हम स्मार्ट नही हो पाये. हम चाय से रोटी खाने वाले लोग हैं, चम्मच को हटा कर हाथ से दाल भात खाये बिना हमारी भूख नही मिटती। खाना खाकर कुरते से ही हाथ पोछने वाले लोग हैं, हमसे स्मार्ट नही बना जाएगा।
हवाई जहाज की आवाज सुन कर ऊपर देखने लगते हैं, काले बादलों को देख छत पर भीगने पहुँच जाते हैं । कोयल की कू पर जोर जोर से कूक लगाने वाले लोग हैं, हमसे स्मार्ट नही बना जाएगा। हम आइसक्रीम को चम्मच से नही खाते, टूथपेस्ट की अंतिम किश्त को प्लास से दबा कर निकाल लेते हैं। हम स्मार्ट नही बन पाएंगे। डीजे की धुन पर नाचते गाते आधे घण्टे की बारात के जमाने में हम खिचड़ी टिकने के दिनों को याद करते हैं, त्योहारों के आने पर मन की विकलता कई गुना बढ़ जाती है। होली के टीके लगाते और दीवाली पर चॉकलेट खाते हमें लगता है जैसे किसी ने सात तालों में बंद कर रखा हो।
धूप को खिलते देख, सुबह और साँझ के सूरज की लाली देख, पार्क में फूलों को देख, फुदकती चिड़ियों और भन्न भन्न करती तितलियों को देख हमें कैसा लगता है जब किसी से बताते हैं तो वह जाने क्यों हंस देता है। एफ एम के दौर में विविध भारती के पंचरंगी कार्यक्रम सुनने वाले हम लोग कभी स्मार्ट नही बन पाएंगे।
हमारी स्मार्टनेस मेहमान के जाने के बाद बची मिठाई पर निगाह जमाने में थी। हम केवल यस यस कहने कह पाते हैं, इससे आगे की अंग्रेजी बोलने में सोचना पड़ता है। हम बुफे सिस्टम में पंगत और कॉस्मेटिक्स की दुकान पर बिसारती को याद करते हैं। फ्लैट में रहने के बावजूद अपने दालान से कभी निकल नही पाए, हमारे गाँव का देसीपन हमें कभी शहर का वह सभ्य नागरिक नही बनने देता जो एप्रन पहने आम काट कर एक एक टुकड़े में कांटा लगाकर खता है।
हमसे स्मार्ट नही बना जाएगा, हम चतुर नही हो पाए, ठगे गए, पर भरोसा करना नही छोड़ा, हमने कभी यह नही सच समझा कि आँसू नकली भी होते हैं। हम किसी सही बात पर भी पिताजी के डाँटने पर बाद चुप रहने वाली पीढ़ी के लोग हैं। सभी रिश्ते नाते की समझ रखने वाले हम लोग यह नही जान पाए कि फादर्स डे पर पापा को बधाई कैसे दी जाती है, मदर्स डे पर माँ से नही कह पाए कि अम्मा तुम्हारे बिना कैसे जीते हैं, हम स्मार्ट नही बन पाए।
हम कि अपने गाँव को भूल नहीं पाते, जमाने के साथ दौड़ नहीं पाते, बिसलेरी की बोतल को छोड़ कुएं की जगत पर बैठ उसके सूख कर चटख गए तली को देखते हैं। उन दिनो को याद करते हैं जब कुए भरे थे, ताल लहराते थे, रातें जुगनुओ से जगमग थी,एक एक तारे गिने जाते थे, जब चंद्रमा से अमृत छलकता था जब बाबा कहानियां सुनाते थे।
हम वर्तमान के क्रूर विकास में अतीत की हरी और कोमल दूब हेरने वाले लोग स्मार्ट नहीं बन पाए।
AAPAN Uttar- Pradesh
UTTAR-PRADESH
03/02/2025
वसंत पंचमी की बहुत बहुत बधाई।
जय मां सरस्वती
24/01/2025
'रघुकुलनंदन' प्रभु श्री राम एवं योगेश्वर श्रीकृष्ण की पावन जन्मस्थली, बाबा श्री विश्वनाथ के आशीर्वाद से अभिसिंचित, सृजन, संस्कृति, संस्कार व शौर्य की गौरवशाली धरा उत्तर प्रदेश के 76वें स्थापना दिवस की प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई!
