क्या विडंबना है उत्तराखंड की राजनीति की —
एक ओर सरकार दूसरों पर मुकदमे दर्ज करवाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी ओर जिन लोगों पर करोड़ों की जमीन की रजिस्ट्री तथ्यों को छुपाकर कराने एवं कोर्ट रचित दस्तावेजों को तैयार करके और कथित रूप से भाजपा को ही ठगने के आरोप हैं, उन पर आज तक मुकदमा तक दर्ज नहीं हो पाया। और ना ही अपनी धनराशि वसूल पाई
सवाल उठना स्वाभाविक है —
क्या सत्ता के भीतर कुछ लोग ऐसे लोगों को संरक्षण दे रहे हैं?
यदि आम नागरिक पर छोटी सी शिकायत में तत्काल FIR हो सकती है, तो करोड़ों के भूमि प्रकरणों में अब तक कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं?
जनता जवाब चाहती है।
“ज़ीरो टॉलरेंस” केवल भाषणों तक सीमित रहेगा या फिर अपने करीबियों पर भी कानून समान रूप से लागू होगा?..
Vikesh Singh Negi
I am an Advocate and RTI Activist
कब तक बिकती रहेंगी सरकारी ज़मीनें? जवाब दो सरकार.!
भू-माफिया के आगे नतमस्तक देहरादून का जिला प्रशासन.!
मैं, एडवोकेट विकेश सिंह नेगी, आज सिर्फ आक्रोश में नहीं—बल्कि इस सिस्टम की चुप्पी से आहत होकर लिख रहा हूं। क्या कानून अब सिर्फ किताबों की शोभा बनकर रह गया है? क्या उत्तराखंड की सरकारी जमीनें अब खुलेआम नीलामी का मैदान बन चुकी हैं?
आरटीआई के जरिए मैंने जो सच सामने रखा, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला है—
करोड़ों-अरबों की सरकारी जमीनें भू-माफियाओं के हाथों बेची-खरीदी जा रही हैं। मैंने लाडपुर और रायपुर के चाय बागान क्षेत्रों में अवैध कब्जों के खिलाफ लंबी और कड़ी लड़ाई लड़ी। मेरे प्रयासों से लगभग 3000 बीघा से अधिक जमीन अतिक्रमण मुक्त हुई—वो जमीन जो जनता की थी, सरकार की थी, और जिसका सही इस्तेमाल हो सकता था।
लेकिन आज?
आज वही प्रशासन मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा है!
भू-माफिया खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं—और जिम्मेदार अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं।
देहरादून में सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग से लगी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध खरीद-फरोख्त हो रही है। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है—हर दिन सैकड़ों लोग, पत्रकार इस रास्ते से गुजरते हैं। सब देखते हैं, सब जानते हैं—लेकिन सच लिखने और बोलने की हिम्मत कोई नहीं करता!
भू-माफिया के आगे नतमस्तक प्रशासन!
आज यह कहने में मुझे कोई हिचक नहीं कि देहरादून का जिला प्रशासन पूरी तरह से दबाव में है या फिर मिलीभगत में! जिलाधिकारी सबिन बंसल सुर्खियों में हैं, जनता के मुद्दों पर सक्रिय भी दिखते हैं—लेकिन क्या कारण है कि रिंग रोड की जमीनों को निगलते भू-माफिया उनकी नजरों से ओझल हैं?
मेरी वर्षों की मेहनत, संघर्ष और अपना पैसा—सब कुछ दांव पर लगाकर मैंने सरकारी जमीनों को बचाने की कोशिश की। लेकिन आज उसी मेहनत को इस सिस्टम ने रौंद दिया है।
क्या ईमानदारी अब इस व्यवस्था में बोझ बन गई है?
क्या सच बोलना अब गुनाह हो गया है?
अब सवाल सीधे हैं—
क्या सरकार इस खुली लूट पर लगाम लगाएगी.?
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या सब यूं ही चलता रहेगा.?
या फिर उत्तराखंड की जमीनें यूं ही टुकड़ों में बिकती रहेंगी.?
अगर आज भी हम चुप रहे, तो इतिहास गवाह रहेगा—
कि हमने अपनी जमीनें नहीं, अपना भविष्य बेच दिया था।
03/05/2026
*महान कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण ने उपरोक्त कार्टून 60 साल पहले बनाया था, लेकिन वर्तमान संदर्भ में यह कितना सटीक साबित हो रहा है।*
आप सभी का हृदय से धन्यवाद
मेरे जन्मदिन पर आपने जो स्नेह, शुभकामनाएँ और आशीर्वाद दिया, उसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी हूँ। आपके प्रेम और विश्वास ने इस दिन को मेरे लिए और भी विशेष बना दिया।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें।
“तीर्थ में गूंजे ‘हेमन्त द्विवेदी मुर्दाबाद’ के नारे…और बीकेटीसी बोले—सब कंट्रोल में है!”
अगर ये वीडियो एआई की करतूत नहीं है,
तो फिर साफ है-मंदिर समिति में कुछ तो गड़बड़ जरूर है। जहां आस्था होनी चाहिए, वहां आक्रोश दिख रहा है, और जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वो जैसे मूकदर्शक बन रहा है।
हेमंत द्विवेदी जी से बद्री-केदार मंदिर समिति संभल नहीं रही, या फिर हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब छुपाए नहीं छुप रही.? सरकार को यह तय करना होगा- मंदिर व्यवस्था से चलेगा या नारों के सहारे.?
01/05/2026
महात्मा बुद्ध के चारों ओर अज्ञान से ज्ञान, अशांति से निर्वाण और सीमित से असीम की यात्रा निरंतर चलती रहती है। यदि हम उनके उपदेशों का अंशमात्र भी आत्मसात कर लें, तो जीवन की जटिलताएँ स्वतः सरल प्रतीत होने लगेंगी। आज बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर, आइए भीतर झांकें, अपने विचारों को परिष्कृत करें और उस शांति को खोजें, जिसकी ओर महात्मा बुद्ध ने संकेत किया था। बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।
29/04/2026
“जब मशाल ही नकली है, तो मुद्दा भी नकली है—महिला आरक्षण 2023 में पूर्ण बहुमत से कानून बन चुका है; अब राजनीति सिर्फ उसके नाम पर की जा रही है।”यदि धामी सरकार वाकई राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना चाहती है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट दें यानी 25 टिकट। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि महिलाओं के प्रति अपराध भी कम हो। अंकिता भंडारी केस के वीआईपी को जनता के सामने लाएं। वरना नकली मशाल जुलूस निकालने से अब प्रदेश के लोगों को भ्रमित नहीं किया जा सकता है।
27/04/2026
*RTI में बीकेटीसी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा*
*दर्जाधारी राज्यमंत्री ने पत्नी को नियुक्त किया अपना चपरासी !*
प्रसिद्ध बदरीनाथ व केदारनाथ धामों का प्रबंधन देखने वाली श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) यात्रा व्यवस्था कायम करने में विफल साबित हो रही है। मगर उसके पदाधिकारी श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन को ठिकाने लगाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बीकेटीसी में उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त दर्जा राज्यमंत्री विजय कप्रवाण अपनी पत्नी को अपने साथ अनुचर (चतुर्थ श्रेणी कार्मिक) दिखा कर बारह हजार रूपये प्रतिमाह भुगतान ले रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने उक्त आरोप लगाते हुए बताया कि उनके द्वारा बीकेटीसी से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों- करोड़ों सनातनियों की आस्था व श्रद्धा के केंद्र बदरीनाथ व केदारनाथ धामों को बीकेटीसी के पदाधिकारियों ने भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न निगम व बोर्डों में तैनात दायित्वधारियों को सरकारी कार्मिक उपलब्ध नहीं होने की दशा में निजी स्तर पर एक वैयक्तिक सहायक व एक चतुर्थ श्रेणी कार्मिक नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। वैयक्तिक सहायक को पंद्रह हजार और चतुर्थ श्रेणी कार्मिक को बारह हजार रूपये प्रतिमाह का प्रावधान किया गया है।