15/08/2024
िएंगे_और_मरेंगे_ये_वतन_तेरे_लिए
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं |
My dear friends welcome to the Rampura Panchayat.
15/08/2024
िएंगे_और_मरेंगे_ये_वतन_तेरे_लिए
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं |
22/07/2024
स्वतन्त्र हिन्दुस्तान का आधार तीन चीजों पर टिका हुआ था लेकिन इस देश की जनता का दुर्भाग्य है कि उन तीनों में से वामपन्थ के विचारधारा ने एक व्यक्ति को इतना महान बना दिया कि हम उनकी गलतियों से सीखना तो दूर यह भी नहीं मान सकते कि उनसे कोई गलती भी हो सकती है जिसके कारण आज उनके द्वारा किए गए बहुत अच्छे कामों को भी लोग शंका की नजरों से देखते हैं | दूसरे को उन्होंने एक जाति के दायरे में समेट कर उनकी वास्तविक विचार से जनता को अवगत नहीं होने दिया और उनके द्वारा कुरीतियों के खिलाफ उठाए गए आवाज को धर्म के खिलाफ घोषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा और एक पूरे समाज को उनका दुश्मन बना दिया |
सबसे बड़ा दुष्प्रचार उन्होंने उस संगठन के बारे में फैलाना में शुरू किया जिसके गठन का आधार ही भारत में मुगलों और अंग्रेजो द्वारा फैलाए गए कुरीतियों को दूर करते हुए अपने साँस्कृतिक विरासत को आने वाले पीढ़ी को सौंपना था |
स्वतंत्र भारत के वो तीन आधार हैं #महात्मा_गांधी, #बाबा_साहब_भीमराव_अम्बेदकर और विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन #आरएसएस |
ईन तीनों के विचार को बिना जाने बिना पढ़े इस देश का भविष्य उज्जवल नहीं हो सकता लेकिन पढ़ाई WHAT'SAPP UNIVERSITY की नहीं होनी चाहिए |
Lok Janshakti Party
Chirag Paswan
Ved Prakash
07/07/2024
#बिहार_की_शिक्षा_व्यथा_एक_शिक्षक_के_कलम_से
#ईटीसी
पिछले दिनों मेरे पड़ोस का एक लड़का मेरे पास आया उसने बताया का उसके स्नातक का रिजल्ट आ गया है। उसने यह भी बताया कि वह प्रथम श्रेणी से पास है।मैने बधाई दी। फिर उसने बताया कि उसके सबसे ज्यादा नंबर ईटीसी में आए हैं।
किसी नए विषय का नाम सुन मैं चौंका।मुझे लगा शायद पाठ्यक्रम में कोई बदलाव हुआ हो।सहसा मैने पुछ लिया तुमने कौन कौन सा विषय रखा है।उसने अपना मार्कशीट दिखाया। उसे सचमुच लगभग चौहतर प्रतिशत नंबर आए थे। मैंने सोचा हमारे समय में स्नातक में इतना नंबर लाना वह भी बिहार के कॉलेज में दिवास्वप्न ही था।
उसके दो विषय थे ज्योग्राफी और पॉलिटिकल साइंस।
मैने धृष्टता के साथ दोनों विषयों की स्पेलिंग बच्चे से पुछ ली।वह एक भी का सही उत्तर न दे पाया।उसे ज्योग्राफी शब्द लिखने तक नहीं आया। फिर मैने मार्कशीट दिखाते हुए पूछा इसमें ईटीसी कहां है मुझे दिख नहीं रहा।कुछ देर बाद पता चला अनिवार्य विषयों में एक पेपर एथिक्स का भी था जिसे वह और उसके शिक्षक ईटीसी कह रहे थे जैसा कि उसने बताया।
बिहार के अधिकांश बच्चों के साथ यही हो रहा। वे नकल और दूसरे तरीके से स्नातक तो कर जा रहे लेकिन अपने विषय का नाम तक नहीं जानते। पढ़ना तो बहुत दूर की बात है। एक और फैशन इन दिनों दिख रहा ।ज्यादा से ज्यादा बच्चे साइंस स्ट्रीम से आजकल स्नातक कर रहे।
बगैर पढ़े लिखे डिग्री मिल जाए तो आर्ट्स की जगह साइंस लेने में क्या बुराई। ये है पूरे देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था।ऐसे में इस देश का आने वाला भविष्य कितना हाहाकारी होगा आप कल्पना कर सकते।
Om Prakash Rai Yayavar
Lok Janshakti Party
Chirag Paswan
30/12/2023
खत्म हो रहा 500 वर्षों का इंतजार,
अयोध्या अब ले रही भव्य आकार !
