All India Human Rights Association "AIHRA"

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All India Human Rights Association (AIHRA) established in 1987 and Registered in the year 1989 under the Societies Registration Act XXI of 1860, is working with dedication for the Noble cause of Human Rights Protection and Promotion, Justice for all, Eco 1) AIHRA is a Social helping hand and an Organization for the ignored, disregarded, over- looked, victimised oppressed, depressed, tortured

30/04/2012

उजाले से मानूस थे इस क़दर दीए आँधियों में जला कर चले !

करीब उन के ख़ुद मंज़िलें आ गईं क़दम से क़दम जो मिला कर चले !!
पंकज प्रसन्न द्विवेदी
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *
web:www.aihra.org

intro All India Human Rights Association (AIHRA) Security Policy Complete security of your transactions and information is the foremost consideration of our service. We have followed the highest global benchmarks for security over the Internet for our customers. AIHRA is Password P...

02/03/2012

अपने भावी जीवन का, निर्माण हमें ही करना है !!
अपनी संस्कृति के हित में, नवीन भारत रचना है !!
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

28/02/2012

सुखे पत्तों की तरह बिखरे थे हम.....
किसी ने समेट भी तो सिर्फ़ जलानें के लिऎ!!
Join "AIHRA"
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

24/01/2012

बाल श्रम हमारे लिऎ अभिशाप है!
आइए हम सब मिल कर संकल्प ले-
बाल श्रम पर रोक हेतु हम अपना
संपुर्ण भागीदारी एवं दायित्वों का
निर्व्हन करेंगें!
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

24/01/2012

बाल श्रम (निषेध व नियमन) कानून 1986- यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को 13 पेशा और 57 प्रक्रियाओं में, जिन्हें बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए अहितकर माना गया है, नियोजन को निषिद्ध बनाता है। इन पेशाओं और प्रक्रियाओं का उल्लेख कानून की अनुसूची में है। फैक्टरी कानून 1948 - यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन को निषिद्ध करता है। 15 से 18 वर्ष तक के किशोर किसी फैक्टरी में तभी नियुक्त किये जा सकते हैं, जब उनके पास किसी अधिकृत चिकित्सक का फिटनेस प्रमाण पत्र हो। इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए हर दिन साढ़े चार घंटे की कार्यावधि तय की गयी है और रात में उनके काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। भारत में बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप 1996 में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से आया, जिसमें संघीय और राज्य सरकारों को खतरनाक प्रक्रियाओं और पेशों में काम करनेवाले बच्चों की पहचान करने, उन्हें काम से हटाने और उन्हें गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने यह आदेश भी दिया था कि एक बाल श्रम पुनर्वास सह कल्याण कोष की स्थापना की जाये, जिसमें बाल श्रम कानून का उल्लंघन करनेवाले नियोक्ताओं के अंशदान का उपयोग हो।
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

24/01/2012

भारत में बाल श्रम के खिलाफ राष्ट्रीय कानून और नीतियां
कानून
भारत का संविधान (26 जनवरी 1950) मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत की विभिन्न धाराओं के माध्यम से कहता है-
14 साल के कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्टरी या खदान में काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया जायेगा और न ही किसी अन्य खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जायेगा (धारा 24)।
राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करेंगे कि श्रमिकों, पुरुषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्षित रह सके और बच्चों की कम उम्र का शोषण न हो तथा वे अपनी उम्र व शक्ति के प्रतिकूल काम में आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रवेश करें (धारा 39-ई)।
बच्चों को स्वस्थ तरीके से स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर तथा सुविधाएं दी जायेंगी और बचपन व जवानी को नैतिक व भौतिक दुरुपयोग से बचाया जायेगा (धारा 39-एफ)।
संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर राज्य 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे (धारा 45)।
बाल श्रम एक ऐसा विषय है, जिस पर संघीय व राज्य सरकारें, दोनों कानून बना सकती हैं। दोनों स्तरों पर कई कानून बनाये भी गये हैं।
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

21/01/2012

याद रखें -मुश्किलें हमेशा श्रेष्ठ लोगों के हिस्से मे ही आती है दोस्तों !
क्यो कि वो उसको श्रेष्ठतम तरीके से हल कर देने की ताकत रखते है !
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

21/01/2012

बिना लिबास के आये थे इस जहाँ मे दोस्तों!
बस एक कफ़न के खातिर इतना लम्बा सफ़र तय करना पडा !!

12/01/2012

आवश्यक सुचना-
अखिल भारतीय मानव अधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री एम.यु.दुआ जी
18/012012 एवं 19/01/2012 को छत्तीसगढ प्रवास पर रहेंगे!
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

12/01/2012

स्वामी विवेकानंद ने भारत में हिन्दू धर्म का पुनरुद्धार तथा विदेशों में सनातन सत्यों का प्रचार किया। इस कारण वे प्राच्य एवं पाश्चात्य देशों में सर्वत्र समान रूप से श्रद्धा एवं सम्मान की दृष्टि से देखे जाते हैं। दुनिया में हिंदू धर्म और भारत की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक हस्ती होने के बावजूद अपने नवीन एवं जीवंत विचारों के कारण आज भी युवाओं के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
150 वी जयंती पर शत शत नमन...।।
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

12/01/2012

उस लम्हे को बुरा मत कहो दोस्तों जो तुम्हे ठोकर पहुँचाता है!
उस लम्हो की कदर करो क्योकि वो तुम्हे जीने का अन्दाज सिखाता है!!
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
अखिल भारतिय मानव अधिकार
संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

10/01/2012

मित्रों चिंतन करें..............
आप अपनी जिंदगी से बहुत कुछ प्राप्त करतें है,
मगर जिंदगी आपसे कुछ नहिं प्राप्त करती
सिर्फ़ आपकी आखरी साँस के अलावा !!
पंकज प्रसन्न द्विवेदी.
"प्रदेश प्रमुख"
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संगठन "ऎहरा"छत्तीसगढ़ *

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