Jai Singh Rathore
Jai Singh Rathore, Congress activist since 1968,
former General Secretary, Rajasthan Pradesh Congre
“जो चीज़ें पहली नज़र में बहुत कूल लगती हैं, उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी यही होती है कि उनका असर ज्यादा दिन नहीं टिकता।”
प्रसिद्ध साहित्यकार शिवानी की बेटी ईरा पांडे अपनी माँ की जीवनी में एक दिलचस्प प्रसंग दर्ज करती हैं। वह लिखती हैं कि उनके नाना के ठीक बगल वाले घर में डेनियल पंत रहते थे, जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था। नाना की सोच काफ़ी रूढ़िवादी थी, इसलिए उन्होंने दोनों घरों के बीच एक दीवार खड़ी करवा दी—ताकि “उनकी दुनिया” और “हमारी दुनिया” अलग-अलग रहें। घर में सख़्त निर्देश थे कि उस तरफ़ न देखा जाए, न कोई मेल-जोल हो।
शिवानी ने कहीं लिखा है कि डेनियल पंत के घर से उठने वाली मसालेदार मांस की खुशबू उनके साधारण ब्राह्मण रसोईघर तक पहुँच जाती थी और उनकी दाल, आलू की सब्ज़ी और चावल को फीका बना देती थी।
यह वर्णन उसी घर का था, जिसके मुखिया तारादत्त पंत ने 1874 में हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था—और इस तरह वे कुमाऊँ की उस “नीरस” ब्राह्मण रसोई से आज़ाद हो गए थे।
इसी डेनियल पंत की बेटी आयरीन रूथ पंत ने आगे चलकर अपने से दस साल बड़े, पहले से विवाहित और पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान से विवाह किया। इसके साथ ही उन्होंने ईसाई धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर लिया।
दिलचस्प बात यह है कि लियाकत अली खान के पूर्वज करनाल के जाट थे, इक़बाल के परदादा कश्मीरी पंडित और जिन्ना के दादा कठियावाड़ी हिंदू। यानी पाकिस्तान की नींव रखने वाले ज़्यादातर लोग, दो-चार पीढ़ी पहले तक उसी सांस्कृतिक दुनिया का हिस्सा थे, जिसे बाद में उन्होंने “नापाक” बताकर खारिज कर दिया—और एक नए देश का निर्माण खून और विभाजन के रास्ते किया।
धीरे-धीरे एक सोच गढ़ी गई—
जो कुछ भी अपने पूर्वजों, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने देश के विरुद्ध हो, वही कूल है।
मांसाहार, नशा, विवाह से बाहर संबंध, भागकर शादी, बार-बार विवाह और धर्म परिवर्तन—इन सबको आधुनिकता और प्रगति का प्रतीक बना दिया गया।
इस्लाम स्वीकार करने के बाद आयरीन रूथ पंत का नाम “गुल-ए-राणा” पड़ा और वे राणा लियाकत के नाम से जानी गईं। वे निस्संदेह साहसी महिला थीं। पाकिस्तान निर्माण के दौर में उन्होंने मुस्लिम लीग की महिला शाखा का नेतृत्व किया—तब यह कूल माना गया।
लेकिन विडंबना देखिए, जब वही पाकिस्तान बन गया और वहाँ “दो महिलाओं की गवाही एक पुरुष के बराबर”
वाला क़ानून आया, तो उसी के विरोध में बोलने पर राणा लियाकत को जेल जाना पड़ा।
जोगेंद्र मंडल ने दलित अधिकारों की उम्मीद में पाकिस्तान का समर्थन किया—वह भी उस समय कूल था। मगर जब नए देश में दलितों पर हो रहे अत्याचार सामने आए, तो उन्हें सब कुछ छोड़कर भारत लौटना पड़ा।
लियाकत अली खान ने अपनी मातृभाषा पंजाबी त्यागकर उर्दू को अपनाया—यह भी तब कूल समझा गया। लेकिन जब यही विचार बंगालियों पर थोपा गया, तो परिणामस्वरूप लाखों जानें चली गईं।
जीवन के अंतिम वर्षों में राणा लियाकत ने अपने भाई नॉर्मन पंत को भेजे एक तार में सिर्फ़ इतना लिखा—
“आई मिस अल्मोड़ा।”
वह जीवन भर मड़ुए की रोटी, पहाड़ी गेहत की दाल और दाड़िम की चटनी को याद करती रहीं।
