11/01/2025
सदियों के संघर्षों, त्याग, तपस्या, आस्था और असंख्य रामभक्तों की बलिदान के उपरांत के श्रध्दा व आस्था के प्रतीक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर,अयोध्या जी में प्रभु श्री रामलला जी की प्राण-प्रतिष्ठा का एक वर्ष पूर्ण होने पर सभी रामभक्तों को हार्दिक बधाई.. एवं हार्दिक शुभकामनाऐ...
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्री_राम
10/01/2025
आपको #विश्व_हिंदी_दिवस" की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!
हिंदी मात्र भाषा नही अतिपु हमारी संस्कृति, सभ्यता, समृध्दि, सम्पर्क और शक्ति का अभिन्न हिस्सा है, यह हमारी परम्परा एवं गौरव का महान प्रतीक है। एक भाषा के साथ-साथ आपसी प्रेम और अपनत्व को साझा करने का एक सशक्त माध्यम है..
आइये, हम सब मिलकर अपनी मातृभाषा पर गर्व करें और आओं
हिन्दी में #हस्ताक्षर आरम्भ करें.. #डाॅ_राजकुमार_फलवारिया
#विश्व_हिन्दी_दिवस
04/01/2025
छात्र जीवन से #अखिल_भारतीय_विधार्थी_परिषद_ABVP में कार्य करते हुए, लगातार वर्षों तक आंदोलन के माध्यम से मांग करते रहें, का निर्माण हों, नये कालेजों का निर्माण हों, यह मांगें हमारी रही, अन्तत: प्रधानमन्त्री #श्री_नरेंद्र_मोदी_जी ने वर्षों से लंबित मांगों को West & East Campus व वीर सावरकर कालेज का शिलान्यास कर नववर्ष पर वर्षों से छात्रों व छात्र संगठनों की मांग को पूरा किया...
Deputy Director
Gandhi Bhawan, University of Delhi
,
Shyama Prasad Mukherji College,
03/01/2025
#सावित्रीबाई_ज्योतिराव_फुले (3 जनवरी 1831)
आधुनिक भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवियत्री थीं। अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। 1848 में उन्होंने बालिकाओं के लिए प्रथम विद्यालय की स्थापना की, कुल 18 बलिका विधालय खोले, आपने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ 1873 को #सत्यक_शोधक_समाज की स्थापना की, अशिक्षा, सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या हत्या तथा विधवा विवाह जैसे तत्कालीन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया। ऐसी महान क्रांतिकारी माता सावित्री बाई फुले की जयन्ती पर हम शत शत नमन शत शत वंदन करते हैं..
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#डाॅ_राजकुमार_फलवारिया, दिल्ली विश्वविद्यालय
प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी, दिल्ली प्रदेश
राष्ट्रीय प्रशिक्षण संयोजक,भाजपा,अनुसूचित जाति मोर्चा
02/01/2025
्ष_2025 की आपको हार्दिक शुभकामनाऐ व बधाई..
30/12/2024
#देश के सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में SC/ST/ OBC के आरक्षण का प्रावधान हैं... किन्तु AMU में नही...?
#देश में आजादी के बाद सें सभी विश्वविद्यालय में आरक्षण की व्यवस्था हैं... किन्तु AMU में नही...?
#देश में आजादी के बाद कांग्रेस सरकार AMU में आरक्षण के मुद्दे पर चुप्पी क्यों..?
#देश में 2006 से कांग्रेस सरकार काल में केन्द्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली में SC/ST/ OBC आरक्षण समाप्त क्यों...?
: #अलीगढ_मुस्लिम_यूनिवर्सिटीज
26/12/2024
#सरदार_उधम_सिंह
26 दिसम्बर 1899–31 जुलाई 1940
भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के महान सेनानी एवं क्रान्तिकारी थे.. उन्होंने जलियांवाला बाग कांड के समय पंजाब के गर्वनर जनरल रहे माइकल ओ' ड्वायर को लन्दन में जाकर गोली मारी थी..
उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब प्रांत के संगरूर जिले के सुनाम गाँव में एक कम्बोज सिख परिवार में हुआ था। सन 1901 में उधमसिंह की माता और 1907 में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना के चलते उन्हें अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। उधमसिंह के बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्तासिंह था, जिन्हें अनाथालय में क्रमश: उधमसिंह और साधुसिंह के रूप में नए नाम मिले..अनाथालय में उधमसिंह की जिंदगी चल ही रही थी कि 1917 में उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया। वह पूरी तरह अनाथ हो गए। 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में शमिल हो गए। उधमसिंह अनाथ हो गए थे परंतु इसके बावजूद वह विचलित नहीं हुए और देश की आजादी तथा जनरल डायर को मारने की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए लगातार काम करते रहे।
उधमसिंह १३ अप्रैल १९१९ को घटित जालियाँवाला बाग नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे.. राजनीतिक कारणों से जलियाँवाला बाग में मारे गए लोगों की सही संख्या कभी सामने नहीं आ पाई। इस घटना से वीर उधमसिंह तिलमिला गए और उन्होंने जलियाँवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ'डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। अपने इस ध्येय को अंजाम देने के लिए उधम सिंह ने विभिन्न नामों से अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा की.. सन् 1934 में उधम सिंह लंदन पहुँचे और वहां 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे.. वहां उन्होंने यात्रा के उद्देश्य से एक कार खरीदी और साथ में अपना ध्येय को पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवाल्वर भी खरीद ली। भारत के यह वीर क्रांतिकारी, माइकल ओ'डायर को ठिकाने लगाने के लिए उचित वक्त का इंतजार करने लगे..
उधम सिंह को अपने सैकड़ों भाई-बहनों की मौत का बदला लेने का मौका 1940 में मिला। जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ'डायर भी वक्ताओं में से एक था.. उधम सिंह उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुँच गए। अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके...बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ'डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ'डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई..