Chas, Bokaro

Chas, Bokaro

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Chas is the twin city of Bokaro notable for a large wholesale market. NH-32, Dhanbad-Purulia Road links to Tata, Ranchi (NH-23).

18/02/2026

चास नगर निगम मेयर के लिए प्रचार जोर शोर से है।
कृपया ध्यान रहे नेता वो चुने जो चास को स्वच्छ रखे, सुंदर रखे।
ऐसा न हो कि जितने के बाद वोट बैंक इनका खटाल और अतिक्रमण वाले याद आ जाए। और चास को गंदा कर दे।

याद रहे बोकारो से अतिक्रमण हटाने को ले कर बहुत प्रयास कर रही है और चास के #मेयर प्रत्याशी में से बहुत सारे #नेता हैं जो अतिक्रमणकारियों के पक्ष और support में मंच लगा कर भाषण दे रहे थे।

जीतने के बाद इन अतिक्रमणकारियों के लिए दिखावटी काम भी हुआ तो आपके लिए भी नुकसान जरूर होगा।

#चास_नगर_निगम
#मेयर

18/06/2024

हमारा विनाश कव शुरू हुआ था?
1.हमारा विनाश उस समय से शुरू हुआ था जब हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और हमारा पौष्टिक वर्धक, शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया है!

2. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश में जर्सी गाय लायी गई और भारतीय स्वदेशी गाय का अमृत रूपी दूध छोड़कर जर्सी गाय का विषैला दूध पीना शुरु किया था!

3. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन भारतीयों ने दूध, दही,मक्खन, घी आदि छोड़कर शराब पीना शुरू किया था!

4. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश वासियों ने गन्ने का रस छोड़कर पेप्सी, कोका कोला पीना शुरु किया था जिसमें 12 तरह के कैमिकल होते हैं और जो कैंसर, टीबी, हृदय घात का कारण बनते हैं!

5. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश वासियों ने शुद्ध देशी तेल खाना छोड़ दिया था और रिफाइंड आयल खाना शुरू किया था जो रिफाइंड ऑयल हृदय घात, आदि का कारण बन रहा है!

6. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश के युवाओं ने नशा शुरू किया था बीडी, सिगरेट, गुटखा, गांजा, अफीम, आदि शुरू किया था जिससे से कैंसर बढ रहा है!

7. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ जिस दिन देश में 84 हजार नकली दवाओं का व्यापार शुरु हुआ और नकली दवाओं से लोग मर रहे हैं!

8. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश वासियों ने अपने स्वदेशी भोजन छोड़कर पीजा, बर्गर, जंक फूड खाना शुरू किया था जो अनेक बीमारियों का कारण बन रहा है!

9. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने अनुशासित और स्वस्थ दिनचर्या को छोड़कर मनमानी दिनचर्या शुरू की थी ।

10. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने घरों में एलुमिनियम के बर्तन व घर में फ्रिज लाया था।

11. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन भारतीय जीवन शैली को छोड़कर विदेशी जीवन शैली शुरू की थी।

12 .हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड दिया था और अपने शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतों के विपरीत कार्य करना शुरू किया था ।

13. लोग घर मे तो काम नही करते पर जिम जाकर हार्टअटैक से मर रहे है क्योंकि बॉडी को दिखाना भी है जिसके लिए अलग अलग प्रकार के दवाई और पावडर का सेवन कर रहे जो धीरे-धीरे हार्ट अटैक और किडनी डैमेज का कारण बनता जा रहा है।

14. पहले के जमाने में लोग स्वस्थ इसलिए रहते थे क्योंकि प्रकृति के हिसाब से चलते थे सुबह दोपहर शाम रात का काम प्रकृति के हिसाब से करते थे अब सुबह उठते नहीं और रात को सोते नहीं जिससे पूरा सिस्टम ही खत्म हो गया है जो धीरे-धीरे बीमारियों का जड़ बन रहा है

15. आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों में भोजन का समय सूर्यास्त के बाद बताया गया है पर आजकल 11:00 बजे 12:00 बजे रात को भोजन किया जाता है जिससे पेट तो निकल ही रहे हैं शरीर पचा नहीं पता और धीरे-धीरे बीमारियों का घर बनते जा रहे हैं

नोट :- हमारे विनाश के अनेक कारण हैं आज लोगों को सिर्फ को.रोना ही दिखाई दे रहा है उन्हें यह भी देखना चाहिए कि लोग कैंसर, टीबी, हृदय घात, शुगर, किडनी फेल, हाई वीपी, लो वीपी, अस्थमा आदि गंभीर बीमारियों से मर रहे हैं!!

30/03/2023

NH18 धनबाद - चास - पुरुलिया रोड में आई.टी.आई. के समीप NH पर खड़ी ट्रकों या गाड़ियों की चालान काटते दिखे प्रशासन।
सवाल: क्या ये सख्ती सिर्फ त्यौहारों के लिए है?
* क्या ऐसी चेकिंग daily basis पर नही होनी चाहिए?
* 4 लेन सड़क जो आजतक पार्किंग मुक्त नहीं हो पाया इसमें लापरवाही और कमजोरी किसकी ?

