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through this page we like to share that how woman faces the criticism on the path of their empowerment.

17/01/2026
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खुशीClose-Up Photo of Woman With Her Hands Tied With Ropeये कहानी ख़ुशी नाम की एक लड़की की है जिसने हार नहीं मानी अपने अधि...
13/05/2022

खुशी

Close-Up Photo of Woman With Her Hands Tied With Rope

ये कहानी ख़ुशी नाम की एक लड़की की है जिसने हार नहीं मानी अपने अधिकार के लिए उसने बहुत संघर्ष किया । शिक्षित परिवार था उसका, परिवार में माता -पिता और एक छोटा भाई था । बहुत पढ़ाया था उसके माता –पिता ने ख़ुशी डॉक्टर थी। हॉस्पिटल में काम के दौरान उसकी दोस्ती एक लड़के से हो गई और कुछ समय बाद वो लड़का अपने शहर चला गया इधर वो भी अपनी नौकरी में व्यस्त रहने लगी फोन पर बात होती थी धीरे -धीरे ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला । जब उसके परिवार को पता चला तो उन्होंने उस लड़के से बात ना करने का दबाव डाला जब खुशी ने उनकी बात नहीं सुनी तो उसके परिवार ने उसे घर के एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ मार -पीट करने लगे।उसका मोबाईल भी छीन लिया गया। इन सब में उसका छोटा भाई भी शामिल था ।अत्याचार बढ़ने लगा और अब वो मदद चाहती थी एक दिन मौका पाकर उसने मोबाईल लिया और अपना एड्रेस एक ऐसी संस्था में लिखवा दिया जो महिलाओं की मदद करती थी । समाज -सेविका जब उनके घर पहुँची तो उसकी माँ घर पर ही थी बड़ी मुश्किल से ख़ुशी से मिलवाया गया उसने अपनी परेशानी बताई और कहा की वो अपने परिवार की काउंसलिंग करवाना चाहती है और कुछ नहीं । उसने पुलिस को सूचना देने से मना कर दिया उसे लगा परिवार उसकी बात समझ जाएगा और उसकी शादी उसके पसँद के लड़के से करवा देगी।उस समय उसकी माँ ने भी एक पेपर पर लिखकर दे दिया की वो अब ख़ुशी को कभी परेशान नहीं करेंगे और ना ही उसे अपने काम पर जाने से रोकेंगे पर अगली सुबह जब संस्था ने फ़ोन किया तो उसके घर में किसी ने नहीं फोन उठाया जब घर जाकर देखा तो पता चला घर कि घर में तो ताला लगा है ।फिर पड़ोसियों ने बताया की रात में डॉक्टर के घर में उनकी बेटी खुशी की तबियत खराब थी वो होश में नहीं थी शायद उसे हॉस्पिटल ले गए है । पुलिस स्टेशन में शिकायत की गई पर कुछ पता नहीं चला ।अचानक दो दिन के बाद फिर से उस ख़ुशी का फ़ोन आया की उसे बचा ले उसकी ज़बरदस्ती शादी हो रही है किसी दूसरे शहर में पर वो अपना पता नहीं बता पायी सिर्फ जगह और अपने चाचा का नाम उसने बताया तब पता चला उसके चाचा का नाम ही काफी था एड्रेस तो उनके नाम से ही पता चल गया वो एक नेता थे जिन्हें सब जानते थे उसके चाचा के एरिया के पुलिस स्टेशन में भी समाज सेविका ने मदद के लिए बात की। पर नेता का रुतबा़ इतना था की पुलिस की उपस्तिथि में ही खुशी की शादी कर दी गई । खुशी से महिला पुलिस की बात भी करवाई गई और समाज सेविका की भी ।उस समय वो कुछ ठीक से नहीं बोल पा रही थी और कुछ भी ऐसा नहीं कह रही थी जो सँधिग्ध लगता। महिला पुलिस ने बताया की लड़की खुश है शादी से । इतनी कोशिशों के बाद भी ज़बरदस्ती खुशी की शादी करवा दी गई । कुछ दिन बाद वो लड़की फिर फ़ोन करती है की उसे मदद चाहिए वो शेल्टर होम चाहती है और वो अपने हॉस्पिटल में है जहां वो काम करती थी,उससे बात करने पर पता चला की वो अपने पति के साथ ही आई थी ये कहकर की उसे हॉस्पिटल में कुछ काम है और अब पति बाहर बैठा है और वो हॉस्पिटल में है शेल्टर होम की वैन में बैठकर वो चली गई और अपने पति को कॉल करके कहा वो कि वो घर वापस जाए,वो उनके साथ वापस नहीं जाना चाहती है ।खुशी से बात करने पर पता चला की जिस दिन उसकी शादी हो रही थी और महिला पुलिस ने समाज - सेविका से बात करवाई थी उस समय उसकी बन्दुक की नोक पर शादी हो रही थी इसलिए वो नहीं बोल पायी और पुलिस की मौजूदगी में ये सब हो रहा था तो क्या करती ,उस समय वो निस्सहाय और दबाब में थी। उसके बाद उसने संस्था की मदद से कोर्ट में केस किया और कोर्ट के द्वारा इस शादी को अमान्य घोषित किया गया। उसके मायके के परिवार के खिलाफ़ भी कार्यवाई करने के लिए निर्देश दिए गए। ख़ुशी ने अपने माता – पिता के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाई करने से मना कर दिया ।अब वो खुश है अपनी लाइफ से जिस लड़के से वो शादी करना चाहती थी उससे भी शादी ना करने का फैसला लिया क्यों की वो भी उसकी मदद के लिए सामने नहीं आया । अब ख़ुशी बहुत खुश है ।

