04/07/2025
अविनाश बाबा
॥ॐ॥
हर हर महादेव
॥ॐ॥ !!
04/07/2025
02/07/2025
जरा सोचिए:- पहले प्रवीण तोगड़िया जी को निपटाया, संजय जोशी को घर बिठाया, नूपुर शर्मा को निपटाया और अब टी राजा सिंह को जाने पर मजबूर किया गया ।
वो तो योगी जी के भरोसे ८० सीट्स है नहीं तो इनको निपटाने के भी कई प्रयास तो हो ही चुके है ।
परिवर्तन संसार का नियम है यह .. समय आ रहा है ? क्या शीर्ष नेतृत्व अप्रासंगिक और असहाय होने लगा है?
29/06/2023
Choose life…. Celebrate a cruelty free Eid
जीवन को चुनें.… क्रूरता मुक्त ईद मनाएँ.
यदि हमारे पूर्वजों को हवाई जहाज बनाना नहीं आता, तो हमारे पास "विमान" शब्द भी नहीं होता.!
यदि हमारे पूर्वजों को Electricity की जानकारी नहीं थी, तो हमारे पास "विद्युत" शब्द भी नहीं होता।
यदि "Telephone" जैसी तकनीक प्राचीन भारत में नहीं थी तो, "दूरसंचार" शब्द हमारे पास क्यों है ?
Atom और electron की जानकारी नहीं थी तो अणु और परमाणू शब्द कहाँ से आये?
Surgery का ज्ञान नहीं था तो, "शल्य चिकितसा" शब्द कहाँ ये आया?
विमान, विद्युत, दूरसंचार, ये शब्द स्पष्ट प्रमाण है, कि ये तकनीक भी हमारे पास थी।
बिना परिभाषा के कोई शब्द अस्तित्व में रह नहीं सकता।
सौरमण्डल में नौ ग्रह है व सभी सूर्य की परिक्रमा लगा रहे है, व बह्ममाण्ड अनन्त है, ये हमारे पूर्वजों को बहुत पहले से पता था। रामचरित्र मानस में काक भुशुंडि - गरुड संवाद पढ़िये, बह्ममाण्ड का ऐसा वर्णन है, जो आज के विज्ञान को भी नहीं पता।
अंग्रेज़ जब 17-18 सदी में भारत आये तभी उन्होंने विज्ञान सीखा, 17 सदी के पहले का आपको कोई साइंटिस्ट नहीं मिलेगा।
17 -18 सदी के पहले कोई आविष्कार यूरोप में नहीं हुआ, भारत आकर सीखकर, और चुराकर अंग्रेज़ों ने अविष्कार करे।
भारत से केवल पैसे की ही लूट नहीं हुयी, ज्ञान की भी लूट हुयी है।
वेद ही विज्ञान है और हमारे ऋषि ही वैज्ञानिक हैं.!
सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है 🚩
"जब कोई सभ्यता, समाज या धर्म आवश्यकता से अधिक शांत और सभ्य हो जाता है, तो बर्बर सभ्यताएं उसे आसानी से निगल जाती हैं। 🚩🇮🇳
बचपन से ही हमलोग एक कथा सुनते आ रहे हैं कि....
एक बिच्छू जल में छटपटा रहा था और एक महात्मा उसे बचा रहे थे...!
लेकिन, जैसे ही महात्मा उसे उठाते थे... बिच्छू उन्हें डंक मार कर काट लेता था.
ये देख कर... लोगों ने महात्मा को समझाया कि....
महात्मा... ऐसे जीव को क्यों बचाना, जो खुद को बचाने वाले को ही काट रहा है ???
जाने दो न...!
लेकिन, ये सुनते ही महात्मा जी पर "महात्मागीरी" हावी हो गई...
और, वे कहने लगे... "जब यह छोटा सा जीव अपना स्वभाव नहीं छोड़ता...
तो, फिर मैं क्यों छोड़ दूँ ???"
'पंचतंत्र' में इतनी कथा के बाद विराम लग गया...!
पर, आगे की कथा में सुनता हूँ.
लोगों ने उस नदी वाली बात को भुला दिया....
पर, महात्मा अपनी "महात्मागीरी" में लगे रहे...
और, ढेरों बिच्छू बचा बचा कर अपने इर्द-गिर्द जमा कर लिए ...
चूंकि, बिच्छुओं की प्रजनन दर भी बहुत तेज थी तो जल्द ही हर तरफ बिच्छू ही नजर आने लगे.
अब वे सारे बिच्छू.... जो पहले सिर्फ छूने पर ही डंक मारते थे,
अब, बिना छुए ही खुद से पहल कर महात्मा को "काटने" लगे.
यहाँ तक कि... उन्हें "ध्यान-साधना" भी न करने दें.
तब तंग आकर महात्मा बोले...
"अरे...!
मुझे मेरी पूजा तो करने दो,
वरना मैं महात्मा कैसे बना रह पाऊंगा ??"
इस पर बिच्छू कहते हैं....
"अब हमारी गिनती ज्यादा है.
इसीलिए, अब रहना है तो हम जैसा बन के रहो,
वरना हम तेरा जीवन ही समाप्त कर देंगे।"
यह देखकर... हैरान- परेशान महात्मा ने "डंडा" लेकर बिच्छुओं की खातिरदारी करनी शुरू की..
तो झट से.... सारी "बिच्छू जमात" चिल्लाने लगी कि...
तुम तो महात्मा हो,
तुम्हें हिंसा नहीं करनी चाहिए,
तुम तो वसुधैव कुटुम्बकम वाले लोग हो..