#उत्तरप्रदेश_स्थापना_दिवस
14/01/2025
आप सभेन के मकर संक्रांति के बहुत बहुत बधाई
12/01/2025
Greetings, I have become a primary member of the BJP. You too can join the Party using my referral link : https://narendramodi.in/bjpsadasyata2024/LYCHO8
ब्ल्यू लाईन पर केवल टच करें, अपना मोबाइल नं डालें, OTP फिल करें, अपना नाम और अपनी विधानसभा डाल कर सेव पर क्लिक करें बस बन गये भाजपा के मेंबर ।
जय श्री राम
BJP Membership Drive 2024 Join BJP Today! Become a part of the world's largest political party by giving a missed call on 8800002024.
04/01/2025
खो गईं वो चिठ्ठियाँ जिसमें “लिखने के सलीके” छुपे होते थे “कुशलता” की कामना से शुरू होते थे। बडों के “चरण स्पर्श” पर खत्म होते थे...!!
“और बीच में लिखी होती थी “जिंदगी”
नन्हें के आने की “खबर”
“माँ” की तबियत का दर्द
और पैसे भेजने का “अनुनय”
“फसलों” के खराब होने की वजह...!!
कितना कुछ सिमट जाता था एक
“नीले से कागज में”...
जिसे नवयौवना भाग कर “सीने” से लगाती
और “अकेले” में आंखो से आंसू बहाती !
“माँ” की आस थी “पिता” का संबल थी
बच्चों का भविष्य थी और
गाँव का गौरव थी ये “चिठ्ठियां”
“डाकिया चिठ्ठी” लायेगा कोई बाँच कर सुनायेगा
देख-देख चिठ्ठी को कई-कई बार छू कर चिठ्ठी को अनपढ भी “एहसासों” को पढ़ लेते थे...!!
अब तो “स्क्रीन” पर अंगूठा दौडता हैं
और अक्सर ही दिल तोड़ता है
“मोबाइल” का स्पेस भर जाए तो
सब कुछ दो मिनट में “डिलीट” होता है...
सब कुछ “सिमट” गया है 6 इंच में
जैसे “मकान” सिमट गए फ्लैटों में
जज्बात सिमट गए “मैसेजों” में
“चूल्हे” सिमट गए गैसों में
और इंसान सिमट गए पैसों में 🙏
06/12/2024
Celebrating my 11th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
19/09/2024
मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है
हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.
● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं
जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।
● हम वो आखिरी लोग हैं…
जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे
● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं
जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।
● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…
जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।
● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं
जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।
जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।
जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।
जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है
जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।
जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे ❣️🙏
#यादें
15/09/2024
🇮🇳हमारे यूपी और बिहार मे बूढ़ पुरनिया एक कहावत कहते थे।❤️ जो बचपन में बहुत सुनने को मिलता था एक कहानी जो रात में निकले सांप और महुआ के बीच का संवाद है ।
💯सांप बोला महुआ से टीप से टपाक से कपार काहे फोरले?
महुआ बोला सांप से ठेंगे से, बोंंगे से रात काहे डोलले?😄
अर्थ -सारी रात टप टप टपकने वाला महुआ जब सांप के सर पर गिर जाता है तब सांप नाराज होकर कहता कि टीप से टपक कर कपार क्यों फोड़ दिया?
