31/03/2026
देशभक्ति मेरा धर्म
मेरा भारत महान
31/03/2026
28/03/2026
अभी कुछ ही दिन पहले ईद का त्योहार था। देश के कई हिस्सों में एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली—जब नमाज़ पढ़कर लोग लौट रहे थे, तो रास्तों में खड़े लोगों ने उन पर फूलों की बारिश की। उस पल ने दिल जीत लिया था। लगा था कि यही है हमारा भारत, जहां त्योहार सिर्फ अपने नहीं, बल्कि सबके होते हैं।
लेकिन आज जो खबर सामने आई, उसने उसी भरोसे को हिला दिया। बंगाल के मुर्शिदाबाद में रामनवमी के जुलूस के दौरान अचानक माहौल बदल गया। पहले मामूली कहासुनी हुई, फिर देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। कई लोग घायल हुए, दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
सोचने वाली बात है—एक तरफ फूलों से स्वागत और दूसरी तरफ पत्थरों से जवाब। क्या यही भाईचारा है?
अगर त्योहार डर का कारण बनने लगें, तो हमें रुककर खुद से सवाल करना होगा—आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं?
Disclaimer: यह पोस्ट उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स पर आधारित है, किसी भी धर्म या समुदाय को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं है।
26/03/2026
धुरंधर फ़िल्म में मेजर इकबाल (वास्तविक जीवन में इलियास कश्मीरी) का एक डायलॉग है "मैंने हिंदुस्तानी काफ़िर का सिर काटकर मुशर्रफ के दस्तरख्वान पर रखा था।"
यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है। इलियास कश्मीरी हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी का कमांडर था। इस आतंकी संगठन ने 27 फरवरी 2000 को राजौरी में अशोक लिसनिंग पोस्ट पर भारतीय सैनिकों पर हमला किया था जिसमें ड्यूटी पर तैनात 17 जवानों को वीरगति प्राप्त हुई थी। उन्हीं जवानों में से एक 17 मराठा लाइट इन्फेंट्री के जवान भाऊसाहेब मारुति तालेकर का सिर काटकर वे पाकिस्तान ले गए थे। इलियास ने वह कटा सिर मुशर्रफ के सामने पेश किया जिसके लिए उसे सम्मान और पुरस्कार मिला था।
पाकिस्तानी समर्थकों को इसीलिए धुरंधर से मिर्ची लग रही है क्योंकि पाकिस्तान की बर्बरता के कच्चे चिट्ठे खुल रहें हैं।
#समझे_चंपक?
#मनेजस्टबताया
26/03/2026
उबलते दूध से स्नान करने के चक्कर में एक बाबा बुरी तरह से जल गया। दरअसल गर्म दूध से स्नान करना इनकी ट्रिक होती है , उबल रहे घड़ों के दूध के बीच एक घड़ा ऐसा होता है ,जो फिटकरी की वजह से उबल रहा होता है ,जबकि उसका दूध वास्तव में गर्म नही होता। उसी घड़े को पहचान कर स्नान करना होता है। यहां बाबा से घड़ा पहचानने में गलती हो गई। 🤭🤭
25/03/2026
ये घटना बरेली की है... अब आप कल्पना करिए अगर कोई हिंदू त्यौहार होता और हिंदुओं की भीड़ यही काम करती तो राहुल गांधी प्रियंका वाड्रा और सारे कांग्रेसी चमचे छाती पीटकर हल्ला करते लहंगा घागरा उठाकर चिल्लाते हाय मेरे बापू के साथ क्या कर दिया हाय मेरे बापू के साथ क्या कर दिया
लेकिन क्योकि गांधी की प्रतिमा के साथ यह अश्लील हरकत मुसलमानो ने की है इसीलिए अखिलेश यादव से लेकर पूरी कांग्रेस चुप है।
#कांग्रेसपार्टी
#समाजवादीपार्टी
24/03/2026
-भारत का बंटवारा कराया और पाकिस्तान बनाया
-पाकिस्तान से भारत की दुश्मनी करवाई
-दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान पहुंचाया
-पाकिस्तान में ल्यारी जैसा गैंगस्टरों का इलाका बसाया
-हिंदुस्तान के पंजाब में नशा, आतंकवाद, अलगाववाद बढ़ाया
-भारतीय प्लेन हाइजैक करवाया
-संसद पर हमला करवाया
-मुंबई में 26/11 हमला करवाया
-उरी, पुलवामा जैसे आतंकी हमले करवाए
-भारत में नकली नोट और माफियों का नेटवर्क खड़ा किया
-मोदी से कहकर नोटबंदी करवाई
-पाकिस्तान में एक के बाद एक "अननोन मेन" द्वारा आतंकियों की हत्या करवाई
इतना सब किया गया ताकि धुरंधर जैसी प्रोपोगेंडा फिल्म बनाई जा सके..क्या जरूरत थी इतना झूठ फैलाने की जबकि भारत में टाइगर, पठान, मैं हूं ना जैसी "अमन की आशा" वाली फिल्में बन ही रही थीं 😉
धुरंधर एक प्रोपोगंडा है वरना रियल मूवीज तो पहले से बन रही है देखिए 👇👇👇👇
16/03/2026
जो स्त्री सेक्स देती है उसकी बात को टालना या मना करना आसान नहीं होता
एक तारीख थी। पति अपनी सैलरी लेकर शाम को थका हुआ घर आया। पत्नी इंतजार में थी कि कब पति आएगा। पति के आते ही उसने उसे गर्म-गर्म चाय पिलाई और पूछा —
“आज सैलरी आ गई होगी आपके?”