29/06/2021

#हुल_जोहार

30 जून- #हुल_दिवस

सिद्धू-कान्हू चौक (आई.टी.आई. मोड़)
चास, बोकारो।

#हूल दिवस : झारखण्ड की धरती से शुरू हुई थी भारत देश की आजादी की पहली लड़ाई


जिस दिन झारखंड के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाया था यानी विद्रोह किया था, उस दिन को 'हूल क्रांति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस युद्ध में करीब 20 हजार आदिवासियों ने अपनी जान दे दी थी...

सिद्धू और कान्हू के करीबी साथियों को पैसे का लालच देकर दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया और फिर 26 जुलाई को दोनों भाइयों को भगनाडीह गांव में खुलेआम एक पेड़ पर टांगकर फांसी की सजा दे दी गई। इस तरह सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव, ये चारों भाई सदा के लिए भारतीय इतिहास में अपना अमिट स्थान बना गए।

भारत की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले आदिवासियो को शत शत नमन करते है..

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आजादी की पहली लड़ाई
हालांकि आजादी की पहली लड़ाई तो सन 1857 में मानी जाती है लेकिन झारखंड के आदिवासियों ने 1855 में ही विद्रोह का झंडा बुलंद कर दिया था। 30 जून, 1855 को सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में मौजूदा साहेबगंज जिले के भगनाडीह गांव से विद्रोह शुरू हुआ था। इस मौके पर सिद्धू ने नारा दिया था, 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो'

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आंदोलन का कारण
मौजूदा संथाल परगना का इलाका बंगाल प्रेसिडेंसी के अधीन पहाड़ियों एवं जंगलों से घिरा क्षेत्र था। इस इलाके में रहने वाले पहाड़िया, संथाल और अन्य निवासी खेती-बाड़ी करके जीवन-यापन करते थे और जमीन का किसी को राजस्व नहीं देते थे। ईस्ट इंडिया कंपनी ने राजस्व बढ़ाने के मकसद से जमींदार की फौज तैयार की जो पहाड़िया, संथाल और अन्य निवासियों से जबरन लगान वसूलने लगे। लगान देने के लिए उनलोगों को साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता और साहूकार के भी अत्याचार का सामना करना पड़ता था। इससे लोगों में असंतोष की भावना मजबूत होती गई। सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव चारों भाइयों ने लोगों के असंतोष को आंदोलन में बदल दिया।

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आंदोलन की शुरुआत
30 जून, 1855 को 400 गांवों के करीब 50 हजार आदिवासी भगनाडीह गांव पहुंचे और आंदोलन की शुरुआत हुई। इसी सभा में यह घोषणा कर दी गई कि वे अब मालगुजारी नहीं देंगे। इसके बाद अंग्रेजों ने, सिद्धू, कान्हू, चांद तथा भैरव- इन चारों भाइयों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। जिस दरोगा को चारों भाइयों को गिरफ्तार करने के लिए वहां भेजा गया था, संथालियों ने उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी। इस दौरान सरकारी अधिकारियों में भी इस आंदोलन को लेकर भय पैदा हो गया था।

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आंदोलन का परिणाम
आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजों ने इस इलाके में सेना भेज दी और जमकर आदिवासियों की गिरफ्तारियां की गईं और विद्रोहियों पर गोलियां बरसने लगीं। आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए मार्शल लॉ लगा दिया गया। आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी के लिए अंग्रेज सरकार ने पुरस्कारों की भी घोषणा की थी। बहराइच में अंग्रेजों और आंदोलनकारियों की लड़ाई में चांद और भैरव शहीद हो गए। प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहासकार हंटर ने अपनी पुस्तक 'एनल्स ऑफ रूलर बंगाल' में लिखा है, 'संथालों को आत्मसमर्पण की जानकारी नहीं थी, जिस कारण डुगडुगी बजती रही और लोग लड़ते रहे।' जब तक एक भी आंदोलनकारी जिंदा रहा, वह लड़ता रहा। इस युद्ध में करीब 20 हजार आदिवासियों ने अपनी जान दी थी। सिद्धू और कान्हू के करीबी साथियों को पैसे का लालच देकर दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया और फिर 26 जुलाई को दोनों भाइयों को भगनाडीह गांव में खुलेआम एक पेड़ पर टांगकर फांसी की सजा दे दी गई। इस तरह सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव, ये चारों भाई सदा के लिए भारतीय इतिहास में अपना अमिट स्थान बना गए।

29/06/2021
02/03/2021

dance

01/03/2021
15/02/2021

यथा द्रष्टी ताथा सृष्टि ,🙏

13/10/2020

एकता कपूर की बालाजी टेलीफिल्म्स के वेब सीरीज के लिए आज रांची के डीएसपीएमयू में ऑडिशन रखा गया है. ऑडिशन दोपहर 12 बजे से शुरू होगा जो शाम चार बजे तक चलेगा. प्रतिभागियों को अपना पोर्टफोलियो साथ लाना होगा. झारखंड बेस्ड इस वेब सीरीज में स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जाएगा. 25 एपिसोड की इस वेब सीरीज 'डॉ डॉन' की शूटिंग भी झारखंड में ही होगी. बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ जुड़कर अभिनय के क्षेत्र में करियर बनाने की इक्षा रखने वाले युवाओ के लिए ये सुनहरा मौक़ा है जब वे अपनी प्रतिभा को सही मंच दे सकते है.

28/09/2020

Nice

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Chas Interstate The Twin City Of Bokaro Notable For A Large Wholesale Market. , NH-32, Gurudwara Road, Chas
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