जिस भोजन को कभी “बोरिंग” कहा गया था, वही स्मृतियों में सबसे सुकून देने वाला बन गया।
यही कूल चीज़ों की सच्ची हक़ीक़त है—
वे कुछ समय तक चमकती हैं, तालियाँ बटोरती हैं, लेकिन अंत में इंसान को उसी जड़ों की याद दिलाती हैं, जिन्हें छोड़कर वह चला था।
10/01/2026
अपने घर पर ब्लैक डायमंड अमरूद का पौधा जरूर लगाएँ। यह एक खास किस्म है, जिसमें सिर्फ 6 महीने में ही फल आना शुरू हो जाता है। इसे आप आसानी से छत पर 18 से 24 इंच के ग्रोबैग में भी उगा सकते हैं। सही धूप और थोड़ी देखभाल के साथ आप घर पर ही स्वादिष्ट और ताज़े अमरूद का आनंद ले सकते हैं। 🌿
#अमरूद
06/01/2026
पूर्व सांसद मोहर सिंह राठौड़ की मनाई जयंती। news plus 24×7@पूर्व सांसद मोहर सिंह राठौड़ की मनाई जयंती।
06/01/2026
सालभर मीठे और पौष्टिक अमरूद का आनंद चाहिए, तो थाई पिंक अमरूद जरूर उगाएँ।इसे छत पर 18-20 इंच के गमले में आसानी से लगाया जा सकता है, जहाँ यह खूब फलता है और रसीले, स्वादिष्ट अमरूद देता है।
06/01/2026
27/12/2025
अगर आपके नींबू के पौधे पर केवल पत्तियाँ आ रही हैं लेकिन फल नहीं आ रहे, तो यह चिंता की बात जरूर है—लेकिन इसका समाधान पूरी तरह संभव है। नींबू ऐसा पौधा है जिसे सही देखभाल, थोड़ा धैर्य और नियमित पोषण मिलने पर वह सालों-साल फलों से लदा रहता है।
♦️ आइए जानते हैं नींबू के पौधे में फल नहीं लगने का कारण और समाधान —
1️⃣ पर्याप्त धूप का अभाव :--
नींबू का पौधा धूप पसंद पौधा है। यदि इसे पर्याप्त धूप नहीं मिलती, तो इसमें फूल और फल आने की प्रक्रिया रुक जाती है।
✅️ समाधान :--
पौधे को ऐसी जगह रखें या लगाएँ जहाँ प्रतिदिन 6 से 8 घंटे सीधी धूप मिले। अगर पौधा छांव या आधी धूप वाली जगह पर है, तो उसे धूप वाले स्थान पर स्थानांतरित करें।
2️⃣ गमले का आकार और मिट्टी की गुणवत्ता :--
अगर नींबू का पौधा गमले में लगाया गया है, तो उसका गमला बहुत छोटा होने पर जड़ों का विकास सीमित हो जाता है। ऐसे पौधे ऊपर से हरे तो दिखते हैं, लेकिन फूल और फल नहीं देते।
✅️ समाधान :--
गमला कम से कम 14 से 18 इंच गहरा और चौड़ा होना चाहिए। मिट्टी न तो बहुत भारी हो और न ही पानी रोकने वाली। एक संतुलित मिट्टी मिश्रण तैयार करने के लिए 2 भाग बगीचे की मिट्टी + 1 भाग गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट + 1 भाग रेत + थोड़ा नीम खली पाउडर लें। यह मिश्रण पौधे की जड़ों को सांस लेने में मदद करता है और मिट्टी को पोषक तत्वों से भरपूर बनाता है।
3️⃣ पौधे में फूल नहीं आना या सिर्फ पत्तियाँ आना :--
कई बार पौधा तेजी से बढ़ता है, लेकिन उस पर फूल नहीं आते। यह इस बात का संकेत है कि पौधे को नाइट्रोजन तो पर्याप्त मात्रा में मिल रही है, लेकिन फास्फोरस और पोटाश की कमी है — जो फूल और फल बनने के लिए ज़रूरी हैं।
✅️ समाधान :--
महीने में एक बार मिट्टी में 1 चम्मच सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और 1 चम्मच म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) डालें, इसके साथ गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाना और भी बेहतर रहेगा।
4️⃣ फूल आकर झड़ जाना या फल नहीं बनना :--
अगर पौधे में फूल आते हैं लेकिन जल्दी झड़ जाते हैं या फल नहीं बनते, तो इसका कारण परागण की कमी और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो सकता है।