पति मुस्कराहट के साथ बोला —
“हाँ, और इस महीने ओवर टाइम का ₹12,000 बोनस भी मिला है।”
पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पत्नी मीठी आवाज़ में बोली —
“क्या हम इस रविवार को शॉपिंग करें?”
तो पति बोला —
“ठीक है, लेकिन सिर्फ एक शर्त पर। यदि तुम हफ्ते में कम से कम एक बार मेरी मां से फोन पर बात कर उनका हाल पूछोगी।”
पत्नी ने दबी आवाज़ में “हाँ” कर दी। पति सिर्फ यह चाहता था कि उसकी मां और पत्नी के बीच जो भी अनबन है, वह दूर हो जाए।
ठीक 2 मिनट बाद पति के मोबाइल पर मां का फोन आया। उधर से मां बोली —
“कैसे हो बेटा?”
बेटा बोला —
“मां, मैं ठीक हूँ। आप सबका हाल-चाल?”
तो पत्नी इधर मुंह बनाकर मन ही मन सोच रही थी —
“आज पहली तारीख है, सैलरी आई है, इसलिए फोन करके पैसे मंगवाना चाहती है। लेकिन इस बार मैं एक पैसा भी नहीं देने दूंगी।”
उधर मां बोली —
“बेटा, थोड़ी मदद चाहिए।”
तो बेटा बोला —
“बोलिए मां, क्या हुआ?”
मां बोली —
“बेटा, इस महीने ₹5000 मिल सकते हैं क्या?”
पति हर काम अपनी पत्नी से पूछकर करता था। उसने यह बात पत्नी से पूछी। पत्नी बोली —
“बोल दो कि अभी सैलरी नहीं आई है।”
बेटे ने मां से कहा —
“मां, अभी सैलरी आने में टाइम है।”
मां बोली —
“बेटा, कैसे भी करके भिजवा दो, प्लीज। हॉस्पिटल में इलाज के लिए चाहिए।”
पति ने यह बात पत्नी से दोहराई। पत्नी बोली —
“मां से बोल दो कि सरकारी हॉस्पिटल में इलाज करवा लें।”
पति ने मां को यही सलाह दी।
मां बोली —
“बेटा, सरकारी अस्पताल में सही इलाज नहीं होता और वहाँ ध्यान भी नहीं रखते। इस बार तो…”
पत्नी को गुस्सा आ गया और वह पति से बोली —
“बोल दो उन्हें कि हमारे सर पर पहले से इतना बोझ है और अब इससे ज्यादा हम सह नहीं पाएंगे। इसलिए सरकारी अस्पताल में ही इलाज करवाओ।”
पत्नी के शब्द बिगड़ गए। यह बोलते हुए बोली —
“वैसे भी चार-पांच दिन की मेहमान हैं।”
पति इस बार बोला —
“ऐसे तो मत बोलो मां के बारे में।”
पति को थोड़ा गुस्सा आ गया, लेकिन मन को शांत करते हुए मां से बोला —
“मां, इस महीने नहीं हो पाएगा। इसलिए सरकारी हॉस्पिटल में ही करवा लीजिए इलाज।”
मां उधर से भीख मांगने लगी —
“बेटा, प्लीज ₹2000 तो दे दो।”
तो पति आँखों में आंसू लिए पत्नी से बोला —
“कम से कम ₹2000 तो देने दो।”
पत्नी गुस्से में थी लेकिन जैसे-तैसे मान गई और बोली —
“ठीक है, बोल दो कि ₹2000 भिजवा देंगे कल।”
तो उधर पति बोला —
“सासू मां, आपको कल ₹2000 भिजवा दूंगा।”
पति के मुंह से इस बार “मां” की जगह “सासू मां” सुनते ही पत्नी को चक्कर आने लगे। जुबान लड़खड़ाने लगी, पसीना छूट गया और पति से पूछा —
“क्या यह मेरी मां का फोन आया है?”
पति बोला —
“हाँ, तुम्हारी मां का ही फोन है। मैं तो तुम्हारी मां को भी अपनी मां ही समझता हूँ। लेकिन तुमने कभी मेरी मां को अपनी मां की तरह समझा ही नहीं।”
पत्नी इस बार जोर से रो पड़ी और फोन में माफी मांगने लगी —
“मुझे माफ कर दो मां, मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है।”
तो उधर से मां बोली —
“बेटी, यदि सिर्फ एक मां का दिल दुखाया होता तो माफ कर देती। लेकिन तुमने तो आज एक नहीं बल्कि दो मांओं का दिल दुखाया है।
यदि आज मैं तुम्हें माफ भी कर दूं, तो भी ऊपर वाला तुम्हें माफ नहीं करेगा।”
संदेश
तो दोस्तों, ऐसा माना जाता है कि अगर ऊपर वाला भी मां का कर्ज चुकाने आ जाए तो वह भी कंगाल हो जाए।
एक मां खुद मौत के मुंह में जाकर ज़िंदगी को जन्म देती है। उस मां का सम्मान करें।
मां तो मां होती है, उसको मरने से पहले जीते-जी न रुलाएँ
11/03/2026
दोस्तों ये जो जिम में एक्सरसाइज करता दिख रहा है.... यही है दिल्ली में उत्तम नगर में ज@हादि@यों के हाथों मारा गया तरुण खटीक...
