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Photos from Ranbeer pateriya Page's post 01/06/2026
01/06/2026

आज बहुत खुशी का दिन है बजरंग सेना ओर लोगो भारत सरकार द्वारा रजिस्टर्ड हो गया सभी को बधाई
जय श्री राम

01/06/2026

भगवान श्री महाकाल और हनुमान जी की कृपा से बजरंग सेना ओर लोगो भारत सरकार द्वारा रजिस्टर्ड हो चुका है सभी भाइयों बहनों को बहुत-बहुत बधाई

31/05/2026

मुझे एक पुराना वाक्या याद आ गया मुझे लगा कि आप लोगों के साथ शेयर करूं आप लोग प्रतिक्रिया जरुर दें

में दिल्ली से छतरपुर लौट रहा था। सिर में बहुत दर्द हो रहा था मन इतना भारी था कि किसी से बात
करने की भी इच्छा नहीं हो रही थी। रात लगभग 11 बजे की राजधानी एक्सप्रेस
थी और ठंड अपने पूरे शबाब पर थी। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर लगी, मैं
चुपचाप अपनी बोगी में जाकर बैठ गया । बस यही चाहता था कि किसी तरह आंख लग
जाए और कुछ देर के लिए मन का शोर थम जाए।

मैंने अपनी सीट पर चादर बिछाई ही थी कि तभी मेरी नजर टीटीई के साथ खड़े
एक आदमी पर पड़ी। उतने में टीटीई मेरी टिकट चेक करने आ गए। मैंने टिकट
दिखा दी और फिर लेटने ही वाला था कि कानों में उनकी बातचीत सुनाई दी।

वह आदमी बार-बार टीटीई से विनती कर रहा था
“सर, मेरी पत्नी की अभी-अभी डिलीवरी हुई है… वह ऊपर की सीट पर नहीं चढ़
पाएगी। अगर नीचे की सीट मिल जाए तो बड़ी कृपा होगी।”

टीटीई भी लाचार थे। रात काफी हो चुकी थी और किसी यात्री को उठाकर सीट
बदलवाना आसान नहीं था।

उनकी बातें सुनकर मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैं टीटीई के पास गया और बोला
“आप इन्हें मेरी सीट दे दीजिए, मेरी सीट नीचे की है। मैं ऊपर सो जाऊंगा।”

मेरी बात सुनते ही उस आदमी के चेहरे पर जैसे सुकून उतर आया। उसने हाथ
जोड़कर मुझे कई बार धन्यवाद कहा। उसकी आंखों में राहत साफ दिखाई दे रही
थी। उस पल पहली बार लगा कि शायद दूसरों के दर्द को समझना ही इंसानियत की
असली पहचान है।

कुछ महीनों बाद मैं अपने पिता जी ओर माता जी को मथुरा वृंदावन दर्शन करवाने लिए उनके साथ ट्रेन से जाना था
। उन दिनों मन हमेशा उलझा रहता था। इसी भागदौड़ और मानसिक तनाव में मैं पहले से ट्रेन की सीट बुक करना भूल गया।जल्दबाजी में सीट बुक करवाई
तो हमें अलग-अलग सीटें मिली ।

जब ट्रेन में जाकर सीट देखी, तब अपनी गलती का एहसास हुआ। पिता जी ओर माता जी
ट्रेन में पहली बार सफर कर रहे थे , उन्हें अकेले कहीं और बैठाना संभव नहीं था। मैंने उन्हें अपने पास
बैठा लिया और टीटीआई से मदद मांगी।

उन्होंने कहा -
अभी आप बैठ जाइए, मैं देखता हूं क्या हो सकता है।”

इतने में जिस यात्री की वह सीट थी, वह अपनी पत्नी के साथ आ गए। उन्होंने मेरी परेशानी को एक
नजर में समझ लिया। बिना किसी नाराज़गी के उन्होंने मुझसे पिता जी ओर माता जी की सीट
पूछी और खुद वहां जाकर बैठ गए।

उन्होंने अपनी वह विंडो सीट छोड़ दी, जिसके लिए शायद उन्होंने अतिरिक्त
पैसे दिए होंगे।

मैंने हाथ जोड़कर उन्हें कई बार धन्यवाद कहा। उस दिन दिल से यही महसूस
हुआ कि नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती। ईश्वर हर छोटे-बड़े कर्म का लेखा-जोखा
रखते हैं।

जो हम दुनिया में बोते हैं, वही किसी न किसी रूप में लौटकर हमारे पास आता है।
दया लौटती है
सम्मान लौटता है
और सबसे बढ़कर, इंसानियत लौटती है।

शायद इसी का नाम जीवन है।

31/05/2026

जय गौ माता...

31/05/2026

ईद के दिन #सूर्या चौहान को मारने वाला मुख्य आरोपी असद का एनकाउंटर हो चुका है योगी जी को बधाई🙏

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सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बहुत बहुत बधाई

31/05/2026

सजा-ए-मौत भी इसके लिए बहुत आसान होगी!
गौर से देखिए इस चेहरे को... यही है वो हैवान 'विराज'! इसने फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए डेढ़ साल के मासूम आरव को 8 बार जमीन पर पटक-पटककर मार डाला।
इस खौफनाक वारदात का सीसीटीवी वीडियो जिसने भी देखा, उसका कलेजा फट गया और रूह कांप उठी। इस सनकी शख्स ने क्रूरता के मामले में 'जल्लादों' को भी पीछे छोड़ दिया है। उस फूल जैसे बच्चे की मासूमियत पर भी इस पत्थर दिल को रत्ती भर तरस नहीं आया।
ऐसे लोग समाज के नाम पर कलंक हैं, धरती पर अभिशाप हैं! इसके लिए फांसी का फंदा भी बहुत कम है। इसे ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि जब तक इसके सीने में आखिरी सांस बाकी रहे, यह तिल-तिल कर तड़पता रहे।

30/05/2026

बजरंग सेना विजय भव...
जुड़ने के लिए अपनी फोटो आधार कार्ड भेजे वाट्सअप नंबर 9425 102102 पर

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