29/05/2026
हमे यह बात जिले के किसानो तक पहुचानी चाहिए कि वे अपनी खाद बुकिंग जल्दी कर लें.
जिले में खाद वितरण को सुव्यवस्थित एवं बिना परेशानी के उपलब्ध कराने हेतु बलराम ऐप के माध्यम से / ई-विकास पोर्टल के माध्यम से ई-टोकन व्यवस्था लागू की गई है।
आप चाहें तो बलराम ऐप के माध्यम से अथवा सीएचसी जाकर ई-विकास पोर्टल पर पंजीयन कर अपनी आवश्यकता अनुसार खाद की बुकिंग कर सकते हैं।
निर्धारित तिथि एवं समय पर संबंधित केंद्र से खाद प्राप्त किया जा सकेगा।
📌 ई-टोकन प्राप्त करने की प्रक्रिया:
1️⃣ किसान ई-विकास पोर्टल पर लॉगिन करें।
2️⃣ आधार नंबर/समग्र आईडी एवं आवश्यक जानकारी दर्ज करें।
3️⃣ नजदीकी खाद वितरण केंद्र का चयन करें।
4️⃣ आवश्यक खाद की मात्रा दर्ज कर आवेदन करें।
5️⃣ आवेदन स्वीकृत होने पर मोबाइल पर ई-टोकन प्राप्त होगा।
6️⃣ निर्धारित दिनांक एवं समय पर केंद्र पर जाकर खाद प्राप्त करें।
बाद में बहुत से किसान एक ही तिथि मांगे उस से अच्छा है कि अभी से अपनी खाद प्राप्त कर ले. एक बार खाद ले लें तो ऐप पे दोबारा माँग करने की सुविधा भी है .
26/05/2026
ग्राम सिमराखुर्द तहसील पलेरा जिला टीकमगढ़ (म.प्र.) खसरा 1461/3 रक़बा 7.249 हेक्टेयर खसरा 1728/1 रक़बा 51.457 हेक्टेयर कुल रकबा 58.706 हेक्टेयर याने लगभग 145 एकड भूमि उद्योग विभाग को आवंटित की गई है यहाँ मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (MPIDC) औद्योगिक पार्क विकसित करेगा जिससे रोजगार और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा. माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक विकास की ले जाने की उत्कृष्ट नीति के क्रम में टीकमगढ़ में तीन औद्योगिक केंद्र एमपीआईडीसी द्वारा चिन्हित किए गए हैं जिनमे से २ केन्द्रों जतारा के रामनगर खुर्द और पलेरा के सिमरा खुर्द में भूमि आवंटन की कार्यवाही हो चुकी है , माडूमर के तीसरे औद्योगिक केंद्र आवंटन की कार्यवाही प्रगतिरत है .
21/05/2026
बलदेवगढ़ में बलदाऊ जी के मंदिर का स्वरूप निखरकर और दिव्य और भव्य हो रहा है . विकास कार्य अभी प्रगति पर है . नगर पालिका बलदेवगढ़ को बधाई.
तब और अब ।
20/05/2026
पिछले वर्ष वर्षा ऋतु के दौरानग्राम लुहर्रा की एक तस्वीर ने हम सभी को भीतर तक व्यथित कर दिया था — मुक्तिधाम के अभाव में बारिश से बचाने के लिए अंतिम संस्कार प्लास्टिक के नीचे करना पड़ा था ।
वह दृश्य केवल एक समाचार मात्र नहीं था, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला अत्यंत दुःखद प्रसंग था।
उसके बाद हमने ऐसे ग्रामों की सूची तैयार कराई जहाँ अभी तक मुक्तिधाम या तो उपलब्ध नहीं थे या जर्जर हो चुके थे . एस्टीमेट बनवाया , लगभग २. ३७ लाख से एक मुक्तिधाम बनता है . मनरेगा से मजदूरी स्वीकृत की और मान सांसद जी डॉ वीरेंद्र कुमार जी द्वारा सांसद निधि के माध्यम से लगभग 100 ग्राम पंचायतों को मुक्तिधाम निर्माण हेतु आर्थिक स्वीकृति प्रदान की गई, मान विधायक खरगापुर ने भी ७ मुक्तिधामों के लिए निधि प्रदान की .
आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए पिछले डेढ़ माह से लगातार जनपद सीईओ को निर्देशित किया जा रहा है कि 15 जून से पूर्व मुक्तिधाम निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएँ।
अब तक —
- १२ मुक्तिधाम पूर्ण हो चुके हैं।
- ७० मुक्तिधामों का कार्य प्रगति पर है।
- २५ कार्य अभी प्रारंभ नहीं हो सके हैं. कार्य शुरू ना हो पाने की वजह मुख्यतः स्थल विवाद , जगह उपलब्ध ना होना और अतिक्रमण हैं. तहसीलदार को निर्देश दिए हैं एक सप्ताह में सभी स्थल भ्रमण करके अतिक्रमण/ विवाद दूर करें . जो ७० कार्य प्रगतिरत हैं वहाँ के ग्रामवासी / पंचायतें अपनी पंचायतों के मुक्तिधाम निर्माण के काम को प्राथमिकता से देखें और पंचायतें मुक्तिधामों को बारिश के पहले पूर्ण करा लें .