Lok Janshakti Party
19/09/2023
गोबिंदगंज के पूर्व विधायक, प्रखर वक्ता, कुशल संगठनकर्ता जिनके कुशल नेतृत्व में पार्टी नित्य नई ऊँचाईयों को छू रही है और संगठन प्रतिदिन मजबूत हो रहा है, लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बड़े भाई Raju Tiwari जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं |
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपका मार्गदर्शन, प्यार और नेतृत्व हमलोगों को लंबे समय तक मिलता रहे |
शशि रंजन ठाकुर
प्रदेश महासचिव
युवा लोजपा (रामविलास)
06/08/2023
हे समय के देवता स्वीकार लो आराधना ...
संगठन के कठिन पथ पर कर रहें हम साधना ..!
ंवाद_यात्रा
#कोशी_कॉलेज_खगड़िया
Lok Janshakti Party
Ved Prakash
Amit Ranu
Prakash Mehta
21/06/2023
#निःस्वार्थ_समर्पण_भाव_से_सेवा_है_जिनका_काम,
#वैसे_भाई Balendu Jha के कर्मठता को बारम्बार प्रणाम |
बुजुर्ग दादी अस्पताल में 3 दिनों से खून की कमी के कारण तड़प रहीं थीं, पुरे दरभंगा में कहीं भी O negative ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा था ऐसे समय में सिर्फ एक कॉल पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में अति व्यस्त होने के बावजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक, अखिल भारतीय हिन्दू जागरण सेवा समिति, दरभंगा के संस्थापक साथी, दरभंगा भाजपा युवा मोर्चा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष भाई Balendu Jha ने तत्परता दिखाते हुए तुरन्त ब्लड उपलब्ध करवा यह साबित किया कि सेवा के लिए पद की नहीं लगन की आवश्यकता होती है |
बुजुर्ग दादी के परिवार के तरफ से आपको धन्यवाद और उनका आशीर्वाद सदा आपके साथ है और पूर्ण विश्वास है कि आप अपने कर्तव्य पथ पर इसी तरह अविरल चलते रहें महादेव आपकी मनोकामना अवश्य पूरी करेंगे |
🙏🙏🙏
जब जेब में पैसे हो जाएं तो आदमी इज्जत ढूंढता है, पावर ढूंढता है। अहसास चाहिए उसे दमदार होने का भले ही उसकी इस चाहत से कितनों की जिंदगी बर्बाद हो जाए उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
समाज को जरूरत है वैसे गिद्धों से अपने नवयुवकों को बचा कर स्वावलंबी बनाने की क्योंकि अगर वैसे लोग सच में समाज का विकास सोचते हैं तो अपने वंशजों को क्यों नहीं समाज सेवा के लिए आगे लाते हैं ??
