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 #बिहार म्यूजियम को एशिया में नंबर-1 का गौरव, लेकिन कुर्किहार गढ़ आज भी उपेक्षित क्यों?जर्मनी के म्यूनिख से प्रकाशित अंत...
26/10/2026

#बिहार म्यूजियम को एशिया में नंबर-1 का गौरव, लेकिन कुर्किहार गढ़ आज भी उपेक्षित क्यों?

जर्मनी के म्यूनिख से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गदर्शिका एवं पत्रिका ‘वर्थ अ जर्नी’ (Worth a Journey) द्वारा बिहार म्यूजियम को दुनिया का नौवाँ और एशिया का नंबर-1 संग्रहालय बताए जाने की खबर बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 🇮🇳

लेकिन इस उपलब्धि के पीछे छिपे बिहार के एक ऐतिहासिक गांव कुर्किहार गढ़, जिला गया के योगदान को भी याद किया जाना चाहिए।

📜 क्या बिहार के नेताओं और मंत्रियों को कुर्किहार गढ़ के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी है?
Jitan Ram Manjhi Department of Tourism, Government of Bihar
कुर्किहार गढ़ वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां से 1930 में प्राचीन कांस्य प्रतिमाओं का एक विशाल भंडार मिला था। यहां से प्राप्त बौद्ध प्रतिमाएं बिहार की समृद्ध कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।

आज बिहार म्यूजियम की उपलब्धि पर श्रेय लेने की होड़ दिखाई देती है, लेकिन सवाल यह है कि जिस ऐतिहासिक विरासत ने बिहार की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया, उसी विरासत के मूल स्थल की सुध कौन लेगा?

💔 एक तरफ बिहार म्यूजियम की अंतरराष्ट्रीय पहचान, दूसरी तरफ कुर्किहार गढ़ की बदहाल स्थिति!

कुर्किहार गढ़ आज भी समुचित संरक्षण, सुरक्षा और पुरातात्त्विक अनुसंधान की प्रतीक्षा कर रहा है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की जाती है कि यहां जमीन के नीचे अनेक प्राचीन पुरावशेष दबे हो सकते हैं। इनकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए वैज्ञानिक पुरातात्त्विक सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की निगरानी में अनुसंधान आवश्यक है।

⚠️ हमारी मांगें:

✅ कुर्किहार गढ़ का तत्काल पुरातात्त्विक सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक उत्खनन कराया जाए।

✅ ऐतिहासिक स्थल की चारदीवारी, सुरक्षा और संरक्षण की उचित व्यवस्था की जाए।

✅ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) एवं बिहार सरकार के संबंधित विभाग इस धरोहर के संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाएं।

✅ कुर्किहार से प्राप्त प्रतिमाओं के ऐतिहासिक स्रोत और योगदान को बिहार म्यूजियम में उचित पहचान मिले।

✅ कुर्किहार गढ़ को बौद्ध विरासत एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।

हमारा सवाल किसी एक नेता या सरकार से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जो अपनी ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा करती है।

🏛️ बिहार म्यूजियम की उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन कुर्किहार गढ़ का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

कुर्किहार गढ़ केवल एक गांव नहीं, बिहार की ऐतिहासिक पहचान और हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

📢 कुर्किहार गढ़ को उसका सम्मान और संरक्षण दिलाने के लिए आवाज उठाइए!

Samar Singh Rathor Ministry of Culture, Government of India Ministry of Tourism, Government of India News18 Bihar

25/10/2026

बोधगया में पर्यटन सीजन बेपटरी; होटलों में केवल 30% बुकिंग, ₹200 करोड़ के भारी घाटे का अनुमान
महंगी हवाई टिकट और उड़ानों की अनुपलब्धता ने विदेशी पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित की है.
बेंगलुरु से गया भी ट्रेन संचलित होनी चाहिए

Ashwini Vaishnaw Ministry of Railways, Government of India
We need a train from Bangalore to Gaya at least weekly once.

