15/08/2021
डाक्टर सच्चिदानंद सिन्हा रचना च्रकBndss Rachna Chakra Saran
डाक्टर सच्चिदानंद सिन्हा रचना चक्र
15/08/2021
07/08/2021
Congratulations to Neeraj Chopra winner of jevelin throw at Tokyo
नमस्कार साथियों !
आप जैसे युवा साथियों के कंधे पर अब इस समाज का दारोमदार है. जैसा कि आपको ज्ञात है पूरे भारतवर्ष में कायस्थ जाति का कोई अभिभावक नहीं है और ना ही कोई संगठन है .भारत में लगभग 1708 रजिस्टर्ड संस्थाएं कायस्थ जाति नाम पर काम कर रहे हैं परंतु पिछले 50 सालों में इतने संगठन होने के बावजूद हम संगठित नहीं हो पाए और हम निरंतर हाशिए पर चले जा रहे है, उस का प्रमुख कारण यह है कि हम एक निश्चित परिधि में ही रह जाते हैं अतः अपने परिधि को बढ़ाएं आप तमाम साथी जिस भी पद पर है उस पद की गरिमा को देखते हुए रचना चक्र को वार्ड और पंचायत स्तर तक पहुंचाने का काम करें तभी जाकर 2025 में हम एक बेहतर रिजल्ट दे पाएंगे और अपने गरिमा अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस ला पाएंगे.
जरूरत है नए चेहरे नई उर्जा और नए साथियों की तो आइए समाज को मजबूती प्रदान करने के लिए # सुधाकर_ श्रीवास्तव जी के हाथों को मजबूत करें।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जो सूची है उसमें एक भी कायस्थ क्यों नहीं ?
एक थे भी तो उनको भी निकाल दिया गया
सभी कायस्थ नेताओ को बधाई हो ।
06/07/2021
आज आप मिलेंगे 'हमारी विभूतियाँ 'स्तम्भ में स्वाधीनता संग्राम की पहली कतार के सेनानी ,महान विधिवेत्ता एवं भारतवर्ष के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी से :
26 जनवरी, 1950 को जब भारत को संविधान के रूप में एक गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा दिया गया उसी दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के रूप में स्वतंत्र भारत को पहला राष्ट्रपति भी प्राप्त हुआ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के एक छोटे से गांव जीरादेई में हुआ था.
एक बड़े संयुक्त परिवार के सबसे छोटे सदस्य होने के कारण इनका बचपन बहुत प्यार और दुलार से बीता. संयुक्त परिवार होने के कारण पारिवारिक सदस्यों के आपसी संबंध बेहद मधुर और गहरे थे. इनके पिता का नाम महादेव सहाय था. डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुई. उस समय यह रिवाज था कि शिक्षा का आरंभ फारसी भाषा से ही किया जाएगा. इसीलिए राजेंद्र प्रसाद और उनके चचेरे भाइयों को पढ़ाने एक मौलवी आते थे. पढ़ाई की तरफ इनका रुझान बचपन से ही था. बाल-विवाह की परंपरा का अनुसरण करते हुए मात्र 12 वर्ष की आयु में इनका विवाह राजवंशी देवी से संपन्न हुआ. राजेंद्र प्रसाद जी ने अपने लगातार खराब रहने वाले स्वास्थ्य का असर अपनी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कलकत्ता विश्विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें 30 रूपए महीने की छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई. जीरादेई गांव से पहली बार किसी युवक ने कलकत्ता विश्विद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी जो निश्चित ही राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए गर्व की बात थी. सन 1902 में उन्होंने कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया. सन 1915 में कानून में मास्टर की डिग्री में विशिष्टता पाने के लिए राजेन्द्र प्रसाद को सोने का मेडल मिला. इसके बाद उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की.