अपनी #जड़_और_जमीन से जुड़े रहने का संतोष जो मिलता है वह उससे दूर होकर अपना अस्तित्व खोने जैसा ही है। पिछ्ले दो तीन दसकों में हज़ारों लोग अपनी जड़ से खत्म होकर शहर की चकाचौंध में एक अपना आशियाना बना कर गुजर बसर कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने आलीशान बंगला बनाई है अपने परिवार के साथ शहर की आगोश में फल फूल रहे हैं और उनके बच्चे उसी शहर की समाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को अपना चुके हैं।
महानगरों में बसे ऐसे बहुत से धनाढ्य लोग रहते हैं जिनको उनका पड़ोसी भी नहीं जानता है, पब और बार की संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती जा रही है और तेजी से #लिव_इन रिलेशनशिप , #समलैंगिक_विवाह का प्रचलन जैसे #व्यक्तिगत_प्राइवेसी (मां बाप से अलग एक ही शहर में रहने का तरीका) जैसे जीवन जीने की ओर युवा पीढ़ी अग्रसर है। इसमें कोई बुराई है या नहीं इस पर कोई टिपण्णी नहीं करना चाहता लेकिन इसको अपनाने के बाद ऐसे लोग जो अपनी जड़ से कट चुके हैं क्या खोया इसकी चर्चा अवश्य करना चाहता हूं।
हालांकि गांव भी अब उतने शहरों से अछूते नहीं रहे, इसमें सोशल मीडिया और टीवी चैनलों का भी योगदान है फ़िर भी जो समाजिक और #सांस्कृतिक_मूल्यों की धरोहर गांवों में है वह शहरों में नही है। जड़ और जमीन से दूर हो चुके शहरी लोग अपने बच्चों से उस सांस्कृतिक मूल्यों की आपेक्षा रखने की उम्मीद लगाए बैठे हैं जो उनके बच्चों ने कभी देखा ही नहीं। अगर वे जड़ और जमीन से कटे नही होते #संयुक्त_परिवार की महत्ता को बनाए रखें होते। साल में एक दो बार सपरिवार गांव की यात्रा किए होते, सगे सम्बन्धी के अच्छे बुरे कर्म के अवसर पर उपस्थित होकर कंधे से कंधा मिलाकर चले होते तो निश्चित रूप से बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के इस प्रकार के मूल्यों का ज्ञान उनके बच्चों में भी हुआ होता। जो अपेक्षा आज वो अपने बच्चों से कर रहे हैं उनपर वे शायद खरे उतरते।
गांवो में आज भी अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परम्परा है चाहें वह गांव का कोई बड़े हो या रिश्तेदार हो , नतमस्तक होकर सहज भाव से उनका अभिवादन किया जाता है जबकि शहरों में बच्चे दूर से हीं मां बाप को भी हाय मॉम और हैलो डैड बोल दे तो बड़ी बात होती है । इसमें दोष उन बच्चों का विल्कुल नहीं है बल्कि उनके माता पिता की है जिन्होंने अपनी तरक्की के लिए अपनों को छोड़ दिया।
ऐसे बहुत से लोग इस भूल का अहसास कर अपने चौथेपन में गांवो की ओर रुख कर रहे हैं लेकिन गांव के उनके भाई बंधु उनको कैसे अपनाएं जिनको उन्होंने कभी अपना समझा ही नहीं। न तो उनके खुशी में शामिल हुए न उनके गम में। कभी छुट्टी न मिलने का बहाना तो कभी तबीयत खराब होने की। जो कटुता वर्षो से जमी पड़ी है वह इतनी आसानी से कहां पिघलने वाली। एक समय था जब शहर से कोई गांव जाता था तो पुरा गांव उसको पलकों पर बिठाया करता था अब जब ऐसे लोग शहर से गांव जाते हैं गांव के बड़े तो छोड़िए बच्चे भी मुंह फेर लिया करते हैं।
