29/12/2025
Jawaharlal Nehru BBC Interview : जवाहरलाल नेहरू का साल 1953 का बीबीसी इंटरव्यू देखा आपने? (BBC)
जून, साल 1953 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लंदन में बीबीसी को अपना टेलीविज़न इंटरव्यू दिया था. देख...
29/12/2025
#ख़िराज_ए_अक़ीदत
हकीम अजमल ख़ान, एक ऐसे अज़ीम तबीब, शिक्षाविद् और सच्चे देशप्रेमी थे जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी यूनानी तिब्ब और क़ौम की तामीर के लिए वक़्फ़ कर दी। उनके लिए तिब्ब सिर्फ़ इलाज का ज़रिया नहीं था, बल्कि इंसानियत की ख़िदमत और समाज को सेहतमंद बनाने का एक मुक़द्दस फ़र्ज़ था। इल्म, अख़लाक़ और देशभक्ति का जो संगम उनके व्यक्तित्व में दिखाई देता है, वह आज भी हमें सही राह दिखाता है।
अजमल साहब ने जिस दूरअंदेशी और संकल्प के साथ शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ाया, उसी का नतीजा था Jamia Millia Islamia जैसी इदारे की बुनियाद, जो आज भी तालीम, तहज़ीब और आज़ादी के उसूलों की अमीन है। आज भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और शैक्षिक विरासत को याद करते हुए, हम एहसास करते हैं कि असली क़यादत वही होती है जो आने वाली नस्लों को सोचने, समझने और इंसाफ़ के साथ जीने का हौसला दे।
हकीम अजमल ख़ान की ज़िंदगी हमें यह सिखाती है कि इल्म जब इंसानियत से जुड़ जाए, तो वह सिर्फ़ किताबों तक महदूद नहीं रहता, बल्कि एक तहरीक बन जाता है; ऐसी तहरीक जो समाज को जोड़ती है, मुल्क को मज़बूत करती है और ज़हन व दिल दोनों को रोशन करती है।
आज हम और हमारी टीम हकीम अजमल ख़ान को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हैं और उनके सपनों को मंज़िल तक पहुंचाने का अहद करते हैं!
~ Mohammad Imteyaz (Noorani)
#ख़िराज_ए_अक़ीदत
#यूनानी_तिब्ब
#तालीम_और_तहज़ीब
#जामिया_मिल्लिया_इस्लामिया
#आज़ादी_की_तहरीक
12/12/2025
प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करने वाला व्यापारी होता है, जबकि इंसान में इन्वेस्ट करने वाला ही असल राजनेता कहलाता है...
अफ़सोस की बात यह है कि आज के दौर में बहुत-से नेता इंसानों को इंसान की तरह नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट की तरह देखने लगे हैं। कहीं कोई इलाक़ा “प्रोजेक्ट” बना दिया जाता है, कहीं कोई क़ौम, कहीं कोई तबक़ा; और फिर उसी के हिसाब से “इन्वेस्टमेंट” तय होता है।
यहाँ नेता व्यक्ति के क़द को नहीं बढ़ाता, बल्कि अपने प्रोजेक्ट के नक़्शे पर लोगों की जगह तय करता है। जहाँ उसका फ़ायदा हो, वहाँ बड़े पैमाने पर संसाधन, वादे और तवज्ज़ो दी जाती है; जहाँ फ़ायदा न दिखे, वहाँ की आवाज़ें खामोश कर दी जाती हैं।
ऐसी सोच न सिर्फ़ जम्हूरियत (लोकतंत्र) के लिए ख़तरनाक है, बल्कि जनता के लिए प्रलयकारी सिद्ध हो सकती है। लोकतंत्र तब ही महफ़ूज़ रहता है जब नेता इंसान को इंसान समझकर उसमें भरोसा, तालीम, जागरूकता और तरक़्क़ी का निवेश करे, न कि उसे किसी प्रोजेक्ट की फ़ाइल की तरह इस्तेमाल करे।
सच्ची सियासत वही है जो दिलों में निवेश करे, न कि डाटा शीट में; जो इंसान गढ़े, प्रोजेक्ट नहीं; जो अवाम की तामीर करे, तिजारत नहीं।
Mohammad Imteyaz (Noorani)
01/12/2025
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यह यक़ीन रखें कि आपके भीतर एक और बेहतर मैं छुपा है, बस...
मुझ को मालूम था मैं और सँवर जाऊँगा
घर से निकलूँगा तो हर सम्त बिखर जाऊँगा
राज़ मौजों के समुंदर ने बताए हैं मुझे
यहाँ डूबूँगा कहीं और उभर जाऊँगा
~पी. एस. बेताब
हमेशा यह यक़ीन रखें कि आपके भीतर एक और बेहतर मैं छुपा हुआ है; बस उसे पहचानने की ज़रूरत है। यह एक ऐसा स्वरूप है, जो वक़्त की रग-रग पहचानता है, और जो ख़ुद से सँवरने की क़ाबिलियत भी रखता है। बस आपको अपनी दहलीज़ से आगे बढ़ने की देरी है!
