12/10/2024
सादगी एवं सरलता की प्रतिमूर्ति, नारी शक्ति की अद्वितीय मिसाल एवं प्रखर राष्ट्रवादी, भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक श्रद्धेय राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।
हितार्थ सभी शुखिनः भवः
12/10/2024
सादगी एवं सरलता की प्रतिमूर्ति, नारी शक्ति की अद्वितीय मिसाल एवं प्रखर राष्ट्रवादी, भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक श्रद्धेय राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।
08/06/2024
*श्री शिवराज सिंह चौहान*
*जनसेवा की अनवरत यात्रा*
1972 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े
1975 अध्यक्ष, मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल छात्र संघ
1975-1976 आपातकाल के खिलाफ भूमिगत आंदोलन में भाग लिया
1976-1977 आंतरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत कैदी (मीसाबंदी)
1977-1978 संगठन सचिव, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भोपाल
1978-1980 संयुक्त सचिव, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मध्यप्रदेश
1980-1982 महासचिव, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मध्यप्रदेश
1982-1983 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
1984-1985 संयुक्त सचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा, मध्यप्रदेश
1985-1988 महासचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा
1988-1991 अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा, मध्यप्रदेश
1991-1992 संयोजक, अखिल भारतीय केशरिया हिंदू वाहिनी
1992 अध्योध्या में कार सेवा के दौरान जेल
1992-1996 महासचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा
1997-2000 महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश
2000-2003 राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा
2003-2005 राष्ट्रीय महासचिव, भारतीय जनता पार्टी
2005-2006 प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश
2014-2022 सदस्य, भारतीय जनता पार्टी पार्लियामेंट्री बोर्ड
2018 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी
2019 सदस्यता अभियान के प्रमुख, भारतीय जनता पार्टी
1990 बुधनी विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक का चुनाव जीता
1991 विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद का चुनाव जीता
1996 विदिशा संसदीय क्षेत्र से दूसरी बार सांसद का चुनाव जीता
1998 विदिशा संसदीय क्षेत्र से तीसरी बार सांसद का चुनाव जीता
1999 विदिशा संसदीय क्षेत्र से चौथी बार सांसद का चुनाव जीता
2004 विदिशा संसदीय क्षेत्र से पांचवीं बार सांसद का चुनाव जीता
2005 पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला
2006 बुधनी में विधानसभा का उपचुनाव जीता
2008 बुधनी से तीसरी बार विधायक और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने
2013 बुधनी से चौथी बार विधायक और तीसरी बार मुख्यमंत्री बने
2018 बुधनी से पांचवीं बार विधायक चुने गये
2020 चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने
2023 बुधनी से छठवीं बार विधायक का चुनाव जीता
2024 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से रिकॉर्ड मतों से छठवीं बार चुनाव जीता
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4 बार मुख्यमंत्री
6 बार विधायक
6 बार सांसद
15/05/2024
ादों_में_राजमाता: माधवी राजे सिंधिया के निधन की दुःखद खबर सुन आज पूरा शहर है ग़मगीन ......
मध्यप्रदेश की पावन धरा का सत्य उसको अनुभूत किए बिना नहीं जाना जा सकता।
सुनिए मध्यप्रदेश की जनता के दिल मे क्या है -
“मामा मैजिक करत हैं”
08/06/2023
22/04/2023
#भोपाल : #सीएम का मानवीय चेहरा एक बार फिर आया सामने, #वीआईपी रोड पर घायल युवक को देखकर रुकवाया काफिला, तत्काल भेजा उपचार के लिए।
22/04/2023
भोपाल न्यूज़ (BHOPAL NEWS)
जून से शुरू होगी लर्न एंड अर्न योजना
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना महासम्मेलन में कहा
युवाओं को काम सीखने के बदले मिलेंगे 8,100 रुपए प्रति माह
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि बेटों के लिए जल्द ही बहुत अच्छी योजना आ रही है। वो है लर्न एंड अर्न करो और सीखो कमाई योजना। इस योजना को हम जून में शुरू करेंगे। जो बच्चे काम सीखने जाएंगे, वह चाहे फैक्ट्री में जाएं, सर्विस सेक्टर में जाएं, उन्हें काम सीखने के बदले 8,100 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा, ताकि बेरोजगार न रहे। उन्हें कुछ न कुछ मिलता रहे और साल भर बाद वह काम सीखकर अपना काम शुरू करें।
