03/10/2026
शिवधाम उज्जैन से रामधाम अयोध्या तक
"सनातन स्वाभिमान यात्रा"
"सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा" - धर्म के नाम पर अधर्म के विरुद्ध जनजागरण
मैं आगामी 20 अक्टूबर को अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व दशहरा से "सत्य सनातन स्वाभिमान पद यात्रा" प्रारंभ कर रहा हूँ। यह यात्रा उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करके प्रारंभ होगी तथा अयोध्या में भगवान राम के मंदिर पर समाप्त होगी। मैं यह यात्रा क्यों कर रहा हूँ, यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
विगत महीनों में पूरे देश ने देखा है कि भगवान श्रीराम के मंदिर को चढ़ावे में प्राप्त नकद राशि, विदेशी मुद्रा तथा सोने-चाँदी के आभूषणों की चोरी और हेराफेरी हुई है। राज्य सरकार द्वारा गठित एस.आई.टी. की जाँच रिपोर्ट में आरोपियों ने 2 से 3 करोड़ रुपये नकद, सोने और चाँदी के आभूषणों की चोरी को स्वीकार किया है। यह चोरी कैमरों में भी कैद हुई है। इसके अलावा आठ महीनों के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट किया गया है। राममंदिर ट्रस्ट में जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह इसके गवाह हैं। यह चोरी लगभग 200 से 300 करोड़ रुपये की होने की आशंका है। राम मंदिर निर्माण के इंजीनियर रहे दीनानाथ वर्मा ने स्पष्ट बताया कि मंदिर निर्माण के लिये दिये गये ठेकों में 40प्रतिशत का कमीशन खाया गया।
राम मंदिर निर्माण के लिये प्राप्त दान से दक्षिणपंथी संगठनों ने अपने विस्तार के लिये कर्नाटक में जमीनें खरीदी गईं, यह बात एस.आई.टी. के सामने आई है। राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने होटलों और जमीनों की डील की। राम मंदिर का ध्वज डिजाइन करने वाले व्यक्ति ने इसकी गवाही दी। आम आदमी पार्टी के सांसद श्री संजय सिंह ने 2021 से 2024 तक राम मंदिर के आसपास की जमीनों के क्रय में भारी भ्रष्टाचार होने का दस्तावेजी साक्ष्यों सहित खुलासा किया है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि एस.आई.टी. ने इसे जाँच के दायरे में नहीं लिया। राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के समारोह में ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को काम सौंपा गया और बिना काम के करोड़ों का भुगतान किया गया यह बात स्थानीय ऑडिट में सामने आई। ऐसे अनेकों प्रमाण और गवाह हैं जो राममंदिर में भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार सेवक संतोष दुबे स्वयं चंपत राय और उनके साथ मंदिर प्रशासन के लोगों के भारी भ्रष्टाचार का कैमरों के सामने खुलासा कर रहे हैं।
भगवान राम के नाम पर यह चोरी कोई नई बात नहीं है। विश्व हिंदू परिषद ने 1989 में रामशिला पूजन अभियान चलाया। देश के लाखों गाँवों में करोड़ों लोगों की भावनाओं को उभारा गया और शिलाओं अर्थात ईंटों को पूजकर एकत्रित किया गया। इसमें कई लोगों ने भगवान राम के नाम पर चाँदी की ईंटें तक भेंट कीं। इस अभियान में 1400 करोड़ रुपये एकत्रित होने की जानकारियाँ सामने आईं किन्तु विश्व हिंदू परिषद के अनुसार रामशिला पूजन के दौरान कुल 8 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि एकत्रित हुई। इस राशि का विश्व हिंदू परिषद ने कभी कोई हिसाब क्यों नहीं दिया? चाँदी की ईंटें कहाँ गायब हो गईं? मैं यद्यपि विश्व हिंदू परिषद और आर.एस.एस. की विचारधारा का समर्थन नहीं करता फिर भी जहाँ भगवान श्रीराम का प्रश्न उपस्थित होता है, मैं सदैव मंदिर निर्माण के पक्ष में रहा और मैंने 1989 में भी अपनी श्रद्धानुसार उसमें योगदान दिया। बाद में रामजन्मभूमि ट्रस्ट को मैंने अपनी श्रद्धानुसार मंदिर निर्माण के लिये भी योगदान दिया। इसलिये इस चोरी ने मुझे और मेरे जैसे करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा को चोट पहुँचाई है।
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के समय मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत 800 करोड़ थी। मंदिर का निर्माण 2200 करोड़ में हुआ। और एक तथ्य और बताना जरूरी है कि मंदिर निर्माण के लिये श्रद्धालुओं ने 3264 करोड़ रुपये दान में दिये। क्या इनसे हिसाब देने की बात करना अधर्म होगा?