इसलिए अपने जड़ से जुड़े रहें और धन के व्यय की परवाह किए बिना यदा कदा गांव की यात्रा करते रहें। बार बार शिमला जाने से हिमाचल प्रदेश की राजधानी बदल नहीं जाएगी लेकीन हुजूर बार बार गांव जाने से और लोगो के सुख दुख में शरीक होने से आपके अपने लोग आपको अपने बीच पाकर खुश अवश्य होंगे। ध्यान रहे आपकी कमाई में आपके भाई बंधु , गांव वालो और रिश्तेदारों का भी हक है उन सभी लोगों की दुआओं से ही आप उस मुकाम पर हैं जहां आज आप गर्व महसूस कर रहे हैं।
*वर्ष 1977 में कांग्रेस के शासन को तीस साल पूरे होने पर 'शरद जोशी' ने जो व्यंग्य लिखा था, उसके कुछ अंश पढ़िए, अदभुत व्यंग्य है ---*
तीस साल का इतिहास साक्षी है कांग्रेस ने हमेशा संतुलन की नीति को बनाए रखा।
जो कहा वो किया नहीं, जो किया वो बताया नहीं, जो बताया वह था नहीं, जो था वह गलत था।
अहिंसा की नीति पर विश्वास किया और उस नीति को संतुलित किया लाठी और गोली से।
सत्य की नीति पर चली, पर सच बोलने वाले से सदा नाराज रही।
पेड़ लगाने का आन्दोलन चलाया और ठेके देकर जंगल के जंगल साफ़ कर दिए।
राहत दी मगर टैक्स बढ़ा दिए।
शराब के ठेके दिए, दारु के कारखाने खुलवाए,
पर नशाबंदी का समर्थन करती रही।
हिंदी की हिमायती रही अंग्रेजी को चालू रखा।
योजना बनायी तो लागू नहीं होने दी।
लागू की तो रोक दिया।
रोक दिया तो चालू नहीं की।
समस्याएं उठी तो कमीशन बैठे, रिपोर्ट आई तो पढ़ा नहीं।
कांग्रेस का इतिहास निरंतर संतुलन का इतिहास है। समाजवाद की समर्थक रही,
पर पूंजीवाद को शिकायत का मौका नहीं दिया।
नारा दिया तो पूरा नहीं किया।
प्राइवेट सेक्टर के खिलाफ पब्लिक सेक्टर को खड़ा किया, पब्लिक सेक्टर के खिलाफ प्राइवेट सेक्टर को।
दोनों के बीच खुद खड़ी हो गई । तीस साल तक खड़ी रही।
एक को बढ़ने नहीं दिया।
दूसरे को घटने नहीं दिया।
आत्मनिर्भरता पर जोर देते रहे, विदेशों से मदद मांगते रहे।
‘यूथ’ को बढ़ावा दिया,
बुढ्ढो को टिकट दिया।
जो जीता वह मुख्यमंत्री बना, जो हारा सो गवर्नर हो गया।
जो केंद्र में बेकार था उसे राज्य में भेजा,
जो राज्य में बेकार था उसे उसे केंद्र में ले आए।
जो दोनों जगह बेकार थे उसे एम्बेसेडर बना दिया।
वह देश का प्रतिनिधित्व करने लगा।
एकता पर जोर दिया आपस में लड़ाते रहे।
जातिवाद का विरोध किया,
मगर वोट बैंक का हमेशा ख्याल रखा।
प्रार्थनाएं सुनीं और भूल गए।
आश्वासन दिए, पर निभाए नहीं।
जिन्हें निभाया वे आश्वश्त नहीं हुए।
मेहनत पर जोर दिया, अभिनन्दन करवाते रहे।
जनता की सुनते रहे अफसर की मानते रहे।
शांति की अपील की, भाषण देते रहे।
खुद कुछ किया नहीं दुसरे का होने नहीं दिया।
संतुलन की इन्तहां यह हुई कि उत्तर में जोर था तब दक्षिण में कमजोर थे।
दक्षिण में जीते तो उत्तर में हार गए।
तीस साल तक पूरे, पूरे तीस साल तक,
कांग्रेस एक सरकार नहीं, एक संतुलन का नाम था।
संतुलन,
तम्बू की तरह तनी रही
गुब्बारे की तरह फैली रही,
हवा की तरह सनसनाती रही बर्फ सी जमी रही पूरे तीस साल।
*शरद जोशी का पठनीय व्यंग्य*
25/11/2020
#गाँव का
जीवन बदल गया
पगडंडी पर छाँव नहीं है
बिछुआ वाला पाँव नहीं है
सच पूछो तो शहर हो गया
गाँव रहा अब गाँव नहीं है
वहाँ आम पर झूलों वाला
सावन बदल गया
#गांव का जीवन बदल गया।
साथ-साथ सब हँसते-गाते
दीवाली औ' ईद मनाते
सुख-दुख में सब इक दूजे का
जहाँ रहे हैं साथ निभाते
नए दौर में आज वहाँ का
मन-मन बदल गया
#गांव का जीवन बदल गया।
बरकत और दुआ की बातें
खोई होली गाती रातें
नाव कागजी कहाँ बहाती
सावन-भादों की बरसातें
बँटवारे की दीवारों से
आँगन बदल गया
#गांव का जीवन बदल गया।
29/08/2019