22/04/2023
शिवराज सरकार ने जारी किया आदेश
प्रदेश में वन टाइम परीक्षा शुल्क सुविधा आज से लागू
Shivraj Singh Chouhan ji
15/04/2023
मध्यप्रदेश के कर्मठ, जनप्रिय एवं ऊर्जावान गृह मंत्री श्री Dr. Narottam Mishra जी को जन्मदिवस के शुभ अवसर पर आत्मीय बधाई व शुभकामनाएं।
बाबा महाकाल आपको सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्नचित्त रखें तथा आपके आगामी जीवन का प्रत्येक दिन मंगलमय हो, ऐसी कामना करता हूँ।
04/04/2023
धन्यवाद मीडिया
11/03/2023
राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महापराक्रमी, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें शत-शत नमन।
09/03/2023
राजनीति की आदर्श प्रतिमूर्ति माधवराव सिंधिया
एक महाराज जिसने किया आमजन के दिलों पर राज
78वीं जयंती पर विशेष
डॉ. केशव पाण्डेय
माधवराव सिंधिया राजनीति का एक ऐसा नाम जो कभी भुलाए भी न भूले। हंसता, मुस्कराता चेहरा, बातचीत का विनम्र लहजा और अंदाज ऐसा कि जो भी एक बार मिलता व कभी उन्हें नहीं भूलता। अजनबी भी अपनेपन का अहसास करता। क्योंकि उनका पूरा जीवन यह साबित करने के लिए समर्पित था कि हाँ, आप वही थे जो आप पैदा हुए थे। लेकिन जो अधिक महत्वपूर्ण था वह यह था कि आपने अपने जीवन के साथ क्या किया, आपने अपने भाग्य को कैसे नियंत्रित किया? भुलाए जाने की बात तो दूर, वह अब भी उन लोगों के दिलो-दिमाग में बसते हैं, जो उन्हें कभी व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं हैं। अजनबी उसके बारे में गर्मजोशी से बात करते हैं। परिचित उनका जिक्र आदर से करते हैं।
आज उनकी जयंती पर उनकी भूली-बिसरी यादों के साथ करते हैं उनका पुण्य स्मरण।
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10 मार्च 1945 को मुंबई में जन्में माधवराव सिंधिया द्वितीय (1945-2001) ग्वालियर की तत्कालीन सिंधिया रियासत के प्रमुख शासक थे। उŸारी भारत में मराठा साम्राज्य के विस्तार में सिंधिया शासकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इसी कुल के वे ग्यारहवें शासक थे।
रिसायत से सियासत की राह पर चलने वाले माधवराव का जब राजीतिक उदय हुआ तो वे राजनीति की अमिट छाप बन गए। 1971 में गुना क्षेत्र से जनसंघ के सदस्य के रुप में लोकसभा का सदस्य बनने के साथ ही उनका राजनीतिक आगाज हुआ और वह तीन दशक तक नये आयाम गढ़ता रहा। वे पॉंचवी से तेरहवीं लोकसभा तक नौ बार लगातार सदस्य रहे।
श्री सिंधिया राजनीति में सुचिता का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने सदैव मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित राजनीति को प्रश्रय दिया। सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने के लिए सतही राजनीति को उन्होंने कभी नहीं अपनाया। ‘साध्य’ के साथ साधनों की पवित्रता में उनका अटूट विश्वास था, जिसे वे जीवन में अंगीकार करते थे।
यही वजह थी कि 1971 से तीन दशक तक संसद का हर कोना उनसे परिचित हो गया था। षड्यंत्रकारी राजनीति सिंधिया के स्वभाव में नहीं थी। दबाव और ब्लैकमेल जैसे शब्द उनके राजनीतिक शब्दकोष में नहीं थे। मूल्यहीन हो रही राजनीति का कु-चलन उन्हें कभी प्रभावित नहीं कर पाया। न ही छल-कपट और उठापटक उनकी मंजिल के मील के पत्थर बने।
लोकतंत्र में उनकी गहरी आस्था थी। वे प्रजातंत्र को एक प्रकार का ‘वैलेंसिंग एक्ट’ मानते थे, जो प्रजा अपना मत देकर करती थी। वे लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धान्तों पर सदैव चलते रहे और उसे ही अपने जीवन का प्रमुख अंग मानते रहे।
स्वतं़त्रा प्र्राप्ति कि बाद राष्ट्र के अनेक राजे-रजवाड़ों के राजाओं एवं महाराजाओं ने राजनीति में प्रवेश किया। किन्तु वे भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली में सामंजस्य न बिठा सकें! माधवराव ऐसा कर सकें। उन्होंने समय की वास्तविकताओं को खुली आंखों से देखा और भविष्य को अतीत के हाथों गिरवी नहीं रखने दिया। उन्होंने
आमजन की नब्ज के मर्म को समझा और राजसŸा को लोकसŸा में समाहित कर ‘‘राजनैतिक-इतिहास’’ को नया पर्याय प्रदान किया। इसलिए वे एक सच्चे जननायक बन गए।
1991 में जब वचे नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन मंत्री बने तो उन्होंने उड्डयन क्षेत्र के आधुनिकीकरण की योजना पेश की। हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण तथा मॉडल हवाई अड्डों का निर्माण, एअर इण्डिया के निजीकरण की योजना, खुला आकाश नीति आदि नवीन योजनाओं पर कार्य किया। माधवराव सिंधिया ने बदलते हुए विश्व परिदृश्य, भूमण्डलीकरण एवं वैश्वीकरण के दौर में भारत के पर्यटन क्षेत्र को सशक्त रुप से खड़ा करने के लिए अनेक नवीन योजनाऐं बनायी।