✅️ समाधान :--
जिंक (Zinc) और बोरॉन (Boron) जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का स्प्रे करें। (10 लीटर पानी में 10 ग्राम जिंक सल्फेट और 5 ग्राम बोरिक एसिड मिलाकर छिड़काव करें।) इससे फूल झड़ने की समस्या कम होती है और फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। अगर पौधा छत या बालकनी में है, तो पास में तुलसी, गेंदा या सूरजमुखी लगाएँ — ताकि मधुमक्खियाँ और तितलियाँ आकर्षित हों और परागण प्राकृतिक रूप से हो सके।
5️⃣ पौधे की नियमित छंटाई आवश्यक :--
नींबू का पौधा समय के साथ बहुत घना हो जाता है। जब शाखाएँ एक-दूसरे में उलझ जाती हैं, तो धूप और हवा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे नई कोंपलें और फूल नहीं निकल पाते।
✅️ समाधान :--
हर 3 से 4 महीने में पौधे की हल्की छंटाई (Pruning) करें। सूखी, रोगग्रस्त और अंदर की ओर बढ़ती शाखाओं को काट दें। इससे पौधे में नई कलियाँ निकलेंगी और फूलों की संख्या बढ़ेगी।
6️⃣ जैविक खाद का उपयोग करें :--
नींबू का पौधा जैविक खाद से सबसे अच्छी तरह बढ़ता है।
विशेष रूप से नीम खली (Neem Cake Powder) मिट्टी को पोषक बनाती है और साथ ही कीटों को भी दूर रखती है।
✅️ समाधान :--
हर 45 दिन में मिट्टी में एक मुट्ठी नीम खली पाउडर डालें। महीने में एक बार बोनमील, कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट डालें। ध्यान रखें, खाद की अधिक मात्रा से केवल पत्तियाँ बढ़ती हैं, फल नहीं आते।
7️⃣ पानी देने का सही तरीका :--
नींबू का पौधा नमी पसंद करता है, लेकिन जलभराव को बिल्कुल सहन नहीं करता। ज्यादा गीली मिट्टी से जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा कमजोर हो जाता है।
✅️ समाधान :--
गर्मियों में हर 2-3 दिन में पानी दें। पानी देने से पहले मिट्टी में उंगली डालकर जांचें — अगर मिट्टी सूखी है तभी पानी दें। सर्दियों में पानी की आवश्यकता और भी कम हो जाती है।
♦️ खाद डालने का सही समय (साल में 3 बार) :--
■ फरवरी–मार्च → नए फूल आने से पहले
■ जून–जुलाई → बारिश शुरू होने से पहले
■ अक्टूबर–नवंबर → सर्दियों के पहले
🌿 नींबू का पौधा तभी फल देता है जब उसे पर्याप्त धूप, सही मिट्टी, नियमित पोषण और उचित छंटाई मिलती है। थोड़ा धैर्य रखें, जैविक तरीके से देखभाल करें — कुछ ही महीनों में आपका नींबू का पौधा हरे-भरे पत्तों के साथ ढेर सारे फलों से लद जाएगा।
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26/12/2025
जायफल और जावित्री दोनों एक ही वृक्ष मिरिस्टिका फ्रैग्रैन्स से प्राप्त होने वाले अत्यंत मूल्यवान मसाले हैं। यह वृक्ष मूल रूप से इंडोनेशिया के मोलुकास द्वीपों का देशज है, लेकिन आज चीन, मलेशिया, भारत, श्रीलंका और दक्षिणी अमेरिका के कई क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से उगाया जाता है। यह वृक्ष सदाबहार होता है और इसकी पत्तियों में प्राकृतिक सुगंध मौजूद रहती है।
इसके फल छोटी नाशपाती के समान होते हैं। पकने पर फल दो हिस्सों में फट जाता है और अंदर लाल/सिंदूरी रंग की जालीदार परत दिखाई देती है, जिसे जावित्री कहते हैं। जावित्री के अंदर एक कठोर खोल होता है, जिसके भीतर वास्तविक जायफल पाया जाता है। एक ही फल से यह दोनों मसाले प्राप्त होते हैं। नया पौधा लगभग 7–8 वर्ष में फल देना शुरू करता है।
✴️ कब और कैसे लगाएँ?
