नवक्रांति

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भ्रष्टाचार के खिलाप सामाजिक चेतना

07/07/2025

के दो मशहूर गुंडों के आगे क्यों हैं भारत की न्याय व्यवस्था पस्त
#नमोनारायण

29/03/2025

खानवा का युद्ध । Battle of Khanwa was fought on 16 March 1527 between Ranae Sanga and Babar.
#नमोनारायण

03/01/2025

बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर कृत संविधान का पुरोला में चुनाव आयोग खुलकर कर रहा है अपमान । मनरेगा श्रमिको को आयोग दे रहा है नगर पालिका चुनाव लड़ने की इजाजत, आधे के करीब मतदाता भी है मनरेगा श्रमिक। The Election Commission is openly insulting the Constitution written by Babasaheb Dr. Bhimrao Ambedkar in Purola. The Commission is giving permission to MNREGA workers to contest municipal elections, almost half of the voters are MNREGA workers.

गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर कृत भारत के संविधान में प्रदत अधिकारों के तहत भारत की संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार सरकार ग्रामीणों को 100 दिन रोजगार की गारंटी देती है। मनरेगा के अनेक प्रावधानों में से एक प्रावधान ये भी है कि उक्त व्यक्ति को किसी भी गांव का निवासी होना चाहिए न कि किसी शहर का निवासी होना चाहिए।

स्पष्ट है कि जो व्यक्ति या परिवार गांव में रहकर अपनी आजीविका चला रहा है वहीं व्यक्ति मनरेगा के अंतर्गत लाभ लेने का पात्र है । अब जो व्यक्ति किसी गांव में मनरेगा के तहत लाभ का पात्र है वो व्यक्ति किसी शहर का निवासी हो ही नहीं सकता है। अब जो व्यक्ति किसी शहर का निवासी ही नहीं है वो व्यक्ति उस शहर का मतदाता बन कैसे गया।

इतनी बड़ी तादात में मनरेगा श्रमिकों को पुरोला निकाय में पहले मतदाता बनाना व उसके बाद उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत देना देश के संविधान का बहुत बड़ा अपमान ही नहीं अपितु लोकतन्त्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

असल सवाल अब भी यही है कि एक व्यक्ति जो मनरेगा श्रमिक हैं ,अभी तो नगर पालिका पुरोला के चुनाव प्रभावित कर रहा है व 6 महीने बाद अपनी मूल ग्राम पंचायत के चुनाव को प्रवाहित करेगा । खैर जब पूरे देश में भ्रष्टाचार चरम पर हो तो चुनाव कराने की की जरूरत ही क्यों है। सीधे तौर पर नामित व्यक्तियों को ही पदभार दिया जाना चाहिए।

#नमोनारायण

02/01/2025

उत्तरकाशी जनपद में भाजपाइयों को मच्छी खाने की सलाह क्यों दे रही जनता । अहम ठेकों में सर्वाधिक कांग्रेसियों की हिस्सेदारी का भुगतना पड़ सकता हैं खामियाजा। सड़क निर्माण हो या नदी नालों में चल रहे विनाश कार्य, हर तरफ भाजपा कार्यकर्ता हाशिए पर । कबर स्टोरी में जानिए भाजपा का कथित दलित मोर्चा कैसे बन रहा कांग्रेस उम्मीदवारों की रीड। Congressmen's stake in important contracts may have to bear the brunt. Be it road construction or ongoing destruction work in river drains, BJP workers are marginalized everywhere. Know in Kabar Story how BJP's alleged Dalit Morcha is becoming the read of Congress candidates.

