Ram kumar Pal 64 Foundation.

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राष्ट्रीय अध्यक्ष- प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान संगठन
उत्तर रेलवे- सुरक्षा सलाहकार लखनऊ मंडल

31/05/2026

#अहिल्या_की_दहाड़

अहिल्या की दहाड़ थी, साहस का श्रृंगार थी,
नारी शक्ति की ज्योति थी, भारत का अभिमान थी।

जब अन्याय के बादल छाए, जब संकट ने ली अंगड़ाई,
तब सिंहासन पर बैठ अहिल्या ने धर्म और न्याय की लौ जगाई।

उनकी हुंकार से हिले पहाड़, दुश्मन भी हुए लाचार,
प्रजा के हित में जीने वाली, थीं वह युग की अवतार।

न धन का मोह, न सत्ता का गर्व,
जनसेवा ही था उनका सर्वस्व।

आज भी गूँजता है इतिहास में उनका महान किरदार,
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर अमर हैं, अमर रहेगा उनका उपकार।

काशी की ज्योति से लेकर सोमनाथ की लहरों तक, ओंकारेश्वर के पावन नाद से लेकर महाकाल की नगरी तक, जहाँ-जहाँ सनातन आस्था पर संकट आया, वहाँ-वहाँ लोकमाता राजमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर ने अपने त्याग, तपस्या और अद्वितीय संकल्प से नई चेतना का संचार किया।

घाटों का निर्माण, मंदिरों का जीर्णोद्धार, धर्मशालाएँ, अन्नछत्र और कुएँ—यह केवल निर्माण कार्य नहीं थे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का एक महान अभियान था।

आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों की चर्चा हो रही है। ऐसा प्रतीत होता है मानो भय, अन्याय और निराशा का अंधकार धीरे-धीरे समाप्त हो रहा हो और सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा सामाजिक एकता का प्रकाश जन-जन के मन में फैल रहा हो।

हमें गर्व है कि हम लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की विरासत से जुड़े हैं और उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। मैंने आज यह संकल्प लिया है कि अपने घर में उनकी प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन उनका पूजन-वंदन करूँगा तथा उनके आदर्शों, विचारों और लोककल्याण की भावना को अपने परिवार और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाऊँगा।

मेरा सभी माताओं, बहनों, युवाओं और समाजबंधुओं से विनम्र आग्रह है कि अपने बच्चों को अहिल्याबाई होलकर के जीवन का पाठ अवश्य पढ़ाएँ। उनके त्याग, समर्पण, सेवा, साहस और संघर्ष से प्रेरणा लें। जिस युग में महिलाओं के लिए आगे बढ़ना अत्यंत कठिन था, उस समय बिना किसी विशेष सहारे के उन्होंने अपने पराक्रम, दूरदर्शिता और लोकसेवा के बल पर जो अमिट इतिहास रचा, वह युगों-युगों तक प्रेरणा देता रहेगा।

आइए, हम सब मिलकर उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और एक शिक्षित, संगठित, संस्कारित एवं स्वाभिमानी समाज के निर्माण का संकल्प लें।

जय लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर!

31/05/2026

आज 31 मई को डिबेट में

31/05/2026

MODI ji ka Sandhesh
India is the place to be for mango lovers.

Which is your favourite mango? 🥭
आम पसंद करने वालों के लिए भारत सबसे अच्छी जगह है।

आपका पसंदीदा आम कौन सा है? 🥭


31/05/2026

*🚩 लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर :* लोककल्याण, सुशासन और राष्ट्रधर्म की अमर प्रेरणा 🚩

देश के इतिहास में जितने भी लोककल्याणकारी शासक हुए हैं, उनमें एक ओर छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लिया जाता है, तो दूसरी ओर पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर का नाम सम्मानपूर्वक लेना पड़ता है।
*— महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री माननीय श्री देवेंद्र फडणवीस जी*

इतिहास में अनेक राजा हुए, साम्राज्य बने और मिट गए, लेकिन जनकल्याण को शासन का मूल उद्देश्य मानने वाले शासक बहुत कम हुए हैं।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य को न्याय, स्वाभिमान, धर्म और लोककल्याण की मजबूत नींव प्रदान की, वहीं लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर ने उस आदर्श परंपरा को सेवा, करुणा, सुशासन और जनहित के प्रकाश से और अधिक गौरवशाली बनाया।

उनके व्यक्तित्व में शक्ति और संवेदनशीलता, धर्म और प्रशासन, करुणा और कर्तव्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके लिए राजसत्ता वैभव का साधन नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा और जनकल्याण का माध्यम थी। उन्होंने धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण कराया, जनहितकारी कार्यों को बढ़ावा दिया, महिलाओं को सम्मान दिया और न्याय को शासन का सर्वोच्च आधार बनाया।

