Uttarakhand Kranti Dal

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Uttarakhand Kranti Dal Uttarakhand Kranti Dal was founded on 25 July, 1979, under the chairmanship of the then Vice-Chancellor of Kumaon University, Shri D.D. Pant.

Uttarakhand Kranti Dal (UKD) is the regional party in Uttarakhand state of India. http://t.me/ukd4uttarakhand Since its formation in 1979, the UKD has been fighting for change as a grassroots political vehicle of the people. As the first party to take up the statehood issue, the UKD laboured for many years, laying the ground work for what would emerge as a successful movement for all-around development for the long neglected Himalayan region. However, enormous work remains, as the unfulfilled expectations of the Uttarakhandi people call out for the continuation of a regional voice in the politics of the state dominated by national parties and their national priorities. The Uttarakhand Kranti Dal was founded on 25 July, 1979, under the chairmanship of the then Vice-Chancellor of Kumaon University, Shri D.D. In addition to leading the separate statehood movement by building a large and inclusive identity for the region's diverse peoples, the for UttarakhandIn 1980, The Jaswant Singh Bisht opened the party's account by winning the UKD's first legislative assembly seat. In 1985, Kashi Singh Airy won in Pithoragarh, becoming the party's longest serving member, winning again in the new Uttaranchal state assembly elections of 2002. In 1994, the party helped successfully steer a anti-reservation stir into a massive movement for a separate hill state, the only way to address the region's development issues specific to its rugged highland geography. In 1999, Indramani Badoni, one of the original hunger strikers of 1994 and a long-time stalwart of the UKD breathed his last. The party pledged to take up his work as a tribute to his tireless efforts on behalf of the region. In 2000, the state of "Uttaranchal" was created. While welcomed as a major victory by the people, the state's creation was only a partial success as the manner in which it was formed completely disregarded the movement that gave it birth. In the post-statehood period, the UKD has continued to speak out for the rights of the average citizens of state, while pressing to complete the unfinished business of the Uttarakhand Andolan, including defending the state's social and cultural identity as embodied by its true name, Uttarakhand, locating its permanent capital at Gairsain, and fighting for greater grassroots democracy and the basic rights of Uttarakhandi people. We have long stressed that only through a new Uttarakhand can a new India be constructed with a renewal of democracy and the human and social rights of its diverse citizens.

आज का दिन हमारे मन को हमेशा से विचलित करता रहा है। वर्ष 1994 में, जब मैं और हमारे कई साथी इसी दिन दिल्ली में थे, तब प्रा...
02/10/2026

आज का दिन हमारे मन को हमेशा से विचलित करता रहा है। वर्ष 1994 में, जब मैं और हमारे कई साथी इसी दिन दिल्ली में थे, तब प्रारंभ में हमें केवल इतना पता चला कि कोई अप्रिय घटना हुई है। लेकिन जब सुबह कुछ साथी घायल अवस्था में दिल्ली पहुँचे, तब रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर की उस भयावह घटना की पूरी तस्वीर सामने आने लगी।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की सरकार के समय रामपुर तिराहा में आंदोलनकारियों पर जिस तरह का दमन और हिंसा हुई, वह उत्तराखंड के इतिहास का एक अत्यंत पीड़ादायक और काला अध्याय बन गया। अनेक आंदोलनकारी शहीद हुए, अनेक घायल हुए और महिलाओं की अस्मिता के साथ भी गंभीर अत्याचार किए गए। उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक अभिलेख भी रामपुर तिराहा की घटना को राज्य आंदोलन के इतिहास का अत्यंत क्रूर अध्याय बताते हैं।

यही कारण है कि 2 अक्टूबर का दिन हमारे लिए केवल एक स्मृति का दिन नहीं, बल्कि हमें एकजुट होकर उत्तराखंड के लिए संघर्ष करने के लिए मंथन का दिवस भी है I
यह भी अत्यंत अफसोसजनक है कि जिस राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उस राज्य में तीन दशक बाद भी रामपुर तिराहा कांड के सभी दोषियों को न्याय के कठघरे तक पहुँचाने का संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आज भी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और विभिन्न आरोपियों के विरुद्ध मामलों की स्थिति पर प्रश्न बने हुए हैं। वर्ष 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तत्कालीन मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह के विरुद्ध मामले की वर्तमान स्थिति बताने के लिए CBI से रिपोर्ट मांगी थी।

