विकसित भारत हम कैसे बनाएं, देखिये ये वीडियो
RADIO MAYUR 90.8 FM
Community Radio Station, Chapra Saran Bihar Community stations serve geographic communities’ and communities of interest.
RADIO MAYUR
Radio Mayur is a community radio station , established and run by the organization, Mayur Kala Kendra- an NGO , well known for its cultural background since 1979 in the region Chapra Bihar . Community radio is a radio service offering a third model of radio broadcasting in addition to commercial and public broadcasting. Radio Mayur is serving its community through is programs on vario
03/06/2026
नवाचार और परंपरा के संगम से विकसित भारत के निर्माण पर युवाओं का महामंथन
आज दिनांक 03 जून 2026 को भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत मेरा युवा भारत सारण इकाई एवं मंत्रालय की नोडल एजेंसी फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 – यंग प्रोफेशनल्स राउंडटेबल का आयोजन आज भिखारी ठाकुर प्रेक्षा गृह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का विषय इनोवेशन विद ट्रेडीशन बिल्डिंग ए मॉडर्न भारत रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय सेवा योजना बिहार विनय कुमार ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता स्वामी अतिदेवानंद महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व समन्वयक रासेयो डॉ विद्या वाचस्पति त्रिपाठी ने युवाओं को सामाजिक नेतृत्व, सेवा भावना और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
राउंडटेबल में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के पैनलिस्ट रेडियो मयूर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक अरुण, प्रिया सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए नवाचार, उद्यमिता, मीडिया की भूमिका तथा युवाओं की नीति-निर्माण में भागीदारी पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन एवं मॉडरेटर रतिकेश पूर्णोदय द्वारा किया गया। उन्होंने संवाद को प्रभावी दिशा देते हुए विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों के विचारों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, राष्ट्रीय सेवा योजना, सामाजिक संगठनों एवं युवा समूहों के प्रतिनिधियों ने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में माई भारत फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया के नोडल अधिकारी तथा राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता मंटू कुमार यादव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे संवाद युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया के सचिव रणजीत कुमार, कोषाध्यक्ष प्रिंस कुमार, अर्पिता राज, रौशनी कुमारी , मंजीत कुमार, कुंदन कुमार, संजय कुमार ,सुमित श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष मकेश्वर पंडित, मेरा युवा भारत सारण इकाई से
करण कुमार कुशाग्र कुमार प्रकाश कुमार रवि कुमार कुणाल कुमार विकास कुमार श्रेया श्रुति सुमन कुमारी सचिन कुमार चौरसिया प्रीति कुमारी अविनाश कुमार तिवारी इत्यादि उपस्थित थे ।
हिन्दी पत्रकारिता दिवस
30/05/2026
हिंदी पत्रकारिता दिवस और हिंदी पत्रकारिता में रेडियो की भूमिका ।
हिंदी पत्रकारिता दिवस प्रत्येक वर्ष 30 मई को मनाया जाता है। इस दिन वर्ष 1826 में हिंदी का पहला समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड प्रकाशित हुआ था, जिसके संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल थे। हिंदी पत्रकारिता दिवस हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, उसके संघर्ष, लोकतंत्र में उसकी भूमिका तथा समाज के प्रति उसके योगदान को स्मरण करने और पत्रकारिता के मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
इस अवसर पर जब हम हिंदी पत्रकारिता की यात्रा पर दृष्टि डालते हैं, तो रेडियो की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण दिखाई देती है। रेडियो ने न केवल समाचारों को जन-जन तक पहुँचाया, बल्कि हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रेडियो को सबसे सुलभ और विश्वसनीय जनसंचार माध्यमों में से एक माना जाता है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, जहाँ लंबे समय तक बड़ी आबादी तक समाचार पत्र और टेलीविजन की पहुँच सीमित रही, वहाँ रेडियो ने हिंदी पत्रकारिता को घर-घर तक पहुँचाने का कार्य किया। रेडियो समाचार बुलेटिनों, समसामयिक चर्चाओं, विशेष कार्यक्रमों और जनहित संदेशों के माध्यम से लोगों को देश-दुनिया की घटनाओं से अवगत कराता रहा है।
हिंदी पत्रकारिता में रेडियो की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरल, सहज और जनसामान्य की भाषा है। रेडियो ने ऐसी हिंदी को बढ़ावा दिया जिसे आम नागरिक आसानी से समझ सके। इसके कारण हिंदी पत्रकारिता केवल शिक्षित वर्ग तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और वंचित समुदायों तक भी पहुँची। रेडियो के माध्यम से लोगों को कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी समय-समय पर प्राप्त होती रही है।
