24/09/2026
एक महिला दूसरी महिला के बारे में कह रही थी—
“पचास साल से ऊपर हो गई है, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षाएँ अभी खत्म नहीं हुईं।”
मैं सोचने लगी… आख़िर महत्वाकांक्षी होना बुरी बात कब से हो गया?
महत्वाकांक्षा सिर्फ़ कुछ हासिल करने की चाह नहीं, जीने का जज़्बा है, आगे बढ़ने का पैशन है और खुद को हर उम्र में नया देखने की हिम्मत है।
जिस दिन इंसान के सपने खत्म हो जाते हैं, शायद उसी दिन उम्र सच में बढ़ने लगती है।
उम्र सिर्फ़ एक संख्या है…
आपका इस बारे में क्या कहना है ?