04/06/2026
बामसेफ कच्छ जिला यूनिट की वार्षिक सभा सम्पन्न, नई कार्यकारिणी का गठन |
गांधीधाम (कच्छ), 3 जून 2026
बामसेफ कच्छ जिला यूनिट की वार्षिक सभा बुधवार, 3 जून 2026 को गांधीधाम, जिला कच्छ (गुजरात) में मू. डी.एम. कटुआ, जिला प्रभारी बामसेफ कच्छ जिला यूनिट की अध्यक्षता में संपन्न हुई। सभा में संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं शुभेच्छकों ने भाग लिया तथा विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सभा के निर्धारित एजेंडा के अनुसार कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026-27 के लिए बामसेफ कच्छ जिला कार्यकारिणी समिति का पुनर्गठन किया गया। सर्वसम्मति से गठित नई कार्यकारिणी इस प्रकार है—
बामसेफ कच्छ जिला कार्यकारिणी समिति (2026-27)
अध्यक्ष
मू. घेवरचंद मौर्या
महासचिव
मू. रमेश जी. कन्नर
कोषाध्यक्ष (कैशियर)
मू. देवराज पी. लालन
सदस्य
मू. दयालाल कन्नर
मू. गोविंदभाई दाफड़ा
मू. राजेशभाई धुआ
मू. महेंद्रसिंह एन.
मू. प्रकाशभाई श्रीमाली
मू. हिरजीभाई चंदारिया
सभा के दौरान संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा समाज के बीच वैचारिक एवं सामाजिक कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया।
वार्षिक सभा के समापन के पश्चात शुभेच्छकों एवं कार्यकर्ताओं के बीच कच्छ जिला यूनिट में मूलनिवासी संघ के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए मू. जगदीश गारु के नाम का प्रस्ताव मू. नाराण बी. गरवा द्वारा जिला अध्यक्ष के रूप में रखा गया। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मू. जगदीश गारु के नेतृत्व में मूलनिवासी संघ कच्छ जिला यूनिट की कार्यकारिणी समिति का गठन शीघ्र किया जाएगा, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक मजबूती एवं विस्तार मिल सके।
— राहुल रंजन | राजा गौतम
एमएनटी न्यूज़ नेटवर्क
03/06/2026
कैथल में शिक्षकों को संबोधित करते हुए बामसेफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सुरेश द्रविड़ ने सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती पर दिया बल
हरियाणा के कैथल में आयोजित कार्यक्रम में बामसेफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सुरेश द्रविड़ ने विद्यालय अध्यापक संघ के साथियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों की सामाजिक भूमिका, संगठन की मजबूती, वैचारिक जागरूकता तथा समाज में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक वर्ग समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम है और सामाजिक चेतना के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कैथल के साथियों के साथ हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य कौंसिल सम्मेलन में भाग लिया। यह सम्मेलन जाट धर्मशाला हिसार में 1,2 जून को आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा लाए गए 9 प्रस्तावों को सदन ने पास किया, सभी ने इन प्रस्तावों का समर्थन किया।
अनेक विषयों पर चर्चा हुई, चर्चा बहुत ही सार्थक थी। शिक्षा विभाग से जुड़े होने के कारण हरियाणा के शिक्षा विभाग को तथा शिक्षा से संबंधित नीतियों को और चुनौतियों को भी जानना, समझना बेहद जरूरी है। इस सम्मेलन से जानकारी में इजाफा हुआ है।
हरियाणा में शिक्षा विभाग से संबंधित अनेक मसले खड़े हो गए हैं, शिक्षा विभाग को समेटा जा रहा है और शिक्षकों को ऊल-जलूल मुद्दों में उलझाया जा रहा है,टैट भी एक बड़ा मुद्दा है जो पूरे भारत वर्ष के शिक्षकों को प्रभावित करेगा। वर्ष 2000 की भर्ती वाला मसला भी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है, जुलाई माह में निर्णय आने की संभावना है। इस निर्णय से हम भी प्रभावित हो सकते हैं। इन मुद्दों पर भी संघर्ष करना पड़ सकता है,जिसकी तैयारी करने की भी आवश्यकता है। इस सांझा लड़ाई के लिए हम तैयार हैं।
सुरेश द्रविड़
संविधान प्रबोधक
मू. सुरेश द्रविड़
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बामसेफ नई दिल्ली
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Suresh Dravid
MNT News Network
बामसेफ
01/06/2026
बामसेफ भोजपुर जिला समिति का गठन, विभीषण राम बने जिलाध्यक्ष
आरा, भोजपुर | 31 मई 2026
