National Service Scheme- my dream

National Service Scheme- my dream

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NSS was launched in1969.Based on Swami Vivekanand and Mahatma Gandhi's thoughts to channelise youth

07/08/2025

My best wishes to all group members. Let us build our Nation best in the World.

09/05/2025
11/04/2022

Thanks Nitish & Akansha from JCBUST FBD for visiting me at my residence to take care of my wellbeing.

11/10/2021

Part of personality development is to remove our own ego.

Often after an argument or if we have been cheated, we feel hurt or let down, we choose to remain hurt or angry for hours, months even years.

We feel our hurt is justified, it was his/her mistake, he/she need to make things right or sometimes we even feel things can never be the same again. Irrespective of what had happened it takes only one thought to get back to normal. The mind will ask questions, give it the answers.

(1) Why should I be doing it, it was their fault? Because my relationship is more important than my ego.

2) Why so soon, let them at least realise their mistake? Because every passing moment is causing me and them pain and weakening our relationship.

3) Will I be considered weak if I give in? Forgiving, forgetting and moving on is strength, let me give myself and them that strength.

(4) If I become normal, will they do the same? They may take their time, but if I get to normal, the process has begun and very soon they will get back to normal.

(5) Will I be taken for granted? If people can take my love and care for granted, it’s my fortune. I have given them a reason to believe that I always love them.

if we have decided that our relationship is our priority, their happiness and our own happiness matters to us more than what was right or wrong.

14/09/2021

हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ साथ संपर्क भाषा भी बनती जा रही है। कभी कभी कुछ लोग इस भाषा में अनुवाद करते समय शब्दो को कठिन बनाने का प्रयास करते है जिससे सरलता से समझने के विपरीत उलझन पैदा होती जाती है। भाषा बोलने और लिखने में सरल है इसलिए यदि राष्ट्रभाषा भी हिंदी हो तो शायद आपसी संपर्क में आसानी हो जायेगी। हमारी क्षेत्रीय भाषा भी आवश्यक है उनका भी सम्मान होना चाहिए।हिंदीदिवस पर शुभकामनाएं।

19/05/2021

आईना
सभी के घर में एक आईना मौजूद होता है।किसी के लिए यह आईना एकमात्र साधन है पर किसी के लिए यह ज़िंदगी का एक सहारा , एक हमराज मित्र,स्वयं का आत्मदर्शन,तथा एक माध्यम जिसके द्वारा जीवन का अर्थ भी ढूंढ सके।
अपनी व्यथा किस से कहें।
ममता के कमरे में भी एक कोने में एक आईना था।उसे नही पता था कि यह आईना ही जीवन भर का सहारा और सहेली बनकर उसका साथ निभाएगा। विवाह से पहले वो अपनी परेशानी एवम नाराजगी आसानी से प्रकट कर देती थी लेकिन शादी के बाद परिस्थिति में बदलाव निश्चित रूप से आता है।

कुछ दिन तो सब कुछ नया नया था,समय बीतता गया और अब ममता का परिवार जैसे जैसे बढ़ने लगा ममता की पारिवारिक उलझने तथा जिम्मेवारी भी बढ़ने लगी।कभी कभी तो इतनी परेशान हो जाती थी कि जीवन ही भार लगने लगता था। किस से साझा करे अपनी व्यथा को?

किस से कहें की मैं अपनी जिम्मेवारी को पूर्ण निष्ठा से निभा रही हूं ? तकिए में सिर रख कर रोने के अलावा मन का भार कैसे कम करूं ?
क्या ये ही मानव जीवन है जिसे हम ईश्वर द्वारा प्रदत सर्व श्रेष्ठ योनि में गिनते हैं।न जाने लगातार कितने प्रश्नों से बोझिल ममता का मन हर बात का अर्थ जानना चाहता था।एक दिन ममता उस आईने के सामने बाल संवार रही थी न जाने अचानक ही आईना में देख कर प्रश्न किए जा रही थी और उसे अपने उत्तर स्वयं ही मिलने लगे। ममता ने जाना मानव जीवन का अर्थ संघर्ष है, मानव जीवन का अर्थ सिर्फ दूसरों की सेवा के लिए है। परिश्रम तो जानवर भी करते हैं लेकिन निस्वार्थ सेवा तो सिर्फ मनुष्य ही कर सकता है। ईश्वर ने तो उसे विवेक एवम बुद्धि इसी लिए ही दी है की उसका हर निर्णय स्वयं अपनी परेशानी का हल ढूंढ सके। उस के हर कर्म में एक वजह हो और वो है सेवा।अपनी सुविधा से जीना तो पशु एवम पक्षी भी जानते हैं।दूसरे की सेवा एवम परोपकार में जो आनंद है उसे सिर्फ मानव ही महसूस कर आनंदित हो सकता है।