रामपुर तिराहा कांड के संदर्भ में यह भी गंभीर प्रश्न रहा है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही किस प्रकार तय हुई और बाद के वर्षों में उनके विरुद्ध चलने वाली कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में गई। उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों के अनुसार, तत्कालीन जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह के विरुद्ध CBI की कार्रवाई और बाद की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चली; 2003 में उत्तराखंड हाईकोर्ट की एक पीठ ने उनके विरुद्ध CBI की कार्यवाही को निरस्त कर दिया था।

मुलायम सिंह यादव को वर्ष 2023 में नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। रामपुर तिराहा कांड की स्मृति और उस घटना में शहीद हुए आंदोलनकारियों के परिजनों तथा उत्तराखंड की जनता की भावनाओं के संदर्भ में यह सम्मान उत्तराखंड को अपमानित करने वाला था । नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा मुलायम सिंह यादव को दिया गया मरणोपरांत पद्म विभूषण उत्तराखंड आंदोलनकारियों के बलिदान का अपमान है ।

हमारे लिए यह पीड़ा इसलिए भी गहरी है कि जिन लोगों ने उत्तराखंड की अस्मिता और राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनके बलिदान की स्मृति के साथ न्याय होना अभी भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

रामपुर तिराहा के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।

उत्तराखंड आंदोलन के सभी शहीदों और आंदोलनकारियों को कोटि-कोटि नमन।

जय भारत, जय उत्तराखण्ड
Kashi Singh Airy
Uttarakhand Kranti Dal

02/10/2026

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, भारत-रत्न लालबहादुर शास्त्री जी की जयंती पर सादर नमन।
Kashi Singh Airy
Uttarakhand Kranti Dal

01/10/2026

आज उत्तराखण्डवासियों के प्रेरणास्रोत, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं पेशावर कांड के नायक स्वर्गीय चंद्र सिंह गढ़वाली जी की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर उनकी अदम्य साहस, देशभक्ति और उत्तराखण्ड के प्रति उनके योगदान को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

हमने 90 के दशक में प्रस्तावित उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी गैरसैंण घोषित कर, उनके नाम पर चंद्रनगर राजधानी की परिकल्पना का सूत्रपात किया था। आज सरकारें गैरसैंण के नाम पर नित नए नाटक करती हैं, लेकिन चंद्र सिंह गढ़वाली जी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब चंद्रनगर (गैरसैंण) को उत्तराखण्ड की स्थायी राजधानी बनाया जाएगा।

उत्तराखण्ड की इस महान विभूति के साहस, संघर्ष और विचारों से हमें सदैव प्रेरणा मिलती रहेगी। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कृतज्ञतापूर्वक नमन एवं भावपूर्ण स्मरण।

पेशावर कांड के महानायक चंद्र सिंह गढ़वाली जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।

जय भारत, जय उत्तराखण्ड
Kashi Singh Airy
Uttarakhand Kranti Dal

उत्तराखंड छात्र संगठन (USF) के सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। सीमित संसाधनों के बावजूद जिस...
30/09/2026

उत्तराखंड छात्र संगठन (USF) के सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। सीमित संसाधनों के बावजूद जिस उत्साह, संघर्ष और समर्पण के साथ आप सभी ने यह चुनाव लड़ा और विजय प्राप्त की, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। यह सफलता आपकी मेहनत, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता और छात्रहित के लिए आपके संकल्प का परिणाम है।

इन चुनावों में जिस प्रकार जनता और युवाओं का रुझान दोनों राष्ट्रीय दलों से हटकर उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की ओर बढ़ रहा है, वह एक शुभ एवं महत्वपूर्ण संकेत है। यह बदलाव उत्तराखंड की युवा पीढ़ी में अपने राज्य, अपने अधिकारों और क्षेत्रीय मुद्दों के प्रति बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाता है।

मुझे विश्वास है कि आने वाले चुनाव में इस बदलते जनरुझान का प्रभाव उत्तराखंड की राजनीति में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पुनः बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है कि आप सभी छात्रहित और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे।

जय भारत, जय उत्तराखंड
Kashi Singh Airy
Uttarakhand Kranti Dal

28/09/2026

उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा शीघ्र ही ‘उत्तराखंड स्वाभिमान संकल्प यात्रा’ निकाली जाएगी, जिसका शुभारंभ हल्द्वानी से होगा। यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए जन-सरोकारों से जुड़े मुद्दों को सामने लाएगी और हल्द्वानी में ही इसका समापन होगा।