बामसेफ भोजपुर एवं उसके सभी ऑफ-सूट विंग्स के तत्वावधान में रविवार को आरा के जगदेव नगर स्थित इंद्रलोक भवन में कैडर कैंप सह जिला समिति गठन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर बामसेफ बिहार के राज्याध्यक्ष मूलनिवासी राजकमल ने कैडर कैंप को संबोधित करते हुए संगठन निर्माण, संगठनात्मक संरचना तथा सामाजिक क्रांति के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभानी होगी तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक संगठन की विचारधारा पहुंचानी होगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ के केंद्रीय समिति सदस्य मू. उमाशंकर सिंह ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत संगठन निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं जागरूक कार्यकर्ता ही संविधान के दायरे में रहकर देश की वर्तमान दशा और दिशा को सकारात्मक रूप से बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कैडर कैंप के उपरांत बामसेफ भोजपुर जिला समिति का गठन किया गया। नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष मू. विभीषण राम ने संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए पूरे जिले में बामसेफ की गतिविधियों को और अधिक तेज़ करने का संकल्प लिया।
राज्य संगठन सचिव एवं भोजपुर प्रभारी मू. डॉ. मनोज कुमार गुप्ता ने नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा की। घोषित समिति में मू. विजय कुमार सिंह को जिला सचिव, मू. प्रो. नंदकिशोर चौधरी को उपाध्यक्ष, मू. प्रवीण कुमार प्रभाकर को कोषाध्यक्ष तथा मू. सुशील कुमार सुधाकर को प्रशिक्षण सचिव बनाया गया।
इसके अतिरिक्त मू. शाहनवाज, मू. कमलेश कुमार, मू. अमित कुमार, मू. मून महेश राम, मू. मैनेजर सिंह, मू. दुर्गावती कुमार, मू. संतोष कुमार, मू. उपेंद्र कुमार राम, मू. सुनील कुमार, मू. सुमेश कुमार एवं ओमप्रकाश पंडित को जिला कार्यकारिणी समिति का सदस्य मनोनीत किया गया।
कार्यक्रम का समापन संगठन को गांव-गांव तक मजबूत बनाने तथा बहुजन समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष को और तेज करने के संकल्प के साथ हुआ।
जय भीम! जय मूलनिवासी!
जय भारत! जय संविधान!
रिपोर्ट:- राहुल रंजन | राजा गौतम
Published by- MNT News Network
30/05/2026
आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है।
बामसेफ संगठन पिछले 23 वर्षों से मूलनिवासी टाइम्स हिंदी पाक्षिक प्रकाशित कर रहा है। आप इस पाक्षिक अखबार को डाक द्वारा अपने घर पर मंगा सकते हैं।
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28/05/2026
नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय छात्र प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को मिला वैचारिक मार्गदर्शन
रिंगणाबोडी, नागपुर | 27 से 29 मई 2026
मूलनिवासी विद्यार्थी संघ (MVS) द्वारा नागपुर के रिंगणाबोडी में 27, 28 और 29 मई 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय छात्र प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर से आए विद्यार्थियों को वैचारिक, सामाजिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत बनाना रहा। शिविर में विभिन्न विषयों पर अनुभवी वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा सामाजिक आंदोलनों में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष **डॉ. अमोल वज्जी** के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने संगठन के विजन और मिशन को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मूलनिवासी समाज के विद्यार्थियों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी आगे आना होगा।
शिविर के दौरान “मूलनिवासी बहुजन आंदोलन में विद्यार्थियों की भूमिका”, “भारत में विद्यार्थी आंदोलनों की गतिशीलता”, “सामाजिक आंदोलनों में लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली एवं निर्णय प्रक्रिया”, “विद्यार्थी जीवन में शैक्षिक एवं आंदोलनात्मक कार्यों का संतुलन” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए छात्र-छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए।
इस प्रशिक्षण शिविर का एक प्रमुख आकर्षण बामसेफ (BAMCEF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष **संजय मोहिते जी** का संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने “मूलनिवासी विद्यार्थी संघ की संरचना, विस्तार नीतियां और रणनीतियां” विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मूलनिवासी विद्यार्थी संघ केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि मूलनिवासी समाज के वैचारिक आंदोलन की मजबूत रीढ़ है।
संजय मोहिते जी ने अपने संबोधन में संगठन को भीड़ आधारित नहीं बल्कि कैडर आधारित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के “Educate, Agitate, Organize” सिद्धांत को विद्यार्थियों के जीवन का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत करियर निर्माण नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और संगठित करना भी होना चाहिए।
