13/06/2026
शायद किसी का दर्द अपना बना कर देखो, दुनिया के साथ-साथ अपनी भी दुनिया बदल जाती है
आज AIIMS में इस मासूम बच्चे रवि के साथ दूसरा दिन है, लेकिन दिल को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे यह मुलाकात दूसरी बार की नहीं, बल्कि जन्मों की पहचान जैसी हो। उसके चेहरे की मासूमियत, उसकी शांत आँखें और उसकी नन्ही-सी दुनिया को देखकर मन बार-बार यही सोचता है कि आखिर इतनी कम उम्र में एक बच्चे को इतना दर्द क्यों सहना पड़ रहा है।
12 साल का रवि अहिरवार, जो भोपाल के लालघाटी क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहता है, आज जिंदगी की एक बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। वह एक स्पेशल चाइल्ड है। उसकी अपनी एक अलग दुनिया है—जहाँ मासूमियत है, अपनापन है, और बिना किसी स्वार्थ के प्रेम है। परिवार के अनुसार रवि अक्सर जानवरों के साथ खेलता था। शायद उसे क्या पता था कि यही मासूम खेल एक दिन उसके जीवन पर इतना भारी पड़ सकता है।
मोहल्ले में लगे मेडिकल कैंप में जांच के दौरान उसे रेबीज से पीड़ित बताया गया। परिवार के अनुसार उसके व्यवहार में भी रेबीज जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। एक माँ के लिए अपने बच्चे को इस हालत में देखना कितना कठिन होगा, यह शब्दों में कहना आसान नहीं है। रवि की माँ जमना अहिरवार की आँखों में बस एक ही प्रार्थना है—“मेरा बच्चा ठीक हो जाए।”
आज जब रवि AIIMS में इलाज की उम्मीद के साथ है, तो मन बार-बार भगवान से यही प्रार्थना कर रहा है कि यह बच्चा जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाए। उसकी मासूम मुस्कान फिर लौट आए। वह इस संसार में अपना सामान्य जीवन जी सके। वह भी खेल सके, हँस सके, अपने परिवार की गोद में सुरक्षित महसूस कर सके।
रवि की कहानी सिर्फ एक बच्चे की बीमारी की कहानी नहीं है। यह हमारी संवेदनशीलता की परीक्षा है। यह सवाल है कि जब किसी गरीब, असहाय और मासूम बच्चे को हमारी जरूरत होती है, तब हम उसके लिए कितना आगे आते हैं।
शायद सच यही है—किसी का दर्द अपना बना कर देखो, दूसरों की दुनिया के साथ-साथ अपनी भी दुनिया बदल जाती है।