लिये, प्रवचन के लिये व पूजा पाठ के उद्देश्य से बनाई गयी थी l

बाघ गुफाओ का रचना काल क्या है?

कला इतिहासकार 'विन्सेन्ट स्मिथ ' ने बाघ की गुफाओ की चित्रकारी का समय सन् 626-628 ई. माना है l जिसे स्मिथ ने अजन्ता की गुफा संख्या 2 के समकालीन बताया है l बाघ की गुफाये गुप्त काल से संबन्धित है यहा के सुन्दर चित्र अजन्ता की चित्रो की यादे ताजा कर देती है, पुरातत्व विभाग को इस गुफा की सफाई के दौरान दूसरी गुफा से एक ताम्र पत्र प्राप्त हुआ है जो राजा सुबन्धु का है इस पत्र के आधार पर गुफा का निर्माण 416-466ई. के मध्य माना है l फर्ग्युसन और वर्गेस ने इस गुफा का निर्माण काल 200ई. माना है l

बाघ गुफा का प्राचीन नाम क्या था?

बाघ की गुफाओ का प्राचीन नाम 'कलयन' था l स्थानीय लोग इस गुफा को पञ्चपाण्डु के नाम से भी पुकारते है l

बाघ गुफा किस राजवन्श के समय की है?

बाघ की गुफाऒ का का निर्माण गुप्त राजवन्श के समय मे हुई, यह गुप्त काल की श्रेष्ठ धरोहर के रूप मे आज भी प्रत्यक्ष है l यहा से अनेक सुन्दर व श्रेष्ठ चित्र आज भी उपलब्ध है l

बाघ गुफा के चित्रो की प्रतिलिपि किस किस ने तैयार की?

बाघ गुफा के चित्रो की प्रतिलिपि अनेक देश व विदेश के चित्रकारो ने तैयार किया है जिसमे से भारतीय चित्रकार नन्दलाल बोस जो शान्ति निकेतन के कलाकार है, असितकुमार हाल्दार, सुरेन्द्र नाथ, ए. बी. भोन्सले तथा बी. एन. आप्टे व जगपत ने प्रतिलिपि तैयार की, इसके अतिरिक्त 'सरकिस कचडोरियल' ने बाघ चित्रो की प्रतिलिपि तैयार की l

बाघ गुफा के चित्र कहा संग्रहित है?

बाघ गुफाओ की चित्रो की प्रतिलिपिया आज हमको 'ग्वालियर दुर्ग के गूजरी महल ' की बारहदरी मे देखने को मिलते है l

बाघ गुफाओ की संख्या कितनी है?

वैसे तो बाघ की गुफाओ की संख्या 9 है, जिसमे से सभी गुफाये बौध्द धर्म के निवास स्थान के रूप मे बनाई गयी थी l 9 गुफाओ मे कुछ ही गुफाये अच्छी अवस्था मे है बाकी नष्ट हो चुकी है

बाघ गुफा की गुफाओ के अलग अलग नाम क्या है?

बाघ की पहली गुफा का नाम 'गृह गुफा है l दूसरी गुफा का नाम गुसाई गुफा जिसे पञ्च पाण्डु गुफा के नाम से भी जाना जाता है l तीसरी गुफा का नाम 'हाथीखाना' है, चौथी गुफा 'रङ्ग महल' है, पाचवी गुफा 'पाठशाला ' है और छठी, सातवी, आठवी व नौवी गुफा का रस्ता अभी साफ नही होने से उसका अभी तक कोई नामकरण नही हो पाया है l

बाघ गुफा के चित्र विषय क्या थे?

बाघ गुफाओ का सम्बन्ध बौध्द धर्म से है यहा पर महात्मा बुध्द के जीवन से संबन्धित अनेक घटनाऒ का चित्रण हुआ है l यहा के अधिकतर चित्र अजन्ता गुफाओ से मिलते है l

बाघ गुफा के चित्र किन किन गुफाओ मे अब शेष बचे है?

