आर्य समाज The Arya Samaj

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"कृण्वन्तो विश्वमार्यम्"

05/06/2026

खुली चुनौती: DNA Test करा लो | Arya Samaj |

05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस

05/06/2026

5.6.2026
यह संसार करोड़ों वर्षों से चल रहा है। उसकी तुलना में मनुष्य जीवन का समय कोई बहुत लंबा समय नहीं है। 60 70 80 90 वर्ष बहुत छोटा समय है। और इतने थोड़े समय में काम बहुत से करने होते हैं। "इसलिए जो मुख्य कार्य हैं, उसमें अपना मूल्यवान समय लगाएं। उन कार्यों की योजना बनाएं और पूरी शक्ति से उन कार्यों को करें।"
"चिंता तनाव आदि से दूर रहें। मन को शुद्ध रखें। ईश्वर की भक्ति करें। सेवा परोपकार दान और दया पूर्वक अपना जीवन जिएं। दूसरों को यदि आप सुख नहीं दे सकते, तो कम से कम दुख भी न दें। छोटी-छोटी बातों की शिकायतें न करें। दूसरों की छोटी-मोटी गलतियों को माफ करें। यदि आप का मन कहीं न लग रहा हो, मन में चंचलता हो, तो एकांत में जाकर थोड़ी देर हंस लें। कोई गीत गुनगुना लें, अथवा अपना मनपसंद संगीत सुन लें। इससे आपका मन स्थिर एवं शांत हो जाएगा।"
और जो परिस्थितियां आपके आसपास चल रही हों, यदि आप उन्हें बदल सकते हैं, तो उन्हें बदलने के लिए पूरी शक्ति लगाएं। और यदि नहीं बदल सकते, तो उन्हें स्वीकार कर लें। "केवल उन परिस्थितियों की शिकायतें करने से तो आपका और दूसरों का तनाव ही बढ़ेगा।" "दूसरों के साथ जब भी बातचीत करें, उत्साह जनक एवं आशावादी बातचीत करें।" "क्या संसार में केवल पाप कर्म ही हो रहे हैं? कुछ तो अच्छे कर्म भी हो रहे हैं। जो अच्छे कर्म हो रहे हैं, उनकी चर्चा अधिक करें। बुरे कर्मों की चर्चा यथासंभव न ही करें।" "जो लोग स्वयं चिंता और तनाव में डूबे रहते हैं, वे दूसरों के साथ नकारात्मक बातें कर करके उनका भी तनाव बढ़ा देते हैं। ऐसा करना आपके लिए और दूसरों के लिए, सबके लिए हानिकारक है।"
"इसलिए सदा सकारात्मक बातचीत करें। समस्याओं पर 10% चर्चा करें, और उनके समाधान पर 90% चर्चा करें। समाधान सोचने से कोई न कोई समाधान निकल आएगा। यदि आप ऐसा करेंगे, तो आप सदा प्रसन्न रह सकते हैं।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात." See less

05/06/2026

आप सभी को नमस्ते
🙏
🌄 सुप्रभात 🌄
प्रातः जागरण, अभिवादन, नित्य कर्म, सन्ध्योपासना-हवन, स्वाध्याय करना फिर आवश्यक कार्य में लग्न हो जाना यही आदर्श जीवन शैली है।

04/06/2026

क्या आज की लड़कियों ने अपने आप को खोल कर रख दिया है |

04/06/2026

4.6.2026
आज के संसार में जो व्यक्ति सत्य का पालन करता है, धर्म के मार्ग पर चलता है, न्याय का आचरण करता है, उसे बहुत कठिनाइयां सहन करनी पड़ती हैं। "उसको यह सत्य न्याय और धर्म का आचरण करना बहुत कष्टदायक लगता है। जहर पीने के बराबर लगता है।"
"परंतु इस धर्म आचरण का जो फल है, वह बहुत उत्तम और अमृत के समान अत्यंत सुखदायक होता है। वह परिणाम सामान्य लोगों को दिखाई नहीं देता। इसलिए उन्हें सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने में रुचि नहीं होती।"
बुद्धिमान लोग इस बात को समझते हैं, कि हम जो सत्य धर्म न्याय का आचरण करेंगे, तो इससे हमें बहुत उत्तम सुख मिलेगा। "सामान्य लोग केवल भौतिक धन संपत्ति को ही सुख का साधन समझते हैं। यह उनकी भूल है।"
"वास्तव में जो व्यक्ति सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलता है, उसके पास भौतिक साधन भले ही कम हों। परंतु धर्म आचरण के फल स्वरूप ईश्वर उसे मन की जो शांति आनंद निश्चिंतता उत्साह आदि प्रदान करता है, वह सामान्य व्यक्ति को नहीं दिखती। यह उसी उत्तम आचरण का फल है, धर्म आचरण का फल है।"
इतना ही नहीं, यह तो बहुत थोड़ा सा फल है। "इसका बहुत सारा फल तो उसे अभी अगले जन्म में मिलेगा। जो कि उसे किसी अच्छे उत्तम धनवान विद्वान बलवान बुद्धिमान परिवार में जन्म मिलेगा। यह फल आम आदमी को दिखता नहीं, इसलिए उसकी रुचि उत्तम कर्मों के आचरण में नहीं बन पाती।"
अतः सब लोगों को सोचना चाहिए, कि भले ही आज हमें सच्चाई के मार्ग पर चलने से कष्ट हो रहा है, विष के तुल्य लग रहा है। कोई बात नहीं। "हमारे मन में जो शांति है, जो निर्भयता आनंद और उत्साह है, वह शांति आनंद निश्चिंतता उत्साह आदि झूठे बेईमान लोगों के जीवन में नहीं है। और हमारा अगला जन्म भी उत्तम मनुष्य का होगा। इस बात का भी उस सत्यवादी को संतोष होता है। इसलिए सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर ही चलना लाभकारी है।"
"अतः इस मार्ग पर चलना चाहिए। जो लोग इतनी हिम्मत रखते होंगे, वे सत्य न्याय और धर्म के मार्ग पर ही चलेंगे। बाकी सामान्य लोग तो संसार की नकल करेंगे और कितने ही जन्मों तक दुख भोगेंगे।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात." See less

03/06/2026

देश को नेता नही न्याय चाहिए |

03/06/2026

अंडा मांस खाकर भी नहीं कर पाएंगे ये काम |

03/06/2026

3.6.2026
बहुत से लोग ऊपर ऊपर से तो बहुत अच्छे दिखते हैं, "परंतु अंदर किसके मन में कैसी-कैसी अच्छी बुरी भावनाएं हैं, यह पहचानना एक कठिन कार्य है।"
"फिर भी बुद्धिमान लोग दूसरों के हाव भाव से, उनके चेहरे के लक्षणों से, उनकी चाल ढाल से, उनकी बातचीत और शब्दों से, उनके बोलने की टोन से, आदि आदि उपायों से वे दूसरों के मन की भावनाओं को भी काफी कुछ पहचान लेते हैं।"
आप भी इन्हीं उपायों का प्रयोग करें, और अपने आसपास के लोगों का परीक्षण सदा करते रहें। "समय समय पर लोगों के विचार बदलते भी रहते हैं। इसलिए उनका परीक्षण सदा करते रहना आवश्यक है।" "अन्यथा वे आपको कभी भी धोखा दे सकते हैं। तथा छल कपट से आपकी हानि कर सकते हैं।"
"यदि आप सावधान रहेंगे, और आसपास के लोगों का परीक्षण करते रहेंगे, तो अनेक दुखों से बचकर सुखी जीवन जी सकेंगे।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात." See less

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