पचास वर्षों से अधिक के मेरे सार्वजनिक राजनीतिक जीवन में मैंने कभी भी राजनीति के लिये धर्म का इस्तेमाल नहीं किया है, भले ही मुझे उसकी कीमत चुकानी पड़ी हो। धर्म हृदय की गहराई में श्रीराम को विराजमान करता है। वह कोई व्यापार की वस्तु नहीं, जिसे सत्ता के बदले बेच दिया जाये।
मैं ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का वर्ष 1983 से दीक्षित शिष्य हूँ। राम मंदिर निर्माण के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री पी.वी. नरसिंहाराव जी ने 1994 में उनकी अध्यक्षता में इस ट्रस्ट का गठन किया था लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘‘रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’’ नाम से एक नये ट्रस्ट का गठन किया और उसका महासचिव चंपत राय को बना दिया। इस ट्रस्ट में न सिर्फ शंकराचार्यों और दशकों से रामलला की सेवा कर रहे निर्मोही अखाड़े की उपेक्षा की गई है बल्कि गुरु गोरखनाथ ट्रस्ट की भी उपेक्षा की गई है जिसने राममंदिर निर्माण के लिये लड़ाई लड़ी। प्रधानमंत्री के द्वारा चंपत राय के नेतृत्व में बनाये गये इस नये ट्रस्ट में भारत के धार्मिक इतिहास की यह सबसे बड़ी चोरी हुई है। यह धर्मसम्मत नहीं है। राजनीति यदि धर्मसम्मत हो तो वह कल्याणकारी होती है किन्तु यदि धर्म को राजनीति का हथियार बना लिया जाये तो वह अकल्याणकारी है।
धर्म मनुष्य को भीतर से बदलता है। ऐसा व्यक्ति कभी चोरी, हिंसा, अत्याचार, अन्याय कर ही नहीं सकता। जिसके भीतर राम जागृत हो गया, वह उस राम की हर कीमत चुकाकर रक्षा करता है। मैं इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश देना चाहता हूँ कि जो श्रीराम के नाम पर सत्ता में आये, जिन्होंने श्रीराम का नाम ले लेकर देश के लोकतंत्र को कमजोर कर दिया, वे श्रीराम को लूटकर रामभक्त नहीं कहे जा सकते, यह भारत की आस्थावान भोली-भाली जनता को पता चलना चाहिए।
मैं आगामी 20 अक्टूबर को महाकाल से यह प्रार्थना करके अयोध्या के लिये प्रस्थान करूँगा कि वे मुझे वह शक्ति दें जिससे देश में धर्म के नाम पर मची लूट और आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकें। मैं ओरछा में रामराजा और अयोध्या में रामलला से प्रार्थना करूँगा कि वे लोगों की आस्था की रक्षा करें और इस महाचोरी में शामिल लोगों को दण्डित करें जिससे दान देने वाले श्रद्धालुओं के आहत हृदय पर मरहम लग सके। मेरी यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक यात्रा है। इसमें हर वर्ग, पंथ और विचारधारा के लोग सादर आमंत्रित हैं जो आस्था और धार्मिक मूल्यों की रक्षा करना चाहते हैं तथा इस यात्रा के ध्येय वाक्य ‘‘यतो धर्मस्ततो जयः’’ में विश्वास करते हैं।
-- दिग्विजय सिंह
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