महिला  सुरक्षा आज देश मे महिला सुरक्षा की बात तो होती है ,कानून भी बनते हैं पर सुरक्षा मात्र चुनौती बनकर रह गई है`। जब च...
28/03/2022

महिला सुरक्षा
आज देश मे महिला सुरक्षा की बात तो होती है ,कानून भी बनते हैं पर सुरक्षा मात्र चुनौती बनकर रह गई है`।
जब चुनाव होते हैं तो पहला मुद्दा ही महिला सुरक्षा का होता है ,पर बाद सारे दावे खोखले ही नज़र आते हैं। हर रोज़ कितने ही जघन्य आपराधिक मामले सुनने को मिलते हैं ऐसा क्यों है? हम एक सुरक्षित वातावरण नहीं बना पा रहे क्यों ?अँधेरा होने के बाद महिलाये बाहर जाने से डरती हैं क्यों? हम अपने बेटियों को बाहर भेजने मे डरते हैं जब तक वो घर नहीं आती उसे बार -बार फ़ोन करते हैं, कभी सोचा है ऐसा क्यों है? कभी -कभी तो घर भी सुरक्षित जगह नहीं रह जाती बेटियों के लिए ऐसे मैं वो कहा जाए कभी सोचा है ऐसा क्यों है ? दोष किसका है ? क़ानून का , हमारा या समाज का ये तो सोचने का विषय है !

ये सब हमारी संकुचित सोच के कारण है। हमें अपनी मानसिकता को बदलना ही होगा ऐसा नहीं है की इसके लिए सिर्फ पुरुष ही जिम्मेदार हैं मानसिकता मे बदलाव समाज के दोनों पक्षों को ही लाना होगा हम अपने बच्चों को कैसे बड़ा कर रहे है हम लिंग के आधार पर उनके साथ भेद -भाव तो नहीं कर रहे अगर ऐसा है तो बदलाव नहीं आएगा इसलिए हमे अपने बच्चो को सामान रूप से पालना होगा उन्हें समझाना होगा के दोनों सामान है ! इसकी शुरुआत हम सभी को अपने ही घर से करनी होगी तभी सुरक्षित वातावरण हम अपने बच्चों के लिए बना पाएंगे । आइए हम सभी मिलकर एक शुरुवात करैं अपने ही घर से और एक सुरक्षित माहौल बनाए ।