उन्होंने संगठन के विस्तार के लिए “Campus to Village” दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थी गांव-गांव जाकर वंचित समाज के बच्चों को शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करें। साथ ही डिजिटल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से सही इतिहास और वैचारिक मुद्दों को युवाओं तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने, कॉलेजों और हॉस्टलों में स्टडी सर्कल बनाने तथा जमीनी स्तर की पत्रकारिता को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे सावित्रीबाई फुले, राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले, छत्रपति शाहू जी महाराज और डॉ. आंबेडकर के विचारों का अध्ययन कर सामाजिक न्याय के आंदोलन को नई दिशा दें।
कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग और वैलेडिक्टरी सत्र में संगठन के भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के वैचारिक प्रशिक्षण शिविर युवाओं को नेतृत्व क्षमता विकसित करने और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
बामसेफ
MNT News Network
रिपोर्ट:- राहुल रंजन | राजा गौतम
Published by- MNT News Network
28/05/2026
नागपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय महिला कैडर कैंप में महिलाओं को मिला वैचारिक एवं संगठनात्मक प्रशिक्षण
BAMCEF एवं सभी ऑफशूट्स की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
रिंगणाबोड़ी, नागपुर
राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले सामाजिक क्रांति संस्थान (RJPJSR), DKKMT, रिंगणाबोड़ी, नागपुर द्वारा BAMCEF के द्वारा 27 से 29 मई 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय महिला कैडर कैंप का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आई महिलाओं ने भाग लेकर सामाजिक, वैचारिक एवं संगठनात्मक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को बहुजन आंदोलन की विचारधारा, इतिहास, सामाजिक संरचना, संगठन निर्माण एवं नेतृत्व क्षमता से जोड़ना रहा। शिविर में महिलाओं को आंदोलन की दिशा, जिम्मेदारियों एवं वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक किया गया।
पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण प्रक्रिया कार्यक्रम राष्ट्रीय गीत और और शपथ ग्रहण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत । जिसके बाद उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में BAMCEF की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनीता कापरवाल एवं डायरेक्टर ऑफ ट्रेनिंग एम. डी. चंदनशिवे ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज परिवर्तन के आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाएं वैचारिक रूप से मजबूत नहीं होंगी, तब तक सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।
पहले दिन - राष्ट्रीय गीत और और शपथ ग्रहण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। आयोजित विभिन्न सत्रों में “इतिहास, मूलनिवासी महामानव एवं मूलनिवासी पहचान”, “ब्राह्मणवादी व्यवस्था और मूलनिवासी महिलाओं की वर्तमान स्थिति”, “लोकतांत्रिक कार्य प्रणाली, निर्णय प्रक्रिया एवं संगठन व्यवहार” जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने महिलाओं को संविधान, सामाजिक न्याय एवं बहुजन आंदोलन के इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया।
दूसरे दिन सुबह व्यायाम, इसके बाद “मूलनिवासी पुरुष आंदोलन में महिलाओं की भूमिका, जिम्मेदारियां एवं हस्तक्षेप”, “स्वास्थ्य एवं स्त्री स्वास्थ्य”, “संगठन के प्रश्न”, “महिला उत्पीड़न और कानूनी सहायता” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। वक्ताओं ने महिलाओं को समाज में व्याप्त भेदभाव, शोषण एवं असमानता के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करने का संदेश दिया।
कैडर कैंप के दौरान महिलाओं को संगठन निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व विकास, सामाजिक व्यवहार एवं आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के तरीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। विभिन्न सत्रों में मौजूद प्रशिक्षकों ने महिलाओं से संवाद करते हुए उनके प्रश्नों के उत्तर दिए और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित किया।