9 गुफाओ मे सात गुफाओ के चित्र अब पूर्णतः नष्ट हो चुके है केवल 2 ही गुफा मे अब चित्र शेष बचे है गुफा संख्या 4 और 5 मे अब चित्र शेष बचे है l गुफा दिवारो पर स्थान स्थान पर केले के वृक्षो का अङ्कन हूआ है

चौथी गुफा के चित्र -

बाघ की चौथी गुफा को रङ्ग महल (hall of colours ) के नाम से जाना जाता है l यह एक चैत्य (पूजा घर ) है l

पहला दृश्य - पहला दृश्य एक वियोग का प्रतीत होता है जिसमे एक स्त्री व्याकुल व दुख मे डूबी हुई है जो दाहिने हाथ से मुह को पल्लू से छिपा रही है, छत पर कबूतरो का जोडा बैठा हुआ है जो किसी प्रेम प्रसंग को इन्गित करता है l

दूसरा दृश्य - दूसरे दृश मे किसी विचार पर चार पुरुष आपस मे मन्त्रणा कर रहे है जो अभूषन पहने हुए है, मुकुट भी पहने हुए है l एक मन्त्री प्रतीत होता है तो दुसरा राजपुरुष प्रतीत होता है l

तीसरा दृश्य - तीसरे दृश्य मे देव पुरुषो का आकाश मे भ्रमण करते हुए दिखया गया है l सभी आकृतियो के सिर मुडे हुए है l

चौथा दृश्य - इसमे 5 गायिकाओ का चित्र बनाया गया है, मुख्य अकृत के हाथ मे वीणा जैसा वाद्य यन्त्र है l चित्र मे ईरानी रङ्ग भरा गया है l

पञ्चम् दृश्य - नृत्यङ्गनाओ और वदिकाओ का सुन्दर दृश अङ्कित किया गया है l

छठा दृश्य -उद्यान और सैकडो घुडसवारो का सुन्दर दृश्य अङ्कित किया गया है l

सातवा दृश्य - 6 हाथी और 3 घुडसवार का दृश्य, यह एक जुलूस का दृश्य है l

आठवा दृश्य - 4 हाथी 3 घोडे विश्राम की अवस्था मे है l

गुफा संख्या 5 के चित्र -

यहा पर अनेक सुन्दर भित्ति चित्रो का निर्माण किया गया था जो समय के साथ धीरे धीरे नष्ट हो गये l जहा पर अनेक फूल पत्ती व अलङ्कारिक चित्रो का निर्माण किया गया था l इस गुफा का एक चित्र 'कार्ल खण्डालावाला ' ने 'मुर्गी और उसके चूजे ' प्रकाशित किया था l

बाघ गुफाओ मे कौन कौन से रङ्ग प्रयोग किये गये?

सफेद रङ्ग, हिरौन्जी रङ्ग, लाल, नीला और पीला रङ्ग का भी प्रयोग हुआ है l

बाघ गुफाओ की विशेषता क्या है?

(1) प्रकृति का सुन्दर अङ्कन

(2) जीवन के अनेक पक्षो का चित्रण l

27/06/2023

Ajanta gufa vlog l अजन्ता गुफा कि खोज, निर्माण, व किस धर्म से संबन्धित है? अजन्ता गुफा का सम्पूर्ण कला इतिहास क्या है? Ajanta gufa mandir kis rajya me hai ?

अजन्ता केव(गुफा )(200 ई. पू. से 650 ई.) प्राचीन भारत का एक ऐसा समय जो अपनी अद्भुत कला कौशल और जीवन्त भित्ति चित्रो के माध्यम से इतिहास के पन्नो दर्ज हो गया l जी हा हम बात कर रहे है अजन्ता गुफा कि जिसका निर्माण काल 200 ई. पू. से लेकर 7वी शताब्दी तक अनवरत रूप लगभग 850 वर्षो तक चलता रहा, वर्तमान मे अजन्ता गुफा महाराष्ट्र के aurangabad जिले मे पडती है, वर्तमान मे यहा से 30 गुफाये प्राप्त है l जो पहाडियो को काट कर बनाया गया है यह गुफा औरन्गाबाद जिले से लगभग 100कं और जलगाव स्टेशन से लगभग 55km कि दूरी पर स्थित है l यह सतपुडा कि पहाडियो को काट कर बनाई गयी है जो बघोरा नदी के किनारे स्थित है l इस गुफा का आकार अर्ध्दचन्द्राकार रूप मे है l

