13/05/2026
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10/05/2026
“जनप्रतिनिधि कानून बनाते हैं, सरकारी विभाग उनका पालन करते है और शासन ठिक से चले इसपे नजर रखने का काम प्रतिनिधि करते है”
https://youtube.com/shorts/lkmn1bVkFm0
भारत का संविधान स्पष्ट कहता है कि देश और राज्यों का प्रशासन निर्वाचित सांसदों और विधायकों द्वारा नहीं, बल्कि संविधान, कानूनों और सरकारी विभागों द्वारा चलाया जाता है।
सांसद (MP) और विधायक (MLA) का मुख्य कार्य है:
* कानून बनाना,
* सरकारी विभाग के कार्यों पर नजर रखना ,
* समाज कि बेहतरी के लिए सरकारी विभाग द्वारा काम करवाना,
* और कानुन मे कमी है तो कानुनों मे बदलाव कर उन्हे लागु करवाना।
* शासन सरकारी विभाग चलाते है, लेकिन उन पर प्रतिनिधि नजर रखते है ।
* जनता प्रतिनिधी चुनती है बेहतर कानुन बनाने के लिए , अगर कानुन अच्छे है तो चुनाव कि जरुरत नही होनि चाहिए।
याद रखिए:
* सड़क बनाना, स्कूल चलाना, अस्पताल संचालित करना, सीमा सुरक्षा करना, कानून-व्यवस्था जैसे समाजीक जरुरत कार्य, सरकारी विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
* सीमा सुरक्षा → केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी।
* कानून-व्यवस्था → पुलिस की जिम्मेदारी।
* आपातकाल में → राष्ट्रपति (अध्यक्ष ) शासन लागू कर सकता है, पर सामान्य शासन हमेशा सरकारी विभाग के अनुसार ही चलता है।
सच्चाई यह है:
देश किसी व्यक्ति विशेष, नेता, सांसद या विधायक से नहीं चलता।
देश चलता है—
* कानूनों से,
* संस्थाओं से,
* और जनता की जागरूकता से।
जनता के लिए संदेश:
* नेताओं को भगवान मत बनाइए।
* उन्हें समाज के बेहतरी के लिए काम करने वाला जनसेवक समझिए।
* जब जनता अपने अधिकार और शासन व्यवस्था को समझेगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा।
“देश व्यक्तियों से नहीं, कानून से चलता है।”
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—
विनय बिरादार
राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (UCP)
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09/05/2026
“जनप्रतिनिधि कानून बनाते हैं, सरकारी विभाग उनका पालन करते है और शासन ठिक से चले इसपे नजर रखने का काम प्रतिनिधि करते है”
भारत का संविधान स्पष्ट कहता है कि देश और राज्यों का प्रशासन निर्वाचित सांसदों और विधायकों द्वारा नहीं, बल्कि संविधान, कानूनों और सरकारी विभागों द्वारा चलाया जाता है।
सांसद (MP) और विधायक (MLA) का मुख्य कार्य है:
* कानून बनाना,
* सरकारी विभाग के कार्यों पर नजर रखना ,
* समाज कि बेहतरी के लिए सरकारी विभाग द्वारा काम करवाना,
* और कानुन मे कमी है तो कानुनों मे बदलाव कर उन्हे लागु करवाना।
* शासन सरकारी विभाग चलाते है, लेकिन उन पर प्रतिनिधि नजर रखते है ।
* जनता प्रतिनिधी चुनती है बेहतर कानुन बनाने के लिए , अगर कानुन अच्छे है तो चुनाव कि जरुरत नही होनि चाहिए।
याद रखिए:
* सड़क बनाना, स्कूल चलाना, अस्पताल संचालित करना, सीमा सुरक्षा करना, कानून-व्यवस्था जैसे समाजीक जरुरत कार्य, सरकारी विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
* सीमा सुरक्षा → केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी।
* कानून-व्यवस्था → पुलिस की जिम्मेदारी।
* आपातकाल में → राष्ट्रपति (अध्यक्ष ) शासन लागू कर सकता है, पर सामान्य शासन हमेशा सरकारी विभाग के अनुसार ही चलता है।
सच्चाई यह है:
देश किसी व्यक्ति विशेष, नेता, सांसद या विधायक से नहीं चलता।
देश चलता है—
* कानूनों से,
* संस्थाओं से,
* और जनता की जागरूकता से।
जनता के लिए संदेश:
* नेताओं को भगवान मत बनाइए।
* उन्हें समाज के बेहतरी के लिए काम करने वाला जनसेवक समझिए।
* जब जनता अपने अधिकार और शासन व्यवस्था को समझेगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा।
“देश व्यक्तियों से नहीं, कानून से चलता है।”
— विनय बिरादार
राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (UCP)
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09/05/2026
“जनप्रतिनिधि कानून बनाते हैं, सरकारी विभाग उनका पालन करते है और शासन ठिक से चले इसपे नजर रखने का काम प्रतिनिधि करते है”
भारत का संविधान स्पष्ट कहता है कि देश और राज्यों का प्रशासन निर्वाचित सांसदों और विधायकों द्वारा नहीं, बल्कि संविधान, कानूनों और सरकारी विभागों द्वारा चलाया जाता है।