डॉ राजेन्द्र प्रसाद का राजनैतिक सफर स्वदेशी आंदोलन के साथ तभी शुरू हो गया था जब उन्होंने गांधी जी से प्रेरित हो विदेशी कपड़ों की आहुति दे दी थी. गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ इण्डिया सोसायटी की शुरुआत की तब राजेंद्र प्रसाद को इसमें सदस्यता लेने के लिए बहुत प्रेरित किया. लेकिन परिवारवालों की इच्छा के विरुद्ध वह कोई भी कदम उठाना नहीं चाहते थे इसलिए उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया. इस बीच कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद राजेन्द्र प्रसाद कई प्रसिद्ध वक़ीलों, विद्वानों और लेखकों से मिले. अब तक वह भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी बन गए थे. एक समर्पित कार्यकर्ता की छवि के चलते वह जल्द ही गांधी जी के संपर्क में आ गए थे. यही उनके राजनैतिक जीवन की एक सुनहरी शुरुआत थी. चम्पारन आंदोलन के दौरान राजेन्द्र प्रसाद गांधी जी के वफादार साथी बन गए थे. गांधी जी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने और रूढिवादी विचारधारा का त्याग कर दिया और एक नई ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय कॉग्रेस से एक से अधिक बार अध्यक्ष भी रहे. वह संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे। उन्होंने संविधान निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भले ही 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई लेकिन संविधान सभा का गठन उससे कुछ समय पहले ही कर लिया गया था. जिसके अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र प्रसाद थे. 26 जनवरी, 1950 को भारत गणतंत्र बना और देश को अपना पहला राष्ट्रपति मिल गया.
डॉ राजेन्द्र प्रसाद भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति का पद प्राप्त किया. राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए राजेन्द्र प्रसाद ने सद्भावना के उद्देश्य से कई देशों की यात्राएं भी कीं. उन्होंने इस आण्विक युग में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया. सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया. डॉ राजेन्द्र प्रसाद का निधन राजनीति से सन्यास लेने के बाद राजेन्द्र प्रसाद ने अपना जीवन पटना के सदाकत आश्रम में बिताया जहां 28 फरवरी, 1963 को उनका निधन हो गया.
04/07/2021
भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म दर्शन को विश्व पटल पर ख्याति दिलाने वाले हम सभी के प्रेरणास्रोत एवं कायस्थ कुल गौरव स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें मेरा कोटि-कोटि नमन
01/07/2021
पसीने से तरबतर तुम्हारी वो कमीज़, मास्क से तुम्हारे चेहरे पर पड़े वो निशान...सब याद रखेगा हिंदुस्तान
कोरोना वायरस महामारी से जंग में सबसे बड़े हीरो रहे देश के डॉक्टर्स को कीजिए सलाम
06/03/2021
संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष, बिहार निर्माता ,प्रसिद्ध सांसद,शिक्षाविद,अधिवक्ता एवं पत्रकार कायस्थ कुल रत्न "डॉ. सचिदानंद सिन्हा" जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
डॉ सच्चिदानन्द सिन्हा (10 नवम्बर 1871 - 6 मार्च 1950)भारत के प्रसिद्ध सांसद, शिक्षाविद, अधिवक्ता तथा पत्रकार थे। वे भारत की संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे। बिहार को बंगाल से पृथक राज्य के रूप में स्थापित करने वाले लोगों में उनका नाम सबसे प्रमुख है। 1910 के चुनाव में चार महाराजों को परास्त कर वे केन्द्रीय विधान परिषद में प्रतिनिधि निर्वाचित हुए। प्रथम भारतीय जिन्हें एक प्रान्त का राज्यपाल और हाउस ऑफ् लार्डस का सदस्य बनने का श्रेय प्राप्त है। वे प्रिवी कौंसिल के सदस्य भी थे। डॉ सचिबनन्द सिन्हा का जन्म वास्तव में शाहाबाद जिले के मुरार गाँव के एक कायस्थ कुल में हुआ था वर्तमान में इनका गाँव बक्सर जिले में है.
जीवन परिचय : --
श्री सच्चिदानन्द सिन्हा का जन्म बिहार के आरा के एक धनी कायस्थ परिवार में हुआ था। उन्होने लन्दन में कानून की शिक्षा प्राप्त की और बैरिस्टर बने। इंग्लैण्ड से स्वदेश लौटने पर १८९१-९२ में उन्होने अलग बिहार राज्य की माँग की और आन्दोलन चलाया। उस समय वे मुश्किल से बीस वर्ष के थे।
*बिहार निर्माता डाक्टर सच्चिदानंद सिन्हा रचना चक्र बिहार*
27/02/2021
देश के महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी को उनके बलिदान दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
26/02/2021
धूल चटा दो ,उन गीदड़ों को।
जो घर मे ,घुस कर घात करे।।
जीभ काट लो उन कुत्तों की।
जो कायस्थों मिटाने की बात कहें।।
जय श्री चित्रगुप्त...
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