The Daily post Bhomag

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For posts related to society and natural beauty

31/05/2026

With Jeevan Pahari Singer – I'm on a streak! I've been a top fan for 23 months in a row. 🎉

26/05/2026

🎤🙏 जय बाबा गबसर्रा देवता 🙏🎤
आप सभी श्रद्धालुओं एवं संगीत प्रेमियों को यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा कि प्रसिद्ध पहाड़ी गायक जीवन पहाड़ी अपनी मधुर आवाज़ और शानदार प्रस्तुति के साथ बाबा गबसर्रा देवता मेला 2026 में आ रहे हैं।
📅 दिनांक: 16 जून 2026
📍 स्थान: बाबा गबसर्रा देवता मेला परिसर

24/05/2026

Proud moment for India....
Karate Player Jyoti Devi, aged 24 years, daughter of Prakash Singh, resident of Tote, tehsil Bhomag, district Reasi, won a gold medal in the 23rd Tenshin International Karate Championship held at the Municipal Indoor Stadium, Kandy, Sri Lanka on 16th May

23/05/2026

बाबा गबसरा और गोमसी माता की कहानी
बाबा गबसरा जी का यह ऐतिहासिक एवं पवित्र धाम श्रद्धा, आस्था, त्याग और चमत्कारों का अद्भुत प्रतीक माना जाता है। यह पावन स्थल जम्मू-कश्मीर के जिला रियासी की तहसील भोमाग के गाँव गब्बर में स्थित है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस गाँव का नाम माता गोमासी और बाबा गबसरा जी के नाम पर “गब्बर” रखा गया था, जबकि “सरोटे” नाम सरोतिया (सुदा) जाति के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

बुजुर्गों और लोक कथाओं के अनुसार माता गोमासी भगवान के प्रति अटूट विश्वास और गहरी भक्ति रखती थीं। कहा जाता है कि उस समय कश्मीर का क्रूर शासक दामोदर, जो कंस का रिश्तेदार और मित्र माना जाता था, माता गोमासी की भक्ति और विश्वास को तोड़ना चाहता था। उसने माता पर दबाव डाला कि वे भगवान को न मानकर कंस को भगवान स्वीकार करें, लेकिन माता अपने विश्वास और भक्ति पर अडिग रहीं।

मान्यता है कि माता की आस्था को तोड़ने के लिए दामोदर ने उनके सातों पुत्रों की एक-एक कर बलि चढ़ा दी। कहा जाता है कि जब सातवें पुत्र का बलिदान हुआ, उसी समय अचानक तेज वर्षा और भयंकर बिजली गिरी। उसी दौरान वहाँ स्थित पवित्र शहतूत का पेड़ सात हिस्सों में फट गया था। आज भी उस पेड़ के सात भाग स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं और लोग उन्हें उस दिव्य घटना का प्रतीक मानते हैं।

लोक मान्यता है कि उसी समय माता गोमासी की अटूट भक्ति और विश्वास को देखकर भगवान स्वयं एक छोटे बालक के रूप में माता के सामने प्रकट हुए थे। यह घटना आज भी यहाँ की आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है।

इस मंदिर के पास आज भी उस महान बलिदान के प्रमाण मौजूद बताए जाते हैं। यहाँ पत्थरों से बनी एक प्राचीन बावली स्थित है, जिस पर सात पत्थरों के नल लगे हुए हैं। मान्यता है कि जब एक पुत्र का बलिदान दिया जाता था, तब उसके नाम पर एक नल लगाया जाता था। ये सातों नल आज भी उस पावन इतिहास की जीवंत गवाही देते हैं।

इस पवित्र वृक्ष को स्थानीय लोग आज भी अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजते हैं। ऐसी मान्यता है कि महिलाएँ इस पेड़ पर कभी नहीं चढ़तीं और न ही इस वृक्ष को कभी काटा जाता है। इस पवित्र पेड़ के भीतर एक पत्थर की पिंडी भी स्थित है, जिसके श्रद्धालु दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कहा जाता है कि यहाँ रहने वाले एक बुजुर्ग, जो राजस्थान के अलवर जिले से आए थे, उन्हें माता गोमासी और बाबा गबसरा जी ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। स्वप्न में उन्हें आदेश मिला कि वे इस पवित्र स्थान पर आकर इसे पुनः स्थापित और आबाद करें। इसके बाद वे अलवर से पैदल चलकर इस पावन धाम तक पहुँचे और यहीं बस गए।