--हर्ष के दरबारी विद्वान बाणभट्ट ने अजन्ता गुफा के बारे मे अपनी पुस्तक मे जानकारी दी है

--398 ई. मे चीनी यात्री फह्ययान ने इस गुफा के कला के बारे मे वर्णित किया है

--travels in india नामक पुस्तक मे चीनी बौध्द यात्री युवाङ्ग् च्वाङ्ग् ने अजन्ता कि कला कि खूब प्रसंसा कि है l

अजन्ता नाम कैसे पडा?

इस गुफा के पास कुछ दूरी पर अजिष्ठा नामक ग्राम है जिसको आम तौर पर अजिस्ठा नाम से उच्चारित किया जाता रहा है वर्तमान मे इसी का हिन्दी रूप मे अजन्ता नाम से बुलाया जाता है l इस गुफा के नामकरण मे एक और मत मिलता है जिसमे--'यो मैत्रेय बुध्द 'अर्थात भविष्य मे अवतरित होने वाले बुध्द को 'आजित ' कहा गया है इन साक्ष्यो के के आधार पर हम महात्मा बुध्द से जुडी गुफाओ को अजन्ता नाम देना हमे ठीक जान पडता है l

अजन्ता गुफा का सम्बन्ध किस धर्म से है?

अजन्ता गुफा का संबन्ध बौध्द धर्म से है l अजन्ता मे गुफाओ कि संख्या 30 है l यहा पर महात्मा बुध्द से संबन्धित अनेक भित्ति चित्र बनाये गये है वर्तमान मे 30 गुफाओ मे से केवल 6 गुफाओ मे ही चित्र शेष बचे है l इस गुफा मे बुध्द के पुर्वजन्मो(जातक कथा )के दृश्य बनाये गये है l

अजन्ता गुफा कि खोज कब और कैसे हुई?

सन् 1819 ई. मे मद्रास सेना का एक सेवानिवृत्त अधिकारी के द्वारा हमे अजन्ता गुफा कि जानकारी हुई l

-- अजन्ता पर सबसे पहले एक कम्पनी के अधिकारी विलियम एरिकसन ने व्यौरा लिखा और उसे बाम्बे लिटरेरी सोसायटी मे पढा l

--1844 राबर्ट गिल ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कहने पर भारत आये और 1847 ई. मे अजन्ता कि प्रतिलिपिया तैयार किl और इन चित्रो को क्रिस्टल पैलेस लन्दन मे प्रदर्शित कि गयी l

--1872 ई. से 1876 ई. तक जे. जे. स्कूल आफ आर्ट के प्राचार्य के सानिध्य मे वहा के सैकडो बच्चो ने अनुकृतिया बनाई l

--1854 मे युनेस्को ने यहा के रङ्गीन चित्रो का एक संग्रह पेन्टिग आफ अजन्ता केव प्रकाशित किया l

अजन्ता गुफाओ का निर्माण और रचना समय --अजन्ता गुफाओ गुफाओ का निर्माण कई राजवंशो के समय मे हुआ है जैसे गुप्त, सातवाहन, चालुक्य, वकाटक आदि l अजन्ता गुफा का निर्माण काल दूसरी शताब्दी से सातवी शताब्दी तक चला l यहा पर 30 गुफाओ का निर्माण हुआ है जिसमे 5 चैत्य गुफाये व 25 विहार गुफाये है सबसे प्राचीन गुफा संख्या 9,10 है और सबसे नवीन गुफा संख्या 1,2 है l गुफा संख्या 13 कि दीवार पर मौर्य कालीन पलिश है l अजन्ता कि गुफाये बौध्द धर्म के हीनयान और महायान से संबन्धित है l

- फर्ग्युसन के विचार मे पहली गुफा सबसे बाद मे चित्रित कि गयी है

-- सबसे प्राचीन चित्र 9,10 गुफा के है l

अजन्ता गुफा के चित्र व उसके विषय क्या थे?