सांसद (MP) और विधायक (MLA) का मुख्य कार्य है:
* कानून बनाना,
* सरकारी विभाग के कार्यों पर नजर रखना ,
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* सीमा सुरक्षा → केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी।
* कानून-व्यवस्था → पुलिस की जिम्मेदारी।
* आपातकाल में → राष्ट्रपति (अध्यक्ष ) शासन लागू कर सकता है, पर सामान्य शासन हमेशा सरकारी विभाग के अनुसार ही चलता है।
सच्चाई यह है:
देश किसी व्यक्ति विशेष, नेता, सांसद या विधायक से नहीं चलता।
देश चलता है—
* कानूनों से,
* संस्थाओं से,
* और जनता की जागरूकता से।
जनता के लिए संदेश:
* नेताओं को भगवान मत बनाइए।
* उन्हें समाज के बेहतरी के लिए काम करने वाला जनसेवक समझिए।
* जब जनता अपने अधिकार और शासन व्यवस्था को समझेगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा।
“देश व्यक्तियों से नहीं, कानून से चलता है।”
— विनय बिरादार
राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (UCP)
27/04/2026
ಡಾ. ಬಾಬಾಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್ ಅವರ 135ನೇ ಜಯಂತಿಯ ಅಂಗವಾಗಿ ದತ್ತಾ ಬೋಡ್ಕೆ ಅವರ ನಾಯಕತ್ವದಲ್ಲಿ 13-೦4- 2026ರಂದು ಲಖನಗಾಂವ್ನಿಂದ ಭಾಲ್ಕಿ ತಾಲೂಕಿನವರೆಗೆ ಬೈಕ್ ರ್ಯಾಲಿ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿ ನಡೆಯಿತು. ಬಸವ, ಶಿವಾಜಿ ಮಹಾರಾಜ್, ಮಹಾತ್ಮ ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ, ಕನಕದಾಸ, ಶಾಹು ಮಹಾರಾಜ್, ಅನ್ನಭಾವ್ ಸಾತೆ, ಬಾಬಾಸಾಹೇಬರ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್ ಮೂರ್ತಿ ಗಳಿಗೆ ಗೌರವ ನಮನ ಸಲ್ಲಿಸಲಾಯಿತು ಮತ್ತು ಮುಂತಾದ ಮಹಾಪುರುಷರ ಅನುಯಾಯಿಗಳು, ತಾಲೂಕು ನಾಯಕರು ಮತ್ತು ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಪೂರ್ಣ ಬೆಂಬಲ ನೀಡಿದ್ದರು. ಎಲ್ಲಾ ನಾಯಕರು, ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಮತ್ತು ಬೆಂಬಲಿಗರಿಗೆ ಹೃದಯಪೂರ್ವಕ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.
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#ಡಾ_ಬಾಬಾಸಾಹೇಬ್_ಅಂಬೇಡ್ಕರ್
#ಲಖನಗಾಂವ್ #ಭಾಲ್ಕಿ_ತಾಲೂಕು
18/04/2026
संविधान निर्माता के प्रश्न पर एक विचार :
“सही जानकारी का प्रसार होना चाहिए” —
इसी उद्देश्य के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या भारतीय संविधान के निर्माण को केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित करना उचित है?
इतिहास के अनुसार, बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में “स्वराज बिल” के माध्यम से भारत के लिए एक प्रारंभिक संवैधानिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें लगभग 113 अनुच्छेद बताए जाते हैं। यह भारत में संवैधानिक सोच की एक प्रारंभिक पहल मानी जाती है।
इसके बाद एम. एन. रॉय ने 1928 और 1944 में संवैधानिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें लगभग 13 अध्याय और 137 अनुच्छेदों का उल्लेख मिलता है।
फिर 1947 में बी. एन. राव ने संविधान का एक विस्तृत मसौदा तैयार किया, जिसमें लगभग 240 अनुच्छेद, 25 भाग और 13 अनुसूचियाँ शामिल थीं।
यह मसौदा आगे चलकर संविधान सभा के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बना।
स्वतंत्रता के बाद, संविधान सभा के तहत डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर और उनकी समिति के सदस्यों ने 1949 मे अंतिम मसौदा तैयार किया,
जिसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ शामिल थीं।
* संविधान के मसौदे पर हस्ताक्षर के समय, डॉ. भीमराव आंबेडकर के हस्ताक्षर 29वें क्रम था।
* संविधान की सोच व निर्माण का कार्य आंबेडकर के जन्म से पहले ही शुरू हुई थी, तो संविधान निर्माता उन्हें कहना ठीक नहीं।
इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व उस समय संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया।
* नेतृत्व: डॉ. प्रसाद ने संविधान के निर्माण में सद्भाव, धैर्य व दूरदर्शिता का परिचय दिया।
* अंतिम भाषण: 26 नवंबर 1949 को, संविधान को अपनाने के दिन, उन्होंने अध्यक्ष के रूप में समापन भाषण दिया था।
* भूमिका: उनके मार्गदर्शन में ही संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए सर्वोच्च कानून तैयार किया।
यह भी उल्लेख किया जाता है कि महात्मा गांधी ने संविधान निर्माण समिति के लिए डॉ. आंबेडकर के नाम का समर्थन किया था, जिससे उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्य में भूमिका निभाने का अवसर मिला।