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि बीकेटीसी में जरुरत से ज्यादा अस्थायी कार्मिक नियुक्त हैं। मगर उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने बीकेटीसी के कार्मिकों को संबद्ध करने बजाय अपने पड़ोस के एक युवक को वैयक्तिक सहायक के रूप में दर्शाया है। हैरानी की बात यह है कि बीकेटीसी जैसी प्रतिष्ठित धार्मिक संस्था के उपाध्यक्ष ने सारी नैतिकता ताक पर रख कर अपनी पत्नी को ही अपने साथ चतुर्थ श्रेणी कार्मिक दर्शा कर बारह हजार रूपये प्रतिमाह का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा की शासन ने सरकारी कार्यालय व आवास उपलब्ध नहीं होने की दशा में दायित्वधारियों के लिए पच्चीस हजार रूपये प्रतिमाह का प्रावधान किया है। बीकेटीसी का मुख्यालय जोशीमठ और कैंप कार्यालय राजधानी देहरादून में स्थित है। देहरादून कार्यालय में उपाध्यक्ष को भी कक्ष आवंटित है। मगर इसके बावजूद कप्रवाण अपना आवास व कार्यालय रुद्रप्रयाग में दर्शा कर भत्ते के रूप में प्रतिमाह पच्चीस हजार रूपये ले रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि कार्यालय और आवास की व्यवस्था मुख्यालय अथवा कैम्प कार्यालय वाले स्थान में ही हो सकती है। मगर कप्रवाण ने अपने गृह नगर रुद्रप्रयाग में आवास और कार्यालय दर्शाया हुआ है। कार्यालय में फर्नीचर इत्यादि भी बीकेटीसी के पैंसे से खरीदा गया। उन्होंने आश्चर्य जताया कि बीकेटीसी द्वारा मंदिर समिति एक्ट और शासनादेशों का उल्लंघन कर कप्रवाण को लगातार भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
25/04/2026
कभी-कभी सही समय पर उठाई गई आवाज़ बदलाव की दिशा तय कर देती है।
मैंने प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया था कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) की जिम्मेदारी नियमानुसार किसी वरिष्ठ आईएएस या अनुभवी पीसीएस अधिकारी को दी जानी चाहिए। सरकार ने इस पर निर्णय लेते हुए जिम्मेदारी जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को सौंपी, लेकिन मैंने यह भी स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी पहले से ही अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों में व्यस्त रहते हैं।
बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के बीच की दूरी, यात्रा सीजन का दबाव और व्यवस्थाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए यह जरूरी था कि कोई ऐसा अधिकारी नियुक्त हो, जो पूरी तरह से यात्रा प्रबंधन पर फोकस कर सके और लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे।
अब पीसीएस अधिकारी सोहन सिंह को मुख्य कार्याधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। यह निर्णय न केवल व्यावहारिक है, बल्कि यात्रियों की सुविधा और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम भी है।
आशा है कि इस फैसले से चारधाम यात्रा और अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सहज बनेगी।
पहले दिन-रात भाजपा को कोसो,
नेताओं पर तीखे वार करो…
फिर एक दिन “ऑफर” आएगा,
और आप सीधे वाशिंग मशीन में।
अंदर गए—तो सारे पुराने पाप साफ,
बाहर निकले—तो आप राष्ट्रभक्त और पवित्र घोषित।
कल तक विरोधी, आज विचारधारा के सिपाही
जैसे Raghav Chadha
राजनीति में चरित्र नहीं,
वाशिंग मशीन ही असली पहचान है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Website
Address
Dharampur
Dehra Dun
248001
