28/06/2026
डिग्रियों का अंबार और बेरोजगार युवा... क्या ऐसे मुकाबला करेंगे चीन और अमेरिका का?
आज हमारे देश का सबसे बड़ा कड़वा सच यह है कि लाखों रुपये खर्च करके डिग्रियां लेने के बाद भी हमारे युवा नौकरियों के लिए भटक रहे हैं। देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था केवल 'रट्टू तोते' और 'कागजी डॉक्टर-इंजीनियर' पैदा कर रही है, जिन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज के नाम पर कुछ नहीं आता। अगर हमारी नींव ही कमजोर होगी, तो हम दुनिया की महाशक्तियों से आगे निकलने का सपना कैसे देख सकते हैं?
"अगर मैं प्रधानमंत्री होता" तो देश की शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ सुधारता नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह से बदल देता। मेरा विज़न ये 4 बड़े क्रांतिकारी कदम उठाने का होता:
1️⃣ 'रटंत विद्या' बंद, 6ठी क्लास से ही प्रैक्टिकल और स्किल ट्रेनिंग 🛠️
चीन आज दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब इसलिए है क्योंकि वहाँ बचपन से ही बच्चों को हाथों से काम करना और टेक्नोलॉजी सिखा दी जाती है। हमारी नीति होती कि कक्षा 6वीं से ही हर बच्चे के लिए कोडिंग, रोबोटिक्स, मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग, कारपेंट्री या कृषि तकनीक जैसी कोई एक स्किल सीखना अनिवार्य होता। स्कूल से निकलते ही युवा के हाथ में सिर्फ कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि कमाने का हुनर होता।
2️⃣ हर जिले में 'वर्ल्ड-क्लास' बिल्कुल मुफ्त उच्च शिक्षा 🏫
आज शिक्षा एक बहुत बड़ा धंधा बन चुकी है। गरीब का बच्चा टैलेंटेड होने के बावजूद लाखों की फीस न होने के कारण पीछे छूट जाता है। मेरी सरकार का नियम होता—प्राइमरी से लेकर आईआईटी (IIT) और मेडिकल तक की शिक्षा हर उस बच्चे के लिए 100% मुफ्त होगी जो पढ़ना चाहता है। अमीर और गरीब के बच्चे एक ही बेंच पर बैठकर पढ़ेंगे, तभी देश में समानता आएगी।
3️⃣ विदेशी यूनिवर्सिटीज़ को टक्कर देने वाले रिसर्च सेंटर्स 🔬
हमारे देश के बेहतरीन वैज्ञानिक और डॉक्टर आज अमेरिका और यूरोप क्यों चले जाते हैं? क्योंकि यहाँ रिसर्च के लिए बजट नहीं मिलता। हम नेताओं की फिजूलखर्ची का पैसा सीधे देश की यूनिवर्सिटीज़ में रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए झोंक देते। जब भारत में ही नासा (NASA) जैसी सुविधाएं और लैब्स मिलेंगी, तो हमारा 'ब्रेन ड्रेन' रुकेगा और दुनिया हमारे आविष्कार देखेगी।
4️⃣ डिग्री नहीं, 'स्टार्टअप और रोजगार' की गारंटी 🚀
आज यूनिवर्सिटीज़ सिर्फ डिग्रियां बांटकर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। मेरा विज़न होता कि फाइनल ईयर के छात्रों को सिर्फ थ्योरी पढ़ाने के बजाय उन्हें सीधे उद्योगों के साथ जोड़ा जाता। जो युवा अपना बिजनेस शुरू करना चाहता, उसे बिना किसी गारंटी के सरकार सीधे फंड (ग्रांट) देती। हमारा युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनता।
✍️ मेरा संकल्प:
चीन और अमेरिका को सीमाओं पर नहीं, बल्कि क्लासरूम के भीतर मात दी जा सकती है। जब तक देश के आखिरी पायदान पर खड़े गरीब के बच्चे को दुनिया की सबसे बेहतरीन शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता। 'गरीब आदमी पार्टी' का मानना है कि शिक्षा पर किया गया खर्च देश का सबसे बड़ा निवेश है।
अगर आप भी युवाओं के हाथों में डिग्रियों की जगह हुनर और सम्मान देखना चाहते हैं, तो इस सोच को आगे बढ़ाइए।
जय हिंद!