14/05/2026
मऊबुजुर्ग के प्राचीन महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य आज ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा प्रारम्भ कर दिया गया . मध्य प्रदेश शासन के धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए २३.६१ लाख रुपये स्वीकृत किए हैं 🙏🏻
13/05/2026
किसानों की सुविधा एवं आगामी खरीफ/रबी सीजन में खाद वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने हेतु 13, 14 एवं 15 मई को प्रत्येक ग्राम पंचायत में “फार्मर रजिस्ट्री- ई विकास कैम्प ” आयोजित किए जा रहे हैं।
फार्मर रजिस्ट्री किसान के लिए किसान होने का आधार कार्ड जैसा है. अब किसानों को खाद प्राप्त करने हेतु E-Vikas Portal पर पंजीयन आवश्यक है । जिन किसानों की Farmer Registry पहले से हो चुकी है, उनका E-Vikas Portal पर पंजीयन सरल प्रक्रिया से हो जाता है ।इसलिए फार्मर रजिस्ट्री आवश्यक है .
कई किसानों के प्रकरण में यह पाया गया है कि Farmer Registry में उनके सभी खसरा नंबर दर्ज नहीं हैं, जिसे “बकेट क्लेमिंग” कहा जाता है। ऐसे किसान भी अपने छूटे हुए सभी खसरा नंबर भी Farmer Registry में अवश्य जुड़वाएँ।
शिविर में किसानों के लिए निम्न सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी —
✅ Farmer ID बनाना
✅ सभी खसरा नंबर Farmer Registry से लिंक कराना
✅ E-Vikas Portal हेतु पंजीयन
📌 कृषि विभाग द्वारा किसानों के E-Token Booking एवं E-Vikas Portal संबंधी कार्य किए जाएंगे।
📌 राजस्व विभाग/पटवारी द्वारा Farmer Registry एवं खसरा लिंकिंग का कार्य किया जाएगा।
अतः सभी किसान भाई 13, 14 एवं 15 मई को अपने ग्राम पंचायत में आयोजित शिविर में पहुँचें, आवश्यक दस्तावेज साथ लाएँ एवं समय पर पंजीयन कराकर खाद प्राप्ति में होने वाली असुविधा से बचें।
आवश्यक दस्तावेज —
• आधार कार्ड
• खसरा/खतौनी
• मोबाइल नंबर
• समग्र आईडी
“समय पर Farmer Registry एवं E-Vikas पंजीयन ही खाद प्राप्ति की सुविधा सुनिश्चित करेगा।”
09/05/2026
तपते टीन शेड से जन शीतल आश्रय बनने में थोड़ा सा ही संसाधन लग रहा है. पलेरा नगर पालिका द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जिले का तीसरा जन शीतल आश्रय बनाया है , मरीजों के साथ आने वाले परिचारकों को ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं के दरमियान शीतल स्वच्छ पर्यावरण में बैठने सुस्ताने की व्यवस्था की है. नगर परिषद पलेरा को बधाई .
03/05/2026
टीकमगढ़ में ज्ञान भारतम अभियान के अंतर्गत नगर भवन लाइब्रेरी में प्राप्त एक दुर्लभ पांडुलिपि मदन वाटिका के संबंध में आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया में समाचार प्रकाशित हुआ है। यह पांडुलिपि वर्ष 1876 ई. में लिखी गई “मदन वाटिका” है, जिसके लेखक श्री मदन सिंह हैं। इसमें अश्व विज्ञान (Equine Science) पर विस्तृत जानकारी दी गई है, जिसमें घोड़ों की नस्लें, अंगुल में माप अश्वों का शारीरिक मानक, रंग वर्गीकरण तथा पशु-चिकित्सा संबंधी विवरण शामिल हैं। यह पांडुलिपि दुर्लभ श्रेणी की है .
टीकमगढ़ में अब तक ७५ हस्तलिखित पांडुलिपियाँ हमने ढूंढी है AI की मदद से उनके कंटेंट पढ़ने का प्रयास जारी है अभी तक टीकमगढ़ लाइब्रेरी में मिली पांडुलिपियाँ है - मदन वाटिका, योग वशिष्ठ सार, नक्षत्र इष्टि प्रयोग, गणपत कथा, राम कलेवा, नैमिषारण्य माहात्म्य, श्री महा गणपति सहस्र नाम स्तोत्र, संस्कृत व्याकरण पुस्तक, ज्ञानार्णव तंत्र, किरातार्जुनीयम् पर समीक्षा, परमहंस स्तोत्र (पंचांग/पाताल), विज पावनी / तरंगन.
ज्ञान भारत अभियान सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य देश भर में बिखरी पुरानी पांडुलिपियों (हस्तलिखित किताबों/ग्रंथों) को ढूंढना, सुरक्षित रखना और डिजिटल रूप में संरक्षित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस ज्ञान का लाभ ले सकें
इसमें क्या किया जाता है?
* गांव, शहर, मंदिर, पुस्तकालय या निजी संग्रह में रखी पांडुलिपियों की खोज और पहचान
* उनकी फोटो/स्कैन लेकर डिजिटल रिकॉर्ड बनाना
* जरूरी होने पर उनका संरक्षण (preservation)
एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना है .
यदि आपकी जानकारी में ऐसा कोई भी पुराना दस्तावेज हो तो ज्ञान भारतम ऐप की जानकारी श्री अनुपम दीक्षित +91 94248 00790 और श्री विजय मेहरा 98939 97657 जी से ले सकते हैं . टीकमगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर लाने में आप सहयोग कर सकते हैं .