गजेन्द्र सिंह चौहान, पुरोला

राजनीतिक सह मात के खेल में उत्तरकाशी जनपद में भाजपा का सुपड़ा साफ होते लोकसभा चुनाव में सबने देखा । बावजूद भाजपा के नीति निर्धारकों ने सबक नहीं सिखा । यहां ये भी जानना जरूरी है कि जनपद उत्तरकाशी में भाजपा की करारी हार के पीछे पुरोला विधानसभा में कार्यकर्ताओं में उत्पन व्यापक आक्रोश था । किंतु भाजपा हाइकमान ने इसे मात्र रानी के खिलाफ असंतोष मान हार की जिम्मेदारी लेना मुनासिब नहीं समझा। ये भी जानना जरूरी है कि अगर असंतोष रानी के खिलाफ था तो रानी जीती कैसे । चुनाव के परिणाम से स्पष्ट हो गया था कि असंतोष रानी के खिलाफ नहीं था अपितु कार्यकर्ताओं की व्यापक अनदेखी इसका प्रमुख कारण था।

खैर लोकसभा चुनाव के नतीजों से सिख न लेकर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का सिलसिला अनवरत जारी रहा। मात्र अनदेखी ही असंतोष की प्रमुख वजह नहीं है अपितु सड़क निर्माण से लेकर नदी नालों में चल रहे विनाश कार्यों के सभी ठेकों में कांग्रेसियों की बड़ी हिस्सेदारी सबसे बड़ी वजह है।

विगत तीन वर्षों में भाजपा ने कांग्रेस के परम्परागत वोट बैंक में बड़ी सेंध मारते हुए कथित दलित मोर्चे पर शत प्रतिशत ध्यान लगाया । किंतु कथित दलित मोर्चे पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की वजह से भाजपा अपने परम्परागत वोट बैंक को भूल गई व उन्हें बंधुआ वोटर समझ बैठी।

कथित दलित मोर्चे पर शत प्रतिशत ध्यान देने से वास्तविक दलितों का बीजेपी से मोहभंग हो गया व उन्हें कांग्रेस की ओर लौटना पड़ा। वहीं एक तरफ कथित दलित मोर्चे ने निकाय चुनाव की रणभेरी बजते ही खुलकर कांग्रेस को समर्थन दे दिया व दूसरी तरफ पार्टी का परम्परागत वोट बैंक पहले से नाराज बैठा हुआ है ।

एक तरफ तो भाजपा पर माया मिली न राम की कहावत चरितार्थ हो रही है वही लोकल कहावत अब खा माछ कि सलाह भाजपा पदाधिकारियों को सुननी पड रहीं है, जिसका शाब्दिक अर्थ अब मछली खालों ।

11/12/2024

उत्तराखंड के दो राजनेता जिनपर नहीं लगते भ्रष्टाचार के आरोप । आखिर क्या खास हैं इन नेताओं में जो इनकी लोकप्रियता को रख रही हैं बरकरार। आज की कबर स्टोरी में उत्तराखंड को भ्रष्टाचार के दलदल में झोंकने वाले शासकों पर एक परिचर्चा । Two politicians of Uttarakhand who do not face corruption charges. After all, what is special about these leaders that is keeping their popularity intact? In today's Kabar Story, a discussion on the rulers who plunged Uttarakhand into the quagmire of corruption.

गजेंद्र सिंह चौहान

उत्तराखंड राज्य अपनी स्थापना के समय से ही भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता चला गया है। बात उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी की हो या सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे जनरल खंडूरी। हर मुख्यमंत्री के शासन में भ्रष्टाचार फला व फूला है। राज्य स्थापना से अबतक जितने भी विधायक हुए है सभी पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगने के बावजूद उनकी लोकप्रियता में भारी इजाफा हुआ है। यानी कि जिस राजनेता को जनता जितना भ्रष्ट मानती अमुक नेता जनता के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। भ्रष्टाचार के आगे उत्तराखंड की जनता इतनी बेबस हो चुकी है कि भ्रष्टाचार की बात करने वालों को यहां सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता है। यहां मंत्री हो या संत्री सब भ्रष्टाचार के हमाम में नहाकर जन सेवक बने बैठे हैं।