देश में कुशल पर्यटक प्रबंधकों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए ग्वालियर में ‘भारतीय पर्यटन व यात्रा प्रबंध संस्थान’ की स्थापना की।
1995 में मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने पर अनेक युगान्तकारी कार्य किये। ‘शिक्षा के सार्वभौमिकरण’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना उनके कार्यकाल में प्रारंभ हुई। प्राथमिक शालाओं में विश्व के सबसे बड़े कार्यक्रम ‘मध्यान्ह भोजन योजना’ उनके कार्यकाल मं प्रारंभ हुई जिसमें प्रतिदिन देश के 12 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राऐं निःशुल्क भोजन करते है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ‘महिला समृद्धि योजना एवं राष्ट्रीय महिला कोष’ योजना प्रारंभ की गयी। अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक विकास के लिए ‘मदरसो’ के आधुनिकीकरण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की। उच्च शिक्षा के विकास के लिए हैदराबाद में ‘उर्दू विश्वविद्यालय’ तथा बनारस में ‘हिन्दी विश्वविद्यालय’ की स्थापना करवायी। उन्होंने राज्य सरकारों को ओपन विश्वविद्यालय की स्थापना करने का सुझाव दिया था, ताकि उच्च शिक्षा का अधिक प्रसार हो सके।
ग्वालियर में एशिया के प्रथम ‘राष्ट्रीय सूचना एवं प्रबंध संस्थान’, इंदौर एवं कालीकट में भारतीय तकनीकी एवं प्रबंध संस्थान, ग्वालियर में इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेन्ट की स्थापना कराई।
इनके अलावा एशिया के सबसे बड़े शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय एलएनआईपीई ग्वालियर को सम-विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया।
राजनीति के अलावा उनका सामाजिक योगदान भी अविस्मरणीय है। सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिए आधुनिक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने अंध विश्वासों एवं सामाजिक कुरीतियों पर आधुनिक दृष्टिकोण अपनाकर तार्किक ढंग से प्रहार किया। भारत जैसे बहुधर्मी, बहुसम्प्रदायी एवं बहुभाषी देश में शोषित, पीड़ितों और पिछड़ों को सामाजिक न्याय दिलाने में सदैव आगे रहे। उन्होंने जाति के आधार पर समाज को बांटकर अपना हित साधने वाले लोगों पर कड़ा प्रहार किया। वे समानता पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहते थे। उनकी एक सोच और वादा था कि देश को आगे ले जाने के लिए जरूरी दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता वाला राजनेता बना जाए।
माधवराव सिंधिया की मान्यता थी कि समाज का उद्योग, खेलकूद, साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा सभी क्षेत्रों में विका होना चाहिए, तभी समाज का संतुलित एवं सर्वांगीण विकास होगा।
धर्म निरपेक्षता एवं साम्प्रदायिक सद्भाव को मजबूत बनाने के लिए आजीवन संकल्पित रहे। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि भारत जैसे बहुधर्मी देश में धर्म निरपेक्षता और साम्प्रदायिक सद्भाव के बिना देश की एकता एवं अखण्डता को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।
धर्म को आधार बनाकर कोई भी राष्ट्र मजबूत नहीं बना है। धर्म, जाति के नाम पर जो देश के बंटवारे की बात करते हैं, वे देशद्रोही हैं। माधवराव सिंधिया मानते थे कि धर्म निरपेक्षता के बिना भारत की एकता और अखण्डता को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है।
माधवराव सिंधिया कला एवं संस्कृति संरक्षक थे। उन्होंने कला एवं संस्कृति के संबर्द्धन के लिए ग्वालियर में देश का अद्भुत कलाकेन्द्र ‘‘बहुआयामी कला केन्द्र’’ को शिलान्यास किया था। साथ ही संगीत धरोहर को संरक्षित करने के लिए ग्वालियर में ‘‘हिन्दुस्तानी संगीत विद्यालय’’ की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की। ग्वालियर व्यापार मेले में राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन माधवराव सिंधिया के प्रयत्नों से ही अनेकों बार संपन्न हुआ। ग्वालियर मेले में देश का दूसरे एवं मध्यप्रदेश के प्रथम ‘‘दस्तकारी हॉट’’ का निर्माण कराया। जिसमें भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का जीवन्त प्रदर्शन होता है। कला एवं संस्कृति के पोषण के लिए मोतीमहल परिसर में बैजाताल में जल में तैरता रंगमंच तैयार कराया जिस पर जर्मनी एवं मलेशिया के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये थे।
वे सदैव आमजन के हित की बात करते थे। यही कारण है कि एक महाराज होकर भी आम आदमी के दिलों पर राज करते हैं। इसीलिए वे राजनीति की आदर्श प्रतिमूर्ति कहलाते हैं।