गिरना भी अच्छा है,
औकात का पता चलता है।
बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को,
अपनों का पता चलता है।
जिन्हें गुस्सा आता है,
वो लोग सच्चे होते हैं।
मैंने झूठों को अक्सर
मुस्कुराते हुए देखा है।
सीख रहा हूं अब मैं भी
इंसानों को पढ़ने का हुनर
सुना है चेहरे पे किताबों
से ज्यादा लिखा होता है।
राकेश सनोरिया, आम आदमी पार्टी हरी नगर Ac-28
social worker
*जय श्री राम*
[13/10, 19:15] हे राम //-: सबने रावण दहन किया, लेकिन क़ोई भी भी आज हरिद्वार नहीं गया! हिंदूधर्म मे यह गलत हैँ!
08/10/2024
बहम था सारा बाग़ अपना हैँ!
लेकिन तूफान के बाद पता चला कि सूखे पत्ते भी हमारे नहीं!
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