26/01/2026
अभी तो आधे से ज्यादा देश बचा है कब्जा करने के लिए...
जो इतने चालक और कुटिल अंग्रेज सालों में कर पाए वो मो di सर car और उनके परम मित्रों ने 10-12 सालों में ही कर दिया...
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26/01/2026
अभी तो आधे से ज्यादा देश बचा है कब्जा करने के लिए...
जो इतने चालक और कुटिल अंग्रेज सालों में कर पाए वो मो di सर car और उनके परम मित्रों ने 10-12 सालों में ही कर दिया...
26/01/2026
सवाल ये है कि इस फैसले से पहले भी गैर हिंदू वहां जाते रहे होंगे...?
और जाते भी रहे होंगे तो क्या उनकी वजह से ही 2013 की आपदा आई होगी?
या फिर उन हिंदुओं की वजह से जो जाते तो एक धाम में हैं,
लेकिन श्रद्धालुओं की तरह नहीं बल्कि अय्याशों की तरह...
मैं अपना ही किस्सा बताती हूँ,
2018 में मैं जब केदारनाथ गई, तो उधर का वेस्ट (कूड़ा निस्तारण) मैनेजमेंट के नाम पर बेहाली देख कर भयंकर किलस गई थी...
धाम में चढ़ते वक्त एक सरकारी सफाई कर्मचारी से मेरी इसलिए भी तू तू मैं मैं हो गई थी,
कि पर्यावरण मित्र होते हुए भी वो कचरा यूं ही फेंक दे रहा था इतने सुंदर बुग्याल में...
ऊपर से जब मैंने उससे उसके उस व्यवहार की शिकायत की तो मुझसे ही बद्तमीजी से बोलते हुए कहा,
कि इतना ही शौक है सफाई का तो तू ही उठा ले...
खैर मुझे ऐसे फालतू लोगों की फालतू बातों से कोई फर्क तो पड़ता नहीं..लेकिन
दूसरे दिन भैरव मंदिर की तरफ खाली बुग्यालों में घूमते हुए उधर 4- 5 लड़के बैठे देखे...
वो अपने साथ खाने पीने की चीजें तो लाए ही थे, साथ ही उधर नशे वाली सिगरेट पी रहे थे...
अब वो क्या कर रहे क्या नहीं उससे मुझे ज्यादा मतलब नहीं होता,
लेकिन जब उन्होंने नमकीन, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक खा पी कर प्लास्टिक ऐसे ही फेंक दिया,
तो मैंने; जो कि एक बोरा लेकर भैरव मंदिर के बुग्यालों का कचरा उठा रही थी;
उनको खूब सुना दिया...
मन में एक बार नहीं सोचा कि ये नशे में हैं...
लेकिन मैंने उनको खूब ज्ञान दिया...
उन्होंने भी कुछ बोला नहीं अपना कचरा उठाया, मेरे बोरे में डाला और उधर से चले गए,
ये बोलकर कि मूड खराब कर दिया...
लेकिन रात में उधर कुछ विदेशी लोगों का ग्रुप आया और धाम से वापसी में ऑस्ट्रेलिया के 2 व्यक्तियों से बात हुई...
लेकिन उनके संस्कार देख कर लगा ये कोई श्रद्धालुओं की तरह आए नहीं...
लेकिन फिर भी इनके अंदर नेचर या रिलिजियस टूरिज्म को लेकर कितनी सेंसिबलिटी है...
हम हिंदू हिंदू होने का इतना ढिंढोरा तो खूब पीटते हैं,
तमाम तरह के हिपोक्रेसी दिखाते रहते हैं...
लेकिन कभी अपने अंदर झांक कर नहीं देखते कि हम अगर कहीं पीछे हैं,
तो क्यों हैं?
खराब हैं तो क्यों हैं?
अब तो हमने बस दूसरे धर्मों पर हर बात की जिम्मेदारी डालनी सीख ली है...
और वैसे भी
गैर हिंदू तो वहां आते भी नहीं।
दलितों को तुम मंदिरों में घुसने नहीं देते...
दूसरा तुमने उनकी जिंदगी में इतना स्ट्रगल दे रखा है कि
उनकी लाइफ में इतना सुकून भी नहीं है लाइफ में कि वो मंदिरों में घूमते फिरें...
दूसरा क्या जैन, सिख, बौद्ध, क्रिश्चन (देसी/विदेशी/अंग्रेज) के जाने पर भी प्रतिबंध होगा... 😅
अभी तो ये जनता को खून के आंसू रुलाएगा
अपने देश के हिंदू हिंदू नहीं हैं बल...
आपका पैसा इनकी जेब में जा रहा है...
😂
देश की एकता तोड़ने के बाद अब जनता के घरों को तोड़ने पर आ गए
भारत का डंका खूब जोरों से बजा रहे हैं डंकापति
इनको झूठ बोलना भी नहीं आता
मोदी जी तो 10 लाख के गर्म गर्म कपड़े पहन कर देश विदेश घूम रहे है.
कागज वाले रूपये...
इन पर असली वालों की तरह चिप नहीं है...
सच में...
इनके तो अच्छे दिन आ गए...
अभी उनके बाकी है आने जो कांग्रेस के समय मिली नौकरियों पर पल रहे हैं...
सबका मकान आयेगा एक दिन जद में...
कोई हमारा मकान ही थोड़े हैं यहां...