समुदायिक रेडियो (कम्युनिटी रेडियो) ने हिंदी पत्रकारिता को और अधिक स्थानीय एवं जनोन्मुख बनाया है। समुदायिक रेडियो स्थानीय मुद्दों, समस्याओं और उपलब्धियों को प्राथमिकता देते हैं। वे उन आवाज़ों को मंच प्रदान करते हैं जिन्हें मुख्यधारा की मीडिया में अक्सर पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। स्थानीय भाषा और बोलियों के साथ हिंदी का उपयोग करते हुए ये रेडियो स्टेशन समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
आपदा और संकट के समय भी रेडियो की पत्रकारिता की उपयोगिता सिद्ध हुई है। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी या अन्य आपात स्थितियों में रेडियो ने त्वरित और विश्वसनीय सूचना प्रदान कर लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाओं के अभाव में भी रेडियो सूचना का एक प्रभावी माध्यम बना रहता है।
डिजिटल युग में भले ही संचार के अनेक नए माध्यम सामने आए हों, लेकिन रेडियो की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। एफएम रेडियो, ऑनलाइन रेडियो और पॉडकास्ट के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता नए स्वरूप में उभर रही है। तकनीक के साथ तालमेल बैठाते हुए रेडियो आज भी विश्वसनीय, त्वरित और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का सशक्त माध्यम बना हुआ है।
अंततः कहा जा सकता है कि हिंदी पत्रकारिता के विकास और विस्तार में रेडियो की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। रेडियो ने न केवल सूचना के प्रसार का कार्य किया है, बल्कि समाज को जागरूक, शिक्षित और सशक्त बनाने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया है। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर हमें रेडियो की इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी भूमिका को सम्मानपूर्वक स्मरण करना चाहिए।
अभिषेक अरुण
बरसात का मौसम और हमारी चुनौतियाँ
29/05/2026
#सेहत_सही_लाभ_कई
एआई चैटबॉट ‘खुशी’ बताएगी टीबी से बचने और ठीक होने का रास्ता, स्वास्थ्य विभाग का नया डिजिटल मिशन शुरू
• टीबी उन्मूलन अभियान को डिजिटल ताकत
• ‘टीबी मुक्त भारत’ ऐप से मरीजों को मिलेगी घर बैठे सहायता
• मरीजों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को एक मंच पर जोड़ेगा ऐप
छपरा। टीबी मुक्त परिकल्पना को साकार करने और लक्ष्य को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने डिजिटल तकनीक का सहारा लेते हुए एक बड़ी पहल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विश्व टीबी दिवस के अवसर पर 24 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया “टीबी मुक्त भारत” मोबाइल एप अब टीबी के खिलाफ चल रहे राष्ट्रीय अभियान का अहम हिस्सा बन गया है। यह एप्लिकेशन न केवल मरीजों को उपचार और परामर्श की सुविधा देगा, बल्कि सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत करेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अपर सचिव एवं मिशन निदेशक आराधना पटनायक द्वारा जारी निर्देश के अनुसार राज्य एवं जिला स्तर पर इस ऐप के व्यापक प्रचार-प्रसार और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्यकर्मियों और सामुदायिक संगठनों को सक्रिय किया जा रहा है।
मरीजों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को एक मंच पर जोड़ेगा ऐप
यह मोबाइल एप एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जो टीबी रोगियों, निक्षय मित्रों, स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को एक मंच पर जोड़ता है। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सामुदायिक जागरूकता, शीघ्र जांच, उपचार अनुपालन और पोषण सहायता को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एआई चैटबॉट ‘खुशी’ बनेगी मरीजों की ई-संगिनी
इस एप की सबसे खास विशेषता इसका एआई आधारित इंटरैक्टिव चैटबॉट “खुशी” है। यह चैटबॉट हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, ओड़िया, तमिल, तेलुगु, बंगाली, कन्नड़, उर्दू, पंजाबी और मलयालम सहित 12 भाषाओं में सहायता प्रदान करता है। “खुशी” चैटबॉट मरीजों और आम नागरिकों को टीबी के लक्षण, जांच, उपचार, पोषण, दवा सेवन और अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की जानकारी टेक्स्ट और आवाज दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराता है। इसे एक तरह से डिजिटल “ई-निक्षय मित्र” के रूप में विकसित किया गया है, जो मरीजों को मानसिक और सामाजिक सहयोग भी प्रदान करेगा।
मरीजों को मिलेगा दवा और जांच का रिमाइंडर
मोबाइल एप के जरिए टीबी मरीजों को दवा लेने के लिए दैनिक रिमाइंडर मिलेगा। साथ ही वे अपने उपचार की प्रगति भी देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इससे मरीजों में उपचार छोड़ने की प्रवृत्ति कम होगी और समय पर इलाज पूरा होने की संभावना बढ़ेगी।
निक्षय मित्र और स्वयंसेवकों को भी मिलेगा लाभ
