सुदर्शन शाखा

सुदर्शन शाखा

Share

उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती
यह देश है पुकारता पुकारती मां भारती

13/04/2026
Photos from सुदर्शन शाखा's post 09/08/2025

रक्षाबंधन उत्सव
#रक्षाबंधन

04/08/2025

अनंतनाग के एक प्राचीन झरने से 7वीं-9वीं शताब्दी की दुर्लभ हिंदू मूर्तियां मिली हैं, जिनमें शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं। ये ऐतिहासिक मूर्तियां हमारी सांस्कृतिक विरासत और सह-अस्तित्व की भावना का जीवंत प्रमाण हैं।



(Anantnag, ancient shivling, old idols found, Kashmir heritage, Hindu murti, 7th century )

04/08/2025

🚩 *सुदर्शन शाखा*🚩

*क्या आपके घर में दवाइयां बची हुई है?*

अगर आपके पास एक्स्ट्रा दवाईयां हैं और आपके बिल्कुल यूज की नहीं है तो उन्हें फेंके नहीं बल्कि नीचे दिए गए पते पर दे दें। या हमें फोन करके दे सकते हैं।
आपकी दी हुई दवाईयां गरीब मरीजों के काम आ सकती हैं।

1. बी-514, सुदर्शन पार्क, आयुष जी- 9773530458
2. A-62, सुदर्शन पार्क, दिपेन्दर जी-+918800546047
3. WZ-95,रामगढ़ कालोनी, गुलशन जी-9873310713

03/08/2025

01/08/2025

🏃‍♂️ आज की शाखा का खेल: "धक्का-मुक्की दौड़" 🧡

इस खेल में उत्साह, अनुशासन और टीम भावना का समावेश होता है। यह शाखा के युवाओं में सहयोग और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है।

📋 खेल का तरीका:
- सभी स्वयंसेवक पंक्ति में खड़े होंगे।
- हर दो स्वयंसेवकों की एक जोड़ी बनेगी।
- एक साथी आँखें बंद रखेगा, दूसरा उसका मार्गदर्शन करेगा।
- तय की गई दूरी तक दौड़ लगानी होगी — लेकिन बाधाएं (रसी, कुर्सी, झंडा इत्यादि) भी होंगी।
- मार्गदर्शक साथी केवल बोलकर सहयोग करेगा, हाथ से नहीं।

🎯 लक्ष्य:
अन्य टीमों की तुलना में तेजी से और सुरक्षित रूप से दूरी तय करना।

💡 यह खेल नेतृत्व, विश्वास और सहयोग को बढ़ाता है। शाखा के अंत में सभी जोड़ियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर उत्साहवर्धक टिप्पणी दी जा सकती है।

01/08/2025

पंच प्रण

30/07/2025

🟠 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शाखा में एक नया खेल: “गति-गुरु” 🕶️🏃‍♂️
विचार: शाखा में शारीरिक चुस्ती के साथ-साथ मानसिक सजगता भी ज़रूरी है। “गति-गुरु” एक ऐसा नया खेल है जो दोनों को साथ में विकसित करता है — गति, ध्यान, और नेतृत्व क्षमता।
🔶 खेल का स्वरूप:
- खिलाड़ी: न्यूनतम 8 स्वयंसेवक
- स्थान: मैदान या खुली जगह
- सामग्री: कोई विशेष उपकरण नहीं, बस शाखा की परंपरागत पंक्तियाँ
🔶 खेलने की विधि:
1. सभी खिलाड़ी एक गोल घेरे में खड़े होते हैं।
2. एक “गति-गुरु” चुना जाता है जो बीच में खड़ा होता है।
3. गति-गुरु कुछ विशेष क्रिया करता है जैसे — ताली, एक कदम आगे, या हाथ ऊपर उठाना।
4. बाकी खिलाड़ी उसी क्रिया को अनुकरण करते हैं।
5. गति-गुरु अचानक क्रिया को बदल देता है — जो ध्यान नहीं देता, वह बाहर हो जाता है।
6. अंत में जो सबसे सजग और कुशल रहता है, वही अगला गति-गुरु बनता है।
🔶 उद्देश्य:
- नेतृत्व कौशल को बढ़ाना
- मानसिक एकाग्रता का विकास
- हल्के-फुल्के अंदाज़ में अनुशासन को मज़बूती देना
✨ यह खेल विशेष रूप से बाल स्वयंसेवकों के लिए उपयुक्त है, पर युवा व वरिष्ठों के बीच भी इसे रुचिकर बनाया जा सकता है।

29/07/2025

29 जुलाई/जन्मदिन
जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा

जे॰आर॰डी॰ टाटा का जन्म 29 जुलाई 1904 पेरिस, फ्रांस मे हुआ। वे रतनजी दादाभाई टाटा और उनकी फ्रांसीसी पत्नी सुज़ेन्न ब्रीरे (en:Suzanne Briere) के पांच संतानो मे से दुसरे थे।

