22/02/2026
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष ओबीसी कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति अवैध मानते हुए उन्हें तुरंत पद से हटाने के निर्देश दिए परंतु धामी सरकार न्यायालय के आदेशों की घोर अब मानना कर रही है
आशीष सैनी ने आरोप लगाया कि राज्य के विद्युत निगम पिटकुल के प्रबंध निदेशक प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने अब व्यापक कानूनी महत्व ग्रहण कर लिया है, क्योंकि इस मामले में भर्ती नियमों के पालन और सार्वजनिक नियुक्तियों की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। हाल ही में उच्च न्यायालय उत्तराखंड ने अपने आदेश दिनांक 18.2.2026 में राज्य निगम पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती नियमों में निर्धारित पात्रता - विशेषकर शैक्षिक योग्यता का कड़ाई से पालन आवश्यक है।
न्यायालय ने कहा कि जब नियम किसी विशेष योग्यता को अनिवार्य बनाते हैं, तो प्रशासनिक अनुभव या कार्यपालिका का विवेक उसका स्थान नहीं ले सकता, जब तक नियमों के अनुरूप कारणयुक्त और रिकॉर्ड पर आधारित निर्णय न लिया गया हो। निर्णय यह भी रेखांकित करता है कि पात्रता मानकों से बिना ठोस आधार के विचलन संवैधानिक समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है। इससे यह सिद्धांत मजबूत हुआ है कि सार्वजनिक नियुक्तियाँ पारदर्शी, नियम आधारित और दस्तावेज़ी निर्णय प्रक्रिया पर आधारित होनी चाहिए।
इस परिप्रेक्ष्य में राज्य के विद्युत निगम में प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति से जुड़ा विवाद अब व्यापक प्रशासनिक महत्व का विषय बन गया है, जो भर्ती नियमों के पालन, राज्य उपक्रमों की जवाबदेही और शासन की विश्वसनीयता से जुड़े प्रश्न उठाता है, विशेषकर उत्तराखंड सरकार के संदर्भ में।
यह प्रकरण पुनः यह आवश्यकता दर्शाता है कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियों में वैधानिक नियमों का कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि संस्थागत विश्वसनीयता, प्रशासनिक निष्पक्षता और जनता का विश्वास बना रहे।
कांग्रेस नेता आशीष सैनी ने बताया कि श्रीमती दीप्ति पोखरियाल जो इस केस में पक्षकार भी है, उनके पति नवनीत पोखरियाल के साथ प्रकाश चंद्र ध्यानी ने अत्याचार की हर सीमा को पार किया जिसके कारण उनके एक आंख की रोशनी पूरी तरह से जा चुकी है और दूसरी आंख की रोशनी भी 40 - 45% खत्म हो चुकी है। इसका कारण प्रकाश चंद्र ध्यानी द्वारा उनके पति नवनीत पोखरियाल को आंखों के इलाज के लिए जाने से रोक कर जबरदस्ती काम करने पर मजबूर किया जाना था जिससे आंखों में खून का प्रेशर बढ़ गया और उनकी एक आंख की रोशनी सदा के लिए चली गई। उन्होंने हर जगह गुहार लगाई परंतु कहीं सुनवाई नहीं हुई। कोई ना कोई बहाना करके एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी ने उन्हें नौकरी रीज्वाइन करने से भी रोका और इस समय उनके वेतन को भी रोके हुए 1 वर्ष से अधिक हो चुका है। दीप्ति पोखरियाल ने उच्च न्यायालय में चल रहे प्रवीण टंडन बनाम प्रकाश चंद्र ध्यानी मामले में पक्षकार बनाने का आवेदन दिया जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने स्वीकार किया। माननीय उच्च न्यायालय का आदेश यह सिद्ध करता है कि उनके द्वारा कही गई बातों को माना गया और प्रकाश चंद्र ध्यानी को प्रबंध निदेशक के पद से तत्काल हटाने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा की प्रकाश चंद्र ध्यानी की एलएलबी डिग्री भी अवैध तरीके से ली गई है। इस पर एक विभागीय जांच भी हुई थी जिसमें एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी की एलएलबी डिग्री में गड़बड़ी पाई गई थी। प्रकाश चंद्र ध्यानी ने गलत दस्तावेज का इस्तेमाल करके और अवैधानिक तरीके से प्रमोशन पाए। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश 18 फरवरी 2026 को आने के बाद भी राज्य सरकार ने एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को उनके पद से नहीं हटाया है जो दिखा रहा है कि वह शासन प्रशासन के कितने चहेते और करीबी है जो अब समझ से परे हो चुका है।
आशीष सैनी ने कहा पिटकुल एक ऐसा निगम है जिसमें भ्रष्टाचार व्याप्त है और इसके अकाउंट गहनता से कंट्रोलर और ऑडिटर जनरल यानी कैग द्वारा समयबद्ध तरीके से करवाया जाए और जांच आख्या को प्रदेश की जनता के समक्ष रखा जाए। विभाग में भ्रष्टाचार इतना व्याप्त है कि अब खुलेआम माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना हो रही है और सरकार मौन है।
आशीष सैनी ने कहा कि यह किसी से नहीं छुपा है की पिटकुल हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। उत्तराखंड की जनता का अधिकार है कि निगम में और यहां हो रहे कार्यों में पारदर्शिता लाई जाए क्योंकि पिटकुल में भ्रष्टाचार का अर्थ है बिजली के बिल के दामों में बढ़ोतरी और जनता से वसूली जिससे पूरी तरह लड़ने की जरूरत है और इसी कारण आज यह महत्वपूर्ण सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश भी मानने को तैयार नहीं है और पिटकुल के एमडी को हटाने को तैयार नहीं है तो इसका मतलब है कि वह माननीय न्यायालय और उनके आदेशों का न सम्मान करते हैं और ना ही अनुपालन करने को तैयार है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इन दोनों के बीच का रिश्ता क्या कहलाता है, इस सरकार को जनता को बताना होगा और अब तक प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश चंद्र ध्यानी को उनके पद से क्यों नहीं हटाया गया है?
आशीष सैनी
प्रवक्ता
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस

31/01/2026
15/09/2025
15/12/2024
16/10/2024
24/03/2024
23/03/2024