घरेलू  हिंसा महिलाओं के प्रति हिंसा हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई है। घरेलू हिंसा का मतलब है घर की चार दीवारी के अंदर महि...
09/03/2022

घरेलू हिंसा

महिलाओं के प्रति हिंसा हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई है। घरेलू हिंसा का मतलब है घर की चार दीवारी के अंदर महिलाओं के साथ किया जाने वाला ऐसा व्यवहार जिससे उसके स्वास्थ्य ,सुरक्षा ,जीवन पर असर हो जिसके कारण महिला को अपमान सहना पड़े ।घरेलु हिंसा से हमें लगता है की शादी के बाद होने वाली हिंसा ही घरेलू हिंसा है पर ऐसा हरगिज़ नहीं है अपने माता -पिता के घर मैं होने वाली हिंसा भी इसी दायरे में आती है। हिंसा किसी भी रूप मै हो सकती है मौखिक और भावनात्मक हिंसा ,शारीरिक हिंसा, लैंगिक हिंसा, आर्थिक हिंसा ।

मौखिक और भावनात्मक हिंसा - गाली देना ,चरित्र पर आरोप लगाना ,लड़का ना होने पर प्रताड़ित करना ,बच्चा न होने पर दूसरी शादी की धमकी देना, दहेज़ के लिए परेशान करना ,अपने मन से शादी ना करने देना, नौकरी ना करने या छोड़ने के लिए दबाव बनाना ।

शारीरिक हिंसा - मारपीट ,लात -मारना ,थप्पड़ मारना आदि ।

लैंगिक हिंसा -बलपूर्वक बनाये गए शारीरिक सम्बन्ध ,अश्लील वीडियो या तस्वीर देखने के लिए मजबूर करना, बच्चों के साथ लैंगिक हिंसा ।

आर्थिक शोषण -रोज़गार ना करने देना , घर मै खर्चा न देना , वेतन ले लेना ,घर से बाहर निकाल देना।

घरेलू हिंसा को अक्सर छुपाया जाता है ताकि घर की बात बाहर ना जाए। महिला पर दबाव रहता है की घर की बात है इसलिए वो किसी को ना बताए धीरे- धीरे सब ठीक हो जाएगा । इसी दबाव मै सब सहन करते हुए वो समझौता कर लेती है पर ये समझौता उसके जीवन को घुट घुट कर जीने को मजबूर कर देता है । इसका असर घर के बच्चों पर भी पड़ता है अगर वो बच्चा लड़का है तो उसे ये समझ आता है कि उसे भी आगे चलकर ऐसा ही करना है और वो लड़की है तो बचपन से ही वो सहना और चुप रहना सिख लेती है। हम अपने बच्चों को कैसा माहौल दे रहे हैं हम समाज मै क्या योगदान कर रहे हैं ये सोचने का विषय है।ऐसा हरगिज़ नहीं है की ये सिर्फ मिडिल क्लास की महिलओं की समस्या है ये समाज के हर वर्ग की महिलाओं की समस्या है । वो सब महिला और पुरुष जो इस बुराई को ख़त्म करना चाहते हैं उन्हें ही इसके लिए पहल करनी होगी कहीं भी महिला के साथ अत्याचार देखें तो उसकी मदद जरूर करें कई बार तो किसी घर से मारपीट या अन्य प्रकार की हिंसा की आवाजें आती हैं तो लोग अपने घर के दरवाजे बंद कर लेते हैं क्योकि हम समझते हैं की किसी के घरेलू मामले मे हमें नहीं बोलना चाहिए लेकिन ये सोच बदलनी होगी हमारी एक आवाज किसी की ज़िन्दगी मैं बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है। हमारा एक प्रयास किसी की जिंदगी को नई दिशा दे सकता है । अगर ऐसा आपको ऐसी कोई आवाज सुनाई दे तो दरवाजा खटखटाये और उस पीड़ित महिला और बच्चों की मदद करैं चुप ना रहें ।

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