अजन्ता गुफा के चित्रो का विषय बौध्द ग्रन्थ, बुध्द के उपदेश और जातक कथाये रही है l अजन्ता के चित्रो का सृजन केद्र बौध्द धर्म रह है l

-वाचस्पति गैरोला कि पुस्तक 'भारतीय चित्रकला ' मे अजन्ता के चित्रो के विषय को तीन भागो मे विभाजित किया है

1- अलङ्कारिक

2- रूप भैदिक

3- जातक कथाये

अजन्ता भित्ति चित्रो कि रङ्ग योजना क्या थी?

यहा पर खनिज रङ्गो का प्रयोग हुआ है, यहा पर लाल, सफेद, भूरा और पीला रङ्गो का प्रयोग हुआ है l सफेद रङ्ग चूना या खडिया से, लाल व भुरा दोनो खनिज रङ्ग है, हरा एक स्थानीय पत्थर से बनाया गया l (लेपिस लजुली फारस से आयात किया जाता था वाकी सब रङ्ग यही के थे )

अजन्ता कि कितनी गुफाओ मे अब चित्र शेष है?

गुफा संख्या 1,2,9,10,16, व 17 मे चित्र शेष बचे हैl

गुफा संख्या 9 के चित्र ----- बौध्द भिक्षुओ कि उपासना हेतु बनाई गयी थी जो कि एक चैत्य गुहा है l इस गुहा के चित्र दूसरी शताब्दी ई. पू. से लेकर चौथी शताब्दी ई. तक निर्मित होते रहे l ये गुहा हीनयान और महायान दोनो से संबन्धित है l

-- इस गुफा मे एक पाषाण स्तूप भी है l

--इस गुफा मे 23 खम्भे है l

--इस गुफा का सबसे प्राचीन चित्र 'एक बैठी हुई स्त्री ' है l

-- स्तूप पूजा का सुन्दर चित्र भी है l

--नागपुरुष का चित्र

--पशुओ को कदेडते चरवाहे

गुफा संख्या 10 के चित्र

इसमे भी एक स्तूप है यह भी एक चैत्य गुहा है, बाहरी दिवार पर एक लेख खुदा हुआ है जो 200ई. पू. का है जिसके अनुसार यह अन्ध्र सातवाहन मे निर्मित कि गयी l

--छदन्त जातक

--एक जुलूस का चित्र - जिसमे राजा बोधिवृक्ष व स्तूप पूजा के लिये जाते हुए दिखाया गया है l

--साम जातक - श्रवण कुमार जैसी कहानी

गुफा संख्या 16 के चित्र

इस गुफा कि बायी दिवार पर लेख प्राप्त हुआ है जो वकाटक राजा हरिसेन के मन्त्री वराहदेव ने ने बनवाया था (निर्माण काल 475 ई. से 500 ई. )

--सप्त कुण्ड

--बुध्द मूर्ति (चैत्यमन्दिरम् )

--माया देवी का स्वप्न

--धर्मोपदेश

-- नन्द कि दीक्षा

--हस्ति जातक, महाउमङ्ग् जातक

-- नन्द कुमार का वैराग्य

--बुध्द उपदेश

--मरणासन्न राजकुमारी

-- अजातुशत्रु व बुध्द कि मिलन

-- वायी दिवार पर चार दृश्य - शव, वृध्द, सन्यासी व ज्वर पीडित

गुफा संख्या 17 के चित्र

वकाटक नरेश हरिसेन के मण्डलाधीश ने करवाया था l वर्गेस ने इस गुफा के 21 चित्रो का उल्लेख किया है l