उत्तराखंड क्रांति दल जन-सरोकारों के लिए संघर्षरत सभी जन-संगठनों, सामाजिक संगठनों एवं क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन के साथ संवाद और चर्चा करेगा।

उत्तराखंड के हितों और जन-सरोकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए 25 अक्टूबर को हल्द्वानी में एक मंथन कार्यक्रमआयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के सामाजिक संगठनों, जन-संगठनों तथा क्षेत्रीय राजनीतिक संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि उत्तराखंड के भविष्य और जनहित के मुद्दों पर सामूहिक रूप से विचार किया जा सके।

‘उत्तराखंड बसाओ, उत्तराखंड बचाओ’ की नीति के तहत हम सभी संगठनों को एकजुट कर उत्तराखंड के हितों की मजबूती से आवाज उठाएंगे और जन-सरोकारों से जुड़े मुद्दों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।

जय भारत, जय उत्तराखंड
Kashi Singh Airy
Uttarakhand Kranti Dal

27/09/2026
27/09/2026

बद्रीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर हुए शोर-शराबे, डी. जे बजाने के मामले में भाजपा सरकार और प्रशासन अपना पल्ला झाड़ते हुए सेना को क्यों फँसा रही है ?

चमोली के DM अब कह रहे हैं कि 'देवभूमि महोत्सव' के कार्यक्रमों या पेमेंट में ज़िला प्रशासन की "कोई भूमिका" नहीं थी, इसे सेना ने आयोजित किया था, और बिना पहले से इजाज़त लिए बद्रीनाथ में इसके आयोजन के लिए एक नोटिस जारी किया गया है।

लेकिन उनके अपने ऑफ़िस की फ़ाइलें कुछ और ही कहती हैं।

08.09.2026 — DM गौरव कुमार का आदेश: बद्रीनाथ टूरिस्ट अराइवल प्लाज़ा (19–20 सितंबर) में होने वाले 'देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026' के लिए चमोली के CDO को नोडल ऑफ़िसर नियुक्त किया गया और उन्हें सभी इंतज़ाम पक्के करने का निर्देश दिया गया।

09.09.2026 — उसी ऑफ़िस से SP, CDO, CMO, पर्यटन विभाग, नगर पालिका बद्रीनाथ, GMVN, CO गढ़वाल स्काउट्स ज्योतिर्मठ, ट्रांसपोर्ट और अन्य को पत्र (8706 / 8796) भेजे गए: इस फ़ेस्टिवल के सफल आयोजन के लिए तालमेल की समीक्षा बैठक।

बैठक 10.09.2026 को सुबह 11:30 बजे CDO की अध्यक्षता में बुलाई गई। इसमें सेना की यूनिट के 11 अगस्त के पत्र का हवाला दिया गया।

CM धामी समापन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए और सेना व ज़िला प्रशासन को सार्वजनिक रूप से बधाई दी।
DJ / "बाज़ारी संस्कृति" वाले विवाद के बाद, वही DM सेना को नोटिस जारी करते हैं और दावा करते हैं कि ज़िले ने सिर्फ़ स्कीम के स्टॉल लगाए थे।

अगर कार्यक्रम बद्रीनाथ धाम के लिए सही नहीं था, तो नोडल ऑफ़िसर और 10 सितंबर की तालमेल बैठक में शामिल लोगों को सबसे पहले जवाब देना चाहिए। पहले दस्तावेज़ देखें। बाद में पल्ला झाड़ने की बात करें।

असलियत क्या है? दस्तावेज़ कुछ और ही बताते हैं।

आप भाजपा सरकार और प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए जिलाधिकारी चमोली के माध्यम से झूठ फैलाया जा रहा है ?

क्या हमारी सेना और उसके कमांडिंग ऑफ़िसर को निशाना बनाना ही सबसे आसान रास्ता है ?

क्या भाजपा सरकार और प्रशासन द्वारा अपनी गलतियों के लिए हमारी सेना
और उसके अधिकरियों को जिम्मेवार ठहराना उचित है ? क्या ये हमारी सेना और सैन्य अधिकारीयों का अपमान नहीं है ?

मुख्यमंत्री धामी जवाब दें ?

Kashi Singh Airy
Uttarakhand Kranti Dal

जानकारी : कर्नल(रि) आर. एस जमवाल की X पोस्ट से(हिंदी रूपांतरण)

27/09/2026

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Kranti Bhawan, 10 Court Road
Dehra Dun
248001

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