तुम अपना स्वभाव कैसे बदल सकते हो ???
तुम असहिष्णु कैसे हो गये ???"
पहले यही गुजरात में हुआ...
फिर up में त्रिपुरा
और, अब यही असम और त्रिपुरा में हो रहा है.
असल में इसमें गलती बिच्छुओं की नहीं है बल्कि महात्मा की ही है..
क्योंकि, सांप और बिच्छू का स्वभाव ही है काटना...!
और, सांप की वो प्रवृति कभी बदल नहीं सकती...!
उसे तो एक दिन डसना ही है...
फिर चाहे... उसे दूध पिलाओ अथवा न पिलाओ...
ठीक यही प्रवृति दाढ़ी वाले हरे बिच्छुओं में भी पाई जाती है...
पहले तो वे आपके मुहल्ले अथवा घर के बाहर जमीन पर असहाय और लाचार से पड़े रहेंगे...
लेकिन, अगर आपने उसकी बेचारगी पर दया करके किसी एक मूंछ कटे बिच्छू को खाना दे दिया...
तो, कुछ दिनों बाद वो कहेगा... मुझे हलाल खाना दो.
इसके बाद आप उसका मन रखने के लिए जुगाड़ करके हलाल खाना दे देंगे,
तो, अगली बार वो कहेगा.... मुझे रोजगार दो... जिस से मैं अपनी रोटी खुद कमा सकूँ.
अगर, आपने वो भी करते हुए उसे रोज़गार दे दिया,
फिर, तो, वो कहेगा... मेरे फसूल को सम्मान दो.
फसूल को सम्मान देने के बाद...
फिर, आपत्ति करेगा कि...
आपका राष्ट्रगान नहीं गाऊंगा और आपको इस बात से परेशानी नहीं होनी चाहिए.
जब आप राष्ट्रगान गाना बंद कर देंगे...
तो, वो पार्लियामेंट मैं आरक्षण मांगेगा.
और, जब वो पार्लियामेंट में पहुंचेगा तो कहेगा.... संविधान बदलो और मूर्ति पूजा बंद करो...
क्योंकि, इस से उसकी भावना आहत होती है.
और, जब संविधान बदल जायेगा तब वो हड़िया ले आएगा और न मानने वाले को मार देगा.
इस तरह... आप बिच्छुओं को कभी संतुष्ट नहीं कर सकते.
क्योंकि, उन्हें समस्या आपकी "व्यवस्था से नहीं" बल्कि "आपके अस्तित्व से" है.
और, व्यवस्था पर आपत्ति करना तो महज एक बहाना है..
क्योंकि, उनका असली मकसद इन्हीं बहानो से आपको आजमाना है
इसीलिए, प्रथम चरण में ही उनके विषदंत एवं डंक निकाल देना ही इसका सर्वश्रेष्ठ इलाज है। 😏
05/05/2022
#प्रेम का स्मारक #ताजमहल नहीं यह है..
चित्र में दिखाई गई महिला की फोटो को ज़ूम करके देखेंगे तो उनके गले में पहना हुआ एक बड़ा डायमंड दिखाई देगा ..... यह 254 कैरेट का #जुबली_डायमंड है जो आकार और वजन में विश्व विख्यात #"कोह_ए_नूर" हीरे से दोगुना है ...
ये महिला #मेहरबाई_टाटा हैं जो जमशेदजी टाटा की बहू और उनके बड़े बेटे सर दोराबजी टाटा की पत्नी थीं ...
सन 1924 में प्रथम विश्वयुद्ध के कारण जब मंदी का माहौल था और #टाटा कंपनी के पास कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे नहीं थे... तब मेहरबाई ने अपना यह बेशकीमती जुबली डायमंड #इम्पीरियल बैंक में 1 करोड़ रुपयों में गिरवी* रख दिया था ताकि कर्मचारियों को लगातार वेतन मिलता रहे और कंपनी चलती रहे ...
इनकी ब्लड #कैंसर से असमय मृत्यु होने के बाद सर दोराबजी टाटा ने भारत के कैंसर रोगियों के बेहतर इलाज के लिये यह हीरा बेचकर ही #टाटा_मेमोरियल_कैंसर रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी ...
प्रेम के लिये बनाया गया यह स्मारक #मानवता के लिये एक उपहार है .... विडम्बना देखिये हम प्रेम स्मारक के रुप मे ताजमहल को महिमामंडित करते रहते हैं ,और जो हमें जीवन प्रदान करता है, उसके इतिहास के बारे में जानते तक नहीं ....!
साभार
छत पर छिपे पत्थर और बम, आँगन में छिपे कसाई हैं,
जो भारत के टुकड़े टुकड़े चाहें, कैसे कह दूँ वो मेरे भाई हैं..!!
ये हिन्दू कितनी नफरत फैला रहे है?
मरते हुए कितना चिल्ला रहे है..
KashmirFiles
धर्म के नाम पर एकजुट होकर वोट देने की प्रेरणा, हमें मुस्लिम भाइयों से मिली हैं वरना
हम तो प्याज़ के दाम बढ़ने पर
सरकार गिरा देते थे!
🚩हिन्दू एकता..जय श्रीराम 🚩
01/08/2021
जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि जब मिशनरी अफ्रीका आए तो उनके पास बाईबल थी और हमारे पास जमीन, उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं’ हमने आखें बंद कर लीं जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी और उनके पास हमारी जमीन।
इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे और हमारे पास आजादी और निजता थी उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।
जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है..☺️☺️
ादेव
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