-- हस्ति जातक, वेसन्तर जातक, मातृपोषक जातक, महाहन्स जातक,महाकपि जातक, मृग जातक

-- राहुल समर्पण (माता पुत्र )

--सिघलावदान कि कथा

-- उडती हुई गन्धर्व अप्सराये

गुफा संख्या 1 के चित्र

500 ई. से 625 ई. के बीच मे यह गुहा निर्मित हुई l

वकाटक व चालुक्य काल के चित्र इसमे प्राप्त होते है l

--शिवि जातक, महाजनक जातक, चाम्पेय जातक

--नन्द तथा सुन्दरी कि कथा

--नृत्य वादन

--अवलोतिकेश्वर बोधिसत्व

--नागराज सभा

--बोधिसत्व पद्मपाणि

--मार विजय

--श्रावस्ती का चमत्कार

--चालुक्य राजा पुलकेशियन द्वितीय के दरबार मे इरानी राजदूत

--बैलो कि लडाई, चीटियो के पहाड पर सर्प कि तपस्या,छतो पर कमल व हन्सो का अल्न्करण व प्रेमी युगल

गुफा संख्या 2 के चित्र

(500 ई. से 550 ई. तक )

-- महाहन्स जातक

-- बुध्द जन्म

--दो वाये अगूठे वाली रमणी

--माया देवी का स्वप्न

-- तुषित स्वर्ग

--सर्वनाश

--क्षान्तिवादी जातक, विदुर पण्डित जातक कथा, पुर्णक इरन्दति कि प्रेम कथा, सुन्हरे मृग का धर्मोपदेश, प्राणो कि भिक्षा, पुजर्थिनि स्त्रिया

27/06/2023

Elephenta Drawing l Elephenta gufa Kahan hai ?ऎलिफैन्टा कि गुफाओ का (लगभग 600ईस्वी से 900ईस्वी तक )सम्पूर्ण कला इतिहास

एलिफेन्टा केव (गुफा ) त्रिमुर्ति

प्राचीन भारत मे मूर्ति कला का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है मूर्ति कला कि इस कडी मे एलिफेन्टा गुफा जो महाराष्ट्र के मुम्बई मे गेट्वे आफ़ इण्डिया के नजदीक पडता है, एलिफेन्टा कि दूरी समुन्द्र तट से लगभग 6 मील है यह एक तापू पर स्थित है एलिफेन्टा का प्राचीन नाम धारापूरी था, जब 16वी शताब्दी मे पुर्तगाली समुन्द्र मार्ग से भारत आये तो इन्होने इस द्विप पर विशाल हाथी कि मूर्ति देखी और इस द्विप को एलिफेन्टा का नाम दे दिया l वैसे इसके निर्माण को लेकर मतभेद है कुछ विद्वान इसी कल्चुरी परवर्ती मौर्यो से तो कुछ विद्वान इसे वकाटक कला से जोड कर देखते है कुछ विद्वान इसे राष्ट्रकूट के समन्त शिलाहारो के काल मे निर्मित मानते है l फर्गुसन, बर्जेस और जिम्मर ने मुर्तियो के आधार पर इसे 8वी -9वी शताब्दी माना है, हीरानन्द व प्रमोद्चन्द्र ने 7वी शताब्दी माना है l

एलिफेन्टा कि प्रमुख विशेषताये ---

-यह एक शैव गुफा मन्दिर हैl

यह गुफा मन्दिर चारो ओर से समुन्द्र से घिरी हुई है

-यहा से प्राप्त हाथी कि पत्थर कि विशाल मूर्ति वर्तमान मे मुम्बई के विक्टोरिया गार्डन संग्रहालय के बाहर रखी है l