मान्यता है कि यहाँ आने के बाद माता गोमासी और बाबा गबसरा जी ने उन्हें अनेक चमत्कार दिखाए। कहा जाता है कि उनके घर के पास भी उसी पवित्र पेड़ की भाँति सात भाग दिखाई दिए तथा पानी पर स्थापित सात नालों जैसी संरचना बनी हुई थी।

लोक मान्यताओं के अनुसार उन्हीं के नाम से आगे चलकर सात वंश उत्पन्न हुए, जिन्हें आज सरोतिया (सुदा) जाति के नाम से जाना जाता है। इन सात वंशों के नाम इस प्रकार बताए जाते हैं — सिंगो, मोध, ग्रीबा, गुग्गा, चिंगी, सरबन और अंकरू।

कहा जाता है कि एक समय यहाँ के लोगों से कोई बड़ी गलती हो गई थी, जिसके कारण बाबा गबसरा जी क्रोधित हो गए। अचानक बहुत तेज वर्षा हुई, बादल फट गया और भयंकर बाढ़ आ गई। उस बाढ़ में पवित्र बावली दब गई थी। तब गाँव के लोगों ने बाबा से क्षमा माँगी। कहा जाता है कि उसी घटना में बावली के दो नल टूट गए और पवित्र पेड़ की दो डालियाँ भी सूख गईं। लोक मान्यता है कि उसी प्रकार सात वंशों में से दो वंश भी समय के साथ समाप्त हो गए।

तब से लेकर आज तक हर वर्ष जून महीने में यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। पिछले लगभग 15 वर्षों से इस पावन धाम में दिन के समय बाबा गबसरा जी के दरबार में मेला लगता है, जिसमें इन वंशों के लोग और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी हाजिरी लगाते हैं। रात के समय माता के नाम का गुणगान, भजन-कीर्तन और जागरण किया जाता है।

आज जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित किया जा रहा है, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें तथा इस पवित्र धाम को और भी सुंदर एवं आकर्षक बनाया जा सके।

इसके साथ ही यहाँ माता रानी के भव्य मंदिर का निर्माण भी वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से कराया जा रहा है, जिससे इस पवित्र स्थान की धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ रही है।

आज भी यह पावन धाम त्याग, भक्ति, आस्था और चमत्कारों का जीवंत केंद्र माना जाता है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु पहुँचते हैं।

जय बाबा गबसरा जी 🙏
जय माता गोमासी माता 🙏

19/05/2026

18/05/2026

Public awareness on self enumeration of census 2026-27 in a gathering at Kalika mandir sarad dhar Bhomag.

13/05/2026

🙏 गबसरा देवता मेला 2026 की तैयारियों को लेकर गबसरा देवता मेला समिति ने उपायुक्त रियासी से मुलाकात की।
बैठक में मेले की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं एवं प्रशासनिक सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। उपायुक्त रियासी महोदय ने मेले के सफल आयोजन हेतु पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।
✨ आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक — गबसरा देवता मेला 2026
सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग से इस वर्ष का मेला और भी भव्य एवं सफल बनाया जाएगा।

13/05/2026

Vir da beyaa(Bro marriage)



12/05/2026

Heartiest congratulations to all the students of HSP-1 for their well deserved scoring..

12/05/2026

🎂🎉 हमारी प्यारी बिटिया काव्या सिंह नाग को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान तुम्हें हमेशा खुश, स्वस्थ और सफल बनाए।
तुम्हारी मुस्कान यूँ ही पूरे परिवार की खुशियों की वजह बनी रहे। 🌸✨
🎈 Happy Birthday Kavya Singh Naag 🎈
ढेर सारा प्यार, दुआएँ और आशीर्वाद ❤️
From .Family.

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