🔹 उपयुक्त समय
जायफल का पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय जून–जुलाई, यानी मानसून की शुरुआत है। गर्म और नम जलवायु में यह वृक्ष तेजी से बढ़ता है और अच्छी तरह विकसित होता है।
🌱 बीज से पौधा तैयार करना
पके हुए फलों से ताज़ा बीज निकालें। बीज को अधिक देर न रखें, क्योंकि इसकी अंकुरण क्षमता जल्दी कम हो जाती है। बीज को छाया वाली जगह में बोएं। सामान्यतः 4–6 सप्ताह में अंकुरण शुरू हो जाता है।
🌱 कलम द्वारा पौधा तैयार करना
मादा पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए वनस्पति उद्यानों में छोटे पौधों पर मादा वृक्ष की टहनी की कलम लगाई जाती है। इससे फल जल्दी आते हैं और उत्पादन में सुधार होता है।
👉 शुरुआत के 2–3 साल तक पौधे को गमले में उगाया जा सकता है, लेकिन बाद में इसे जमीन में लगाना बेहतर है, क्योंकि यह वृक्ष बड़ा होता है।
🏡 मिट्टी, जगह और सिंचाई
जायफल के लिए हल्की, उपजाऊ, दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सर्वोत्तम होती है। मिट्टी में भरपूर जैविक खाद होनी चाहिए। पौधे को हल्की छाया पसंद है, पर पूरी छाया में इसकी वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
गर्मियों में नियमित हल्की सिंचाईदें। मिट्टी को हमेशा नमीदार रखें, पर जलभराव न होने दें। साल में दो बार गोबर खाद, नीम खली या अन्य जैविक खाद देकर पौधे की वृद्धि को बेहतर बनाया जा सकता है। तेज धूप और तेज हवाओं से पौधे की रक्षा करें, क्योंकि यह धीरे-धीरे बढ़ने वाली प्रजाति है।
🌟 जायफल और जावित्री के फायदे
जायफल और जावित्री दोनों के फायदे अलग-अलग होते हैं। दोनों एक ही फल से आते हैं, लेकिन स्वभाव, प्रभाव और उपयोग अलग हैं।
🌟 जायफल के फायदे
जायफल बीज होता है और इसका प्रभाव थोड़ा गर्म, शांत करने वाला और पाचन सुधारने वाला होता है।
💠 पाचन के लिए श्रेष्ठ
पाचन को सामान्य करता है। गैस, अपच, दस्त, पेट दर्द में राहत।
💠 नींद लाने में मदद
रात्रि में दूध में चुटकी भर जायफल नींद सुधारने में उपयोगी हैं।
💠 दर्द और सूजन में राहत
जोड़, मांसपेशियों, सिरदर्द में लाभ देता है।
💠 तनाव और चिंता कम
दिमाग को शांत करता है
💠 त्वचा के लिए
इसके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे कम करके चेहरे की चमक बढ़ाता है
💠 पुरुष स्वास्थ्य
प्राकृतिक शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक।
🌺 जावित्री के फायदे
जावित्री बीज के ऊपर की लाल झिल्ली है। इसका प्रभाव सुगंधित, पाचक और रक्त-संचार बढ़ाने वाला होता है।
💠 भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने में
खाने में सुगंध देकर पाचन एंजाइम बढ़ाती है। गैस, पेट फूलना, अपच में उपयोगी होता है।
💠 एंटीबैक्टीरियल गुण
संक्रमण, फंगल, बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक हैं।
💠 रक्त संचार में सुधार
थकान और कमजोरी में लाभ मिलता है। शरीर में गर्माहट बढ़ाती है
💠 दर्द निवारक
जावित्री का तेल मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों के दर्द में उपयोग है।
💠 महिलाओं के लिए लाभकारी
शरीर को गर्माहट देता है। मासिक धर्म के दर्द में राहत मिलता है।
💠 स्वाद और सुगंध बढ़ाने में सर्वश्रेष्ठ
बिरयानी, सूप, सॉस में उपयोगी हैं। रंग व सुगंध दोनों बढ़ाती है
✳️ जायफल और जावित्री में मुख्य अंतर
जायफल और जावित्री भले ही एक ही फल से आते हैं, लेकिन दोनों का स्वाद, उपयोग और औषधीय प्रभाव अलग-अलग होता है। जायफल एक कठोर बीज होता है जिसका स्वाद हल्का मीठा और प्रभाव अधिक गर्म माना जाता है। यह नींद सुधारने, तनाव कम करने, पाचन सुधारने और दर्द में राहत देने में विशेष रूप से उपयोगी है। जायफल का प्रयोग मिठाइयों, दूध और हल्के व्यंजनों में किया जाता है। इसकी दैनिक मात्रा ½–1 ग्राम पर्याप्त है, इससे अधिक मात्रा नहीं लेनी चाहिए।
दूसरी ओर, जावित्री बीज के बाहर की सुगंधित लाल परत होती है। यह जायफल की तुलना में अधिक सुगंधित और हल्की तीखी होती है। इसका प्रभाव रक्त संचार बढ़ाने, पाचन सुधारने और भोजन की सुगंध बढ़ाने में प्रमुख है। इसका उपयोग बिरयानी, पुलाव, गरम मसाला, सूप और मसालेदार व्यंजनों में अधिक होता है।
इस प्रकार, भले ही दोनों एक ही वृक्ष से प्राप्त होते हैं, उनके औषधीय गुण, स्वाद और पाक उपयोग स्पष्ट रूप से अलग हैं।
अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना न भूलें। अपने सवाल आप नीचे कमेंट में पूछ सकते हैं। हम आपकी हर प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।
fans
25/12/2025
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