तब महुआ भी ऐठ कर जबाब देता है कि मेरे ठेंगे से कपार फूटा इतनी रात में इधर उधर डोल क्यों रहे थे।🤣
आम में बौर और महुआ में कुंच आने का मतलब होता है कि प्रकृति ने अपना श्रंगार कर लिया है। सारे पेड़ पौधे नव पल्लव, कली फूल धारण करके,बसंत ऋतू के आगमन की तैयारी में लग गए है।
जी हाँ! महुआ के पेड़ में भी फूल आने का यही समय होता है।
कल तिनछठी व्रत में महुआ के उल्लेख पर कई लोगों ने उसके बारे में पूछा था तो सोचा आज तनिक विस्तार से वर्णन कर दूँ।
हम लोग छोटे थे तब महुये के बड़े बड़े बगीचे हुआ करते थे जिसे महुआबारी" कहा जाता था। सुबह सुबह घर के निक्कमे सदस्य एवं छोटे बच्चों के हाथ मे छोटी छोटी डलिया थमा कर महुआबारी मे महुआ बीनने के लिए भेज दिया जाता था सारी रात महुये के फूल टपकते थे जिन्हे सुबह चुन कर धूप मे सूखने के लिए डाल दिया जाता था।
ताजे फूल इतने मीठे रसभरे होते है मानो रसगुल्ला मुँह मे डाल लिया हो। सूखने के बाद भी ये किशमिश की भांति अपना स्वाद लिए रहते है। ताजे महुआ के फूलों को चुनकर,धोकर, निचोड़ कर उसका रस निकाल कर उसमें आटा गुंथकर ठकुवा, लापसी जैसे पकवान बनते है।सूखे फूल को और गेहूं के आटे को भूनकर उसे उखल मे कूटकर लाटा बनाया जाता था। अगर किसी के हाथ में या पैरों में अपरस एक बिमारी होती है चमडा छूटता है तो महुआ का फूल बिना कुछ खाए पीए बासी मुह हथेली पर मसलकर आधे घंटे बाद धो लिजीए दो या तीन दिन में बिमारी खत्म सूखे महुआ को भिगोकर पीसकर बाँधने से सूजन, दर्द, मोच इत्यादि मे आराम मिलता है।हां! सबसे जरूरी बात कि इसका ज्यादा फायदा वो व्यक्ति बता सकता है जो महुआ महरानी का सेवन करता हो। जी हाँ! सही समझे आप इसके फूल से शराब भी बनाई जाती है।जब फूल का मौसम खत्म हो जाता है और आम के पेड़ से आम का सीजन भी खत्म हो जाता है तब महुआ के फल की बारी आती है। जिसे " कोइन " कहते है।
महुवा के फल यानी कोवा की सब्जी उबालकर बेसन और चावल का आटा डालकर बनाई जाती है जिसका स्वाद बहुत ही उत्तम होता है। इसमें कितने लोगों ने इस सब्जी को खाया है कृपया बताएं।
घर की बड़ी बुजुर्ग महिला सारी कोइन इकट्ठा करके उसका गुदा अलग करके बीज निकाल लेती है।
बीज के ऊपर का खोल भी काफ़ी सख्त होता है इसलिए उसे भिगो कर रखते है फिर ईंट के टुकड़े या पत्थर से तोड़कर गिरी निकालकर सूखा ली जाती है। इस गिरी में काफ़ी मात्रा में तेल होता है।
इसके तेल का स्वाद कसैला होता है इसलिए नीबू की पत्ती को तेल में पकाया जाता है ताकि इसका स्वाद और गंध दूर करके खाने के प्रयोग में लाया जा सके इसे रिफाइंड की जगह पर तलने के लिए इस्तेमाल कर सकते है।इसके तेल को शरीर में लगाने से त्वचा का रुखापन दूर होता है
वैसे से महुआ के बारे में मेरा इतनी ही जानकारी था जो घर के बड़े बुजुर्गो से सुने थे आज आप सबसे साझा किए है। आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य साझा करें और अगर आपको हमारा पोस्ट अच्छा लगे तो प्लीज लाइक शेयर कॉमेंट और फॉलो करके सपोर्ट कीजिए 🙏
17/01/2024
उत्तर प्रदेश राज्य का प्रतीक चिन्ह बनाने की शुरुआत 1916 में हुई थी जब रॉयल सोसाइटी इन दी यूनाइटेड किंगडम ने इसको औपचारिक स्वीकृति दी थी। इस डिजाईन में एक सितारा भी था जिसको बाद में हटा दिया गया था। चिन्ह को औपचारिक रूप से अपनाने के लिये श्री गोविन्द बल्लभ पंत ने लंबा संघर्ष किया था। 1930 के शुरुआती वर्षो में राज्य के अँग्रेज़ गवर्नर सर हैरी ग्रैहम हेग थे और वो इस चिन्ह को अपनाने के विरोध में थे। लेकिन गोविन्द बल्लभ पंत अपनी बात पर अड़ गये थे और आखिरकार अगस्त 9, 1938, में सरकार के उनकी मांग को मान लिया था। स्वतंत्रता के बाद भी इस चिन्ह को बदला नही गया
प्रतीक में दो मछलियां अवध प्रांत की प्रतीक है (जो माहिब मारतीब के नाम से जानी जाती थी)।
तीन लहरे गंगा , यमुना और सरस्वती नदियों की प्रतीक है और तीर धनुष #श्रीराम जी का है।
🙏🙏
15/01/2024
आप सबके मकर संक्रांति अउर खिचडी के बहुत बहुत बधाई अउर शुभकामना।
जय मां गंगा, जय श्री सुर्यदेव
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