01/11/2026
मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के अधीन संचालित राजा भोज शोध प्रभाग द्वारा आयोजित
"हमारा भोपाल, हमारे भोज" प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर इसकी सराहना।
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी के संस्कृत सलाहकार श्री राम तिवारी एवं महाराजा राजा भोज शोधप्रभाग के निदेशक श्री संजय यादव उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में भोपाल, रायसेन, विदिशा एवं आसपास के क्षेत्रों की समृद्ध ऐतिहासिक, स्थापत्य एवं पुरातात्विक विरासत को 160 चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसमें प्राचीन स्मारकों, किलों, महलों, मंदिरों, मस्जिदों, मकबरों, बावड़ियों तथा विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका के शैलचित्रों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
*160 चित्रों में साकार हुई भोपाल परिक्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत*
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने बताया कि भोपाल परिक्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत अनेक सभ्यताओं, स्थापत्य परंपराओं और सांस्कृतिक धाराओं का प्रतिनिधित्व करती है। इस विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से चित्रांकन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें कलाकारों ने विभिन्न ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कर उनके स्थापत्य स्वरूप, ऐतिहासिक विशेषताओं और कलात्मक बारीकियों को अपने चित्रों में उकेरा। इन चित्रों के माध्यम से क्षेत्र की विरासत का कलात्मक दस्तावेजीकरण किया गया है।
प्रदर्शनी में रायसेन किला, भोजपुर का शिव मंदिर, भीमबेटका की गुफाएं एवं शैलचित्र, सांची के स्तूप, आशापुरी के मंदिर, ताज-उल-मसाजिद, ताजमहल पैलेस, गौहर महल, शौकत महल, रानी कमलापति महल, जगदीशपुर का रानी महल, इस्लामनगर का गोंड राजा महल, मंगलगढ़ किला, बैरसिया की प्राचीन बावड़ी सहित विभिन्न ऐतिहासिक मकबरों और स्मारकों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इन चित्रों में ऐतिहासिक स्थलों को विभिन्न कोणों से उनके विशिष्ट स्थापत्य विवरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस चित्रांकन कार्यशाला में वरिष्ठ चित्रकार विनय सप्रे, विजय गहरवार, दिनेश दुबे, विवेक टेंबे, मंजू सिंह, शुभम वर्मा, के.के. मालवीय एवं प्रभु ढोक ने सहभागिता की। कलाकारों ने जलरंग माध्यम से ऐतिहासिक स्थापत्य और विरासत के विविध स्वरूपों को चित्रों में अभिव्यक्त किया। कार्यशाला का संयोजन नितिन भांड ने किया।
*भोपाल और उज्जैन परिक्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत का होगा व्यापक दस्तावेजीकरण*
श्री राम तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार भोपाल एवं उज्जैन परिक्षेत्र के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को व्यापक रूप से सामने लाने के लिए इनके पुनर्गठन की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित स्वरूप में भोपाल परिक्षेत्र में भोपाल, विदिशा, सीहोर, सिरोंज, रायसेन और नर्मदापुरम आदि क्षेत्रों तथा उज्जैन परिक्षेत्र में उज्जैन, इंदौर, देवास और धार आदि क्षेत्रों को सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित है। ये दोनों परिक्षेत्र प्रागैतिहासिक काल से लेकर स्वाधीनता संग्राम तक भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं, सभ्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं के साक्षी रहे हैं।उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों की ऐतिहासिक यात्रा को समझने के लिए विभिन्न कालखंडों के वैज्ञानिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक साक्ष्यों का संकलन एवं चित्रों के माध्यम से दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। पृथ्वी के निर्माण और उसके विकास से जुड़े वैज्ञानिक शोधों के साथ मध्यप्रदेश के भू-वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक साक्ष्य भी इस अध्ययन को महत्वपूर्ण बनाते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में भी पृथ्वी के आविर्भाव और महाकाल के प्राकट्य से संबंधित विवरण मिलते हैं।
भोपाल एवं आसपास के क्षेत्रों में प्राचीन जीव-जंतुओं और मानव सभ्यता के अस्तित्व के प्रमाण मिले हैं। इस क्षेत्र में प्राप्त जीवाश्म तथा मानव अवशेष यहां के प्राचीन इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ियां प्रस्तुत करते हैं। वहीं, विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका की गुफाओं में मिले शैलचित्र प्राचीन मानव सभ्यता, चित्रकला, जीवनशैली और सांस्कृतिक विकास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।श्री तिवारी ने कहा कि भोपाल और उज्जैन परिक्षेत्र के विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों से जुड़े साक्ष्यों को चित्रों के माध्यम से संकलित करने का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध विरासत को व्यवस्थित रूप से सामने लाना है, ताकि आमजन, शोधार्थियों और नई पीढ़ी को मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास एवं सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया जा सके।