-130 फुट वर्गाकार मे यह गुहा मन्दिर है l

-यहा से 7 गुफा मन्दिर प्राप्त हुए है l

-यह एक गुहा मन्दिर है जो चट्टानो को काट कर निर्मित कि गयी है l

प्रसिध्द मूर्ति यहा कि ----त्रिमुर्ति ---एलिफेन्टा कि सबसे प्रसिध्द मूर्ति जो त्रिमुर्ति के नाम से प्रसिध्द है तीन मुखो वाली यह विशाल मूर्ति भावाभिव्यक्ति के नजरिये से उत्तम व सुन्दर है, तीनो मुखो मे अलग अलग भावाभिव्यक्ति इस मूर्ति कि एक बहुत बडी विशेषता है,त्रिमुर्ति तीन देवताओ का सम्मिलित रूप है जिसमे ब्रह्म, विष्णु, व महेश कि मूर्ति हैl त्रिमुर्ति के बीच मे कल्याणकारी शिव कि मूर्ति है जो मुकुट धारण किये हुए है l

यहा कि अनेक मुर्तियो को पुर्तगालियो ने खण्डित कर दिया थाl

-शिव ताण्डव कि खण्डित मूर्ति (नटराज )यही से प्राप्त हुइ है

-ई. वी. हैवेल ने अपनी पुस्तक 'भारतीय कला के आदर्श ' मे इस गुफा कि अद्भुत कला कि भूरि भूरि प्रसंसा कि है l

-शिव द्वारा अन्धक राक्षस का वध --एलिफेन्टा मे उत्कीर्ण है जिसमे शिव के क्रोधित मुद्रा को बनाया गया है l

--शिव गङ्गाधर के रूप मे ---गुफा के एक फलक पर शिव को गङ्गा को अपनी जटाओ मे ग्रहण करते हुए दिखया गया है

--महेश मूर्ति --- एक विशाल महेश मूर्ति इस गुफा कि जिसके बारे मे गार्डन चाइल्ड ने लिखा "यदि महेश मूर्ति को न देखता तो भरत कि महान कला से अपर्चित रह जाता "l यह मूर्ति 18 फिट उन्ची है l

--शिव और पार्वती विवाह ----इसे कल्याण सुन्दर मूर्ति के नाम से भी जानते है इस मूर्ति मे शिव को पार्वती देते हुए पिता हिमवान को दिखया गया है शिव के बाये तरफ ब्रह्म को पुरोहित के रूप मे दिखया गया है

---ब्रह्म कि मूर्ति ---आनन्द कुमार स्वामी ने इस मूर्ति को प्रकाश मे लायाl जटाजूट वाले ब्रह्म के मुख पर शान्ति का भाव हैl देह पर अभूषन व जनेऊ पहने हुए है l

--योगिराज शिव कि मूर्ति ---यः एक विशाल मूर्ति है जिसमे शिव ध्यान मुद्रा मे शान्त भाव मे वैठे है, और अध्यात्म मे लीन दिखाया गया है l

--शिव का अर्धनारीश्वर रूप ----शिव को अर्धनारीश्वर के रूप मे एलिफेन्टा मे एक फलक पर उकेरा गया है जिसमे अधा रूप शिव व अधा रूप पार्वती का है पुरुष का शरीर तनाव पूर्ण व स्त्री का लावण्य से भरपूर दिखाया गया है l

---रावण के द्वारा कैलाश पर्वत उखाडते हुए ----दस मुख वाले रावण को एक फलक पर कैलाश पर्वत को उखाडते हुए दर्शाया गया है l शिव को वाये पैर से पर्वत को दबाते दिखया गया है बाद मे रावण द्वारा करूण पुकार सुनकर मुक्त कर देते हैl

---पार्वती शिव से रुष्ठ मुद्रा मे ---एक चट्टान फलक पर शिव बैठे है माता पार्वती वाये तरफ दुसरी ओर मुख कर के रुष्ठ अवस्था मे बैठी है l

--वर्तमान मे इस गुफा को एक पर्यटक स्थल के रूप मे विकसित किया गया है l

आगे और भी ऐसे रोचक तथ्यो व जानकारीयो के साथ वापस आयेङ्गे अभी के लिये इतना ही लेख पढने के लिये आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद

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