मेरा सफर अलग है मुझको जाने दिजिए
#कविताप्रेमी
प्रभात पांडेय
कवि लेखक गीतकार लेखक/कवि/गीतकार
रत्न जड़ित सिंहासन जिसने मोह दे दिया कैकेई को
वही जानकी चरण धूल की बरसों प्यासी रही अयोध्या.
#कविताप्रेमी
व्यास पर बैठ कर जब इस तरह की बकवास करोगे तो थप्पड़ नहीं चप्पल और जूतों से मार दिया जाओगे
कथा जिसको भी करना है करे लेकिन व्यास और ग्रन्थ की मर्यादा के साथ
#हिंदू #हिंदूसंस्कृती #सनातन
हम और इस देश और देश के बाहर भी बहुत सारे लोग आपका बहुत सम्मान करते हैं चाहे वह कविता के लिए हो गीत के लिए हो या भगवान राम की कहानी को अपने-अपने राम के रूप में इतनी सरलता से लोगों के बीच पहुंचाने के लिए हो हमारा मानना है कि आपके पास एक अद्भुत ज्ञान है शास्त्रों का बारीकी से अध्ययन और उसको सरलता से लोगों के बीच पहुंचाने की एक उन्नत कला आपके अंदर है
लेकिन आपकी यह टिप्पणी कि सारे ब्राह्मणों का काम दो गैर ब्राह्मणों के लिखे से चल रहा है इस पर असहमति जरूर है महर्षि वाल्मीकि और महर्षि वेदव्यास दोनों ब्राह्मण कुल से नहीं है यह किस आधार पर बोला जा रहा है
महर्षि वाल्मीकि
1-महर्षि वाल्मीकि जी के पिता ऋषि प्राचेता जो कि ब्रह्मा जी के पुत्र थे
2- स्कंद पुराण के नागर खंड में महर्षि वाल्मीकि जी को ब्राह्मण बताया गया है जिसमें लिखा गया है कि महर्षि वाल्मीकि जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था
महर्षि वेदव्यास
1 - महर्षि वेदव्यास के पिता पराशर ऋषि जो एक ब्राह्मण ऋषि थे
2 - भागवत पुराण के 9वें स्कंध के 21वें अध्याय में पराशर ऋषि के वंश और उनके पुत्र वेदव्यास के बारे में वर्णन किया गया है। इस अध्याय में पराशर ऋषि को वशिष्ठ ऋषि के वंशज (जो कि ब्रह्मा जी के पुत्र थे) के रूप में वर्णित किया गया है और उनके ब्राह्मण होने का साफ उल्लेख है।
3 - मत्स्य पुराण, वायु पुराण, और ब्रह्म पुराण इनमें भी महर्षि वेदव्यास एक महान और ब्राह्मण ऋषि के रूप में ही वर्णित है
अब अगर मेरी बात आप तक पहुंचती है तो आपसे या जिनको भी जानकारी हो इस विषय पर मैं उन सब से यह जरूर जानना चाहूंगा कि किस आधार पर महर्षि वाल्मीकि और महर्षि वेदव्यास जी की जाती पर ऊल जलूल टिप्पणी की जाती है।
नोट : जिनको भी इस विषय पर जानकारी हो वह अपना पक्ष जरूर रखे लेकिन मान्यताओं और कहानियों के अनुसार नहीं वेद पुराण में लिखित किसी साक्ष्य के साथ ।
प्रभात पांडेय
प्रभात पांडेय
24/04/2025
भारतीय मीडिया से ज्यादा बेशर्म दुनिया में कुछ भी नहीं हो सकता l
आज भी सवाल नहीं पूछ सकते कि बदला आखिर कब ...?
सिर्फ पैसा ही कमाना एक मकसद है तो कोठा खोल लो तुम अब
#मीडिया
आतंकवादियों से ज्यादा खतरा तो इस देश को दलाल मीडिया से जिसको सरकार की 4 मीटिंग से पाकिस्तान कांपता दिख रहा है
अभी तो सच बोल देते
कल से फिर करना धंधा
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं
कुछ देख रहे हैं दिल-ए-बिस्मिल का तड़पना
कुछ ग़ौर से क़ातिल का हुनर देख रहे हैं !
दाग देहलवी!
11/03/2025
इक पगली सी लड़की फिर से
सबकी आंखे भर जाएगी
एक पराया घर छोड़ेगी
और पराए घर जाएगी
कितना मुश्किल जीना होगा
अपने दुख खुद सीना होगा
प्याशे आधारों को कल से अब
छुप छुप आंसु पीना होगा
कही टूट न जाए कोई
मर्यादाएं बंधन होगा
पायल की खन खन भी चुभती
ऐसे डसता आंगन होगा
इक ऊंची आहट से भी अब
नन्हीं छिड़िया डर जाएगी
इक पगली सी लड़की कल फिर
सबकी आंखे भर जाएगी
रूठी है दीवारें सारी
चौबारा खामोश हो गया
घर का मंदिर राह देखता
जैसे तन का प्राण खो गया
सांझ हुए तो तुलसी को भी
आस लगेगी आयेगी वो
इक नन्हा सा दीपक है जो
मेरे तले जलाएगी वो
एक चिरैया बाग बगीचा
सब कुछ सूना कर जाएगी
इक पगली सी लड़की कल फिर
सबकी आंखे भर जाएगी
हाथ जोड़ कर कहता कोई
इसको कुछ भी पता नहीं है
बाबू कोई गलती हो तो
इसमें इसकी खता नहीं है
बड़े लाड से पाला इसको
अब तक तो परछाई थी
कहते थे सब, लगा कभी न
बिटिया मेरी पराई थी
बापू पूछ रहे माई से
कैसे अब ये रह पाएगी
इक पगली सी लड़की कल फिर
सबकी आंखे भर जाएगी
एक पराया घर छोड़ेगी......
©️प्रभात पांडेय गोंडा
#कविताप्रेमी #गीत
प्रभात पांडेय
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