13/02/2026
Rajan Kumar yadav
social services
13/02/2026
08/02/2026
01/02/2026
केंद्रीय बजट 2026 बिहार और देश के लिए निराशाओं का ढेर साबित हुआ!
केंद्रीय बजट 2026 सरकारी दावों और वास्तविकता के बीच गहरी खाई को उजागर करता है। इसमें विकास और आत्मनिर्भरता जैसे शब्दों की भरमार तो है, लेकिन किसान, मजदूर, युवा व मध्यम वर्ग को कोई ठोस राहत या उनके आर्थिक उत्थान एवं सशक्तिकरण के लिए इस सरकार के पास कोई बजट 2026 के माध्यम से कोई दिशा नहीं मिली!
देश के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमज़ोर और पिछड़े वर्गों और समूहों को हाशिए पर छोड़ कर देश कैसे आत्मनिर्भर बन सकता है?
महंगाई आम आदमी को परेशान कर रही है, पर दैनिक जरूरतों पर करों में कमी या राहत का कोई प्रावधान ही नहीं है।
बेरोजगारी देश की प्रमुख समस्या बनी हुई है, मगर युवाओं के लिए स्थायी नौकरियां पैदा करने के बजाय इंटर्नशिप जैसी अस्थायी योजनाओं पर जोर दिया गया। पकोड़े तलने या रील बनाने को अगर सरकार स्वरोजगार में जोड़ कर देख रही है तो इसमें सरकार का क्या योगदान है?
किसानों की आय दोगुनी करने की पहली वाली समयसीमा 2022 के निकल जाने के बाद इस वादे को फिर से निर्लज्जता से दोहराया गया लेकिन MSP की कानूनी गारंटी या कर्ज माफी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी साध ली गई।
स्वास्थ्य व शिक्षा में निवेश अन्य देशों की तुलना में बिल्कुल अपर्याप्त है, जबकि कॉरपोरेट टैक्स छूट जारी रही। अगर मानव संसाधन का ही विकास नहीं होगा तो कॉरपोरेट जगत किसके बल पर आगे बढ़ेगा?
यह बजट असमानता बढ़ाता है, न कि सामाजिक न्याय को मजबूत करता है। देश को प्रचार नहीं, हर नागरिक तक पहुंचने वाली ईमानदार नीतियों की जरूरत है। सरकार की ऐसी नीतियां है कि गरीब दरकिनार होता जा रहा है, ग़रीब और भी ज्यादा गरीब हो रहा है और अमीर और ज्यादा अमीर होता जा रहा है। दोनों के बीच की खाई पाटे जाने के बजाय सरकार इसे और गहरी करते जा रही है।
केंद्रीय बजट 2026 बिहार जैसे पिछड़े, श्रमप्रधान, कृषि प्रधान राज्य के प्रति सौतेले व्यवहार दर्शाता है। दुर्भाग्य है कि जिन्होंने यह आम बजट निकाला है उनकी ही सरकार बिहार में है, उन्हें इस खोखले दिशाहीन बजट में भी चमत्कार ही दिखेगा, भले ही अपने 20 साल के शासन में उन्हें दिखाने के लिए कुछ भी नहीं हो।
विकास के तमाम दावों के बावजूद रोजगार, पलायन, कृषि व बुनियादी ढांचे जैसी जरूरतें हाशिए पर रहीं, जबकि यह वह समस्याएँ हैं जो बिहार को सर्वाधिक कचोटती हैं।
देश को सबसे ज्यादा श्रमिक देने वाले राज्य बिहार के लिए उद्योग स्थापना, स्थानीय रोजगार या कौशल विकास का कोई विशेष पैकेज ही नहीं है, मानो बिहार को यह जिम्मेदारी दे दी गई है कि उन्हें देशभर में के कल कारखानों को अपनी सस्ती मजदूरी से जिंदा और फायदेमंद बनाए रखना है, चाहे इसके लिए बिहार के श्रमिकों की पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी में जीवनयापन करने को शापित ही क्यों ना रहें!
कृषि प्रधान बिहार में MSP गारंटी, बाढ़-सूखा प्रबंधन व सिंचाई पर पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। विडंबना है कि स्वास्थ्य-शिक्षा में राष्ट्रीय औसत से पीछे बिहार को मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालयों के लिए विशेष घोषणा नहीं मिली।
रेल, सड़क व बिहार के समग्र विकास पर भी बिहार के हाथ निराशा ही लगी।
बजट 2026 कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देता है, बिहार के गरीबों, किसानों व युवाओं की उपेक्षा करता है। संतुलित विकास के लिए बिहार को न्यायसंगत आर्थिक समर्थन जरूरी है, जो वर्तमान बिहार सरकार और केंद्र सरकार की आपसी सत्तालोभी मिलीभगत और जुगलबंदी में मिल पाना संभव नहीं दिखता!
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17/11/2025