भ्रष्टाचार की हद यहां तक हैं कि अगर आपकी नहर टूटी हुई है, खेत सुख गए हैं तो पहले आपको चढ़ावा चढ़ाना होगा तभी आपकी नहर ठीक होगी । उत्तराखंड का चाहे पूर्व मुख्यमंत्री हो, मंत्री हो, विधायक हो या वर्तमान के मंत्री संत्री जनता के नजर में ये महाभ्रष्टाचारी के साथ महानायक भी हैं। क्योंकि उत्तराखंड की जनता के दिलों दिमाग में यहां के भ्रष्ट नेता व अधिकारी ये बात फिट करने में कामयाब हुए हैं कि भ्रष्टाचार से राष्ट्र का निर्माण होता है।
सवाल ये उठता है कि यहां की जनता भ्रष्टाचार को इतना क्यों पूजते है? यहां के नेता इतना धन क्यों इकठ्ठा करते है। तो उसका सबसे बड़ा कारण है कि यहां छोटा चुनाव लड़ने के लिए एक करोड़ रुपए चाहिए । विधायक बनने के लिए तो 20 करोड़ से ऊपर का काला धन आपके पास होना चाहिए, नहीं तो आपको ढूंढने पर भी कार्यकर्ता नहीं मिलेंगे ।

इसका एक ज्वलंत उदाहरण आजकल खुद मेरे साथ भी देखने को मिल रहा है, जबसे मैने आगामी नगर पालिका अध्यक्ष पुरोला चुनाव लड़ने का ऐलान किया है तब से हर कोई मुझसे एक ही बात कर रहा है, क्या आपके पास डेढ़ करोड़ है?

जब हर कोई डेढ़ करोड़ दिखाने की मांग कर रहा हो तो आदमी क्या करे । अब लोगों को मेरे विजन से कोई मतलब न हो, भ्रष्टाचार को गले लगा चुके लोगों को सिर्फ डेढ़ करोड़ के दर्शन करने है।

इन्हीं सब बातों के मद्देनजर मैने अपने सभी बैंक खातों की स्टेटमेंट साथ में रख ली है, अब कोई डेढ़ करोड़ की बात करता है तो मै उसे बैंक खातों की स्टेटमेंट दिखा देता हु व साथ में ये भी कहता हूं कि जिस दिन मै नामांकन करूंगा ये डेढ़ करोड़ आप लोगों के सम्मुख रख दूंगा ।

खैर भ्रष्टाचार के गहरे दलदल में फंसते उत्तराखंड में उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है। यहां विपक्षी दल कांग्रेस के पास दो ऐसे नेता है जो फ्रंटफुट पर खेलने की पूरी कोशिश तो करते है किंतु खुद की ही पार्टी में हाशिए पर धकेल दिए जाते है। पार्टी के भीतर भीतरघात के शिकार ये दो नेता राजनीति में कायम हैं तो सिर्फ एक वजह से है। इन दोनों नेताओं के बारे में एक बात काफी सुनी जाती हैं कि ये किसी भी कार्यकर्ता से न तो झूठ बोलते है ओर न ही काम के बदले में किसी कार्यकर्ता से पैसे की मांग करते हैं। खैर यहां हम बात कर रहे है पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल व प्रीतम सिंह की ।

उपरोक्त दोनों नेताओं की लोकप्रियता में भ्रष्टाचार का दामन कही नहीं सुना जाता हैं। यही कारण है कि समय समय पर पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बावजूद दोनों नेता अधिक समय तक उक्त जिम्मेदारीयो का निर्वहन नहीं करते । खैर मकसद किसी भी नेता की बुराई करने का नहीं किन्तु भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे नेताओं की वजह से उत्तराखंड की जनता के भविष्य के निर्माण के लिए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, उच्च शिक्षा संस्थान, अच्छी सड़के व अच्छी नहीं बनने की अपेक्षा यहां नदी नालों में बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे है। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि हम उत्तराखंड के भविष्य को नदी नालों में न बहने दे व भविष्य के लिए ऐसे संस्थानों का निर्माण करे जिससे रोजगार के तमाम अवसर पैदा हो व भारत समृद्ध राष्ट्र बने ।

जय हिंद

#नमोनारायण

18/11/2024
18/07/2024

पुरोला को जिला बनाने की मांग को लेकर पंडित शांति प्रसाद सेमवाल के नेतृत्व में ज्ञापन प्रेषित । memorandum was sent under the leadership of Pandit Shanti Prasad Semwal demanding to make Purola a district.

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