यक़ीन मानिए कि अगर अपने घेरा से निकले तो हर सम्त; हर राह, हर मोड़ पर अपनी मेहनत की रौशनी फैला देंगे, अपना असर छोड़ेंगे, और अपनी पहचान खुद गढ़ेंगे।
ज़िंदगी के मौजों वाले समुंदर से एक अहम राज़ सीखना चाहिए कि डूबना हमेशा हार नहीं होता, कभी–कभी यही डूबना इंसान को नई बुलंदियों तक ले जाता है।
जीवन के किसी मोड़ पर गिर भी पड़ें या
किसी लहर में बह जाएं, तो यक़ीन रखिए, कहीं और, किसी नई साहिल पर, आप पहले से ज़्यादा मज़बूत होकर उभर जाएंगे।
क्योंकि
गिरना क़िस्मत है, लेकिन उठना इख़्तियार है;और उभरना एक अज़्म, एक संकल्प है जो दिल की गहराइयों में छुपा होता है।
हर गिरावट एक नई उठान का दरवाज़ा है; जो अपनी क़ुव्वत पहचान लेता है, वह किसी भी समुंदर में डूबकर भी उभर आता है।
हमारे ज़ुनूं का नतीज़ा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर
अगर वो डूब गया है तो कहीं दूर निकलेगा
~अमीर क़ज़लबाश
Mohammad Imteyaz
11/11/2025
लोकतंत्र की असली पहचान
हर नागरिक करें मतदान...
आज विधानसभा चुनाव का दिन है—
घर से निकलिए, कर्तव्य निभाइए, और लोकतंत्र की आवाज़ बुलंद कीजिए। क्योंकि,
आपका एक-एक वोट आज़ाद सोच और बेहतर भविष्य की अमानत है। यह आपके बच्चों का कल, आपके हक़, और आपके समाज की पहचान है।
कम संख्या में मतदान से फ़ैसले दूसरों के हाथ में चले जाते हैं। इसीलिए, सिर्फ़ आम भीड़ मत बनिए, ऑप्शन में से लायक़ इंसान को चुनिए।
~ख़ुद वोट ज़रूर दें
~अपने दोस्तों-परिवार को भी मतदान के लिए प्रेरित करें
~ सही उम्मीदवार चुनें
16/10/2025
दिल में मोहब्बत है और दल की वफ़ादारी है...
सब्र से बैठा हूँ, पर लड़ने की पूरी तैयारी है...
सियासत के इस सफ़र में हर मोड़ पर इम्तिहान है!
इन मुश्किलों से कह दो हौसला अब भी बिल्कुल जवान है!!
नामांकन का आख़िरी दिन अनक़रीब है, लेकिन दिल में यक़ीन की शम्अ अभी भी जल रही है!
इंतज़ार लम्बा ज़रूर हुआ, पर इरादे न कमज़ोर हुए, न जज़्बात में कमी आई!
राहें बहुत हैं जो गुमराही की तरफ़ ले जा सकती हैं,
मगर मैंने सब्र को अपना हमसफ़र बनाया और सच्चाई को अपना रास्ता!
वक़्त चाहे कितना भी आज़माए,
वफ़ा और सब्र से बढ़कर कोई हथियार नहीं होता!
मैं आज भी उसी जगह, उसी यक़ीन और उसी मोहब्बत के साथ खड़ा हूँ —
फ़र्माबरदार और वफ़ादार!
क्योंकि सियासत में कामयाबी सिर्फ़ आंख मूंदकर दौड़ने वालों को नहीं,
बल्कि सब्र और सच्चे इरादे वालों को मिलती है!
✍️ Mohammad Imteyaz
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Rahul Gandhi Krishna Allavaru Rajesh Kumar Indian National Congress - BIHAR Indian National Congress Shakeel Ahmad Kanhaiya Kumar Bisfi Vidhan Sabha Congress Dr. Shakil Ahmad Khan Dr Akhilesh Prasad Singh Imran Pratapgarhi Priyanka Gandhi Vadra Dr.Madan Mohan Jha Sushil Pasi Subodh Mandal
13/10/2025
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है...
सौभाग्य हर वक़्त ख़ामोश नहीं रहता, कभी-कभी वो भी करवट लेता है। ज़िंदगी की राहों में सब्र और उम्मीद बनाए रखना चाहिए, क्योंकि हर अँधेरा हमेशा के लिए नहीं होता; लेकिन हर अंधेरे के बाद उजियारा होना तय...
~ Mohammad Imteyaz
26/09/2025
खिदमत-ए-ख़ल्क़ और समाज की भलाई के संबंध में, अपने जननेता और मुहतरम सांसद पूर्णिया श्री पप्पू यादव साहब के साथ एक सार्थक संवाद!
संवाद ही बदलाव की आधारभूत नींव है।
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~Mohammad Imteyaz