जेआरडी टाटा वायुयान उद्योग और अन्य उद्योगो के अग्रणी थे। 10 फरवरी 1929 को टाटा ने भारत में जारी किया गया पहला पायलट लाइसेंस प्राप्त किया। सन् 1932 में उन्होंने भारत की पहली वाणिज्यिक एयरलाइन, टाटा एयरलाइंस की स्थापना की जो बाद में वर्ष 1946 में भारत की राष्ट्रीय एयरलाइन , एयर इंडिया बनी। बाद में उन्हें भारतीय नागर विमानन के पिता के रूप में जाना जाने लगा।

सन् 1925 में वे एक अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में टाटा एंड संस में शामिल हो गए।वर्ष 1938 में उन्हें भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा एंड संस का अध्यक्ष चुना गया। दशकों तक उन्होंने स्टील, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, रसायन और आतिथ्य के क्षेत्र में कार्यरत विशाल टाटा समूह की कंपनियों का निर्देशन किया। वह अपने व्यापारिक क्षेत्र में सफलता और उच्च नैतिक मानकों के लिए बहुत प्रसिद्ध थे।

उनकी अध्यक्षता में टाटा समूह की संपत्ति $ 1000 लाख से बढ़कर 5 अरब अमरीकी डालर हो गयी। उन्होंने अपने नेतृत्व में 14 उद्यमों के साथ शुरूआत की थी ,जो 26 जुलाई 1988 को उनके पद छोड़ने के समय,बढ़कर 95 उद्यमों का एक विशाल समूह बन गया।उन्होंने वर्ष 1968 में टाटा कंप्यूटर सेंटर(अब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) और सन् 1979 में टाटा स्टील की स्थापना की।

वे 50 वर्ष से अधिक समय तक , सन् 1932 में स्थापित सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। उनके मार्गदर्शन में इस ट्रस्ट ने राष्ट्रीय महत्व के कई संस्थनों की स्थापना की , जैसे टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस, 1936),टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान( टीआईएफआर, 1945), एशिया का पहला कैंसर अस्पताल, टाटा मेमोरियल सेंटर और प्रदर्शन कला के लिए राष्ट्रीय केंद्र।

सन् 1945 में उन्होंने टाटा मोटर्स की स्थापना की। जेआरडी टाटा ने सन् 1948 में भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप में एयर इंडिया इंटरनेशनल का शुभारंभ किया। सन् 1953 में भारत सरकार ने उन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष और इंडियन एयरलाइंस के बोर्ड का निर्देशक नियुक्त किया। वे इस पद पर 25 साल तक बने रहे। जेआरडी टाटा ने अपने कम्पनी के कर्मचारियों के हित के लिए कई नीतियाँ अपनाई। सन् 1956 में, उन्होंने कंपनी के मामलों में श्रमिकों को एक मजबूत आवाज देने के लिए 'प्रबंधन के साथ कर्मचारी एसोसिएशन' कार्यक्रम की शुरूआत की।उन्होंने प्रति दिन आठ घंटे काम , नि: शुल्क चिकित्सा सहायता, कामगार दुर्घटना क्षतिपूर्ति जैसी योजनाओं को अपनाया।

जेआरडी टाटा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। भारतीय वायु सेना ने उन्हें ग्रुप कैप्टन की मानद पद से सम्मानित किया था और बाद में उन्हें एयर कमोडोर पद पर पदोन्नत किया गया और फिर 1 अप्रैल 1974 को एयर वाइस मार्शल पद दिया गया। विमानन के
लिए उनको कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया -मार्च 1979 में टोनी जेनस पुरस्कार ,सन् 1995 में फेडरेशन ऐरोनॉटिक इंटरनेशनेल द्वारा गोल्ड एयर पदक,सन् 1986 में कनाडा स्थित अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन द्वारा एडवर्ड वार्नर पुरस्कार और सन् 1988 में डैनियल गुग्नेइनिम अवार्ड। सन् 1955 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनके नि: स्वार्थ मानवीय प्रयासों के लिए ,सन् 1992 में जेआरडी टाटा को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
29 नवंबर 1993 को गुर्दे में संक्रमण के कारण जिनेवा में 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु पर भारतीय संसद उनकी स्मृति में स्थगित कर दी गई थी।

28/07/2025

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के पिता श्री ने कहा था 'कॉल मी अस्स, नॉट ऐन हिन्दू'।

और जब उनके पुत्र प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने कहा 'बाय कल्चरल एंड माई सिविलाइज़ेशन वी वर टॉट, आय ऐम अ मुस्लिम, एंड बाय एजुकेशन एंड प्रोग्रेसिव थॉट, आय ऐम अ मुस्लिम' ऐंड सडनली, आय बॉर्न ऐज़ अ हिन्दू'।

: जे. नंदकुमार, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह

26/07/2025

यह लेख दैनिक भास्कर में प्रकाशित होना एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है, जो सकारात्मक परिवर्तन की अपार संभावनाओं को उजागर करता है और एक नए दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है।
Panchjanya Organiser Weekly

Want your business to be the top-listed Government Service in Delhi?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Address


Delhi
110015