कार्यक्रम में सुनीता कापरवाल, एम. डी. चंदनशिवे, बी. डी. बोरकर, संजय मोहते, मनोज कुमार, शर्मिष्ठा गौतम, डॉ. दीपशा शिवास्ती, कविता मडावी, आदेश बैरवा सहित कई वरिष्ठ प्रशिक्षकों एवं पदाधिकारियों ने मार्गदर्शन दिया।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के राष्ट्रीय महिला कैडर कैंप का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं वैचारिक स्पष्टता विकसित करना है, ताकि वे सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकें। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों ने खुशी व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की मांग की।
लेखक: राहुल रंजन | राजा गौतम
Published by- MNT News Network
28/05/2026
बामसेफ (BAMCEF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू. संजय मोहिते जी द्वारा मूलनिवासी विद्यार्थी संघ की संरचना, विस्तार नीतियों और रणनीतियों पर दिया गया संबोधन संगठन के भविष्य और युवा नेतृत्व को तैयार करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
इस व्याख्यान के मुख्य बिंदुओं, रणनीतियों और संगठनात्मक ढांचे को निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है:
1. मूलनिवासी विद्यार्थी संघ की वैचारिक संरचना
संजय मोहिते जी के अनुसार, विद्यार्थी संघ केवल एक छात्र संगठन नहीं है, बल्कि यह मूलनिवासी समाज के वैचारिक आंदोलन की रीढ़ है। इसकी संरचना के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं
कैडर आधारित ढांचा: संगठन को 'मास-बेस्ड' (भीड़ आधारित) बनाने के बजाय 'कैडर-बेस्ड' (वैचारिक रूप से प्रशिक्षित) बनाने पर जोर दिया जाता है।
प्रबुद्ध वर्ग का निर्माण:-बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर के "Educate, Agitate, Organize" (शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो) के सिद्धांत पर चलते हुए, विद्यार्थियों में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक चेतना जगाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
नेतृत्व का विकेंद्रीकरण:- संगठन की संरचना इस तरह तैयार की जा रही है कि निर्णय प्रक्रिया में केवल शीर्ष नेतृत्व नहीं, बल्कि जमीनी स्तर (कॉलेज और यूनिवर्सिटी यूनिट) के छात्रों की भी सक्रिय भागीदारी हो।
2. विस्तार नीतियां (Expansion Policies)
संगठन को देश के कोने-कोने और हर शैक्षणिक संस्थान तक पहुँचाने के लिए निम्नलिखित विस्तार नीतियों को रेखांकित किया गया:
कैंपस टू विलेज (Campus to Village) दृष्टिकोण: विद्यार्थी केवल शहरों और विश्वविद्यालयों तक सीमित न रहें। छुट्टियों और विशेष अभियानों के दौरान वे अपने गांवों में जाकर समाज के वंचित तबके के बच्चों को शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करें।
डिजिटल और सोशल मीडिया का उपयोग: आधुनिक दौर में संगठन के विस्तार के लिए स्वतंत्र मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का अधिकतम उपयोग करना, ताकि सही इतिहास और वैचारिक मुद्दे युवाओं तक बिना किसी मिलावट के पहुँच सकें।
समावेशी विस्तार: मूलनिवासी समाज (SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक) के सभी वर्गों के छात्र-छात्राओं को संगठन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व देना, विशेषकर छात्राओं की भागीदारी को बढ़ाना।
3. रणनीतियां (Strategies)
मू. संजय मोहिते जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भविष्य के लिए कुछ व्यावहारिक रणनीतियों पर काम करने का निर्देश दिया:
वैचारिक प्रशिक्षण शिविर (Study Circles): कॉलेजों और हॉस्टलों में छोटे-छोटे स्टडी सर्कल (अध्ययन मंडल) बनाना। जहाँ सावित्रीबाई फुले, राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले, छत्रपति शाहू जी महाराज और डॉ. आंबेडकर के विचारों पर चर्चा हो।
जमीनी स्तर की पत्रकारिता और जागरूकता: मुख्यधारा के मीडिया द्वारा उपेक्षित किए गए मुद्दों को उठाने के लिए छात्रों को 'ग्राउंड रिपोर्टिंग' और सच्चाई पर आधारित पत्रकारिता के लिए प्रेरित करना।
अकादमिक उत्कृष्टता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी: छात्रों को यह समझना होगा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करना केवल व्यक्तिगत करियर बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उपयोग समाज को वापस भुगतान (*Pay Back to Society*) करने के लिए होना चाहिए।
संबोधन का मुख्य निष्कर्ष:
संजय मोहिते जी के इस मार्गदर्शन का मूल उद्देश्य मूलनिवासी विद्यार्थियों को एक ऐसे अनुशासित और वैचारिक रूप से मजबूत बल में तब्दील करना है, जो आने वाले समय में सामाजिक न्याय, समता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए बौद्धिक नेतृत्व प्रदान कर सके।
Report By-Raja Gautam