12/10/2026
प्रसारण: रात 8 बजे
12 अक्टूबर 2026
https://www.youtube.com/live/VAHTgIulKX8
*Live: 12 October 8pm*
_लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती (11 अक्टूबर) और प्रखर समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि (12 अक्टूबर) के अवसर पर भारतीय लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जन-आंदोलनों की वर्तमान दिशा पर एक महत्वपूर्ण विमर्श।_
एक ओर संसद में विपक्ष की सक्रियता और सत्ता से जवाबदेही की मांग, तो दूसरी ओर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं, जातिगत असमानता और नागरिक अधिकारों को लेकर सड़कों पर उठती आवाजें।
क्या यह लोकतांत्रिक चेतना के नए दौर का संकेत है?
क्या लोहिया की सप्तक्रांति और जेपी की सम्पूर्ण क्रांति आज के भारत में नए रूप में प्रासंगिक हो रही हैं?
या फिर राजनीति सत्ता परिवर्तन तक सीमित रह गई है और समाज परिवर्तन का सपना अभी अधूरा है?
🔥 चर्चा के प्रमुख सवाल
🔹 संसद बनाम सड़क नहीं, संसद और सड़क का संवाद: क्या लोकतंत्र की मजबूती के लिए दोनों का सक्रिय होना आवश्यक है?
🔹 लोहिया की सप्तक्रांति: जाति उन्मूलन, स्त्री-पुरुष समानता, आर्थिक विषमता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष आज कहां खड़ा है?
🔹 जेपी की सम्पूर्ण क्रांति: क्या केवल सरकार बदलना पर्याप्त है, या राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और शिक्षा में बुनियादी बदलाव जरूरी है?
🔹 जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय: क्या पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों की भागीदारी का प्रश्न नए सामाजिक परिवर्तन की दिशा तय करेगा?
🔹 किसान, मजदूर और युवा आंदोलन: क्या जन-संघर्ष लोकतंत्र को अधिक जवाबदेह बना सकते हैं?
🔹 लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाएं: क्या नागरिक अधिकारों, असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए व्यापक जनजागरण आवश्यक है?
🔹 विपक्ष की भूमिका: क्या संसद में बढ़ती राजनीतिक बहसें जनसरोकारों को नीतियों में बदल पाएंगी?
🔹 नई पीढ़ी और समाजवादी विचारधारा: क्या आज के युवा जेपी और लोहिया के विचारों से नई प्रेरणा ले सकते हैं?
✊ सत्ता परिवर्तन या समाज परिवर्तन?
डॉ. लोहिया ने जाति, लिंग और आर्थिक असमानता के खिलाफ संघर्ष को सामाजिक परिवर्तन के केंद्र में रखा।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 1974 में सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान करते हुए राजनीति के साथ समाज और व्यक्ति के नैतिक परिवर्तन पर भी जोर दिया।
दोनों नेताओं की विरासत हमें एक बुनियादी प्रश्न के सामने खड़ा करती है:
क्या हम केवल सत्ता बदलना चाहते हैं, या शोषण, असमानता और अन्याय से मुक्त समाज भी बनाना चाहते हैं?
आज जब संसद में सवाल उठ रहे हैं और सड़कों पर नागरिक अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हैं, तब जेपी और लोहिया के विचारों को नए सिरे से समझना जरूरी है।
क्या सप्तक्रांति और सम्पूर्ण क्रांति का अधूरा सपना आज भी भारत के भविष्य की राह दिखा सकता है?
इन्हीं सवालों पर देखिए बहुजन संवाद का विशेष कार्यक्रम।
सहभाग:
🔹 जागृति राही, सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्त्री
🔹प्रो अरुण त्रिपाठी, समाजवादी चिंतक एवं लेखक
🔹उमाकांत लखेड़ा, वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली
🔹एड.शशांक यादव, पूर्व एमएलसी, सपा
🔹 डॉ आनन्द प्रकाश तिवारी, कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद
🎤 संचालन -डॉ सुनीलम, संस्थापक संपादक, बहुजन संवाद
🔔 बहुजन संवाद — जनता के सवाल, संविधान की आवाज़!
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💬 COMMENT में बताएं — क्या आज के भारत को एक नई सम्पूर्ण क्रांति की जरूरत है?
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जेपी–लोहिया की स्मृति में बहुजन संवाद का विशेष वैचारिक कार्यक्रमसं...