Sujata Daan shaala

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Sujata Daan shaala Sujata Daan shaala Bodhgaya

03/08/2026

The inspiring story of Sujata, whose selfless offering changed history forever.
🪷🙏

सभी सदस्यों को सूचित किया जाता है आने वाले आषाढ पोर्णिमा के अवसर पर बोध गया मे बड़ा भोजन दान समारोह किया जा रहा है आप सभ...
27/07/2026

सभी सदस्यों को सूचित किया जाता है आने वाले आषाढ पोर्णिमा के अवसर पर बोध गया मे बड़ा भोजन दान समारोह किया जा रहा है आप सभी इस आयोजन मे सहभागिता लेकर महान पुण्य संपादन करे .

सुजाता दान शाला लंगरसेवा आयोजन कमिटी
(कारवा जण-कल्याण सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश )
(धम्मकथिक प्रकाशन, बोधगया )
(महाबोधी संडे धम्म स्कूल, मुंबई )
(बोधीवृक्ष बुद्धिस्ट मिशन, औरंगाबाद )
9561083358
9027732096
9156533012

एक छोटा सा प्रयास  Sujata daanShala ,BodhgayaNargis Nargis B
22/07/2026

एक छोटा सा प्रयास
Sujata daanShala ,Bodhgaya
Nargis Nargis B

🙏🙏🙏
05/07/2026

🙏🙏🙏

🙏🪷
01/07/2026

🙏🪷

True wisdom is not found in following others blindly—it is discovered when you awaken your own understanding. As the Bud...
29/06/2026

True wisdom is not found in following others blindly—it is discovered when you awaken your own understanding. As the Buddha taught in the Dhammapada, the path can be shown, but walking it is our own responsibility. Be the light that guides your own life.
🪷🙏

सभी उपासक उपासिका ओ को सूचित किया जाता है कि आने वालीं *29 जून 2026* की *पूर्णिमा* को *सुजाता दानशाला बोधगया* की ओर से *...
25/06/2026

सभी उपासक उपासिका ओ को सूचित किया जाता है कि आने वालीं *29 जून 2026* की *पूर्णिमा* को *सुजाता दानशाला बोधगया* की ओर से *बोधगया* की पवित्र भूमि पर *भिक्खू संघ भिक्खूनि संघ* को भोजन-दान खीर-दान फल-दान पाणी-दान किया जा रहा है .
इस महान पुण्य कर्म को अर्जित करने की आशा करने वाले उपासक उपासिका श्रद्धा युक्त चित्त से दान दे कर पुण्य अर्जित कर सकते है .
आने वालीं पूर्णिमा को परिनिब्बूत पूज्य *भदंत डॉ. एन . बोधीरत्न नायक महाथेरो* (संस्थापक - दी इंटरनॅशनल बुद्धिस्ट धम्म दूत सोसायटी, दी रॉयल थाई महा विहार नागवन , नागपूर ) इनको श्रद्धांजली अर्पण की जाएगी .
आप अपनी दान राशि ऑनलाइन नीचे दिए नंबर पर भेज सकते है .

धम्म सेवा मे
*सुजाता दानशाला* भोजनालय बोधगया लंगर सेवा कमिटी

*फोन पे* - 9561083358
(भीम यूपीआई )

25/06/2026
मधुपिण्डिक सुत्त (Madhupiṇḍika Sutta)यह Majjhima Nikaya के 18वें सुत्तों में से एक है (MN 18)। इसे "Honeyball Discourse"...
23/06/2026

मधुपिण्डिक सुत्त (Madhupiṇḍika Sutta)
यह Majjhima Nikaya के 18वें सुत्तों में से एक है (MN 18)। इसे "Honeyball Discourse" भी कहा जाता है। बुद्ध ने इसमें बताया कि मनुष्य के अधिकांश मानसिक संघर्ष, विवाद और दुःख कैसे उत्पन्न होते हैं।

सुत्त का प्रसंग

एक बार बुद्ध Kapilavatthu के निकट महावन में ठहरे थे। वहाँ शाक्य राजकुमार दण्डपाणि ने बुद्ध से प्रश्न किया कि आप क्या सिखाते हैं?

बुद्ध ने उत्तर में कहा:

> "मैं ऐसा धर्म सिखाता हूँ जिसमें व्यक्ति किसी से विवाद नहीं करता।"

दण्डपाणि उत्तर समझ नहीं पाया और चला गया। बाद में भिक्षुओं ने बुद्ध से इस गूढ़ कथन का अर्थ पूछा।

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दुःख और विवाद की उत्पत्ति की श्रृंखला

बुद्ध ने बताया:

चक्षु + रूप → चक्षु-विज्ञान
इन तीनों के मिलने से स्पर्श (फस्स) होता है।

स्पर्श → वेदना (अनुभूति)

वेदना → संज्ञा (पहचानना)

संज्ञा → वितर्क (सोचना, कल्पना करना)

वितर्क → पपञ्च (मानसिक विस्तार, कल्पनाओं का जाल)

पपञ्च → विवाद, संघर्ष, ईर्ष्या, द्वेष, झगड़े

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एक सरल उदाहरण

किसी ने आपको देखकर कहा:

"आपकी बात स्पष्ट नहीं होती।"

1. कान ने शब्द सुना (स्पर्श)

2. अप्रिय वेदना हुई

3. संज्ञा बनी — "इसने मेरी आलोचना की"

4. वितर्क शुरू — "यह मेरा अपमान कर रहा है"

5. पपञ्च शुरू —

"लोग मुझे अयोग्य समझते होंगे"

"यह हमेशा मेरे खिलाफ रहता है"

"मुझे जवाब देना चाहिए"

अब क्रोध, दुःख, तनाव और विवाद पैदा हो जाते हैं।

जबकि मूल घटना केवल कुछ शब्द सुनना थी।

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पपञ्च क्या है?

पपञ्च का अर्थ है मन का अनावश्यक विस्तार करना।

घटना छोटी होती है, पर मन उसके चारों ओर कहानी बना देता है।

जैसे:

एक शब्द → पूरा झगड़ा

एक डर → पूरी चिंता

एक विचार → अवसाद

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बुद्ध का समाधान

यदि साधक वेदना को केवल वेदना के रूप में देख ले और उसके आगे कल्पनाओं की श्रृंखला न बढ़ाए, तो पपञ्च रुक जाता है।

तब:

विवाद नहीं होता

क्रोध नहीं बढ़ता

मानसिक शांति बनी रहती है

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सार

मधुपिण्डिक सुत्त का मुख्य संदेश:

> "दुःख बाहरी घटनाओं से कम और उन घटनाओं पर मन द्वारा रची गई कहानियों (पपञ्च) से अधिक उत्पन्न होता है।"

यही कारण है कि विपश्यना में वेदना को देखकर प्रतिक्रिया न करने का अभ्यास कराया जाता है—ताकि स्पर्श से पपञ्च तक जाने वाली श्रृंखला टूट जाए।

Sujata is the woman who offered food (rice cooked in milk) to the Buddha when he was performing his ascetic practices (l...
15/06/2026

Sujata is the woman who offered food (rice cooked in milk) to the Buddha when he was performing his ascetic practices (long fasts) before enlightenment. The Buddha was near death as this was before he realized and practiced the middle way. Later after enlightenment, a heavy storm came and a large cobra snake protected the Buddha. It is interesting to note that in the Judeo-Christian bible the Fall of man is blamed on a woman and a snake, but in Buddhism the world is saved (by helping the Buddha from death) by a woman and a snake. Sujata would later become a bhikkhuni (Buddhist nun).

Namho budday

Metta to all 🪷🙏
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