ममता को हर प्रश्न का उत्तर मिल रहा था और वो उस बोझिल स्थिति से बाहर आती जा रही थी।उसे लग रहा था की अब उसे एक ऐसा मार्ग निर्देशक मिल गया जो उसकी हर समस्या का हल दे सकता है।ये आईना ही तो था जो ममता की व्यथा को प्रतिबिंबित करता था। वही तो बचपन से अब तक उसकी सारी परेशानियों को संजोए था। लेकिन कभी भी ममता ने उस और ध्यान नहीं दिया था।

अब ममता उसी के साथ अपने दिल की बातों को कह दिया करती थी कभी कभी आंसुओं से रो भी लिया करती थी ख़ुशी होती तो आइने से साझा करती थी। इतने बड़े परिवार में उसको समझने वाला और उसको सुनने वाला यही आईना ममता का हमराज़ बन गया था। वर्ष बीतते गए। ममता की उम्र चेहरे पर झलकने लगी थी।परंतु आज भी आईना कमरे के उस कोने में ममता को जीवन भर का सहारा देने का संकल्प लिए मौजूद था।
ममता आईने के सामने अपनी उन पुरानी तस्वीरों और यादों को खंगाला करती थी। सोचती थी उस आईने में खो जाने वाली विस्मृतीयां कहीं उसे दिखाई दें।उसका दमकता हुआ चेहरा समय के साथ साथ उस आईने की गहराइयों में कहीं खो गया थाl अब तो चेहरे पर झुर्रियों के माध्यम से एक मात्र आईना ही तो था जो उसकी जीवन के संघर्ष एवम उपलब्धियों को बार बार याद दिला रहा था।कितनी खुश थी वह जीवन की इस सफलता पर।
आईने से अच्छा दोस्त कहाँ मिल सकता है जो चुपचाप आपके मन की बात को सुनता है आपके मन को तसल्ली भी देता है आपको आपका स्वरूप दिखाता है,आपका सोच आपके चेहरे पर दिखाता है। आपकी परेशानियों में आपका सहारा बनता है आपकी बात को अपने तक ही रखता है।बस उससे बात करने के लिए स्वयं को उससे साझा करें।

13/05/2021

Corona pandemic ने हमारी जिंदगी में बहुत से दुखों के साथ साथ हमारी संस्कृति पर भी हमला किया है। वसुधैव: कुटुंबकम यानि ये पृथ्वी ही मेरा परिवार है का अनुसरण करने वाले लोग आज अपने निकटतम लोगों से भी दूरी बनाने पर मजबूर हैं। मृत शरीर को कंधा तो दूर पास आने से भी मजबूर हैं। ऐसे समय की कल्पना तो किसी ने भी नही की होगी।
ये समय भी नही रहेगा और फिर से हम सभी अपनी नजदीकियों को पुन: स्थापित करेंगे।
अपना ध्यान रखें,मास्क पहनें,शारीरिक दूरी बनाए, स्वच्छता अपनाए। मन से दूरी न बनाए।

09/05/2021

मां तो सर्व व्यापक है। प्रकृति,धरती भी तो मां होती है। मां की परिभाषा तो मातृत्व एवम त्याग में ही निहित है वही उसका चित्रण है। उसे हर पल प्राण शक्ति में ही महसूस किया जा सकता है। क्यूंकि प्राण शक्ति मां के द्वारा ही प्रदत है।

19/04/2021

WISE WORDS TO ABSORB
In life, friendships change, divorces happen, people move on, others die. Money and jobs will come and go. Live long enough and your health and body will change. It goes with the territory of being human. The fact that you are still here gives you an advantage. Don't look back. Look straight ahead!! Decide to use all of your knowledge, skills, experiences and your life lessons from your mistakes, defeats and setbacks, to start over again. Life changes. You may not have the same life as before, but you can still enjoy your life!"
— Les Brown

07/04/2021

प्रधान मंत्री जी को एक सुझाव।

मुझे आपकी परीक्षा पे चर्चा सुनने के बाद कुछ आपत्ति है। आपके अनुसार परीक्षा में नंबर महत्त्वपूर्ण नहीं है।मान्यवर एक विद्यार्थी के जीवन में परीक्षा में नंबर ही उसके जीवन का आधार बन गया है और यही उसका तनाव का कारण है। आज सबसे बड़ी विषमता है की युवा को उच्च शिक्षा के लिए और कॉलेज में प्रवेश करने में ये नंबर ही एक पैमाना है।आरक्षित श्रेणी का बच्चा तो कम नंबर से भी अच्छे कॉलेज में प्रवेश कर जाता है जबकि अनारक्षित श्रेणी मे 80०/० पर भी एडमिशन नहीं मिलता। मेरा सुझाव है की 12वी कक्षा तक आरक्षित श्रेणी को हर सुविधा दी जाए इसके पश्चात कॉलेज में अथवा उच्च शिक्षा में दाखिला सिर्फ एंट्रेंस परीक्षा से हो।Skill development program के अंतर्गत उन बच्चो को शामिल किया जाए जिन्हे उच्च शिक्षा में प्रवेश नहीं मिल पाता लेकिन उनमें अन्य कार्य करने की क्षमता एवम दक्षता है।
धन्यवाद।

02/04/2021

This page was created by me to share our dreams about NSS.

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