लड़का आसानी से दो चार के काबू में आने वालों में से नहीं था...
गलत होते देखता तो रोकने से हिचकता नहीं था.... बहन बेटी पर कोई आँख उठाता सड़क चलता भी दिखे तो तन कर खड़ा होता था
निडर हिन्दू था.... और हिंदुत्व के लिए समर्पित युवा था...
किसी के साथ गलत करता भी न था
और गलत करने भी न देता था
तरुण की वजह से ज@हा%दियों के इरादे ठंडे थे
बहन बेटियों की तरफ़ आँख उठाते तरुण का डर था मोहल्ले में
तो होली पर बहाना ढूंढ 40-45 का झुण्ड बना कु@त्तों ने निहत्थे तरुण को घेर कर हमला किया...
वो लड़ा.... अकेला लड़ा
और लड़ते हुए मरा नहीं..... ध@र्मयुद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गया...
हर माँ को अपना बेटा तरुण खटीक जैसा ही शेर बनाना होगा
परवाह नहीं एक बेटा गया है.... 1000 और बेटे उसके जैसे खड़े होंगे..
जिंदगी और मौत तो विधाता के हाथ है
हाँ पर जीना कैसे है यह हमारे हाथ है...
नपुंसकता का नंगा सच ~~~
ट्रेन में दूसरों के सर पर भी पैर रख कर निकल जाने को तैयार आप, बीच रास्ते में नमाज़ के लिए बिछाई गयी चटाई को देखते ही पेशाब रोक कर बैठ जाते हैं, या लांग जम्प मार के ऐसे निकलते हैं कि, चटाई का कोना भी आपसे छू न जाये । तो इसलिए नहीं कि आप बड़े धैर्यवान और सहिष्णु हैं । बल्कि इसलिए कि नमाजी को देखकर आपकी पूँछ आपके पैरों के बीच आ जाती है ।
भीड़ भरी सड़कों पर भी फर्राटा भरती आपकी बाइक या गाड़ी मुस्लिम बस्ती के पास जाते ही रेंगने लगती है और लोगों की जान की परवाह न करने वाले आप वहाँ मुर्गियों और बकरियों तक की जान की परवाह करने लगते हैं । तो इसलिए नहीं कि आप बड़े संस्कारी, नियम पालन करने वाले और अनुशासनप्रिय हैं । बल्कि इसलिए कि ऐसी बस्ती के पास पहुँचते ही आपकी जान हलक में आ जाती है।
पुलिस वालों से भी मुँहचार करने में कभी पीछे ना रहने वाले आप किसी से बहस होने पर चार गोल टोपी वालों के जुटते ही वहाँ से रफूचक्कर होने के रास्ते तलाशने लगते हैं । तो इसलिए नहीं कि आप बड़े सभ्य, लड़ाई झगड़ों से दूर रहने वाले, शांतिप्रिय व्यक्ति हैं । बल्कि इसलिए कि उन गोल टोपी और ऊँचे पैजामे वालों को देखते ही आपकी बारह बज जाती है ।
अपने धर्म की हर छोटी बड़ी बात का मज़ाक होते देख भी आनंद उठाने वाले आप 'शांतिदूतों' के सामने जब सब धर्मों की अच्छाई का गुणगान करते हुए उसके द्वारा अपने मजहब की 'अच्छाइयों' को बताने पर हाँ में हाँ मिलाने लगते हैं । तो इसलिए नहीं कि सच में आप धर्मों को लेकर संवेदनशील हैं । बल्कि इसलिए कि उसकी किसी गलत बात का विरोध करने के नाम पर भी आपके पसीने छूट जाते हैं।
किसी शोभायात्रा के समय अपनी कार या बाइक से हॉर्न बजा बजा कर रास्ता बनाने की कोशिश करते आप मुहर्रम के जुलूस में बाइक और गाड़ी चुपचाप किनारे खड़ी कर जब सब सम्प्रदायों के सम्मान की बात का ढोल पीटते हैं, तो इसलिए नहीं कि आप सच में बहुत विनयी प्रकृति के व्यक्ति हैं । बल्कि इसलिए कि मुहर्रम के जुलूस में छाती पीटते और सर पर ट्यूबलाइट्स फोड़ते खूनखच्चर लोगों को देख आपकी हवा टाइट हो गयी होती है ।
विचार करियेगा......
ये सच्चाई है और हम सब आज डर में जीने के लिए मजबूर हैं..! किससे
नाम लेने की मुझको जरूरत है क्या ❓
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