30/05/2026
✒️ हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 📰
"शब्दों में धार हो, विचारों में निष्पक्षता हो,
वही तो लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी होता है।"
आज हिंदी पत्रकारिता दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर समाज को जागरूक, सशक्त और लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाले सभी पत्रकार बंधुओं, लेखकों और मीडिया कर्मियों को सादर नमन एवं हार्दिक बधाई। 🙏💐
समाज का आइना और लोकतंत्र का आधार स्तंभ
आपकी कलम सिर्फ स्याही नहीं बिखेरती, बल्कि समाज की आवाज बनती है। कठिन परिस्थितियों में भी सत्य को सामने लाने का आपका संकल्प सराहनीय है।
शुभकामना संदेश: > ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपकी लेखनी सदैव समाज को सही दिशा दिखाती रहे, सत्य का साथ देती रहे और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को नई ऊँचाइयों पर ले जाए। आपकी बेबाक आवाज़ और निष्पक्ष दृष्टिकोण यूँ ही बना रहे। ✍️✨
जय हिंद! 🇮🇳
#हिंदी_पत्रकारिता_दिवस #लोकतंत्र_का_चौथा_स्तंभ
26/05/2026
देश सेवा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले उत्तराखंड के वीर जवान दीपक कुमार को शत-शत नमन! 🙏✨
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ ने अपना एक और जांबाज बेटा खो दिया है। सियाचिन की शून्य से भी नीचे की हाड़ कंपा देने वाली ठंड और दुर्गम परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए भारतीय सेना की 7 कुमाऊं रेजीमेंट के जवान दीपक कुमार जेठी की तबीयत बिगड़ गई थी।
सेना के अस्पताल से लेकर दिल्ली के आरआर (RR) हॉस्पिटल तक डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान देश का यह रक्षक हमेशा के लिए भारत मां की गोद में सो गया।
इस दुखद घड़ी में हमारी संवेदनाएं दीपक जी के परिवार के साथ हैं। उनकी पत्नी रीना जेठी, 5 वर्षीय मासूम बेटे काव्यांश, बुजुर्ग माता जी और भाइयों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता भवान सिंह जी के बाद अब दीपक का जाना पूरे परिवार के लिए एक ऐसा खालीपन है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।
ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। पूरा देश इस वीर जवान की शहादत और सेवा को हमेशा याद रखेगा।
भावभीनी श्रद्धांजलि! 💐🇮🇳
25/05/2026
अमर शहीद श्रीदेव सुमनजी की जयंती पर शत-शत नमन! 🙏✨
आज उत्तराखंड के उस महान सपूत का दिन है जिसने राजशाही के जुल्मों के आगे झुकने के बजाय 84 दिनों तक भूखे रहकर अपने प्राणों की आहुति दे दी। लेकिन क्या आज की युवा पीढ़ी सिर्फ स्टेटस लगाने तक सीमित है? या हम उस इतिहास को वाकई जानते हैं जिसके दम पर आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं?
आज की युवा पीढ़ी और नौजवानों से कुछ सीधे और तीखे सवाल:
1️⃣ श्रीदेव सुमन कौन थे?
वे सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि टिहरी रियासत की क्रूर राजशाही और सामंतवाद के खिलाफ इंकलाब की बुलंद आवाज थे। प्रजामंडल के जरिए उन्होंने जनता को अधिकारों की लड़ाई लड़ना सिखाया।
2️⃣ श्रीदेव सुमन की हत्या किसने, क्यों और कब की थी?
25 जुलाई 1944 को टिहरी जेल में अमानवीय यातनाएं देकर उन्हें शहीद किया गया। यह किसी 'एक परिवार' की व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि तत्कालीन टिहरी राजवंश और सामंती सत्ता द्वारा की गई एक सोची-समझी 'संस्थागत हत्या' (Institutional Murder) थी। जुर्म सिर्फ इतना था कि उन्होंने जनता की आजादी और अधिकारों की मांग की थी।
3️⃣ सत्ता और राजनीति का संरक्षण:
आजादी के बाद लोकतंत्र आया, लेकिन विडंबना देखिए! जिस राजशाही ने जनता का खून चूसा और श्रीदेव सुमन जैसे क्रांतिकारियों को प्रताड़ित किया, उसी राजघराने के लोगों को समय-समय पर देश के बड़े राजनैतिक दलों (जैसे कांग्रेस और भाजपा) ने सिर-आंखों पर बिठाया, टिकट दिए, सांसद-मंत्री बनाया और सत्ता का संरक्षण दिया।
4️⃣ आज दोनों परिवारों की स्थिति क्या है?
एक तरफ वो रसूखदार 'शाही परिवार' है जो आज भी सत्ता, राजनीति, संपत्ति और महलों के वैभव का आनंद ले रहा है। दूसरी तरफ, श्रीदेव सुमन जी का परिवार और उनकी विरासत है, जो आज भी गुमनामी, सादगी और संघर्षों के बीच सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गई है।
सोचिए और आत्ममंथन कीजिए...🤔
अगर हम इन सवालों के जवाब नहीं जानते या जानकर भी चुप हैं, तो यकीन मानिए—या तो हम भी सिर्फ अपने खोल में सीमित, परिवार और आजीविका के जीवन चक्र में रेशम के कीड़े की तरह कोकून बुन रहे हैं, जहां अंत में हम इसी कोकून के अंदर खुद ही घुटकर मर-खप जाएंगे... या फिर हम अंधे बन चुके हैं या अंधे बनने की प्रक्रिया में हैं!
इतिहास गवाह है कि जो कौम अपने शहीदों के हत्यारों और शोषकों को पूजने लगती है, उसका भविष्य कभी उज्ज्वल नहीं हो सकता।
उठो युवाओं, इतिहास को पढ़ो, सच को समझो और अंधभक्ति के कोकून से बाहर निकलो!
इंकलाब जिंदाबाद! ✊
अमर शहीद श्रीदेव सुमन अमर रहें! 🏔️❤️
15/05/2026
🌾 भालुओं से फसलों को हो रहे भारी नुकसान का मुआवजा दिलवाने के लिए रैली व प्रदर्शन
किसान भाइयों और बहनों,
देहरादून सहित पूरे Uttarakhand में भालू (भालुओं) द्वारा फसलों को लगातार भारी नुकसान हो रहा है। किसान दिन-रात मेहनत करके खेती करते हैं, लेकिन जंगली जानवर रातोंरात उनकी पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं। सरकार और वन विभाग अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP) की ओर से हम इस जनहित मुद्दे को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
📅 दिनांक: 15 मई 2026 (शुक्रवार)
🕒 समय: दोपहर 12:00 बजे (11:30 बजे से एकत्रित होना शुरू)
📍 स्थान: वन विभाग मुख्यालय, राजपुर रोड, देहरादून
हमारी मांग है -
✅ भालुओं द्वारा damaged फसलों का उचित मुआवजा
✅ प्रभावित किसानों को तुरंत राहत
✅ दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना
आप सभी से अपील है - इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल हों। किसानों की आवाज को मजबूत करें।
आइए, किसानों की आवाज बनें!
आइए, हक की लड़ाई लड़ें!
💪 जय किसान! जय हिंद!
निवेदक:
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP)
देहरादून