एप में निक्षय मित्रों और स्वयंसेवकों के लिए भी विशेष सुविधा दी गई है। इसके माध्यम से वे टीबी मरीजों को पोषण सहायता और मनोसामाजिक सहयोग प्रदान कर सकेंगे। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भू-टैग वाली तस्वीरें अपलोड करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे सहायता कार्यों की निगरानी आसानी से हो सकेगी।
स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देने का निर्देश
सरकार ने सभी जिलों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि इस ऐप का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाए। मेडिकल ऑफिसर, सीएचओ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, निक्षय मित्र, माय भारत स्वयंसेवक, टीबी विजेता और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही “माय गवर्नमेंट” प्लेटफॉर्म पर टीबी प्रतिज्ञा अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों से टीबी उन्मूलन के लिए सहयोग की अपील की जा रही है।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि “टीबी मुक्त भारत” मोबाइल ऐप के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
28/05/2026
#सेहत_सही_लाभ_कई
महावारी को लेकर टूटी चुप्पी, गांव-गांव में किशोरियों को किया गया जागरूक
• महावारी स्वच्छता दिवस पर किशोरियों को किया गया जागरूक
• सेनेटरी पैड का वितरण
• रिविलगंज के पांच पंचायतों में चला जागरूकता अभियान
• 219 किशोरियों व महिलाओं की हुई स्वास्थ्य जांच
छपरा। महावारी सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है… लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लेकर जागरूकता की कमी और सामाजिक संकोच देखने को मिलता है। इसी सोच को बदलने और किशोरियों को जागरूक करने के उद्देश्य से महावारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर रिविलगंज प्रखंड में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। महावारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर रिविलगंज प्रखंड में किशोरियों एवं महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। सीएचओ-पीएसपी (पेशेंट स्टेक होल्डर प्लेटफार्म) के सदस्यों के सहयोग से प्रखंड के इनई, खैरवार, कचनार, टेकनिवास एवं मोहब्बत परसा पंचायतों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान स्कूलों और सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य जांच शिविर लगाकर किशोरियों एवं महिलाओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास
कार्यक्रम में सीएचओ, एएनएम, स्थानीय मुखिया एवं विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रिविलगंज के प्रभारी डॉ. राकेश कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक संजीव कुमार एवं आरबीएसके (RBSK) की चिकित्सीय टीम का सहयोग भी सराहनीय रहा। महावारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर आयोजित इस अभियान में किशोरियों को मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखने के तरीके बताए गए। स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इस दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
एएनएम एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने महिलाओं और किशोरियों को सलाह दी कि मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें तथा गंदे कपड़ों के उपयोग से बचें। उन्होंने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए हमेशा सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही पौष्टिक आहार, हरी सब्जियां और फल खाने की भी सलाह दी गई।
118 किशोरियों के बीच सेनेटरी पैड का वितरण:
कार्यक्रम के दौरान स्कूलों एवं पंचायत स्तर पर कुल 219 किशोरियों और महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य जांच के बाद जरूरतमंदों को दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं। वहीं विद्यालय प्रशासन एवं SMFG India Credit Co. Ltd. के सहयोग से 118 किशोरियों के बीच सेनेटरी पैड का वितरण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं, महिलाएं, शिक्षक एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।
महिलाओं और किशोरियों में जागरूकता की कमी:
छपरा शहर के प्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संजू प्रसाद ने कहा कि महावारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रति जागरूकता की कमी और संकोच देखा जाता है, जिसकी वजह से कई किशोरियां संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हमेशा साफ-सुथरे सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उसे बदलते रहें। गंदे कपड़े के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
27/05/2026
सारण प्रमंडल के सभी रंगकर्मी को रंग श्रद्धांजलि के इस कार्यक्रम में सादर आमंत्रित किया गया है, कृपया इस अवसर में अवश्य पधारें ।
25/05/2026
रेडियो मयूर से जुड़ने का अवसर एक बार फिर, जिन्हें जरूरत हो उन्हें जरूर बताएं ।
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