समय बदला, राजवंश बदले, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन लोकमाता अहिल्याबाई द्वारा प्रज्वलित न्याय, सेवा, धर्मरक्षा और लोककल्याण का दीप आज भी उसी तेज के साथ समाज को दिशा दे रहा है।

अहिल्याबाई होलकर केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं हैं, बल्कि आदर्श नेतृत्व, सुशासन, राष्ट्रधर्म और जनसेवा की जीवंत प्रेरणा हैं।

🚩 छत्रपति शिवाजी महाराज और लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर — भारतीय इतिहास में लोककल्याण, सुशासन, राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक गौरव के दो अमर प्रकाश स्तंभ। 🚩

शांतता में सामर्थ्य, संयम में शौर्य और राजधर्म में जनकल्याण — यही लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की अमर पहचान है।

*"हम पाल, धनगर, गड़ेरिया एवं भेड़ पालक समाज* उनके गौरवान्वित *वंशज* हैं। लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर *हमारी कुलदेवी*, हमारी आस्था, हमारा स्वाभिमान और हमारी पहचान हैं।" 🚩⚔️
*रामकुमार पाल 64 फाउंडेशन*

31/05/2026

*🚩 लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर :* लोककल्याण, सुशासन और राष्ट्रधर्म की अमर प्रेरणा 🚩

देश के इतिहास में जितने भी लोककल्याणकारी शासक हुए हैं, उनमें एक ओर छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लिया जाता है, तो दूसरी ओर पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर का नाम सम्मानपूर्वक लेना पड़ता है।
*— महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री माननीय श्री देवेंद्र फडणवीस जी*

इतिहास में अनेक राजा हुए, साम्राज्य बने और मिट गए, लेकिन जनकल्याण को शासन का मूल उद्देश्य मानने वाले शासक बहुत कम हुए हैं।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य को न्याय, स्वाभिमान, धर्म और लोककल्याण की मजबूत नींव प्रदान की, वहीं लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर ने उस आदर्श परंपरा को सेवा, करुणा, सुशासन और जनहित के प्रकाश से और अधिक गौरवशाली बनाया।

उनके व्यक्तित्व में शक्ति और संवेदनशीलता, धर्म और प्रशासन, करुणा और कर्तव्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके लिए राजसत्ता वैभव का साधन नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा और जनकल्याण का माध्यम थी। उन्होंने धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण कराया, जनहितकारी कार्यों को बढ़ावा दिया, महिलाओं को सम्मान दिया और न्याय को शासन का सर्वोच्च आधार बनाया।

समय बदला, राजवंश बदले, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन लोकमाता अहिल्याबाई द्वारा प्रज्वलित न्याय, सेवा, धर्मरक्षा और लोककल्याण का दीप आज भी उसी तेज के साथ समाज को दिशा दे रहा है।

अहिल्याबाई होलकर केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं हैं, बल्कि आदर्श नेतृत्व, सुशासन, राष्ट्रधर्म और जनसेवा की जीवंत प्रेरणा हैं।

🚩 छत्रपति शिवाजी महाराज और लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर — भारतीय इतिहास में लोककल्याण, सुशासन, राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक गौरव के दो अमर प्रकाश स्तंभ। 🚩

शांतता में सामर्थ्य, संयम में शौर्य और राजधर्म में जनकल्याण — यही लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की अमर पहचान है।

*"हम पाल, धनगर, गड़ेरिया एवं भेड़ पालक समाज* उनके गौरवान्वित *वंशज* हैं। लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर *हमारी कुलदेवी*, हमारी आस्था, हमारा स्वाभिमान और हमारी पहचान हैं।" 🚩

*रामकुमार पाल 64 फाउंडेशन* सक्रिय पदाधिकारी

31/05/2026
31/05/2026

मातोश्री अहिल्याबाई होलकर जी की जन्म जयंती पर कोटि-कोटि प्रणाम।

लोककल्याण, सुशासन, धर्मनिष्ठा और जनसेवा की अद्वितीय प्रतीक मातोश्री अहिल्याबाई होलकर जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। ईश्वर हमें ऐसी शक्ति, सद्बुद्धि और संकल्प प्रदान करें कि हम उनके पदचिह्नों पर चलकर समाज एवं राष्ट्र की सेवा निरंतर समर्पण, संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कर सकें।

बाबा विश्वनाथ जी का आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे तथा हमें लोकमंगल के कार्यों में निरंतर अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती रहे

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