हालाँकि, यह समझना आवश्यक है कि संविधान निर्माण एक सामूहिक, संस्थागत और चरणबद्ध प्रक्रिया थी। इसमें अनेक व्यक्तियों और विचारों का योगदान रहा है। इसलिए किसी एक व्यक्ति को “संविधान का एकमात्र निर्माता” कहना एक सीमित दृष्टिकोण हो सकता है।
1950 से लेकर आज (2026) तक भारतीय संविधान में 100 से अधिक संशोधन किए जा चुके हैं, और वर्तमान में इसमें 448 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं। ये संशोधन संसद द्वारा समय-समय पर किए गए हैं, जिनमें विभिन्न सरकारों और दलों की भूमिका रही है।
आज के संदर्भ में एक प्रश्न उठाया जा सकता है—यदि संशोधन और अद्यतन को ही आधार माना जाए, तो क्या वर्तमान पदाधिकारियों जैसे अर्जुन राम मेघवाल या देश के राष्टपति द्रौपदी मुर्मू को भी “संविधान निर्माता” की श्रेणी में रखा जाना चाहिए?
यह एक विचारणीय विषय है, जिसका उत्तर तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रिया को समझते हुए ही दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष:
भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास का परिणाम है। इसमें अनेक महान व्यक्तित्वों का योगदान रहा है और सभी को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुख्य उद्देश्य:
“संविधान के निर्माण में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों के साथ न्याय हो।”
– विनय बिरादार ( जन नेता )
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13/04/2026
👉 “क्या आप जानते हैं? बाल गंगाधर तिलक कि मदद से भारत का पहला संविधान लिखा गया ।”
✔️ 1895 में भारत के लिए संविधान का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया गया " स्वराज बिल ",
✔️ 113 अनुच्छेद लिखे .
https://politicsforindia.com/2-making-of-the-indian-constitution-psir/
https://www.dailyexcelsior.com/a-peep-into-history-of-indian-constitution/ #:~:text=The%20first%20non%2Dofficial%20attempt,of%20the%20local%20legislative%20council.
Yes, Bal Gangadhar Tilak is widely recognized as the inspiration behind the first attempt to draft a constitution for India, known as the Constitution of India Bill (1895) (often referred to as the Swaraj Bill).
01/04/2026
शिक्षा के बाद भी रोजगार की चुनौती और शतरंज के माध्यम से नया करियर
https://youtu.be/fX6fW3eN8io
आज के समय में यह एक कड़वी सच्चाई है कि दुनिया भर में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद भी युवाओं को पर्याप्त और सम्मानजनक वेतन वाली नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। लाखों छात्र डिग्री हासिल करने के बाद भी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। कुछ गिने-चुने लोगों को ही अच्छी नौकरी मिलती है, जबकि अधिकांश युवाओं को मजबूरी में छोटे-मोटे काम करने पड़ते हैं।
कई बार परिस्थितियां इतनी कठिन हो जाती हैं कि कुछ लोग गलत रास्तों की ओर भी मुड़ जाते हैं। वहीं, बहुत से लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटी दुकानों, फुटपाथ पर व्यवसाय या अन्य अस्थायी कामों में लग जाते हैं। यह स्थिति न केवल युवाओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि समाज के विकास में भी बाधा बनती है।
इसी गंभीर समस्या को समझते हुए Bidar District Chess Association ने एक सराहनीय पहल की है। संस्था का उद्देश्य है कि हर नागरिक और छात्र को शतरंज के माध्यम से एक स्थायी और सम्मानजनक करियर का अवसर प्रदान किया जाए।
शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि मानसिक विकास, रणनीतिक सोच और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने वाला एक सशक्त माध्यम है। इस क्षेत्र में खिलाड़ी, कोच, ट्रेनर, आयोजक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई प्रकार के करियर विकल्प उपलब्ध हैं।
संस्था सभी इच्छुक विद्यार्थियों और नागरिकों को आमंत्रित करती है कि वे इस पहल से जुड़ें और अपने जीवन को एक नई दिशा दें। शतरंज के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, बल्कि एक सम्मानजनक और स्थिर जीवन भी प्राप्त किया जा सकता है।
आइए, शतरंज के साथ जुड़कर अपने भविष्य को सुरक्षित और सफल बनाएं।
बीदर जिला शतरंज संघ (युनिवर्सल शतरंज रेटिंग)
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