07/09/2024
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
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07/09/2024
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
21/06/2024
श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र - Shri Shiv Rudrashtakam Stotram | सनातन रूल्स श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र मंत्र (Shree Shiv Rudrashtak Stotra Mantra) को रुद्र कवच मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इन सभी मंत्रों में .....
24/12/2023
भगवान शिव के इस मंत्र के बिना अधूरी मानी जाती है पूजा - कर्पूरगौरं करुणावतारं कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् | सदा वसंतम हृदयारविंदे, भवम भवानी सहितं नमामि || मंगलम भगवान् व.....
24/10/2023
रावण की तरह मन के विकारों का नाश हो,
प्रभु श्रीराम का हृदय में सर्वदा वास हो।
दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।
#दशहरा
#विजयादशमी
#हैप्पीदशहरा
#दशहरा2023
#दशहरात्योहार
#दशहरा_उत्सव
15/10/2023
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
#नवरात्रि
गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता की कैसे करें पूजा
भगवान गणेश सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजनीय हैं अर्थात कोई भी शुभ कार्य करना है तब उसके लिए हमें सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करनी पड़ेगी। इसका कारण है कि कोई कार्य यदि सफल होता है तो उसका पूरा श्री गणेश भगवान को दिया जाता है क्योंकि भगवान गणेश बुद्धि के देवता है वह पितृ भक्त और मातृ भक्त है। उन्होंने अपने माता और पिता के आशीर्वाद से देवताओं में पहले पूजनीय होने का वरदान पाया। जिसके परिणाम स्वरूप कोई भी शुभ कार्य करने से पहले उनका नाम अवश्य लिया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता की कैसे करें पूजा - Ganesh Chaturthi 2022 | सनातन रूल्स Ganesh Chaturthi 2022 : भगवान गणेश सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजनीय हैं गणेश चतुर्थी की शुभ मुहूर्त तिथि 30 अगस्त 2022 को दोपहर 3:35 पर .....
04/09/2023
श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र
रुद्र मंत्र (Rudra Mantra) भगवान रूद्र को समर्पित है, जो भगवान शिव का ही रूप माने जाते हैं और व्यापक अर्थों में दोनों एक ही हैं। अर्थात सर्वशक्तिमान भगवान महादेव ही रुद्र हैं। रुद्र मंत्र (rudra mantra lyrics) के इष्ट देवता भगवान शिव ही हैं। रुद्र मंत्र की आवृत्तियों को बार-बार दोहराने अर्थात इनका जाप करने से भगवान शिव का पावन सानिध्य प्राप्त होता है और मंत्र जाप करने वाले की कोई भी इच्छा पूरी हो सकती है।
देवों के देव कहे जाने वाले महादेव शिव, जिन्हें रुद्र के नाम से भी जाना जाता है, रुद्र मंत्र (shiva rudra mantra) के जाप से शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति भी कर देते हैं। भगवान शिव दुखों का नाश करने के लिए जब भी अपने संहारक रूप में आते हैं और उस काल में रौद्र रूप को रूप धारण करके सभी शत्रुओं को रुलाने से ही वे शिव रुद्र बन जाते हैं और इन्हीं की कृपा पाने के लिए रुद्र मंत्र का जाप करना चाहिए।
श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र मंत्र (Shree Shiv Rudrashtak Stotra Mantra) को रुद्र कवच मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इन सभी मंत्रों में चमत्कारी शक्तियां होती हैं। जो जातक इन मंत्रों का जाप करता है, नकारात्मक ऊर्जा उससे दूर रहती है। इस मंत्र के जाप के दौरान उपासक को भगवान रुद्र को फूल और शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए। आप चाहें तो नियमित रूप से रुद्र मंत्र का जाप कर सकते हैं। हालांकि इन मंत्रों को वैदिक नियमों के अनुसार ही जाप किया जाना चाहिए।
श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र - Shri Shiv Rudrashtakam Stotram | सनातन रूल्स श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र मंत्र (Shree Shiv Rudrashtak Stotra Mantra) को रुद्र कवच मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इन सभी मंत्रों में .....