हमलोग हमेशा और लगातार कुर्किहार गढ़ का जीर्णोद्धार और विकास के आवाज़ को पूरी ताकत से उठाते रहेंगे और एक दिन सरकार को गढ़...
25/10/2026

हमलोग हमेशा और लगातार कुर्किहार गढ़ का जीर्णोद्धार और विकास के आवाज़ को पूरी ताकत से उठाते रहेंगे और एक दिन सरकार को गढ़ का विकास को प्रस्ताव को मंजूरी देनी पड़ेगी
Jitan Ram Manjhi Department of Tourism, Government of Bihar Ministry of Tourism, Government of India Archaeological Survey of India Ministry of Culture, Government of India

वजीरगंज (गया)। गया जिले का वजीरगंज प्रखंड ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों से समृद्ध है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यहां की अमूल्य विरासत धीरे-धीरे नष्ट हो रही है। इसका प्रमुख उदाहरण कुर्कीहार गांव स्थित ऐतिहासिक गढ़ है।
कभी बौद्ध धर्म और कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा यह स्थल आज अतिक्रमण, गंदगी और बदहाली का शिकार है। गढ़ के आसपास ही नहीं, बल्कि गांव की गलियों, घरों और खेतों में भी बुद्धकालीन दुर्लभ मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं।
स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, कुर्कीहार गढ़ का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व काफी अधिक है। मान्यता है कि इसके नीचे प्राचीन सभ्यता से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण अवशेष और दुर्लभ मूर्तियां दबी हुई हैं।
समय-समय पर खुदाई के दौरान यहां से काले पत्थर से निर्मित भगवान बुद्ध, तारा और अवलोकितेश्वर सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां मिलती रही हैं।
इन अवशेषों से क्षेत्र के समृद्ध बौद्ध इतिहास का पता चलता है। ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने दशकों पहले इस स्थल को अपने संरक्षण में लिया था।
विडंबना है कि संरक्षित घोषित होने के बावजूद कुर्कीहार गढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गढ़ की चारदीवारी नहीं होने से इसका बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। टीले के आसपास झोपड़ियां और मकान बना लिए गए हैं। परिसर के निकट कचरे का अंबार लगा रहता है।
सुरक्षा के लिए गार्ड की नियुक्ति के बावजूद ऐतिहासिक स्थल की प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है। पुरातत्व विभाग का सूचना बोर्ड भी देखरेख के अभाव में जंग खा रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति गांव में बिखरी प्राचीन मूर्तियों की है। घरों की दीवारों, चबूतरों, गलियों और खेतों में पड़ी इन मूर्तियों का उचित संरक्षण नहीं हो रहा है।
कहीं इन पर कपड़े सुखाए जाते हैं, तो कहीं इन्हें मवेशी बांधने के लिए खूंटे की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इससे दुर्लभ पुरातात्विक धरोहरों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से सर्वेक्षण और खुदाई कराई जाए तो कुर्कीहार से बौद्ध इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। इससे वजीरगंज को बौद्ध पर्यटन के मानचित्र पर पहचान मिल सकती है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

25/10/2026

Anant singh official का भविष्यवाणी ज्यादा सही ही होता है विधान सभा में बोले थे R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल को 25 से ज्यादा सीट नहीं आएगी और अब Janata Dal (United) 12-15 सीट से ज्यादा नहीं आएगा गठबंधन कोई भी हो!

24/10/2026

Janata Dal (United) ने मोकामा विधायक #अनंत सिंह को पार्टी से बाहर निकाला ये महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण ये है कि कांग्रेसी जो पैसा चुनाव लडने मे देना था वो भी सब खा गया!🤣🤣😂

21/10/2026

18/10/2026

आत्महत्या और गरीबी का एक दूसरे से कोई रिश्ता नहीं है!बिहार सबसे गरीब है राज्य है पर आत्महत्या सबसे कम होता है!
15/10/2026

आत्महत्या और गरीबी का एक दूसरे से कोई रिश्ता नहीं है!
बिहार सबसे गरीब है राज्य है पर आत्महत्या सबसे कम होता है!

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