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Mukesh Barman
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31/07/2022
ब्राह्मण,बनिया और नाई जात देख गुर्राई ????
समय के साथ साथ बड़े बुजुर्ग की इस कहावत का रहस्य समझ आता जा रहा है..
ब्राह्मण हूँ इसलिए ब्राह्मण समाज के लिए ये कहावत सटीक है समझ आता जा रहा है...
आज करोड़ों ब्राह्मणों में कितने ब्राह्मण हैं जो समाज की एकता के लिए दिन रात एक किए हैं शायद उंगली पर गिने जाने लायक संख्या में....
जो परिवार को छोड़कर हफ्तों महीनों देश भर में घूम घूमकर ब्राह्मण एकजुटता के लिए लगे हुये हैं और हम जैसे ब्राह्मण को समाज की एकता के लिए सोचने तक का समय नहीं है हमारा तो एक ही काम है कि कैसे उन लीडर का विरोध करें ????
हम बुद्धिजीवी ब्राह्मणों से तो दूसरे समाज के लोग सही हैं जो अपने अपने समाज के लीडर का समर्थन करते हैं बिना ये सोचे कि वो गलत है या सही बस वो इतना जानते हैं कि हमारे समाज का है और समाज की एकता के लिए कार्य कर रहा है और हम अपने समाज के लीडर का हौंसला बढ़ाने समर्थन करने के वजाय विरोध करने का कोई मौका नहीं छोड़ते.............
मनोबल तोड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ेगे ????
समाज में और फेसबुक पर अक्सर ब्राह्मणों को कहते सुना है कि मुझे गर्व है ब्राह्मण होने का अरे भाई जरा ठंडे दिमाग से सोचना ब्राह्मणों की हालात के बारे में माथे पर शिकन तो आ ही जायेगी....समाज में और फेसबुक पर बुजुर्ग ब्राह्मणों से जब जब ब्राह्मण एकता के नाम पर बात करता हूँ तो यही सुनता हूँ कि जीवन के कई साल खराब कर दिये बुद्धिजीवियों को जगाने में अगर 10 ब्राह्मण ही एकजुट हो जाते तो जीवन सफल हो जाता ..
भाई ब्राह्मण बहुत ही ज्यादा बुद्धिजीवी है कभी एक नहीं हो सकता अरे किस काम का ऐसा बुद्धिजीवी होना ????
मत भूलो कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी एकजुटता के अभाव में पिछड़ती जायेगी कल हमारी पीढ़ी ब्राह्मण होने पर गर्व की जगह शर्म
महसूस ना करे समाज की उन्नति के लिए एक दूसरे का विरोध छोड़िए परशुराम वंशजो.........
समय मिले तो समाज की हालत पर सोचिएगा जरूर..........
भगवान् परशुराम जी की कि्रपा आप सभी पर सदा बनी रहे.
19/05/2022
चुनाव करीब आते ही हार्दिक पटेल का यूं छोड़ के निकल जाना मुझे अचंभित नहीं करता है। कल को अगर कन्हैया, हूडा और जिग्नेश भी पार्टी छोड़ देंगे तो ताज्जुब नहीं होगी। ये लड़ाई कभी भी पार्टी बेस्ड पॉलिटिक्स की थी ही नहीं, ना ही सत्ता में आने या चुनाव जीत लेने के लिए थी।
ये एक सैद्धांतिक लड़ाई थी जिसमें आपके साहस, संघर्ष और सहनशीलता की परीक्षा हो रही थी। ये तय होना था कि आपकी तपस्या में कितनी ईमानदारी है। संघ-भाजपा की मज़बूत नीतियों के आगे अगले दस साल कांग्रेस सत्ता में नहीं आएगी।
अब बस यही देखना है कि कौन रुकेगा. सिंधिया, जतिन, आरपीएन, हार्दिक के पहले भी कई लोगों ने भाजपा के आगे घुटने टेक दिए है लेकिन कांग्रेस आज भी वहीं खड़ी है, अपने बूढ़े स्वर्णिम इतिहास को समेट कर एक आदमी अब भी अकेला चल रहा है।
उस आदमी की बराबरी कर पाना किसी के बस की बात नहीं। उसकी दादी और पिता ने इस देश के लिए अपने प्राण त्यागे है, उसकी मां ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को दो बार ठुकराया है। मैं दावे से लिख सकता हूं, तमाम सियासी संभावनाओं के बाद भी देश का वो इकलौता नेता है जिसमें सत्ता का लालच नहीं है, कुर्सी का लोभ नहीं है, जिसने इस लड़ाई को अपनी जिन्दगी का मकसद बना लिया है।
ये देश बहुत बड़ा है। लेकिन इस देश में राहुल गांधी के साथ चलना आसान नहीं है, सोंचिए राहुल गांधी होना कितना मुश्किल होगा।
श्री राहुल जी के साथ सिर्फ सज्जन लोग ही चल सकते हैं।❤️
मुझे गर्व है मेरा नेता राहुल गांधी है
Mukesh Barman
Congress committee Dr ambedkar Nagar Delhi
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