Rani Bagh
Rani Bagh is a densely populated residential area in the northwest part of Delhi, India. It is situated quite near to Pitam Pura, Saraswati Vihar,
It is situated quite near to Pitam Pura, Saraswati Vihar, Lok Vihar and Punjabi Bagh. It is well connected to various parts of Delhi. Its major attraction is the famous M2K PitamPura and a group of restaurants such as Otik, Kaleva, and Oxygen. Major population of Rani Bagh includes punjabis and Sikhs. There are many gurudwaras and arya samaj temples. The Rani Bagh area is very close to Shakur Bast
01/03/2020
21/11/2019
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16/11/2017
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22/07/2017
#बक्षाली पाण्डुलिपि या #बख्शाली #पाण्डुलिपि ( ) प्राचीन भारत की गणित से सम्बन्धित पाण्डुलिपि है। यह भोजपत्र पर लिखी है। यह सन् १८८१ में बख्शाली गाँव (तत्कालीन पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त; अब पाकिस्तान में, तक्षशिला से लगभग ७० किमी दूर ) में मिली थी। यह #शारदा लिपि में है एवं #गाथा बोली (संस्कृत एवं प्राकृत का मिलाजुला रूप) में है। यह पाण्डुलिपि अपूर्ण है। इसमें केवल ७० 'पन्ने' (या पत्तियाँ) ही हैं जिनमें से बहुत ही बेकार हो चुकी हैं। बहुत से पन्ने अप्राप्य हैं।
शायद यह संस्कृत में अंकगणित पर लिखी गई सबसे पुरानी रचना है जिसे सम्भवतः सातवीं शताब्दी में संकलित किया गया होगा। इसे किसने संकलित किया, इसका कोई उल्लेख नहीं है। कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी ने ‘गणितावली’ नामक ग्रन्थ का प्रकाशन करवाया है। इस ग्रन्थ की पुष्पिका से इतना जरूर पता चलता है कि सुखदास नामक एक कायस्थ ने रामपालदेव के शासनकाल में शक संवत 1615 या 1715 में यह पूरी सामग्री कहीं से हासिल की थी। इस सामग्री की एक अद्वितीय प्रति एशियाटिक सोसाइटी के संग्रह में सुरक्षित है। ग्रन्थ के शुरुआती पन्नों में कई खामियां हैं, हालांकि बाद के पन्नों में अधिकांश सामग्री सुवाच्य है।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के सरस्वती भवन के विभूतिभूषण भट्टाचार्य ने इस सामग्री का सम्पादन किया, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि उनका देहान्त हो गया। अन्ततः मानबेंदु बनर्जी और प्रदीप कुमार मजूमदार ने अंकगणित, प्रारम्भिक रेखागणित और क्षेत्रमिति (मापन) की सामग्री वाले इस ग्रन्थ का सम्पादन किया। यह ज्योतिषियों की हैण्डबुक है जिसमें गणित व खगोल शास्त्र के कुछ विषय शामिल हैं। इस ग्रन्थ के अज्ञात लेखकों ने अपने शुरुआती वाक्यों में साफ कर दिया है कि यह पुस्तक उन कायस्थों या हिसाब-किताब रखने वालों के लिए हैं जो गणित का बेहद प्रारम्भिक ज्ञान हासिल करना चाहते हैं।
इस पाण्डुलिपि में क्या-क्या है? जोसेफ लिखते हैं-
The Bakhshali manuscript is a handbook of rules and illustrative examples together with their solutions. It is devoted mainly to arithmetic and algebra, with just a few problems on geometry and mensuration. Only parts of it have been restored, so we cannot be certain about the balance between different topics.
बख्शाली पाण्डुलिपि नियमों और व्याख्यात्मक उदाहरणों के साथ-साथ उनके समाधान की एक हस्तपुस्तिका है। यह मुख्यत: अंकगणित और बीजगणित को समर्पित है, जिसमें कुछ प्रश्न ज्यामिति और क्षेत्रमिति पर हैं। इसके केवल कुछ भाग ही बहाल हो सके हैं, इसलिए हम विभिन्न विषयों के सन्तुलन के बारे में सुनिश्चित नहीं हो सकते।
सोमवार तड़के 3 बजे रानीबाग एमसीडी ऑफिस के सामने बनी फलों की दुकान में अचानक आग लग गई। एमसीडी तहबाजारी के तहत बनी दुकानों में लगी आग से दुकान में रखे फल व सामान तथा दुकानों के आसपास खड़ी गाड़ियां जलकर खाक हो गईं। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। पीड़ित दुकानदारों एवं स्थानीय लोगों ने बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर डीडीएल पर लापरवाही का आरोप लगाया। लोगों का कहना था कि फायर बिग्रेड को फोन करने के बावजूद गाड़िया एक घंटे देर से पहुँची।
23/03/2017
550 ई. के लगभग इन्होंने तीन महत्वपूर्ण पुस्तकें बृहज्जातक, बृहत्संहिता और पंचसिद्धांतिका, लिखीं। इन पुस्तकों में त्रिकोणमिति के महत्वपूर्ण सूत्र दिए हुए हैं, जो वराहमिहिर के त्रिकोणमिति ज्ञान के परिचायक हैं।
पंचसिद्धांतिका में वराहमिहिर से पूर्व प्रचलित पाँच सिद्धांतों का वर्णन है। ये सिद्धांत हैं : पोलिशसिद्धांत, रोमकसिद्धांत, वसिष्ठसिद्धांत, सूर्यसिद्धांत तथा पितामहसिद्धांत। वराहमिहिर ने इन पूर्वप्रचलित सिद्धांतों की महत्वपूर्ण बातें लिखकर अपनी ओर से 'बीज' नामक संस्कार का भी निर्देश किया है, जिससे इन सिद्धांतों द्वारा परिगणित ग्रह दृश्य हो सकें। इन्होंने फलित ज्योतिष के लघुजातक, बृहज्जातक तथा बृहत्संहिता नामक तीन ग्रंथ भी लिखे हैं। बृहत्संहिता में वास्तुविद्या, भवन-निर्माण-कला, वायुमंडल की प्रकृति, वृक्षायुर्वेद आदि विषय सम्मिलित हैं।
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Rani Bagh Road
Delhi
110034
