12/05/2026
मध्यप्रदेश के किलों, मंदिरों, लोककथाओं, पांडुलिपियों और अनकही कहानियों को अब खोजिए एक नए अंदाज़ में।
📖 हर कदम पर मिलेगा इतिहास से जुड़ने का एक नया अनुभव।
आज ही डाउनलोड करें ज्ञान भारतम् App और शुरू करें अपनी ऐतिहासिक यात्रा।
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10/05/2026
समय के पन्नों में छिपी है मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत।
राजगढ़, मुरैना और दमोह से प्राप्त ये दुर्लभ पांडुलिपियाँ केवल लेखन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, भाषाओं और ज्ञान परंपरा की जीवित धरोहर हैं। ✨
हिंदी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदुस्तानी और फारसी जैसी भाषाओं में लिखी गई ये अमूल्य पांडुलिपियाँ हमें हमारे इतिहास से जोड़ती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का अमिट स्रोत बनती हैं।
ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत इन धरोहरों का संरक्षण एवं डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि इतिहास के ये पन्ने सदैव जीवंत रहें। 🌿
📖 आइए, अपनी लिखित विरासत को सहेजने की इस यात्रा का हिस्सा बनें।
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08/05/2026
📜 संस्कृति, विरासत और इतिहास के संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी संदेश।
माननीय श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी जी
(राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार),
संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा भारतीय सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण हेतु दिए गए प्रेरक विचार, हमारी विरासत को सहेजने के संकल्प को और सशक्त बनाते हैं। 🇮🇳✨
ज्ञान, इतिहास और संस्कृति की यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचे - यही हमारा प्रयास है।
🌿 आइए, इतिहास के पन्नों को जीवंत रखने में अपना योगदान दें।
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07/05/2026
📜 इतिहास सिर्फ स्मारकों में नहीं, शब्दों में भी जीवित रहता है।
ग्वालियर की ये दुर्लभ शिलालेख एवं पांडुलिपियाँ हमारी सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं।
ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत इन्हें संरक्षित एवं डिजिटाइज़ कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हर पांडुलिपि अपने भीतर एक युग की कहानी समेटे हुए है। ✨
🌿 इतिहास के पन्नों को जीवित करें - जुड़िए ज्ञान भारतम् मिशन से।
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05/05/2026
विदिशा की विरासत!
विदिशा के खजाने अब डिजिटल युग में सुरक्षित हैं! श्री सुरेश शर्मा शास्त्री के संरक्षण में मौजूद संस्कृत भाषा की यह दुर्लभ पांडुलिपि अपनी विशिष्ट चित्रलिपि के लिए जानी जाती है। कागज पर अंकित यह हस्तलेख न केवल अच्छी स्थिति में है, बल्कि इसका डिजिटलीकरण और सूचीकरण भी पूर्ण हो चुका है।
इतिहास का हिस्सा बनें!
अपनी अमूल्य सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने और उन्हें संरक्षित करने के लिए आज ही ज्ञान भारतम् मिशन से जुड़ें।
04/05/2026
पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की जयंती (4 मई 2026) के अवसर पर उनके पुरातत्व एवं कला क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत संस्थान को इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित करने तथा मध्यप्रदेश की पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।
साथ ही, उनके जीवन एवं कार्यों पर आधारित एक प्रकाशन तैयार कर डिजिटल माध्यमों पर साझा किया जा रहा है, जिससे उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे।