06/05/2021
*एक थे बिचारे #गंगाराम*
देश के बहुत बड़े धन्नासेठ थे #गंगाराम। वो इतने बड़े धन्नासेठ थे कि *लाहौर का हाईकोर्ट, लाहौर का सबसे बड़ा अस्पताल, लाहौर का आर्ट्स कॉलेज, लाहौर का म्यूजियम, लाहौर का सबसे बड़ा कॉलेज एचिसन कॉलेज और केवल लाहौर नहीं बल्कि पाकिस्तान में मानसिक रोगियों का सबसे बड़ा अस्पताल फाउंटेन हॉउस भी धन्नासेठ गंगाराम ने अपने धन से ही बनवाया था*। उनके द्वारा बनवाए गए उपरोक्त संस्थानों का भरपूर लाभ लाहौर समेत पाकिस्तान वाले पंजाब अर्थात आधे से अधिक पाकिस्तान के नागरिक आज भी ले रहे हैं। #गंगाराम तो बिचारे 1926 में ही मर गए थे। लेकिन 1947 में जब भारत विभाजन हुआ तो लाहौर के *शांतिप्रिय सेक्युलर समाज ने #गंगाराम को उनकी मौत के 21 बरस बाद भी बख्शा नहीं*। पाकिस्तान बनते ही सेक्युलर समाज की भीड़ ने लाहौर के मॉल रोड पर लगी हुई #गंगाराम की मूर्ति को घेर कर उस पर अंधाधुंध लाठियां बरसाते हुए मूर्ति को बुरी तरह क्षत विक्षत कर दिया। लेकिन उस भीड़ की गंगा जमुनी तहजीब और सेक्युलरिज्म की आग फिर भी ठंढी नहीं हुई तो उसने #गंगाराम की मूर्ति पर जमकर कालिख पोती और मूर्ति को फ़टे पुराने जूतों की माला पहना कर अपने सेक्युलरिज्म की आग को भीड़ ने ठंढा किया।
1947 के धार्मिक दंगों के दौरान घटी उपरोक्त घटना का जिक्र उर्दू के मशहूर साहित्यकार *सआदत हसन मंटो* ने अपनी बहुचर्चित लघुकथा * #गारलैंड* में कुछ इस तरह किया है:
*हुजूम ने रुख़ बदला और सर गंगाराम के बुत पर पिल पड़ा। लाठीयां बरसाई गईं, ईंटें और पत्थर फेंके गए। एक ने मुँह पर तारकोल मल दिया। दूसरे ने बहुत से पुराने जूते जमा किए और उन का हार बना कर बुत के गले में डाल दिया। तब तक वहां पुलिस आ गई और गोलियां चलना शुरू हुईं। बुत को जूतों का हार पहनाने वाला जखम हो गया। चुनांचे मरहम पट्टी के लिए उसे *सर गंगाराम हस्पताल* भेज दिया गया।*
*केवल #गंगाराम ही नहीं, लाहौर में अपनी पत्नी के नाम से पाकिस्तान का सबसे बड़ा चेस्ट हॉस्पिटल, गुलाब देवी चेस्ट हॉस्पिटल बनवाने वाले लाला लाजपत राय की मूर्ति के साथ भी यही व्यवहार किया गया और उसे उखाड़ कर फेंक दिया गया*। हालांकि लाला जी की मृत्यु 19 साल पहले 1926 में ही हो चुकी थी।
तथाकथित *गंगा जमुनी* तहजीब और सेक्युलरिज्म का डांस करने वाले ख़बरंडी व अन्य समेत पूरी लुटियन मीडिया का कोई सेक्युलर डांसर क्योंकि आपको धन्नासेठ गंगाराम औऱ लाला लाजपत राय जी की उपरोक्त कहानी कभी नहीं सुनाएगा बताएगा। इसलिए आवश्यक है कि इस कहानी को हम आप जन जन तक पहुंचाएं और उन्हें बताएं कि अपनी *गंगा जमुनी* तहजीब और शांतिप्रिय कहलाने वाले *सेक्युलरिज्म* की भयानक आग से *बंगाल को जलाकर राख करने पर उतारू शांतिप्रिय सेक्युलर नागरिकों का यह कृत्य अहसानफरोसी कमीनपन, कृतघ्नता और कितना जहरबुझा कहा जाए *।
अंत में यह उल्लेख आवश्यक है कि *दिल्ली स्थित सर गंगाराम हॉस्पिटल भी लाहौर के उन्हीं धन्नासेठ गंगाराम ने ही बनवाया था*।
06/05/2021
ସମ୍ବଲପୁର - ଥାନାରେ ପୋଲିସର ଥାର୍ଡ ଡିଗ୍ରୀ.. ପୁଲିସ ଘଟଣାକୁ ରଫାଦଫା କରିବାକୁ ଉଦ୍ୟମ କରିଛି..
ପୁଲିସର ମାତ୍ରାଧିକ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ଫଳରେ ଲୋକମାନଙ୍କର ଭରସା ଓ ବିଶ୍ଵାସ ଉଠିଗଲାଣି
01/04/2021
ଆପଣଙ୍କ ମତରେ ଓଡିଶା କିପରି ହେବା ଉଚିତ୍ ଏବଂ ଓଡିଶାର ବିକାଶ ପାଇଁ କେଉଁ ପ୍ରକାର ପଦକ୍ଷେପମାନ ନିଆଯିବା ଉଚିତ୍?
ମତାମତ ଦିଅନ୍ତୁ 🙂🙏🙂
01/04/2021
ଉତ୍କଳ ଦିବସ ଅବସରରେ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଅଭିନନ୍ଦନ ଓ ଶୁଭକାମନା
29/03/2021
मुस्लिम आयत हिन्दू लोग, धर्म और संस्कृति के खिलाफ हैं.. Please Read this..
31/12/2020
WISHING YOU ALL OF YOU A HAPPY NEW YEAR 2021 TO YOU AND YOUR FAMILY
13/10/2020
ସ୍ମାର୍ଟ-ସିଟିର ସ୍ମାର୍ଟ ବିଜେଡି ଶାସନ..
20/09/2020
@ थाली में छेद भरा क्या ? 🤔 एक Intellectual व्यक्ती R**e Attempt karta है.. तो Bollywood की ठेका लेने वाली महोदया श्रीमती जी ने आवाज बुलंद की थी..
तो महोदया कुछ बोलेंगी नहीं इसपर - - -?
तो आज इसपर वो कुछ लोग Bollywood को बदनाम कर रहें हैं या फिर ये भी थाली में छेद किया गया है क्या?? 🤔 🤔🤔
19/09/2020
कृषिमंत्री हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया अध्यादेश के कारण।
अध्यादेश का डिटेल समझें।
"पैरों में जंजीर और गले में फन्दा"
कभी सोचा है-??- किसानों का "धन्धा" क्यों बांधा गया था...
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सही क्या और गलत क्या -??-
क्या किसानों का "तीन अध्यादेश" के विरुद्ध आंदोलन उचित - है भी या नहीं ?
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सन 1960-70 के आसपास देश में कोंग्रेसी सरकार ने एक कानून पास किया जिसका नाम था - "apmc act" ...
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इस एक्ट में यह प्रावधान किया गया कि किसान अपनी उपज केवल सरकार द्वारा तय स्थान अर्थात सरकारी मंडी में ही बेच सकता है।
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इस मंडी के बाहर किसान अपनी उपज नहीं बेच सकता। और इस मंडी में कृषि उपज की खरीद भी वो ही व्यक्ति कर सकता था जो apmc act में registered हो, दूसरा नही।
इन registered person को देशी भाषा में कहते हैं "आढ़तिया" यानि "commission agent".....
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मोदी सरकार द्वारा किसानों की हालत सुधारने के लिये तीन अध्यादेश लाएं गये हैं।
जिसमे निम्नलिखित सुधार किए गए हैं।
1. अब किसान मंडी के बाहर भी अपनी फसल बेच सकता है और मंडी के अंदर भी ।
2. किसान का सामान कोई भी व्यक्ति संस्था खरीद सकती है जिसके पास पैन कार्ड हो।
3. अगर फसल मंडी के बाहर बिकती है तो राज्य सरकार किसान से कोई भी टैक्स वसूल नहीं सकती।
4. किसान अपनी फसल किसी राज्य में किसी भी व्यक्ति को बेच सकता है।
5. किसान contract farming करने के लिये अब स्वतंत्र है।
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कई लोग इन कानूनों के विरुद्ध दुष्प्रचार कर रहें है।
जोकि निम्नलिखित हैं।
1. आरोप :--- सरकार ने मंडीकरण खत्म कर दिया है ?
उत्तर :--- सरकार ने मंडीकरण खत्म नहीं किया। मण्डियां भी रहेंगी।लेकिन किसान को एक विकल्प दे दिया कि अगर उसको सही दाम मिलता है तो वह कहीं भी अपनी फसल बेच सकता है। मंडी में भी और मंडी के बाहर भी।
2. आरोप :--- सरकार msp समाप्त कर रही है ?
उत्तर :- मंडीकरण अलग चीज़ है msp नुयनतम समर्थन मूल्य अलग चीज़ है। सारी फसलें ,सब्ज़ी ,फल मंडीकरण में आते हैं msp सब फसलों की नहीं है।
3. आरोप :- सारी फसल अम्बानी खरीद लेगा
उत्तर :--- वह तो अब भी खरीद सकता है - आढ़तियों को बीच में डालकर।
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यह तीन कानून किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुक्ति के कानून हैं।
आज इस सरकार ने किसानों पर - कोंग्रेस द्वारा लगाई हुई -"बन्दिश" को हटा कर,
"हर किसी को" अपनी उपज बेचने के लिये आजाद करके,
"पुरे देश का बाजार" किसानो के लिये खोल दिया है।
किसानो को कोई भी टैक्स भी नही देना होगा।
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जो भी लोग विरोध कर रहे है वो उन की अपनी समझ है,
इस सरकार से बढ़ कर कोई "किसान हितेषी" सरकार कभी नही बनी और भविष्य में भी कोई नही बनेगी।
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क्योकि ये मोदिया - बहुत अच्छे से जानता है कि - "किसान और जवान" - ही देश का आधार है।
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जय जवान, जय किसान
*Copy की हुई पोस्ट
18/09/2020
Hindu Vs Muslim Examination Differences
15/09/2020
Hon'ble श्रीमती जया बचन जी ने कहा कि को protection चाहिए और जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो..
🤔 क्या ये Drugs का बचाव कर रही हैं या Drugs खाने वालों की? 🤔 क्या बॉलीवुड में पहले drugs या अन्य किसी नशीले पदार्थों का उपयोग नहीं किया गया..?🤔Bollywood चलाना है तो वो कुछ लोगों का क्या करना चाहिए और सजा क्या होगी? महोदया जरा बिस्तार से बताने का कष्ट करेंगे.._______??